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नारी पर कविता

नारी पर कविता Nari Par Kavita Poem In Hindi आज के समय में हर एक व्यक्ति औरत पर ऊँगली उठाता हैं | उस पर हुए अत्याचार के लिए उसे ही दोषी ठहराता हैं | हर एक पल एक घटना घटती हैं जिसमे औरत की आबरू कुचली जाती हैं | फिर भी यह समाज औरत को गलत कहता हैं | होता कौन हैं यह समाज जो औरत पर ऊँगली उठाता हैं जो खुद औरत पर अत्याचार करता हैं | कभी उसे दहेज़ के लिए जलाता हैं तो कभी सरे आम उसकी इज्जत से खेलता हैं | इसी समाज के तो होते हैं वो गुनाहेगार जो औरत पर अत्याचार करते हैं और ये समाज उन्हें कोसने ठीक करने के बजाय एक औरत को जीने का सलीका सिखाता हैं |

आज हर जगह बेटियों के अनुपात को बढ़ाने के लिए लड़ाई चल रही हैं | सरकार कई कार्य कर रही हैं लेकिन क्या सरकार को यह करना चाहिए ? जब यह समाज उस बेटी को सुरक्षति नहीं रख सकता तो उसे क्या हक़ हैं एक बेटी को जीवन देने का |

एक औरत को खुली तिजौरी समझा जाता हैं गलत निगाहों से देखा जाता हैं ऐसे में कन्या भ्रूणहत्या को रोकने के लिए इतने आडम्बर की क्या जरुरत हैं जब यह समाज जीती जागती औरत को सम्मान नहीं दे पता |

नारी पर कविता Nari Par Kavita Poem In Hindi

Nari Par Kavita Poem In Hindi

Nari Par Kavita Poem In Hindi

निर्लज समाज

कैसे कह दिया वो निर्लज हैं
कैसे कह दिया वो पापी हैं
औरत के दायरे बनाने वालो
ज़रा अपना गिरेबान में तो झाकों
क्या अपनी माँ को संस्कार सिखाओगे
या बहन को सूली पर चढाओगे
दो पल सुकून के देकर, अपनी बेटी से पूछो
कैसा लगता हैं उसे जब कोई सिटी बजाता
जब कोई उसकी आजादी पर उँगली उठाता
क्या बोलोगे तुम इन सवालों पर
जो खुद नुक्कड़ पर खड़ा होकर औकात दिखाता हैं
जो खुद कुत्तों की तरह जीभ निकालता हैं
यही शब्द हैं मेरे भीतर उन चंद गँवारों के लिए
जिन्होंने कहा लड़की गलत हैं, उसके कपडे गलत हैं
और जो ये आवारा कर गए, क्या कहेंगे उसके लिए
ये आपके दिए संस्कार थे या तोहफे में मिले आशीर्वाद
निर्भया थी वो, जो चली गई, पर उसे न्याय नहीं दे पाया समाज
हर पल एक मासूम कुचली जाती हैं, क्या करोगे बढ़ाकर कन्या का अनुपात
जब न्याय देने में सालो लग गए, तब क्या दोगे समाज में समानता का अधिकार

कर्णिका पाठक

नारी पर कविता Nari Par Kavita Poem In Hindi यह कविता मेरे भीतर का गुस्सा हैं जब मैं १६ दिसम्बर की उस घटना को सोचती हूँ | उस पर लोगो की टिप्पणी सुनती हूँ | तब मुझे यही लगता हैं कि जो समाज इतनी गन्दी सोच रखता हैं तो पहले उसे सुधारने की जरुरत हैं जिसके लिए जरुरी हैं हम सब जागरूक हो | और अपील करें कि ऐसी घटनाओं के लिए कड़ी से कड़ी सजा निर्धारित की जाये |

नारी पर कविता Nari Par Kavita Poem In Hindi यह आपको कैसी लगी अवश्य लिखे |

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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