ताज़ा खबर

आई पी एल चेयरमैन रंजीब बिस्वाल का जीवन परिचय | IPL Chairman Ranjib Biswal biography in hindi

IPL Chairman Ranjib Biswal biography in hindi रंजीव बिस्वाल आई पी एल के चेयरमैन है जो कुछ वक्त से चल रही spot-fixing controversies के बाद श्रीनिवासन के विश्वास पर आईपीएल के chairman बनाये गये ,2005 में यह ‘नेशनल सिलेक्शन कमिटी’ के सदस्य बनाये गये. 2006 में यह NCA के चेयरमैन बनाये गये. spot-fixing के विवाद के बाद, 2013 में यह आई पी एल के चैयरमैन बनाये गये. इन्हें lucky-manager का टैग मिला. दुविधा के समय बिस्वाल ने बहुत समझदारी से BCCI और players के बीच सामंजस बनाये रखा.

आई पी एल चेयरमैन रंजीब बिस्वाल का जीवन परिचय

 IPL Chairman Ranjib Biswal biography in hindi

रंजीब बिस्वाल भूतपूर्व भारतीय क्रिकटर हैं, जिन्होंने अंडर -19 में उड़ीसा की तरफ से क्रिकेट खेला था. अपने अंडर- 19 क्रिकेट के दौरान इन्हें पकिस्तान के ख़िलाफ़ चार टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कप्तानी का मौक़ा मिला. ये बाद में आईपीएल के चैरमैन भी रहे. साथ ही ये राजनीती से भी संबंध रखते हैं.

Ranjib Biswal

सन 1989 में, ढाका में, बिस्वाल ने टीम का नेतृत्व किया और देश के लिए Asia youth cup हासिल किया. इन्होंने घरेलु क्रिकेट के लिए सबसे पहली 5 शतक बनाई और 153 विकेट के लिए और ‘विकेट-टेकर’ की लिस्ट में तीसरा स्थान प्राप्त किया. यह भारत की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा तो नहीं बन सके, पर इन्होने टीम का संगठन किया और उन टीम ने देश के लिए ‘world-cup’ ‘the champion trophy’ और ‘Asia-cup’ जीता.

बिस्वाल विश्व के कई देशो का भ्रमण कर चुके है जैसे Australia, Bangladesh, New Zealand, Pakistan, Thailand और UK और इन सभी जगहों से इन्होने ‘Stamps’ एकत्र किया. इन्हें stamp रखने का काफी शौक है ,जिन्हें वह अपने alumb में रखते है, अब तक इनके पास लगभग 3.5 लाख stamp हो चुके है. भारत अपने खिलाडीयों के stamp नहीं बनता है.

रंजीब बिस्वाल का जन्म व परिवार (Ranjib Biswal family)

रंजीब बिस्वाल का जन्म 21 सितम्बर 1970 में उड़ीसा के जगतसिंह में हुआ था. इनके पिता का नाम बसन्त कुमार बिस्वाल था. इनके पिता कांग्रेस नेता थे और त्रितोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे. कालान्तर में इनके पिता को उड़ीसा प्रदेश कांग्रेस कमिटी का उप अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया. रंजीब बिस्वाल को राजनीति विरासत में मिली और क्रिकेट की तरफ उनका अपना रुख था. इनकी पत्नी अनीता मोहंती हैं.

रंजीब बिस्वाल की शिक्षा (Ranjib Biswal education)

रंजीब बिस्वाल ने सन 1986 में कटक के स्टीवर्ट स्कूल से आईसीएससी, बीजेबी कॉलेज से हायर सेकेंडरी तथा सन 1991 में बीजेबी कॉलेज से ही बीए में होनोर्स की डिग्री प्राप्त की.

रंजीब बिस्वाल का क्रिकेट करियर (Ranjib Biswal cricket career)

इस दौरान रंजीब बिस्वाल ने उड़ीसा क्रिकेट टीम से क्रिकेट खेलना शुरू किया. इन्होने भारत के अंडर -19 क्रिकेट टीम में भी अपनी जगह बनायी और पकिस्तान के विरुद्ध चार मैचों में इन्हें कप्तानी करने का मौक़ा मिला. अपने क्रिकेट के दौरान उन्होने सन 1988 में अंडर -19 विश्व कप में भारत का नेतृत्व किया. यह विश्व कप इंग्लैंड में आयोजित हुआ था. इसके एक साल बाद सन 1989 में ढाका में होने वाले एशिया कप में इनकी कप्तानी ने भारत को जीत दिलाई, जिसमे इन्होने कुल 447 रन बनाए तथा 4 विकेट भी लिए. ये एक दाहिने हाथ के मिडील आर्डर बल्लेबाज़ और ऑफ ब्रेक गेंदबाज़ थे. अपने एक दशक के क्रिकेट करियर में इन्होने उड़ीसा और ईस्ट जोन की तरफ से खेलकर कुल 2170 रन बनाए, जिसमे इनके पांच शतक शामिल हैं. बल्लेबाज़ी के साथ इन्होने गेंदबाज़ी में भी अपनी जगह बनायी और कुल 41 फर्स्ट क्लास मैच खेल कर 153 विकेट अपने नाम दर्ज किये. सन 1997 में क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले इन्होने उड़ीसा के रणजी टीम की कप्तानी कई मैचों में की.

