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Mahabharat 25th December 2013 Episode 73 Update

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पहला भाग
शकुनी,दुह्शासन और दुर्योधन को बोलता है कि उनकी योजना का पहला चरण पूरा हुआ अब बस कुन्ती और उसके पांचों पुत्रो को वारणावत भेजने की योजना को अंजाम देना है |
दूसरी तरफ पुरोचन और उसकी पत्नी जो वारणावत की प्रजा में से है वो कुन्ती को बताते है कि महाराज पांडू हाथी को खरीदने हेतु वारणावत आते थे और बहुत सा दान करते थे उनके जाने से प्रजा बहुत दुखी है और अब वो चाहते है कि पांडू के पुत्रों के द्वारा वहां के मंदिर में पूजा और हवन किया जाये | कुन्ती कहती है उनका आना अभी मुश्किल है क्यूंकि युधिष्ठिर अभी अभी युवराज बना है भीम, सहदेव और नकुल सीमा की शांति के गये है और अर्जुन द्वारिका में है | यह सब युधिष्ठिर सुन रहा है और वह पुरोचन को वादा करता है कि वह सभी शीघ्र ही वारणावत आयेंगे,वहाँ हवन करेंगे तो महाराज पांडू की आत्मा को शांति मिलेगी और वहां माता कुन्ती के हाथों दान दिया जायेगा | कुन्ती पूछती है युधिष्ठिर ने हाँ क्यु कहा ? युधिष्ठिर उसे जवाब देता है कि वो प्रजा के बीच जाकर उन्हें जानना चाहता है इसलिए उसे वारणावत जाना है |
पुरोचन ने शकुनी को बताया कि पांडव वारणावत आ रहे है तभी शकुनी ने कहा अगर महाराज खुद अग्नी में प्रवेश कर रहे है तो उन्हें तो बस आग लगानी है |शकुनी पुरोचन को वारणावत की योजना बताता है और ठीक से पांडवो का स्वागत करने का बोलता है | वो उसे यह भी बोलता है कि अगर वह सफल होता है तो उसकी सांत पीढ़ी बैठकर खाएगी और अगर वो असफल होता है तो उसकी सात पीढ़ी जन्म ही नहीं ले पायेगी |पुरोचन कहता है शकुनी चिंता न करे कार्य हो जायेगा और दुर्योधन के लिए एक घडा देता है | शकुनी कहता है वो जल्दी ही अगला आदेष भेजेगा |
युधिष्ठिर अपने कक्ष में राजकीय कार्य कर रहा है और संदेशवाहक को एक संदेश लिखकर देता है और अन्य संदेश पढ़ता है तभी वहां महामंत्री विदुर आते है जो उससे पूछते है कि वह वारणावत जाने के उसके फैसले के बारे में पुनह विचार करने वाला था उसका क्या हुआ क्यूंकि जब दुर्योधन के अधर्म पर अंकुश लगाने का वक्त है वो यहाँ से जा रहा है | युधिष्ठिर कहता है वो अपने पिता के लिए जा रहा है और उसके कुछ देर यहाँ से चले जाने से दुर्योधन की कूटनीति भी शान्त होगी अन्यथा वो प्रतिदिन यही काम करेगा | विदुर कहता है वह तो यह उसके आने के बाद पुनह शुरु कर देगा | युधिष्ठिर कहता है अगर जल में मिट्टी हो तो वो उसे मिलाने से दूर नहीं होती अपितु उसे कुछ वक्त छोड़ देने से स्वतः ही नीचे बैठ जाती है | दुर्योधन भी शान्त हो जायेगा | विदुर कहता है उसे याद नहीं आता कि कभी भी पांडू किसी भी कारण से वारणावत गए हो, उसे यह सब बहुत संदेहात्मक प्रतीत हो रहा है | युधिष्ठिर कहता है अगर विपदा आई भी तो वह पांचो सक्षम है उसे दूर करने के लिए |
दूसरा भाग
अर्जुन अभ्यास कर रहा है तभी सुभद्रा आती है अर्जुन उसे सम्भाल कर आने का कहता है सुभद्रा को लगता है अर्जुन फिर से उसके साथ उपहास कर रहा है और वो आगे बढ़ जाती है लेकिन गिर जाती है | अर्जुन कहता है उसने स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गड्ढे खोदे और उन्हें ढक दिया पर सुभद्रा को तो बस अपने भ्राता कृष्ण पर विश्वास है | सुभद्रा कहती है क्या अर्जुन को अभी भी कृष्ण पर संदेह है ? अर्जुन कहता है नहीं पहले था पर मिलने के बाद अब उसे खुद पर संदेह है | अर्जुन पूछता है सुभद्रा क्यु आई थी उसके पास ? सुभद्रा उसे हस्तिनापुर से आया संदेश देती है जिसमे लिखा है कि अर्जुन को तुरंत वारणावत पहुंचना है , यह जानकर सुभद्रा दुखी हो जाती है | अर्जुन कृष्ण कहाँ है उसे जाने की लेना है | सुभद्रा कहती है अर्जुन को तो ज्यादा वक्त हुआ ही नहीं द्वारका में क्या उसे याद नहीं आएगी | अर्जुन कहता है यहाँ के लोग कहता है कृष्ण जहाँ बसा हो वही उनका स्थान हो जाता है और उसका मित्र उसके ह्रदय में है |
तीसरा भाग
दुर्योधन, दुह्शासन, शकुनी, कर्ण को बताते है कि उन्होंने क्या योजना बनाई है | वारणावत के जिस राजभवन में पांडव और कुन्ती रहेंगे, वह भवन ईट,पत्थर का नहीं अपितु लाख, पशुओं का मांस,घास, घी एवम रुई का बना है जो सभी ज्वलनशील पदार्थ है | शकुनी कहता है यह एक यज्ञ होगा जिसे युवराज्सुय यज्ञ कहा जायेगा जैसे राजा राजसूय यज्ञ करता है अपना सामर्थ्य स्थापित करने के बाद वैसा युवराज दुर्योधन करेगा | दुर्योधन कहता है और इस यज्ञ की बेदी होगा, वो महल और पांडव एवम कुन्ती होंगे यज्ञ में डालने वाली आहुति | इस प्रकार सभी ख़ुशी मना रहे है पर कर्ण मौन है |

याद रखने योग्य : लक्क्षा गृह, वारणावत नगरी में था जहाँ पांडव को जिन्दा जलाने की योजना बनाई गई थी

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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