ताज़ा खबर
Home / सीरियल अपडेट / Mahabharat 23th December 2013 Episode 71 Update

Mahabharat 23th December 2013 Episode 71 Update

rukmanik1

पहला भाग
रुक्मणी माता पार्वती के मंदिर में रो रही है और श्री कृष्ण को देखना चाहती है अब उसमे शक्ति नहीं है कि वह और इंतजार कर सके तभी कृष्ण वहाँ आजाते है उन्हें देख कर रुक्मणी और अधिक भावुक होकर विहल हो जाती है और उसकी आँखों से अश्रु बहने लगते है श्री कृष्ण प्यारी सी मुस्कान के साथ हाँथ में बांसुरी और सिर पर मौर पंख धारण किये हुए है जिन्हें स्पर्श कर रुकमणी खुद को उनके होने का अहसास कराती है | श्री कृष्ण उसकी इस दशा को समझते है और अपने अंदाज में उसे सम्भालते है दोनों अपनी नेत्रों की बोली से ही सारे सवाल पूछते और जवाब भी देते | कृष्ण रुकमणी के आंसू पौछ कर उन्हें अहसास दिलाते है कि अब वो उनके साथ है और वियोग के दिन समाप्त हुए |
दूसरा भाग
दूसरी तरफ अर्जुन रुक्मी और उसकी सैना से युद्ध करने को है तभी वहाँ अपने पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए अपने एक ही वार से सारी सैना को छिन्न भिन्न करते हुए कोई प्रवेश करता है जिसे देख अर्जुन उसे प्रणिपात कर बलराम के नाम से संबोधित करता है | वह हलधारी बलराम है जो कि कृष्ण के बड़े भाई स्वयम नाग देवता का अवतार है | बलराम अर्जुन को आशीर्वाद देता है और उसके अदभुत रूप(वृहन्लाला) को गौर से देखता है फिर उसे पहचान कर अर्जुन के नाम से सम्बोधित करता है |
रुक्मी कृष्ण और रुक्मणी से मिलता है | कृष्ण और रुक्मणी अपने रथ पर है कृष्ण रुक्मी को प्रणाम कर बहनोई सम्बोधत करते हुए कहते है कि एक बार पुनह उनका प्रणाम स्वीकार करे परन्तु रुक्मी उसे कटु शब्दों में कहता है कि रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से तय हुआ था और वो किस प्रकार किसी और की सम्पति को अपने साथ ले जासकता है | एक नारी के लिए सम्पति शब्द सुनकर कृष्ण नाराज होते है और कहते है कि स्त्री कोई धन नहीं है अपितु स्वयम लक्ष्मी है जिसका व्यापार नहीं होता और ना ही इस पर किसी का अनायास हक़ होता है | रुक्मी रुक्मणी से साथ वापस चलने को कहता है अन्यथा वह उसका शव लेकर जायेगा | रुकमणी कहती है वो अब कृष्ण के साथ है और यही उसकी मंजिल है अब उसे किसी का भय नहीं | यह सुनकर रुक्मी गुस्सा हो जाता है और कहता है कि रुक्मणी के इस तरह के व्यवहार के कारण वो और कृष्ण कभी साथ नहीं रह पाएंगे उन दोनों का वियोग निश्चित ही होगा | यह सुनकर कृष्ण नाराज होकर कहते है कि अपनी बहन के इस तरह के शब्दों का उपयोग अनुचित है और वह अपना सुदर्शन चक्र धारण करते है और उसे रुक्मी की तरफ छोड़ देते है | रुक्मणी अपने भाई के जीवन की याचना करती है जिस कारण कृष्ण रुक्मी का वध नहीं करते परन्तु उसे और समस्त मानव जाति को सबक सिखाने हेतु उसके केश काट देते है |
तीसरा भाग
इसके बाद कृष्ण और रुकमणी अर्जुन से मिलते है और कहते है वो जल्दी ही विवाह करेंगे धर्म की स्थापना के लिए | अर्जुन आश्चर्य से बोलता है धर्म की स्थापना वो भी विवाह से ऐसे कैसे होगा | कृष्ण की पहेली उसे भविष्य की तरफ संकेत दे रही है जिसे अर्जुन समझ नहीं पाता|
याद रखने योग्य : बलराम कृष्ण के बड़े भाई थे जो कि शेष नाग का अवतार है और उनका शस्त्र हल है |

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

यह भी देखे

kahani-ghar-ghar-ki-serial

कहानी घर घर की ओल्ड स्टार प्लस सीरियल | Kahani Ghar Ghar ki Old Serial In Hindi

Kahani Ghar Ghar ki Old Star Plus Serial In Hindi सन 2000 में भारत के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *