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Mahabharat 6th January 2014 Episode 80 Update

mahabhart

पहला भाग
वारणावत के महल(palace) में आग तेजी से बढ़ रही है पांडव और कुन्ती वहाँ से निकलने का प्रयास(try) कर रहे है एक दरवाजा(door) खोलते है तो अग्नी(fire) की ज्वाला उन पर आ जाती है वह सभी चिंतित(worried) है हर तरह से निकलने का मार्ग खोज(search) रहे है सहदेव कहता है कि अर्जुन को वर्नाशास्त्र चलाना होगा तभी युधिष्ठिर रोक देता है अगर अग्नी समाप्त हो गई तो सभी समझ जायेंगे कि पांडव जीवित है उन्हें कोई और उपाय ढूँढना होगा | तभी अर्जुन को कृष्ण का दिया ज्ञान याद आता है कृष्ण ने कहा था जब सरस्वती माता को दिव्य ज्योति को धारण कर धरती पर चलना कठिन हुआ तब उन्होंने धरती के भीतर प्रवाह किया | अर्जुन सभी को बताते है कि यह माधव का संकेत ही होगा, अब उन सभी को धरती के नीचे से मार्ग ढूँढना होगा | युधिष्ठिर को यह विचार उतम लगता है और सभी तेज अग्नी की विपरीत दिशा में आगे बढ़ते है
दूसरी तरफ भीष्म तेज गति से वारणावत आ रहा है |
भवन के अंदर ज्वाला के तीव्र वेग के कारण कुन्ती और अर्जुन एक तरफ और बाकि सभी दूसरी तरफ फँस जाते है |अर्जुन और कुन्ती बहुत प्रयास करते है सभी के साथ आने का पर अग्नी बहुत तेज है भीम भी कई तरह से इस अग्नी को शान्त करना चाहता है पर कुछ नहीं होता थोड़ी देर के प्रयास के बाद अर्जुन कुन्ती को गोद में उठाकर भीम की तरफ फेंकता है जिसे भीम पकड लेता और अर्जुन सभी भाइयों एवम माता से चले जाने का निवेदन करता करता है पर कोई नहीं मानता लेकिन अर्जुन के बहुत कहने पर और कुन्ती की सुरक्षा के लिए वह सभी निकल जाते है |
दूसरा भाग
कुन्ती को लेकर सभी भाई एक जगह आ जाते है जहाँ भीम एक प्रहार से धरती को नीचे की तरफ धकेल देता है दूसरी तरफ अर्जुन भी छलांग लगा देता है | कुन्ती सभी भाइयों को कहती है कि सभी चले जाए वो अर्जुन का इंतजार करेगी दूसरी तरफ अर्जुन बचता हुआ निकले का प्रयास कर रहा है | नकुल कह देता है बिना माता के वो नहीं जायेंगे, युधिष्ठिर कहता है सभी धेर्य रखे, हम सभी अर्जुन की प्रतीक्षा करेंगे |
तीसरा भाग
सहदेव ने कहा कि माता को एक भी लपट छूने से पहले सभी भाई भस्म होजायेंगे | अर्जुन भी आ जाता है सभी बहुत खुश है अब सभी बाहर निकलने का रास्ता देखते है | उन्हें कुछ आभास होता है
दूसरी तरफ भीष्म को आग की लपते दिखाई देती है और वो अपना धनुष निकाल कर तीर चलाता है जिससे वारणावत में वर्षा होने लगती है |
precap: भीष्म शवों को लेकर हस्तिनापुर पहुँचता है महामंत्री विदुर और सारी प्रजा वहां मौजूद है भिष क्रोध में कहता है उसका मन करता है कि अभी दुर्योधन और बाकि सभी को कड़ी से कड़ी सजा मिले जो उन्हें जीवन भर याद रहे | दूसरी तरफ दुर्योधन बहुत खुश है |
ज्ञान : पांडव लाक्षाग्रह में जीवित है यह कोई नहीं जानता था | अब वह सभी एक ब्राहमण परिवार के रूप में जीवन बिताएंगे |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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