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मीडिया हिन्दू मुस्लिम भावनाओं के साथ खेल रही हैं

मीडिया हिन्दू मुस्लिम भावनाओं के साथ खेल रही हैं | Media Hindu Muslim Ki Bhavnao Ke Sath Khel Rahi Hain |अपनी TRP बढ़ाने के उद्देश्य से मीडिया ने ही एक न्यूज़ को देश का सनसनी खेज़ मुद्दा बना डाला | और इसका फायदा सियासी लोगो ने भी उठाया और इन सबके बीच गहरा आघात देश की जनता की भावनाओं को पहुँचा |

Media Hindu Muslim Ki Bhavnao Ke Sath Khel Rahi Hain

30 जुलाई की सुबह याकूब मेमन को फांसी पर चढ़ाया गया | यह वह आरोपी हैं जो 1993 के बम ब्लास्ट के आरोप में नेपाल से लाया गया था | यह दिन तय था, जब याकूब मेमन ने ऐसा जघन्य अपराध किया और वह पकड़ा गया सभी को पता था इसके लिए फांसी के अलावा और कोई सजा नहीं हो सकती | लेकिन जैसे ही दिन नजदीक आया मीडिया ने हिन्दू मुस्लिम की भावनाओं के साथ खेलना शुरू कर दिया | सलमान खान के ट्वीट को बढ़ा चढ़ा कर सबके सामने रखा गया| लोगो को उबलता देख मीडिया ने इसमें नेताओं को भी शामिल कर दिया | और इस बात को इतना बढ़ाया गया कि फिर इस मुद्दे ने हिन्दू मुस्लिम को नदी के दो किनारों में बाँट दिया |

मीडिया के इसी बर्ताव के कारण लोगो में ऐसे कुख्यात आतंकवादी के लिए भावनाओं का दौर चल पड़ा | इसका नतीजा यह रहा कि कई हजार लोग याकूब के अंतिम संस्कार में शामिल हो गये | एक आतंकवादी की सजा को शहीद की शहादत बना दिया गया | अभी भी मीडिया इस बात से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं | अब वो तरह- तरह से इक्कट्ठा होने वाली भीड़ की तस्वीरे देश के सामने पेश कर रही हैं जिससे हिन्दू मुस्लिम की दुरी और बढ़े |

मीडिया के इस बात को इतना उछालने के कारण पहले मुस्लिम समाज ने अनजाने में एक आतंकी को सपोर्ट दिया | भावनाओ के साथ ऐसा खेला गया कि मुस्लिम समाज  अपने आपको देश से अलग रख कर सोचने पर मजबूर हो गया | इसके फलस्वरूप मुस्लिम समाज बिना सोचे एक आतंकी के साथ खड़ा हो गया | यह सब यहीं खत्म नहीं हुआ |

अब हिन्दुओं को और अधिक भड़काने के लिए याकूब मेमन के अंतिम संस्कार में शामिल हुए लोगो की तस्वीरे, लोगो की भीड़ को बार-बार देश के सामने ज़ाहिर किया जा रहा हैं ताकि हिन्दू, मुस्लिम को गद्दार समझे |

मीडिया की ताकत बहुत बड़ी हैं | वह किसी भी बात को जिस तरह से पैश करती हैं | लोग उस पर अँधा विश्वास करते हैं | दिन रात टीवी हो या इंटरनेट इन दोनों बड़े माध्यमो के जरिये मीडिया अपने हिसाब से बातों का आँकलन कर उसे लोगो के बीच पहुँचाती हैं |अपने चैनल की TRP बढ़ाने के लिए वो लोगो की भावनाओं पर आये दिन वार करती हैं  | अगर याकूब मेमन के इस मुद्दे के कारण हिन्दू मुस्लिम के बीच एक बड़ी लड़ाई छिड़ जाये | तब क्या मीडिया इस बात की ज़िम्मेदारी लेगी ?

यह मीडिया ही हैं जिसने एक आतंकवादी को इस तरह सबके सामने रखा कि लोग मुंबई बम ब्लास्ट की तकलीफों को भूल एक आतंकी से भावनात्मक जुड़ गए | एक आतंकवादी का कोई मज़हब नहीं होता क्यूंकि कोई भी मज़हब हिंसा नहीं सिखाता |

आज मुस्लिम याकूब के पक्ष में एवम हिन्दू याकूब के विपक्ष में खड़े हैं | यह भिन्नता मीडिया के कारण ही हुई हैं | वह एक आतंकवादी था जिसके लिए इस तरह से सोचना गलत था |

सुप्रीम कोर्ट ने जब एक फैसला सुनाया तो वह फैसला गवाहों एवम सबूतों को देखने के बाद ही सुनाया | मीडिया, हिन्दू अथवा मुस्लिम हम सभी  न्याय पालिका को कैसे झुठला सकते हैं ? न्याय जात-पात से कई उपर हैं | जब सुप्रीम कोर्ट ने हर तरह से याचिकायें खारीच की तो उसके पीछे मज़हबी भावना हो ही नहीं सकती | सुप्रीम कोर्ट हर बात के लिए उत्तरदायी होता हैं वो भावनाओ के वशीभूत होकर फैसला नहीं ले सकता |

मुंबई बम ब्लास्ट ने देश को बहुत क्षति पहुंचाई थी | उसके कई सालों के बाद आज आतंकवाद के खिलाफ एक सजा मुक्कमल की गई | यह सजा केवल आतंकी के लिए थी, ना कि मुस्लिम समाज के लिए |

मीडिया अगर इस तरह से देश के इस नाजुक मुद्दे को उठाकर खेल खेलेगी तो यह देश की अखंडता के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता हैं |

किसी भी व्यक्ति द्वारा कही बातों में से एक अल्पविराम को हटाकर या लगाकर बातों के मतलब को पूरी तरह बदला जा सकता हैं | कल ही एक न्यूज़ में, मैंने देखा UN Secretary General Ban Ki-moon के इंटरव्यू मे उन्होंने कहा फांसी की सजा होनी ही नहीं चाहिए | उस व्यक्ति का सीधा मतलब था कि सामान्यतः फांसी ना हो | यह महज़ एक भावना थी उनकी | जिसे मीडिया ने याकूब से जोड़ दिया और फैला दिया कि UN Secretary General Ban Ki-moon भी याकूब की फांसी की निंदा कर रहे हैं | 

मीडिया को इस तरह से भावनाओ के साथ नहीं खेलना चाहिए | हम सभी को एकता के साथ रहने की जरुरत हैं और मीडिया को इस एकता को बनाये रखने में अपना योगदान देना चाहिए |

हम सभी देशवासियों को समझाना चाहिए कि फुट डालो और राज करो का नारा अंग्रेज यही छोड़ गए हैं | इसका फायदा अब कोई भी उठा सकता हैं |आज के समय में मीडिया एवम सियासी लोग इस नारे का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं जिसमे केवल उनका निजीहित हैं |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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