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Mahabharat 31th January 2014 Episode 99 Update In Hindi

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First Secen
द्रोपदी अर्जुन के चित्र को देख खुश है कृष्ण की बातो को याद कर रही है| दूसरी तरफ,अर्जुन अपने भाइयों से कहता है यह स्वयम्बर क्षत्रियों के लिए है और वह सभी ब्राह्मण वेश में है उनका स्वयंबर में कोई इंतजार नहीं कर रहा है |

द्रोपदी के स्वयंबर की सभी तैयारी पूरी हो चुकी है सभी देश के राजा राज्य में प्रवेश कर रहे है चारो तरफ भव्य शोभा है और संगीत और नृत्य हो रहा है | कर्ण के साथ दुर्योधन प्रवेश करता है | कर्ण शकुनी से कहता है स्वयंबर की व्यवस्था और सुन्दरता बहुत अच्छी है | शकुनी कहता है रेगिस्तान में बसंत आ जाये तो मृगतृष्णा ही होती है | कर्ण कहता है शकुनी पांचाल को अपना दुश्मन मानता है पर अगर शत्रु तारिफ के योग्य हो तो अवश्य करनी चाहिए | शकुनी कहता है कर्ण वीरता को विजय मानता है और शकुनी विजय को ही वीरता मानता है | दुह्शासन कहता है अब तो गुरु द्रोण और ध्रुपद में मित्रता हो गई है तब पांचाल शत्रु नहीं है | शकुनी कहता है अगर द्रुपद अपनी बेटी का विवाह दुर्योधन से करता है तो मित्र है |

द्रोपदी के पास शिखंडिनी आती है कहती है गुरु माता केश की रस्म करने आई है | द्रोपदी गुरु माता से पूछती है यह विधी क्यूँ की जाती है | गुरु माता कहती है विवाह के बाद स्त्री अपने केश खुले नहीं रखती, केवल विधवा स्त्री ऐसा करती है |

Second Scene
पांडव एक गुप्त स्थान पर पहुँचते है वहाँ एक कुटिया है जिसमे वह रुकते है | कुन्ती पूछती है वह सभी काम्पिल्य से तो दूर ही है ना? युधिष्ठिर कहता है हाँ माता सभी वहां से दूर है और सभी को विश्राम करना चाहिए पता नहीं कब मौका मिलेगा, नेमिशारन्य का रास्ता बहुत लम्बा है| वह नकुल और भीम को माता के पास रुकने का बोलता है और सहदेव एवम अर्जुन को खुद के साथ भिक्षा लेने के लिए चलने का बोलता है तभी कुन्ती कहती है भिक्षा सभी भाई साथ में लेने जाये ताकि जल्द ही वापस आ सके | अर्जुन कहता है माता अकेले कैसे रहेंगी ? कुन्ती कहती है वह ठीक है | सभी भाई निकलते है अर्जुन युधिष्ठिर से पूछता है किस दिशा में जाना है ? युधिष्ठिर कहता है उत्तर म काम्पिल्य है वहां नहीं जा सकते तभी भीम कहता है क्या नगर वासी होंगे ? सभी स्वयम्बर देखने गए होंगे | नकुल कहता है आज सभी को स्वर्ण मुद्राये मिलने वाली है और सुना है द्रोपदी बहुत सुंदर है उसे देखने से ही कष्ट दूर हो जाते है हो सकता है सभी नगरवासी कष्ट दूर करने गए हो |

दूसरी तरफ, ध्रुपद सभी का स्वागत करता है और कहता है समस्त आर्याव्रत को देवताओ ने प्रशाद दिया है उसकी कन्या अग्नी से उत्पन्न हुई है | मंदिर के ऊपर का ध्वज जिस तरह यशवान होता है उसी तरह के राजकुमार से द्रोपदी का विवाह होगा और प्रतियोगिता के बारे में राजकुमार दृष्ट्द्युम बताएँगे | दृष्ट्द्युम सभी का स्वागत करते हुए कहता है कि इस प्रतियोगिता को कोई सामान्य धनुर्धर जीत नहीं सकता |

Third Scene
दृष्ट्द्युम कहता है जो भी लोभी है अधर्मी है वह इस प्रतियोगिता को जीत नहीं सकता ऐसा व्यक्ति इस धनुष को हिला भी नहीं सकता | इस पर वही प्रत्यंचा चढ़ा सकता है जिसका क्रोध पर अंकुश हो जिसने निर्मल ह्रदय से शिक्षा प्राप्त की हो और वह आसमान में तीर छोड़ता है | आसमान में मछली तैर रही है जिसका प्रतिबिम्ब धरती में भरे जलाशय में दिख रहा है और प्रतियोगिता यह है कि प्रतिबिम्ब को देखते हुए मछली की आँख को भेदना है | शकुनी दुर्योधन की तरफ देखता है वह कहता है वह नहीं कर सकता वह किसी भी स्त्री के लिए अपना मजाक नहीं उड़वा सकता | शकुनी कहता है बात स्त्री की नहीं पांचाल से मित्रता की है क्यूंकि द्रुपद का राज्य ही उनके साथ नहीं है | दुर्योधन कहता है यह प्रतियोगिता कोई नहीं जीत सकता यह सभी राजाओ का मजाक है | कर्ण कहता है यह स्वम्बर का हिस्सा है वरना वह यह कर सकता है | शकुनी कहता है वह अभी भी कर सकता है | कर्ण कहता है वह इस विवाह के योग्य नहीं | शकुनी कहता है वह यह प्रतियोगिता दुर्योधन के लिए जीत सकता है | कर्ण कहता है क्या यह धर्म है किसी के लिए पत्नी जीतना? शकुनी कहता है भीष्म ने तो जीवन भर यही किया | दुर्योधन भी कर्ण को कहता है कि वह उसके लिए द्रोपदी को जीते |
precap: कृष्ण कहता है यह प्रतियोगिता दो व्यक्ति जीत सकते है अर्जुन और अंगराज कर्ण |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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