इन्होने अपने क्रिकेट करियर के दौरान ऐसे टीम की कप्तानी की जिसमें सौरभ गांगुली, विनोद काम्बले, अजय जडेजा और अनिल कुंबले जैसे खिलाडी थे. इसके बाद सन 1997 में इन्होने घरेलु क्रिकेट से संन्यास ले लिया और एडमिनिस्ट्रेटर हो गये. एक ऑलराउंडर होने के बावजूद भी रंजीब बिस्वाल को भारत के लिए खेलने का मौक़ा नहीं मिला. सन 2005 में इन्हें ईस्ट जोन के सिलेक्शन कमिटी का सदस्य बना दिया गया. इस दौरान इन्होने किरण मोरे के साथ कार्य किया. सन 2006 में जब पुनः इस कमिटी का गठन दिलीप वेंगेस्कर के नेतृत्व में हुआ तो इन्हें पुनः कमिटी में शामिल किया गया. सन 2006 में इन पर एक अन्य जिम्मेवारी भी सौंपी गयी. इन्हें डी दोंगोंकर के साथ ‘इंडिया टूर ऑफ़ वेस्ट इंडीज -2006’ में मेनेजर के पद पर नियुक्त किया गया. इस सीरीज में भारतीय टीम को हार मिली और इसके बाद अगले तीन साल तक रंजीब बिस्वाल को किसी तरह की जिम्मेवारी नहीं सौंपी गयी.

सन 2010 में इनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिलता है. इस साल पुनः भारतीय टीम इनके मेनेजरशिप के साथ वेस्ट इंडीज टी- 20 मैच खेलने गयी, वहाँ पहले ही राउंड में टीम को मात मिली और टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा. इस दौरान अन्य टीम मेम्बर्स के साथ एक रेस्टोरेंट विवाद में होने की वजह से इनकी नौकरी एक बार पुनः मुश्किल में आ गयी, किन्तु इस बार अपनी कूटनीति की सहायता से इन्होने इसे मीडिया में संभाला. मेनेजर के तौर पर बिस्वाल सभी खिलाडियों से दोस्त की तरह पेश आते हैं. यदि खिलाडी अनुशासन में रहें और अच्छा प्रदर्शन करें तो बिस्वाल उन्हें आज़ादी देते हैं. इस वजह से टीम के खिलाड़ी न सिर्फ उन्हें पसंद करते हैं, बल्कि उनका सम्मान भी करते हैं.

रंजीब बिस्वाल आईपीएल चेयरमैन (Ranjib Biswal IPL chairman)

इसके बाद इनकी कार्यक्षमता को देखते हुए इन्हें नेशनल क्रिकेट अकादमी का चेयरमैन बनाया गया. इस दौरान इनकी नियुक्ति उड़ीसा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के लिए की गई. सन 2011 के विश्व कप के दौरान इन्हें भारतीय क्रिकेट टीम का टीम मेनेजर नियुक्त किया गया. कालांतर में सन 2013 में इन्हें आईपीएल का चेयरमैन नियुक्त किया गया, जिस पद पर वे 2015 के अप्रैल महीने तक बने रहे. फिलहाल जनवरी 2017 में इन्हें ओसीए अध्यक्ष पद के कार्यभार से हटाया गया है.

रंजीब बिस्वाल का राजनितिक करियर (Ranjib Biswal political career)

क्रिकेट के साथ साथ रंजीब बिस्वाल ने राजनीति में भी अपने पांव जमाने की कोशिश की. सन 1995 में इन्होने जगतसिंहपुर से मात्र 25 वर्ष की उम्रवस्था में लोकसभा चुनाव जीत कर देश के सबसे कम उम्र वाले संसदों में अपना नाम दर्ज कराया. जगतसिंहपुर से इन्हें कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ते हुए दो बार जीत मिली है. इसके बाद राजनीति में इनका रफ़्तार धीमा होता दिखाई देता है. हालाँकि राजनीति में इन्हें कोई ख़ास सफलता नहीं मिल पायी. जगतसिंहपुर तथा केंद्रपाडा से इन्हें दो बार एमपी चुनाव में मात मिली. इनके पिता पहले से ही राजनीति में कांग्रेस पार्टी से सम्बंधित रहे है, रंजीब बिस्वाल ने सन 2014 में उडीसा से कांग्रेस राज्यसभा सीट के लिए विजयी हुए. इनके बड़े भाई चिरंजीब बिस्वाल भी जगतसिंह विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. रंजीब विस्वाल की शादी एक एनआरआई स्त्री अनीता मोहंती से हुई है.   

रंजीब बिस्वाल के अवार्ड और उपलब्धियां (Ranjib Biswal awards)

  • क्रिकेट में इनके अच्छे प्रदर्शन के लिए इन्हें सन 1993 में एकलव्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • इसी दौरान इन्हें ‘मारुती एस्टेट सहीद स्पोर्टिंग क्रिकेटर ऑफ़ द इयर’ पुरस्कार भी मिला.

अन्य पढ़े:

 

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

One comment

  1. he is a diomond, he lucky man of Indian cricket ,his manegertime india win 20&20warld cup& worldcup2011…..iwant again he maneger 2015 warld cup

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *