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Mahabharat 9th December 2013 Episode 61 Update

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पहला भाग
अर्जुन,कृष्ण के दिए हुए उपहार को देख रहा है,तभी गुरु द्रोण आते है वो उन्हें प्रणाम करता है | द्रोण उससे पूछते है क्या वह युद्ध के लिए तैयार है अर्जुन पूछता है क्या गुरु को उस पर भरोसा नहीं | द्रोण कहता है उसे सबसे ज्यादा अर्जुन पर ही यकीन है |
पांचाल में, शिखंडी भी तैयार है सैना के साथ,द्रुपद ने आदेश दिया एक भी राजकुमार मरना नहीं चाहिए सभी को बंधी बनाओ तभी भीष्म उन्हें लेने आएगा|

पांडव द्रोण से आशीर्वाद लेते है | द्रोण युधिष्ठिर से कहता है कि वो जेष्ठ है जीत और हार दोनों का भार उस पर है | युधिष्ठिर कहता है राजनीती में जीत सबकी होती है पर पराजय केवल राजा की |दुर्योधन आता है कहता है पर 105 राजा नहीं बन सकते | इस युध्द से ही तय होगा कि कौन राजा है यह केवल गुरुदक्षिणा नहीं है | द्रोण कहता है यह प्रश्न दुर्योधन अपने पिता से करे | तभी दुर्योधन कहता है कि उसके पिता के साथ धर्म के नाम सदा ही छल होता आया है और वो यह बात अभी नहीं करना चाहता | वो 100 भाई ही युध्द के लिए जायेंगे वो अपने से बड़ो को नहीं जाने देगा ,चाहो तो अर्जुन,नकुल,सहदेव आ सकते है वो अपने भाइयो की जीत का श्रेय नहीं बाटना चाहता | भीम कहता है अगर युदिष्ठिर युद्ध में हिस्सा ही नहीं लेगा, तो उनके कौशल का परिचय होगा कैसे | अर्जुन कहता है गुरु दक्षिणा पर सबका हक़ है | दुर्योधन कहता है अर्जुन चाहे तो आ सकता है, गुरूजी ने यह कहा था उन्हें द्रुपद चाहिए यह नहीं के इसमें सभी राजकुमार हिस्सा ले | युधिष्ठिर कहता है पांचाल की भूमि पर अगर राजकुमार आपस में ही लड़ेंगे तो हस्तिनापुर का परिहास होगा, इसलिए वो पहला मौका कोरव को देता है, वो पहले युद्ध के लिए चले जाये | भीम और अर्जुन को यह ठीक नहीं लगता पर सहदेव कहता है यह उत्तम युध्दनीती है | कोरव आक्रमण के लिए निकल जाते है | शिखंडी सैना को सम्बोधित करता है और आक्रमण का आदेष देता है | द्रुपद फिर से कहता है राजकुमार जिन्दा चाहिए |

दूसरा भाग
दोनों तरफ से आक्रमण होता है दुर्योधन, दुह्शासन को कहता है कई बार हस्तिनापुर पांचाल को हरा चूका है यह सैना बस रेंगते जूँ है उनके आगे | दुह्शासन कहता है पांचाल की सैना तो पोधो जैसी है आसानी से जीत जायेंगे इनसे | शिखंडी सैना को दिशा बदलने और द्वार बन्द करने को बोलता है | इस तरह वह चक्रव्यूह रचते है धीरे धीरे 100 राज कुमार अन्दर आजाते है | द्रुपद खुश होता है योजना सफल हो गई | सब को बंधी बनाने लगते है दुर्योधन कहता है यह क्या हो रहा है अभी तो सब जीत रहे थे, अब बंधी कैसे बन रहे है | यह व्यूह है जिसे वह तोडना नहीं जानता|

तीसरा भाग
शिखंडी कहता है कि दो राज कुमार बाकी है द्रुपद कहता है वो पंचतंत्र का उपयोग करेगा तो उसकी तोहिन होगी | शिखंडी कहता है वो उन्हें बंधी बना लेगा| वह दुर्योधन से द्वंद करता है | उसका नकाब हट जाता है दुर्योधन उसका उपहास उडाता है कि पांचाल नारी के दम पर युध्द करता है | तभी वहाँ द्रुपद आ जाता है युद्ध होता है वहाँ चारों तरफ ही द्रुपद दिखता है और दुर्योधन आवाक रह जाता है |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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