ताज़ा खबर

Mahabharat 4th February 2014 Episode 101 Update In Hindi

index

First Scene
दुर्योधन को प्रतियोगिता के लिए बुलाया जाता है वो आता है पर अपनी तरफ से कर्ण को भाग लेने का कहता है | द्रोपदी अर्जुन के बारे में सोच रही है | पांडव नगर की तरफ भिक्षा लेने जा रहे है बीच में एक वृध्द मिलता है जो उनसे पूछता है वह कहाँ जा रहे है | वह बोलते है भिक्षा मांगने नकुल कहता है अगर उनके पास कुछ हो तो देदे तब वह वृद्ध बोलता है काम्पिल्य में कुबेर का खजाना बट रहा है और वह सभी यहाँ भिक्षा मांग रहे है उन्हें काम्पिल्य जाना चाहिए और उसे भी अपने साथ ले जाए उस वृध्द को भी वहीं जाना है पर वह अपाहिज है और कोई साथ ढूढ़ रहा है | युधिष्टिर कहता है उन सभी को काम्पिल्य नहीं जाना | वृद्ध कहता है बस उसे वहाँ छोड़ आये वो वापस आने का रास्ता ढूंढ लेगा पर वह सभी लौट जाते है वृध्द दुखी होकर कहता है कि उस अपाहिज को उसका बेटा भी छोड़ गया, अपंग का कोई सहारा नहीं होता |
काम्पिल्य में, दुर्योधन कर्ण को भेजता है कर्ण प्रतियोगिता स्थल तक पहुँचता है और प्रणाम करता है लेकिन दृष्ट्द्युम उसे रोककर कहता है कि क्षमा करे किसी और के लिए प्रतियोगिता जीतने की अनुमति नहीं दे सकते | कर्ण कहता है यह प्रतियोगिता गलत है अगर सामर्थ्य ही देखना है तो उसका मित्र दुर्योधन गदाधारी है उसे उसमे कोई हरा नहीं सकता | दृष्ट्द्युम कहता है उन्हें अपनी बहन का विवाह श्रेष्ठ धनुर्धर से करना है | कर्ण कहता है वह हस्तिनापुर का सैनिक है और सैनिक की जीत राजा की जीत होती है उस पर उसके मित्र का अधिकार है | ध्रुपद कहता है काम्पिल्य में ऐसा नहीं होता यह परम्परा हस्तिनापुर की है और कर्ण को जाने का बोलता है | शकुनी दुर्योधन से कहता है इस बार उसे परम्परा के नाम पर पराजित किया गया है तब दुर्योधन कहता है कि यह गलत है उसे कृष्ण उत्तर देते है कि हर पिता को अपनी बेटी के भविष्य चिंता करने का हक़ है और कर्तव्य भी | स्वयंबर की प्रतियोगिता की पराजय से दुखी होना सही नहीं है | दुर्योधन कहता है उसके मित्र को तो पराजय का भय ही नहीं है पर अधिकार छिनने को वह अपमान मानता है | कृष्ण कहते है किसी और की शक्ति का प्रमाण कोई और कैसे दे सकता है जैसे वृक्ष को फलने के लिए जल ही लगता है दूध वह काम नहीं कर सकता तब दुर्योधन कहता है ठीक है फिर कर्ण ही इस प्रतियोगिता में भाग वह अंग देश का राजा है उसे हक़ है भाग लेने का |

Second Scene
शकुनी को दुर्योधन का निर्णय सही लगा | दुर्योधन ने कहा कर्ण ही विवाह करेगा | कर्ण फिर से प्रतियोगिता स्थल तक जाता है| सभी विचार में है शिखंडिनी कहती है कि कर्ण जीत सकता है |

Third Scene
कर्ण धनुष उठाता है जिसे कोई हिला भी नहीं पाया था,फिर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाता है | यह सब देख द्रोपदी घबरा रही है उसे कृष्ण की बाते याद आ रही है वह कृष्ण की तरफ भी देखती है और दूसरी तरफ कर्ण अपना लक्ष्य साध कर निशाना लगाने खड़ा है तभी द्रोपदी उसे रोकती है और कहती है कि वह सूत पुत्र से विवाह नहीं करेगी |
precap: अर्जुन विवाह स्थल तक पहुँचता है|

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *