Mahabharat 30th January 2014 Episode 98 Update In Hindi

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first scene

दुर्योधन और कर्ण भी काम्पिल्य नगर पहुँच चुके है भीम अपना मिट्टी का वाहन लेकर जा रहा है | बीच रास्ते में रथ का पहिया फँस जाता है | दुर्योधन भीम से उसे निकालने का कहता है भीम ब्राह्मण वेश में है | भीम कह देता है यह भारी है| दुर्योधन कहता है इसका मतलब यह काम उसे ही करना होगा और वह आने लगता है पर कर्ण उसे रोक देता है कहता है वह इस ब्राह्मण की सहायता कर देगा |

second scene
कर्ण भीम के पास आता है पर दुर्योधन उसे रोक देता है और रथ से उतरकर पास आता है और पूछता है कि वह कौन है बहुत जाने पहचाने लग रहे हो | बार बार पूछने के कारण भीम बोलने ही वाला था कि दूसरी तरफ से अर्जुन आजाता है और भीम को सोमेश्वर कहकर पुकारता है और कर्ण दुर्योधन से कहता है कि वह रथ पर जाये | दुर्योधन चला जाता है | अर्जुन और कर्ण मिलकर पहिया निकालते है और एक दुसरे को देख मुस्कुराते है | पहिया निकल जाने के बाद अर्जुन कर्ण से कहता है कि वाहन हो या जीवन अगर कहीं फस जाये तो किसी की सहायता के बिना नहीं निकलता | कर्ण कहता है वाहन या जीवन जब ही धंसते है जब उन पर आवश्यक्ता से अधिक भार हो | दोनों एक दुसरे का आभार मान कर चले जाते है |
रथ पर बैठा दुर्योधन दोनों ब्राह्मणों याने अर्जुन और भीम को दान देता है उनके तरफ दान फेंक कर कहता है कि यह हस्तिनापुर की तरफ से दान है |

Third Scene
अर्जुन उस दान को उठाकर दुर्योधन की तरफ आता है और कहता है क्षमा करे राज कुमार हम श्रम का खाते है प्यार से त्याग करते है परन्तु ना दान लेते है और ना दान देते है | इतना कह कर वह दान लौटा देता है और दुर्योधन आगे बढ़ जाता है |
भीम कहता है अर्जुन आ गया वरना आज वो दुर्योधन को मार डालता | अर्जुन कहता है हम सभी ने उसे क्षमा कर दिया है | भीम कहता है क्षमा नहीं बस दंड ना देने का तय किया है , जिसने अपने साथ अन्याय किया हो उसे देखकर क्रोध पर अंकुश लगाना कठिन है | भीम पूछता है दुर्योधन काम्पिल्य आया क्यूँ है ? अर्जुन कहता है द्रोपदी से स्वयम्बर करने आया होगा | भीम कहता है राजा ध्रुपद इससे उनकी पुत्री का विवाह करेंगे और दोनों हंसने लगते है | अर्जुन कहता है स्वयबर में कन्या की इच्छा होती है पता नही उसे कौन पसंद आ जाये |
द्रोपदी महल में आती है और दासी से अर्जुन का चित्र लाने को कहती है जो मालिनी लाई थी | शिखंडिनी आती है पूछती है उसे क्यूँ देखना है चित्र ? अगर कल अर्जुन आएगा तो दिख ही जायेगा | द्रोपदी बताती है उसने आज मंदिर में एक ब्राहमण को देखा जिसे देख उसे अलग अहसास हुआ हो सकता है वह अर्जुन ही हो | शिखंडिनी कहती है कल जो प्रतियोगिता में जीतेगा उसी से उसका विवाह होगा | दासी चित्र लाती है | शिखंडिनी पूछती है क्या द्रोपदी को कोई अहसास हुआ ? द्रोपदी ना बोल देती है |

दूसरी तरफ , अर्जुन सभी को दुर्योधन के बारे में बताता है | युधिष्ठिर कहता है अगर सभी को उनके बारे में पता चल गया तो पितामह उन्हें ले जायेंगे | कुन्ती कहती है यहाँ स्वयंबर है जिस कारण यहाँ सभी राजा आयेंगे | अगर नकुल सहदेव के मामा आये तब वह इन्हें पहचान लेंगे और अगर कृष्ण और बलराम आये तब वह अर्जुन को पहचान लेंगे इसलिए उन सभी को वहां से निकलना चाहिए तभी नकुल कहता है उसने सुना है कल की प्रतियोगता को वो ही जीत सकता है जो श्रेष्ठ धनुर्धर हो और वह तो भ्राता अर्जुन ही है | अर्जुन कहता है जिसने पांचाल के राजा को हराया था वह अर्जुन वारणावत में जल गया |

दूसरी तरफ, द्रोपदी कृष्ण और शिखंडिनी की बातो को बार बार याद कर रही है वह बहुत बैचेन है | वह अपनी काजल की डिब्बिया से अर्जुन के उस चित्र में दाढ़ी और मूंछ बनाती है उसे यकिन हो जाता है कि मंदिर में उसे ब्राह्मण के भेष में अर्जुन ही दिखा था |

precap : दृष्ट्द्युम सभी राजाओ को स्वयंबर की प्रतियोगिता के बारे में बता रहा है और शकुनी कर्ण से कहता है कि यह इस प्रतियोगिता को जीते और दुर्योधन से द्रोपदी का विवाह करवाए |

याद रखने योग्य : द्रोपदी अग्नी से जन्मी थी और उसका स्वयम्बर अर्जुन ने जीता था परन्तु उसका विवाह पांचो पांडव से हुआ था |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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