Mahila Ka Jeevan Purush Pradhan Bharat Desh main

क्या लड़की होना पाप हैं ? अगर हाँ तो क्यूँ नहीं, जी लेता समाज बिना लड़की के ? और अगर नहीं, तो ये पुरुष प्रधान समाज होता कौन हैं लड़कियों के लिए दायरे बनाने वाला ?

मुझे अक्सर ही गुस्सा आता हैं जब मुझे जल्दी घर लौटने को कहा जाता हैं और भाई से इस तरह का कोई सवाल नहीं किया जाता | भाई को पढ़ने के लिए जहाँ बोले वहाँ भेज सकते हैं पर मेरे लिए कई बार सोचा जाता हैं |

एक दिन, मैं अपनी बुआ के घर गई | उनके घर नए किरायदार आये मैंने बुआजी से पूछा कैसे हैं ये नए लोग ? क्या इनकी बेटियाँ ? क्यूंकि मुझे अक्सर ही अच्छे दोस्तों की तलाश रहती इसी लालच में. मैंने ये सवाल किया | तब मुझे बुआजी ने कहा- बड़े ही अजीब लोग हैं कहने को बहुत पैसा हैं, गाड़ी हैं, खेती बाड़ी सब हैं लेकिन इस घर का मुखिया अपने घर की औरतों को घर की देहलीज भी पार करने की इजाज़त नहीं देता | उसके परिवार में 3 बेटियाँ, 2 बेटे, पत्नी और उसकी बूढी माँ हैं | घर में केवल छोटा बेटा और बेटी स्कूल जाते हैं | बेटी इसलिए क्यूंकि वो छोटी हैं जब वो 12 वर्ष की हो जाएगी उसका स्कूल भी बंद करा दिया जायेगा | अन्य दो बेटियाँ बड़ी हैं एक 16 की और दूसरी 18 की | घर के नियमों के हिसाब से औरते आँगन में भी नहीं आ सकती, अगर उन्हें कपड़े सुखाने डालना हैं तो घड़ी की सुई से 15 मिनिट में काम हो जाना चाहिए, अगर कचरा फेकना हैं तो सर झुकाकर जल्दी से फेंक कर घर वापस आना होगा |जैसे ही घर का मुखिया बाहर जाता घर की औरते कुछ देर देहलीज पर बैठ जाती लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती कि वो आँगन में आ जाये | अक्सर ही मंजली बेटी कचरा फेंकने के बहाने बाहर आती और मुझे देख मुस्कुराती उसकी खामोश आँखे बहुत कुछ कह जाती | उसके लिए मैं एक खुला परिंदा थी और वो एक पालतू जानवर जिसे खाने पीने को तो मिलता पर उसे खुटी से बाँधकर रखा जाता |

मुझे ये देख बहुत बुरा लगा मैंने जब कुछ पल के लिए अपने आपको उनकी जगह देखा तो मुझे घुटन महसूस होने लगी और मुझे अपना परिवार बहुत प्यारा लगने लगा क्यूंकि जो सवाल मेरे परिवार के ज़हन में हैं वो मेरी सुरक्षा के लिए हैं कम से कम उन्होंने मुझे घर रूपी पिंजड़े में बंद तो नहीं किया हैं |

समाज में जो अपराध हैं उनका कारण लड़कियां नहीं हैं क्यूँ उन्हें सजा मिल रही हैं| आज देश के हर क्षेत्र में लड़कियाँ काम कर रही हैं कामयाब हैं | और वही दूसरी तरफ उन्हें नज़र कैद की यह जिन्दगी मिल रही हैं | ऐसा ही रहा तो कैसे सीखेंगी ये लड़कियाँ समाज में अपने दम पर जीना | उन्हें तो हमेशा ही सहारे की जरुरत होगी और अगर वो सहारा छुट जाये तो कैसे जी पाएंगी ये लड़कियाँ | ना शिक्षा हैं ना हिम्मत तो कैसे करेंगी इस दुनियाँ का सामना | इस तरह तो वो या तो खुद मर जाएँगी या दुनियाँ उन्हें मार देगी |

लड़कियों की रक्षा करे पर उन्हें  दुनियाँ से रूबरू होने का मौका भी दे | गिर कर सम्भलने का हौसला भी दे | वो भी इंसान हैं उन्हें खुले आसमान में जीने का हक़ हैं उनसे ये हक़ ना छीने |

Article On Woman’ s Life In Hindi यह एक सच्ची कहानी हैं मुझे आश्चर्य हैं आज भी ऐसे परिवार हमारे देश में हैं | आप इस बारे में क्या सोचते हैं कमेंट बॉक्स में लिखे |

अगर आप भी ऐसी कोई कहानी लिखना चाहते हैं तो मेल करे deepawali.add@gmail.com पर | आपकी कृति नाम एवम फोटो के साथ published की जाएगी |

पढ़े :

 

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

यह भी देखे

jallikattu-new-480

क्या है जल्लीकट्टू का इतिहास और विवाद | What is Jallikattu History and ban issue in hindi

What is Jallikattu history and ban issue in hindi आज तमिलनाडु जन आक्रोश से उबल …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *