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Mahabharat 7th January 2014 Episode 81 Update

mahabhart

पहला भाग
भीष्म वारणावत में प्रवेश करता है लाक्षाग्रह जलकर राख बन चूका है जिसे देख भीम बहुत परेशान है और चारो तरफ पांडवो को उनके नाम से पुकार रहा है तभी उसकी नजर उन शस्त्रों पर पड़ती है जो कि पांडव के थे | सभी शस्त्रों को एकत्र करता है |
दूसरी तरफ प्रजा दुखी है सभी रो रहे है हताश है उनका युवराज उन्हें छोड़ गया है | राजमहल में सैनिक ध्वज नीचे उतारता है जिसे दुर्योधन धक्का मार कर ध्वज वापस लहरा देता है | दुर्योधन, दुह्शासन और शकुनी बहुत खुश है पर कर्ण बहुत दुखी |
क्रिपाचार्य, राज्यसभा में पांडव की मौत का संदेश सुना रहा है यह सुन धृतराष्ट्र और सभी बहुत दुखी है | महल में रानी गांधारी और उसकी दासी भी बहुत दुखी होकर रो रहे है |
भीष्म पांडवो की आखरी निशानियों को लेकर नगर में आरहा है सभी प्रजा दुःख से उसके चरणों में गिर रही है अधीरथ और राधा भी नगर वासियों के साथ खड़े है सभी दुखी है | भीष्म उन सभी निशानियो को लेकर गंगा के पास आता है और अपनी माँ गंगा से कहता है कि गंगा को भागीरथ ने धरती पर बुलाया था ताकि मनुष्य अपने परिजनों की अस्थी इसमें विसर्जित करे और उन्हें मोक्ष मिले पर क्या उसने देखा है कि कोई स्वयम अपनी अस्थियों के विसर्जित करने आया हो आज वो खुद अपनी अस्थी लेकर आया है खुद के मोक्ष के लिए | वह बहुत दुखी है |
दूसरा भाग
भीष्म दुखी है तभी विदुर वहाँ आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर बोलता है वृक्ष के पत्ते तो गिर सकते है पर जड़ नहीं हिल सकती, और भीष्म इस वृक्ष रूपी धर्म की जड़ है जो कभी हिल नहीं सकती | भीष्म दुखी है कहता है ढह चूका है धर्म का वृक्ष और क्रोध में आकर उठा है और जोरो से चिल्ला उठता है कहता है उसका उसका रोम रोम सुलग रहा है और वो अभी दुर्योधन और उसके भाइयो को ऐसी सजा देना चाहता है जो उन्हें जन्मो तक याद रहे |
तीसरा भाग
भीष्म कहता है पर वो ऐसा कर नहीं सकता है सन्तान कितनी ही पापी हो खुद माता पिता उनका नाश नहीं कर सकते आज वो हताश है उसके सारे अरमान खत्म हुए उसके पास अब कुछ नहीं रहा अब उसका अंत निश्चित है | विदुर कहता है उसे यकीन है धर्म का वृक्ष ढह नहीं सकता अधर्म की धुंध के आगे कुछ वक्त के लिए छिप गया है और उचित वक्त आते ही वापस सामने आएगा | विदुर बताता है उसे शक था दुर्योधन और शकुनी पर इसलिए उसने सूचना भिजवा दी थी | भीष्म कहता है इसका मतलब पांडव जीवित है | विदुर कहता है राहू कुछ वक्त तक सूर्य को नीगल सकता है पर हमेशा के लिए नहीं |
दूसरी तरफ पांडव जीवित एक चट्टान के पीछे से निकलते है एक पहाड़ पर खड़े है जहाँ समग्र विश्व उनके सामने है | युधिष्ठिर कहता है अगर वो राजकीय वस्त्रो में रहे तो सब उन्हें पहचान लेंगे और हस्तिनापुर उन्हें ढूंढने लगेगा | अर्जुन कहता है उन्हें ब्राह्मण के वस्त्र धारण करना चाहिए | युधिष्ठिर कहता है वह सभी ब्राह्मण के वस्त्र पहनकर पश्चिम की तरफ जायेंगे कुछ वक्त वहां रहने के बाद वह उसी जगह जायेंगे जहाँ उनका जन्म हुआ था और जहाँ पांडू और मादरी की यांदे है | कुन्ती थोडा दुखी है अर्जुन अपनी मां को दिलासा देता है |
precap: द्रुपद को गुरु कह रहे है कि उसकी किस्मत में पुत्री ही है और यज्ञ से जो पुत्री जन्म लेगी वह धर्म का आधार बनेगी यही बात श्री कृष्ण भी किसी से कह रहे है |
ज्ञान : पांडव जीवित है यह कई वर्षों तक किसी को पता नहीं होता |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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