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Mahabharat 3rd January 2014 Episode 79 Update

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पहला भाग
पुरोचन भोजन परोसता है | उसे जैसे ही पता चलता है कि पांडव सब जान चुके है वो भाग जाते है |नकुल कहता है क्या दुर्योधन को ज्ञात नहीं कि अर्जुन एक बाण से आग बुझा सकता है युधिस्ठिर कहता है उसने इस बारे में सोचा नहीं होगा तभी अर्जुन कहता है उसने सब सोच कर किया है क्यूंकि खीर खाते ही चूहा मर गया और सभी चूहे को देखते है | दूसरी तरफ भीम भोजन कर रहा है और वो कुन्ती को खीर खिलाने की जिद्द करता है और उसे खिलाने के लिए हाथ बढ़ाता है तभी अर्जुन आकर उसके हाथ को धक्का देदेता है और युधिष्ठिर कहता है कि इस भोजन में विष है उन्हें मारने की साजिश की गई है | सभी भवन से निकलने लगते है भीम कहता है जब हिरन की मौत आती है तो वो स्वयम सिंह के पास जाता है अब वो दुर्योधन को जीवित नहीं छोड़ेगा सभी भाई युधिष्ठिर से युद्ध की आज्ञा देने का कहते है तभी कुन्ती रुक जाती है और कहती है कि ऐसी कोई आज्ञा मत देना युधिष्ठिर | कुन्ती को पूरा बिता वक्त याद आता है | भीम कहता है कैसे चुप रहेंगे | कुन्ती कहती है अब वह सभी यही भस्म हो जायेंगे पर हस्तिनापुर नहीं जायेंगे |
दूसरा भाग
कुन्ती कहती है अब हस्तिनापुर के द्वार बंद हो गए है भीम कहता है वो उनका घर है | कुन्ती कहती है घर वह होता है जहाँ परिवार हो प्रेम हो पर जहाँ शत्रु हो वह युद्ध क्षेत्र है जहाँ हमेशा क्रोध और शंका का वास होता है और वो जीते जी नरक के सामान है | नकुल कहता है जेष्ठ वहाँ के युवराज है जो कि उनका हक़ है कुन्ती कहती है उन्हें सत्ता का लालच नहीं है उनके पिता पांडू ने खुद सत्ता का त्याग किया और वन को अपना घर बनाया और उन सभी का जन्म भी तपोवन में हुआ है | वह सभी परिवार के लिए आये थे लेकिन जब प्रेम ही नहीं है तो सिंहासन का क्या करेंगे और युधिष्ठिर को कहती है अगर दुर्योधन को सत्ता चाहिए तो देदो | अर्जुन कहता है न्याय का क्या होगा ? वो कैसे भूल जाए कि दुर्योधन ने उनकी माता को जिन्दा जलाने की योजना बनाई है उसके हर एक अंग में क्रोध का ज्वालामुखी फुट रहा है | कुन्ती पूछती है कि वह दुर्योधन को क्या दंड देंगे जब बचपन में उसने भीम को विष दिया तो उसे क्या दंड मिला महाराज पुत्र मोह में बंधे है भूल गए है कि राजा सबका पिता होता है | दंड मिलेगा तो कुन्ती को ही मिलेगा वो यह जानती है कि सभी पांडव में शक्ति है पर वो किससे भी लड़े दुःख उसके पति को होगा अगर वो जीते तो भी संस्कारो की हार है | उसका धन तो उसके पांचों पुत्र ही है |
तीसरा भाग
कुन्ती रोती है कहती है कि दुर्योधन को बस एक पल लगेगा सफल होने में | भीम कहता है वो कभी सफल नहीं होसकता | कुन्ती कहती है वो कुछ भी करे अगर उसके पुत्र हारे तब भी कुन्ती हारेगी और जीते तो संसकारों की हार है | कुन्ती पूछती है कि उन पांचों ने किस तरह का दुःख उसे देने का सोचा है तभी अर्जुन अपनी माता के आंसू पोछता है और कहता है माता के आंसू सुख के हो तो गंगा स्नान करवाते है और दुःख के होतो अग्नी स्नान | अब वो हस्तिनापुर नहीं जायेंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा कि वह सब जीवित है |दूसरी तरफ पुरोचन भवन को अग्नी दे रहा है |
precape: पांडव और कुन्ती जलते हुए भवन से निकलने का प्रयास कर रहे है |
याद रखने योग्य : भीम को विष के कोई असर नहीं होता था उसे नाग राज ने वरदान दिया था और उसे 100 हाथियों का बल मिले ऐसा भी आशीर्वाद था | लाक्षाग्रह के षड्यंत्र के बाद पांडव गुप्त रूप से चले जाते है और सभी को लगता है कि वह सब मर चुके है |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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