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Mahabharat 28th January 2014 Episode 96 Update In Hindi

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First Scene
दुर्योधन राज्यसभा में प्रवेश करता है और अपने मित्र कर्ण से कहता है कि आज के प्रभात का महत्व है पहले वह केवल स्वप्न देखता था पर आज से उसके स्वप्न सत्य होने जा रहे है कर्ण कहता है कि दुर्योधन के सारे स्वप्न को पूरा करने के लिए वह खुद सबसे आगे होगा | दुर्योधन अपने पिता धृतराष्ट्र का आशीर्वाद लेने उनके पास जाता है | यह सब देख दुशाला अपनी माँ गांधारी के साथ बहुत खुश है | दुर्योधन चरणस्पर्श करता है | धृतराष्ट्र बहुत खुश है और अपने पुत्र के युवराजभिशेक के साथ उसका भी सपना पूरा होने जा रहा है कहता है वह नेत्रहीन है और केवल स्वप्न ही देख सकता है | दुर्योधन आशीर्वाद के लिए पितामह भीष्म के पास जाता है भीष्म उसे कहते है जो केवल स्वप्न देखते है वह अवश्य ही दृष्टिहीन होते है आज दुर्योधन का स्वप्न पूरा होने जा रहा है भगवान उसे अवश्य दृष्टि प्रदान करेंगे | यह सुनकर गांधार नरेश शकुनी कहते है कि क्या देखना है क्या नहीं इसका फैसला तो होता रहेगा अभी दुर्योधन अपनी माँ गांधारी से आशीष ले | दुर्योधन गांधारी से आशीर्वाद लेता है गांधारी कहती है जब वस्त्र पर नयी कढाई की जाती है तब पुराने चित्रों को ही बनाया जाता है उसी से शोभा बढती है इसलिए दुर्योधन को भी अपने भ्राता युधिष्ठिर के पद चिन्हों पर चलकर उनका नाम बढे ऐसा राज्य करना चाहिए | दुर्योधन कहता है जब दीवार पर नया रंग चढ़ता है तब पुराने को सभी भूल जाते है वह ऐसा राज्य करेगा कि सभी भ्राता युधिष्ठिर को भूल जायेंगे |

Second Scene :
दुर्योधन का अभिषेक पूरा होता है वह एक फिर आशीष लेकर अपने सिंहासन की तरफ बढ़ता है और उस पर बैठता है | शकुनी भी उसके साथ है और अपने पैर के घाव को देखकर वह अपनी प्रतिज्ञा याद करता है जो उसने भीष्म के खिलाफ़ ली थी जब उसकी बहन गांधारी का विवाह अंधे धृतराष्ट्र से करवाया गया था | अब दुर्योधन की इच्छा है कि उसका विवाह द्रोपदी से हो | शकुनी कहता है द्रोपदी को भी दुर्योधन का इंतजार होगा |

दूसरी तरफ , कुन्ती को उसके पुत्र पालकी में बैठा कर ले जा रहे है तभी वह अपने पुत्रो से कहती है वह सब थक गए होंगे उसका भर उठाकर चल रहे है इसलिए थोडा विश्राम करले | अर्जुन कहता है संसार में जिस मनुष्य को उनकी माता भार लगने लगेगी,वह जरुर ही थक जायेंगे | भीम कहता है वो अकेला ही उठा सकता है| नकुल कहता है भीम क्यूँ उनके साथ ही पालकी उठाता ? भीम कहता है उसकी लम्बाई अधिक है अगर वो एक तरफ से उठाएगा तो माता को तेडा बैठना पड़ेगा तभी कुछ लोगो के रोने की आवाज़ आती है भीम देखने जाता है वहाँ एक ऋषि एक मृत शरीर को जिन्दा कर देते है सभी लोग खुश हो जाते है वह ऋषि वेद्व्यास है वह सभी को कहते है कि अब वो जाए उन्हें किसी का इंतजार है और वह सभी आने ही वाले है | सभी गाँव वाले चले जाते है | तब ऋषि वेदव्यास भीम को आवाज देते है कहते है आ जाओ उन्ही की प्रतीक्षा कर रहे थे | भीम कहता है उन्हें कैसे पता ? वेदव्यास कहते है उसके अन्य भाई और माता कहा है ?

Third scene
सभी वहां आते है कुन्ती उन्हें पहचान लेती है चरणस्पर्श करती है | वेदव्यास कहते है उनके शिष्यों ने उन सभी के रहने की व्यवस्था की है सभी आराम करे | वेदव्यास कहते है उन्हें पता था कि वारणावत की आग उन पांचो का कुछ नहीं बिगाड़ सकती | युधिष्ठिर कहता है उन सभी ने छिपे रहने का ही निर्णय लिया है | कुन्ती पूछती है क्या यह निर्णय उचित है | वेदव्यास कहते है मनुष्य को लगता है निर्णय उसने लिए पर वास्तव में यह नियति है जो अभी सही और खुद ही कुछ वक्त में गलत हो जायेगी | अर्जुन इसका मतलब जानना चाहता है | वेदव्यास कहते है कल ध्रुपद के काम्पिल्य नगर में विश्राम करना सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जायेंगे |

द्रोपदी अपने भवन में बैठी है तभी शिखंडिनी वहां आती है उसे बताती है कि 100 से भी अधिक राजाओ के संदेश आये है सभी उससे विवाह करना चाहते है | द्रोपदी उदास है | शिखंडिनी इसका कारण पूछती है द्रोपदी कहती है अगर स्वर्ण के थाल में भोजन परोस दिया जाए तो वह अधिक स्वाधिष्ट नहीं हो जाता , उसका मन भी बैचेन है अगर किसी ने स्वयम्बर की प्रतियोगिता जीत भी ली तो क्या वह उसका मन जीत पायेगा ? उस वक्त उसके मन में कई सवाल होने पर क्या कोई उत्तर मिलेगा तभी दासी कन्या मालिनी वहां आती है और एक चित्र देती है जिसे देख द्रोपदी पूछती है यह कौन है तभी कृष्ण वहां आते है यह अर्जुन है उसे ढूंढकर संदेश देने के लिए यह चित्र बनवाया है द्रुपद चाहते है द्रोपदी का विवाह अर्जुन से ही हो | द्रोपदी पूछती है और कृष्ण क्या चाहते है |

दूसरी तरफ कुन्ती और पांडव काम्पिल्य पहुँच चुके है और वहां रहने का स्थान सोच रहे है |

precape: कृष्ण द्रोपदी को शिव के मंदिर जाकर अपने सवालों का जवाब ढूढने का बोलते है वह जाती है और दूसरी तरफ अर्जुन भी उसी मंदिर में आ रहा है |

याद रखने योग्य : महाभारत वेदव्यास ने कही थी जिसे भगवान गणेश ने लिखा था | द्रोपदी के स्वयंबर में दुर्योधन और कर्ण भी भाग लेते है |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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