ताज़ा खबर

पॉइंट नेमो क्या है | Point Nemo Facts in hindi

पॉइंट नेमो क्या है व इसकी गहराई (Point Nemo depth, coordinates, location, Facts in hindi)

किसी भी इंसान के मन में ये जिज्ञासा उठना स्वाभाविक हैं कि धरती का की उत्पत्ति कैसे हुई, इसका अंतिम बिंदु कहाँ है?? या कौनसा वो क्षेत्र हैं जो मानव के लिए दूरस्थ हैं? मानव ने धरती का अंतिम छोर और धरती की आकृति के अनुसार इसे पहले ही समझ लिया था. लेकिन समुद्र और इसके परिमाप से जुड़े रहस्यों पर अभी तक खोज चल रही हैं. समुद्र में भी एक स्थान ऐसा हैं जहाँ से धरती की दूरी सर्वाधिक हैं, उसके बारे में जानना तो रुचिकर है ही, लेकिन साथ में अभी चर्चा का विषय बना वो क्षेत्र जिसे नेमो पॉइंट कहते हैं, अपना एक महत्व भी रखता हैं.

point nemo

पॉइंट नेमो क्या है और कहाँ स्थित हैं?  (What is Point Nemo and What is it’s Location)

दुनिया में समुद्र के मध्य स्थित जगह को ही नेमो पॉइंट कहा गया हैं. जहाँ से आगे दूर-दूर तक कोई सुखी जमीन नहीं हैं.यह समुद्री पोल 48°52.6 दक्षिण और  123°23.6’ पश्चिम में स्थित हैं.

1992 में क्रोटियन कनेडियन सर्वे इंजिनियर ह्र्वोजे लुकतेला ने जिओस्पेशीयल प्रोग्राम लिखा, जिसे हिप्पार्क्स और फाउंड नेमो कहते हैं. दी मिस्टीरियस आइलैंड, वर्नी ने बताया कि नेमो के नॉटिलस का आधार साउथ पेसिफिक में एक आइलैंड है. जो कि ज्वालामुखी के फटने के कारण नष्ट हो गया था.

धरती का आकार गोल हैं इस कारण समुद्र का दूरस्थ हिस्सा इस वृत के मध्य में होगा, जो कि 3 पॉइंट से परिभाषित किया जा सकेगा. मिस्टर ल्युकटेला की गणना को माने तो पॉइंट नेमो इन 3 स्थल खण्डों से 1670 मील दूरी पर स्थित हैं.

  • माउंट नुई के उत्तर-पूर्व में हैं जो कि ईस्टर आइलैंड के साउथ के सबसे बड़े 3 टापू हैं. यह चिली के वेस्टर्न छोर पर स्थित हैं.
  • यह हिम बाधित माहेर आइलैंड के दक्षिण में ,सिप्ले आइलैंड के पास, मरी बायर्डलैंड से दूर और अंटार्टिका का हिस्सा हैं. इसे 1946-47 में यूएस नेवी ऑपरेशन हाईजम्प के द्वारा खोजा गया था.
  • पॉइंट नेमो से केंद्र में बने सर्किल का समुद्र में क्षेत्रफल 8,650,778 स्क्वायर मील हैं (22,405,411 स्क्वायर किलोमीटर हैं) और यह परिमाप आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े देश पूर्व सोवियत संघ से भी थोड़ा बड़ा हैं.

पॉइंट नेमो और नॉटिकल मील की परिभाषा (Point Nemo and Nautical Mile Definition)

पॉइंट नेमो की दूरी और क्षेत्रफल को नापने के लिए नॉटिकल मील की यूनिट का उपयोग हुआ है, इसलिए इसकी परिभाषा को समझना भी जरुरी हैं.

यह हवा और समुद्र में दूरी को मापने के लिए इस्तेमाल होने वाली यूनिट हैं. यह पृथ्वी के बड़े सर्किल के वृतचाप पर आधारित होती हैं,और अलग-अलग इसलिए होती हैं क्योंकि पृथ्वी पूर्णतह गोलाकार नहीं हैं. जैसे एक ब्रिटिश यूनिट 6080 फीट (1853.2 मीटर) के बराबर होती हैं जबकि इंटरनेशनल यूनिट 1852 मीटर की होती हैं जो कि जुलाई 1954 से यूएस द्वारा आधिकारिक रूप से उपयोग में ली जाती हैं.

पॉइंट नेमो का नामकरण (Nomination of Point Nemo)

ह्र्वोजे ने यह नाम हॉलीवुड की मूवी फाइंडिंग नेमो से नहीं लिया हैं, सच तो ये हैं कि यह मूवी तो 2003 में रिलीज़ हुई थी. ये नाम तो उन्होंने वास्तविक नेमो के नाम पर रखा था जो, कि जुल्स वर्म के नावेल “ट्वेंटी थाउजेंड लीग्स अंडर दी सी” के सबमरीन कैप्टेन का नाम था.

नेमो नाम इसलिए भी उपयुक्त हैं क्योंकि ये जगह धरती से इतना दूर समुद्र के मध्य स्थित है, जहाँ कोई नहीं रहता या रह सकता हैं. नेमो शब्द का लेटिन भाषा  में मतलब नो बडी (हिंदी में कोई नहीं) होता हैं. पॉइंट नेमो के उत्तर में ड्यूसी आइलैंड हैं जो कि गैर-आबादी वाला प्रवालद्वीप है जहाँ पर साफ़ पानी की भी कमी हैं. यह पिटकरीन आइलैंड का दूर-दराज क्षेत्र का एक फ्रेगमेंट हैं

पॉइंट नेमो का महत्व (Importance and Facts of Nemo Point in hindi)

पॉइंट नेमो को नासा ने उपयुक्त डंपिंग स्टेशन बना रखा है. अमेरिकन स्पेस एजेंसी के अनुसार यह पेसिफिक ओशियन की स्पेसक्राफ्ट सिमेंट्री हैं जो कि इंसानों की पहुँच से बहुत दूर हैं.

नासा के अनुसार छोटे सेटेलाइट  पॉइंट नेमो पर आकर नहीं बिखरते, क्योंकि घर्षण के कारण इनसे निकलने वाली ऊष्मा इन्हें धरती पर पहुँचने से पहले ही जला देती हैं,जबकि ये हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से धरती की तरफ बढ़ रहे होते हैं

पॉइंट नेमो की जरूरत तब होती है, जब बड़े ऑब्जेक्ट्स जैसे स्पेस क्राफ्ट्स या स्पेस स्टेशन धरती पर वापिस लौटते हैं.  इनके  बडे- बड़े टुकड़े वातावरण में पूरी तरह से नष्ट नहीं होते और तेजी से धरती की  तरफ बढ़ते हैं. ऐसे में इन्हें पॉइंट नेमो पर लाकर छोड़ने की कोशिश की जाती हैं.

1971 से लेकर 2016 के मध्य पूरी दुनिया की स्पेस एजेंसी ने 260 स्पेसक्राफ्ट इस क्षेत्र में डंप किये हैं.

रशियन स्पेस प्रोग्राम की भी इसके साउथ पसिफ़िक हिस्से पर आँख रह चुकी हैं. पॉइंट नेमो के आधिकारिक घोषणा से पहले यह स्वाभाविक था कि दुनिया के इस दूरस्थ स्थान पर  अन्तरिक्ष के कबाड़ को फैकने की उपयुक्त जगह थी. सोवियत/रशिया,यूरोपियन और जापानीज ने सैंकड़ों की संख्या में विघटित अन्तरिक्ष पोत की यहाँ पर जल समाधि बनाई. दुनिया के दूरस्थ क्षेत्र को स्पेसक्राफ्ट सिमेंट्री भी कहा गया. 1971 तक पॉइंट नेमो पर रशिया के मीर स्पेस स्टेशन के 300 स्पेस क्राफ्ट्स फैके जा चुके थे.

ये सभी वातावरण के लिए कहीं से भी सुरक्षित और लाभदायक नहीं था, क्योंकि क्राफ्ट्स के वातावरण के सम्पर्क में आने पर उनमें होने वाले ब्लास्ट से हानिकारक कचरा एक बड़े एरिया में फ़ैल जाता. हालांकि ये क्षेत्र जमीन और शिपिंग लेन एवं एविएशन कोरिडोर से काफी दूर स्थित था कि लेकिन नियमानुसार स्पेस एजेंसी को अपने क्राफ्ट को फैकने से पहले चिली और न्यूज़ीलैंड को सूचित करना पड़ता था, जिससे कि पायलट और नाविक उस स्थान से दूर रह सके.

नेमो पॉइंट तक मानव की पहुँच (Nemo Point and Human visits)

वैसे भी इसके बारे में सोचना किसी भयानक सपने के समान हैं, और जब ये पता हो कि पॉइंट नेमो ना केवल दूरस्थ हैं बल्कि भयंकर रूप से वीरान समुंद्री इलाका हैं. ऐसे में वहां अभी तक कभी भी किसी मानव ने चलाकर विजिट करने की सोची भी नहीं है. हालाँकि वैज्ञानिको ने कुछ आवश्यक खोज करने का प्रयास किया हैं लेकिन एयरक्राफ्ट का डंपिंग स्टेशन भी होने कारण भी अब वहां जाना आसान नहीं हैं.

2015 वॉल्वो ओशीयन रेस के प्रतिभागी जिनमें ऑकलैंड, न्यूज़िलैंड से ईटाजाइ तक और ब्राजील शामिल थे, इसके काफी करीब तक पहुंचे थे. जब वो लोग नेमो पॉइंट के पास से निकले तो ये नोटिस किया कि जहाज आईएसएस (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) अधिशाषित क्षेत्र के नजदीक हैं, जो कि ग्लोब के चारों और के 15 डेली ओर्बिट्स में से प्रत्येक से एक नियत उंचाई पर 250 मील(लगभग 400 किलोमीटर) का सर्किल बना रहे हैं.

पॉइंट नेमो और दी ब्लूप (Point Nemo and The Bloop)

1997 में ओशियनोग्राफर ने पॉइंट नेमो के नीचे से निकलने वाली अल्ट्रा-लो फ्रीक्वेंसी साउंड का अध्ययन किया था और इसका नाम दी ब्लूप रखा था. यह रहस्यमयी आवाज सबसे बड़े समुंद्री जीव ब्ल्यू व्हेल की आवाज से भी ज्यादा थी. वैज्ञानिको का कहना हैं कि यह अन्टार्क्टिका में आइसबर्ग के पिघलने से बना हैं

चीन और पॉइंट नेमो (Chiana and Point NEmo)

अभी चायना के वैज्ञानिक अपने उस टियागोंग-1-ए स्पेस लैब को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं जिस पर से उनकी स्पेस एजेंसी ने अपना कण्ट्रोल खो दिया हैं. और अब यह कभी भी क्रेश होकर धरती पर लौट सकता है, इसका अनुमानित समय दिसम्बर से अप्रैल के मध्य हैं. समस्या ये हैं कि कोई नहीं जानता कि ये धरती पर कौनसी जगह लैंड होगा. इस कारण वैज्ञानिकों अभी इस पर खोये नियन्त्रण के कारण इसे पॉइंट नेमो की तरफ नहीं धकेल पा रहे हैं.

अन्य पढ़े:

Ankita

Ankita

अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
Ankita

One comment

  1. I Rajeev Kumar from India . I can solved this problem point memo related guide how can solved this problem . depalli arrival in this matter go this arrival sub link.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *