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नव वर्ष की शायरी एवं कविता

 नव वर्ष नये संकल्पों को साधकर पुराने पलों को मन में कहीं छिपाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता हैं | हर वर्ष कई सुख दुःख को समेटा होता हैं पर सच्चा राही वही हैं जो आगे बढ़ता हैं जो हर अच्छी बुरी यादों को संजोकर प्रगति की और कदम रखता हैं |

nav varsh

नव वर्ष की शायरी एवं कविता 

आज जब मैं जागी तब मैंने सोचा था
कुछ नया नजारा होगा
आसमां में कुछ नया रंग छाया होगा

भाग कर मैंने अखबार उठाया
शायद देश परदेश में कुछ नया आया होगा

हर पन्ने को मैंने पलटाया
पर कुछ खास ना मैंने पाया

उदास होकर मैंने माँ से पूछा
क्यूँ कल रात इतना जश्न मनाया

सबने कहा था नया वर्ष हैं आया
कब से ढूंढ रही हूँ मैं
पर कुछ नया ना मैंने पाया

माँ ने मुस्कुराकर मुझे बताया
जश्न तो बीती बातो का था
पुरानी यादों का था

अब तो नयी कोरे कागज की गट्ठी हैं
जिसमे नीली स्याही पिरौनी हैं

रंग बिरंगे रंगो के साथ
नयी कहानी रचनी हैं

एक नया संकल्प तुम साधो
नयी राह पर आगे बढ़कर
जीवन पथ को तुम बढ़ाओ

नए युग का निर्माण कर
युवा की शान तुम बढ़ाओ ||

कर्णिका पाठक

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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2 comments

  1. शानदार कविता.

    बहुत अच्छा लिखा है आपने….

    एक नया संकल्प तुम साधो
    नयी राह पर आगे बढ़कर
    जीवन पथ को तुम बढ़ाओ

    WISH YOU A VERY VERY HAPPY NEW YEAR.

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