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नीतीश कुमार का जीवन परिचय | Nitish Kumar biography in hindi

Nitish Kumar biography in hindi वर्तमान बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नी​तीश कुमार जहां अपने सुशासन की वजह से देश मे सुशासन बाबू के नाम से मशहूर हुए हैं, वहीं दूसरी ओर वे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खिलाफत के लिए भी जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले को अपना समर्थन देकर उन्होंने पूरे देश को चौंका दिया है. उनके समर्थन से न सिर्फ केन्द्र पर ​काबिज भाजपा भौंचक है बल्कि बिहार में उनकी गठबंधन सरकार में शामिल राजद भी सदमे में है. यह नीतिश कुमार के काम करने का तरीका है, उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में लोगों को हमेशा अचंभित किया है. वैसे भी उनका राजनीतिक सफर किसी परीकथा से कम नहीं है, जिसमें एक साधारण परिवेश का आदमी केन्द्रीय मंत्री के बाद लंबे समय से भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर काबिज है.

नीतीश कुमार का जीवन परिचय

बिहार में बहार नीतीश कुमार का जीवन परिचय

Nitish Kumar biography in hindi

नी​तीश कुमार का शुरूआती जीवन (Nitish Kumar early life) –

नीतीश कुमार का जन्म बिहार के पटना जिले के बख्तियारपुर में 1 मार्च 1951 को हुआ. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में उपाधि लेने के बावजूद उन्होंने राजनीति में जाने का फैसला लिया. लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव की तरह ही नी​तीश कुमार को भी उस समाजवादी आंदोलन से आगे बढ़ने का मौका मिला, जो भारत में लगी एकमात्र इमरजेंसी की वजह से पैदा हुआ था. कांग्रेस के विरोध में खड़ी जनता पार्टी के युवा नेताओं में नीतीश कुमार का नाम भी प्रमुखता से लिया जा सकता है. नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत जनता पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर ही की. उनका शुरूआती सफर ढेरों ​मुश्किलों से भरा रहा. 1977 में जब जनता दल अपने पूरे परवान पर थी, नी​तीश बाबू को विधानसभा चुनाव में हार का मूंह देखना पड़ा. बिहार के कुर्मी समुदाय के प्रमुख नेता होने की वजह से उन्हें एक बार फिर 1980 में विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने का मौका दिया गया, लेकिन इस बार भी हार ही उनके हिस्से में आई.

पहली सफलता का स्वाद –

लगातार दो बार हारने के बाद उनका आत्मविश्वास नहीं टूटा. परिवार के दबाव के बावजूद वे राजनीति के मैदान में डटे रहे. लगातार काम करते रहे और इन प्रयासों के कारण एक बार फिर 1985 में उन्हें एक बार फिर अपना भाग्य आजमाया और इस बार विजयश्री उनके साथ रही. 1987 में नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें युवा लोकदल का अध्यक्ष चुना गया. यह पहली बार था कि वे किसी महत्वपूर्ण पद का जिम्मा उठा रहे थे. इस जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति में लगातार उनका कद बढ़ता गया. 1989 में उन्हें जनता दल का प्रदेश सचिव चुना गया और पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ने का मौका मिला. इस चुनाव में उन्हें जीत भी मिली और सांसद के साथ केन्द्र में मंत्री बनने का मौका मिला. 1990 के केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में उन्हें कृषि राज्य मंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला.

जनता पार्टी का अवसान और समता पार्टी का उदय –

जनता पार्टी की टूट से पूरे देश के समाजवादियों को झटका लगा और हरेक राज्य में ढेर सारे छोटे दलों का गठन होने लगा. लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल बनाया तो नितिश कुमार ने समता पार्टी का दामन थामा. 1995 में बिहार में हुए चुनावों में नितिश की समता पार्टी को बुरी तरह नकार दिया गया, लेकिन इस बड़ी हार के बावजूद पहले की तरह नितिश एक बार फिर फील्ड में काम करते रहे. नितिश कुमार ने केन्द्रीय मंत्रीमंडल में बतौर रेल मंत्री काम किया और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान स्थापित हुई, लेकिन गैसल में एक दुखद रेल दुर्घटना ​घटित हो गई. नी​तीश कुमार ने घटना की​ जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. इससे राजनीति में उनका कद बढ़ा.

पहली बार बिहार की कमान –

2000 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने लेकिन उनका कार्यकाल महज सात दिन तक चल पाया और सरकार गिर गई. नी​तीश कुमार को इस्तीफा देना पड़ा. उसी साल उन्हें केन्द्रीय मंत्रीमंडल में पिछले अनुभवों को देखते हुए कृषि मंत्री बना दिया गया. अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में उन्हें एक बार फिर 2001 में रेल मंत्री बना दिया गया. इस बीच उनकी नजर बिहार की राजनीति पर रही. नवम्बर 2005 में उन्हें एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ बिहार के मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर बिहार में गठबंधन की सरकार बनाई. 2010 में एक बार फिर उन्होंने अपने बेहतरीन काम की वजह से जनता का समर्थन मिला और वे तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए. इस गठबंधन सरकार में शामिल भाजपा के साथ उनके मतभेद लगातार बढ़ते गए, जिसका एक प्रमुख कारण भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी का प्रखर विरोध था. गठबंधन टूट गया लेकिन सरकार चलती रही. 2014 में हुए लोकसभा के चुनावों में पार्टी की बुरी हार की वजह से उन्होंने एक बार फिर अपने पद से इस्तीफा दे दिया और जीतनराम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री बने. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जीवन परिचय यहाँ पढ़ें|

जीतनराम को राम—राम और बिहार में नीतीश कुमार –

जीतनराम मांझी के साथ नी​तीश कुमार के मतभेद शुरूआत में ही सामने आने लगे और मतभेद इस कदर बढ़ गए कि पार्टी अपने ही मुख्यमंत्री के खिलाफ हो गई. बिहार में हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन करके उन्होंने हमेशा की तरह एक बार फिर अपने प्रतिद्वंद्वीयों का चौकाया. जनता ने एक बार फिर सुशासन बाबू को चुना. उनके द्वारा किया गया नारा बिहार में बहार है,नीतीश कुमार है काफी मशहूर हुआ है. तब से लेकर अब तक बिहार की कमान नीतीश कुमार के हाथ में है और आने वाले समय में उन्हें भारतीय प्रधानमंत्री के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.

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