ताज़ा खबर

Mahabharat 3rd February 2014 Episode 100 Update In Hindi

index

First Scene
ध्रुपद सभी राजाओ का स्वागत करता है इसके बाद वह कृष्ण को सभा में बुलाता है और उन्हें एक युग पुरुष कह कर सम्बोधित करता है | शकुनी अपने भान्जो से कहता है कि बुद्धिमान व्यक्ति कृष्ण को सदा अपना मित्र बनाकर रखते है | दुह्शासन इसका कारण पूछता है | शकुनी कहता है समस्त आर्यवृत में कृष्ण का मुकाबला कोई नहीं कर सकता | कृष्ण सभी राजा महाराजाओं को प्रणाम करता हुआ शकुनी के पास आता और उसे प्रणाम करते हुए मामाश्री कहकर पुकारता है | शकुनी भी प्रणाम करता है और मामाश्री कहने का कारण पूछता है | कृष्ण जवाब देते है कि शकुनी उसके भाई दुर्योधन का मामा है तो उसका भी मामा ही हुआ| इस पर शकुनी बोलता है कृष्ण का मामा बनने से डर लगता है | कृष्ण मुस्कुराते हुए बोलते है उसके मामा कंस का उसके हांथो उद्धार हुआ था क्यूंकि वह अधर्म के मार्ग पर थे इतना कह कर कृष्ण आगे बढ़ते है और दुर्योधन को प्रणिपात कहते है दुर्योधन भी आदर के साथ जवाब देता है और दुह्शासन कृष्ण को प्रणाम करता है | कृष्ण कर्ण के पास जाते है और कहते है उसके मुख के तेज से पता चलता है कि वह अंगराज कर्ण है दोनों एक दुसरे को प्रणाम करते है | कर्ण कृष्ण से कहता है समस्त आर्याव्रत में कृष्ण को ही धर्म का ज्ञाता माना जाता है | इस पर कृष्ण का जवाब है कि धर्म की बाते तो सभी करते है पर कोई उसकी रक्षा नहीं करता कोई उसको समझता नहीं | कर्ण पूछता है कि कृष्ण ही बताये क्या है धर्म ? कृष्ण कहते है धर्म से ही सम्मान मिलता है अगर अपमान मिले तो समझना की अधर्म किया है | कर्ण बोलता है अगर जन्म से ही अपमान हुआ हो तो क्या करे ? कृष्ण कहता है फिर इंतजार करे पर अधर्मी का साथ ना दे | इतना कहकर वह आगे बढ़ जाता है |दुर्योधन और शकुनी चुप है |

Second Scene
द्रोपदी को सभा में लाया जाता है सभी उसकी तरफ देखते है वह आते ही ध्रुपद को प्रणाम करती है | उसकी सुन्दरता को देख दुर्योधन मामा शकुनी से कहता है कि ऐसी सुन्दर स्त्री की आर्याव्रत की महारानी तो बनाना ही चाहिए | दुह्शासन भी उसे निहार रहा है और कर्ण को देखने को कहता है इस पर कर्ण कहता है किसी पराई स्त्री के रूप को देखना उचित नहीं और अगर उसका विवाह दुर्योधन से हुआ तब वह दुह्शासन की माता के बराबर होंगी | यह सुनकर दुह्शासन नीचे मुह कर लेता है |

द्रोपदी कृष्ण के चरण स्पर्श करने झुकती है और कृष्ण उसे सखी कह कर रोक देते है तब द्रोपदी कृष्ण से पूछती है कि क्या अर्जुन स्वयंबर में आ पायेगा ? कृष्ण कहते है उसे तो डर है कि कृष्ण के पहले द्रोपदी को पता चल जायेगा कि अर्जुन स्वयम्बर में आ चूका है | अब स्वयंबर की प्रक्रिया शुरु की जाती है | सबसे पहले राजा शुशेन आते है जो कि धनुष को हिला भी नहीं पाते और सभी सभाजन यह देख हंस रहे है |

Third Scene:
एक के बाद एक राजा असफल हो रहे है यह देख ध्रुपद कृष्ण से कहता है कि यह प्रतियोगिता केवल अर्जुन ही जीत सकता है तब कृष्ण कहते है पुरे संसार में यह प्रतियोगिता दो व्यक्ति जीत सकते है एक पांडू पुत्र अर्जुन और दूसरा अंगराज कर्ण | ध्रुपद कहता है पर कर्ण तो सूत पुत्र है | कृष्ण कहता है वह सामर्थ्य में जाति नहीं देखता उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता पर कर्ण अधर्मियों के साथ है उसे इस बात का दुख है लेकिन वह राजा है उसे स्वयम्बर में हिस्सा लेने से नहीं रोक सकते पर अगर द्रोपदी इनकार कर दे तो ऐसा हो सकता है |
दूसरी तरफ पांडव पुरे नगर में घूम रहे है पर कोई नहीं है जो उन्हें भिक्षा दे सके,तभी नकुल भी काम्पिल्य नगर चलने का बोलता है पर युधिष्ठिर इनकार कर देता है कहता है वहां उनका कोई काम नहीं वह सभी किसी और नगर जायेंगे थोड़ी दुरी पर उन्हें ब्राह्मण मिलते है और वह सभी उन्ही के साथ आगे बढ़ते है |

precap: दुर्योधन कर्ण से प्रतियोगिता में जाने का बोलता है कर्ण धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाकर मछली की आँख पर निशाना साधे खड़ा है |
याद रखने योग्य : कर्ण और अर्जुन दोनों ही महान धनुर्धर है | अर्जुन इंद्र एवम कर्ण भगवान सूर्य का पुत्र है |

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *