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हिंदी दिवस कविता,निबंध,महत्व,भाषण,स्लोगन | Hindi Diwas Essay Kavita Poem Speech Slogan in Hindi

Hindi Diwas Essay Kavita Poem Speech Slogan in Hindi हिंदी दिवस महत्व, भाषण, सन्देश, स्लोगन एवं कविता का समावेश इस एक आर्टिकल में किया गया हैं |

Hindi Divas Mahtva Nibandh Bhashan Speech in Hindi

हिंदी दिवस महत्व, निबंध, भाषण

हिंदी, भारत देश की मातृभाषा |  गर्व से स्वीकारते हैं कि हम हिंदी भाषी हैं | अनेकता में एकता का स्वर हिंदी के माध्यम से गूंजता हैं | जीवन में भाषा का सबसे अधिक महत्व होता हैं | एक भाषा ही हममे तहज़ीब का विकास करती हैं | इसी कारण सभी देशो की अपनी एक मूल भाषा होती हैं जिसका सम्मान करना देशवासियों का कर्तव्य हैं |माना कि भाषा भावनाओं को व्यक्त करने का एक साधन मात्र हैं लेकिन इस साधन में वो बल हैं जो दुनियाँ को बदल सकता हैं | विभिन्नताओं के बीच एक भाषा ही हैं जो एकता का आधार बनती हैं और हम सभी को इस एकता के साधन का सम्मान करना चाहिये | हिंदी हमारी मातृभाषा हैं जिसे सम्मान देना हमारा कर्तव्य हैं |

हिंदी दिवस का इतिहास (Hindi Divas Itihas History):

भारत देश कई विधाओं का मिश्रण हैं | उनमे कई भाषाओँ का समावेश हैं | इन सभी भाषाओँ में हिंदी को देश की मातृभाषा का दर्जा दिया गया था| आज यह दुनियाँ में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक हैं | इसे सम्मान देने के लिए प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता हैं |

वास्तव में 14 सितम्बर 1949 के दिन आजादी के बाद हिंदी को देश की मातृभाषा का गौरव प्राप्त हुआ | उसी की याद में 1953 में निर्णय लिया गया जिसके फलस्वरूप  प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा |

hindi divas sandesh nare

विश्व हिंदी दिवस  (International Hindi Divas Date):

14 सितम्बर को स्वदेश में यह दिवस मनाया जाता हैं विश्व स्तर पर भी इस खास दिवस को मनाया जाता हैं | सर्वप्रथम 10 जनवरी 1975 को नागपुर महाराष्ट्र में विश्व हिंदी दिवस मनाया गया था | उसके बाद 2006 में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस (International Hindi Divas) के रूप में मनाये जाने का ऐलान किया गया | खासतौर पर विदेशो में बने भारतीय दूतावास में 10 जनवरी को Hindi Divas बड़े शान ओ शोकत से मनाया जाता हैं | दुनियाँ में हिंदी के महत्व (Hindi Ka Mahtva) को समझाने के लिए यह दिन शुरू किया गया था |

कैसे मनाते हैं हिंदी दिवस (Hindi Divas Celebration In India):

आमतौर पर 14 सितम्बर के दिन बच्चों को मातृभाषा का महत्व बताने के लिए स्कूल से प्रोजेक्ट दिए जाते हैं | Hindi Divas के उपलक्ष मे प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता हैं जिसमे वाद विवाद, भाषण, कविता वाचन, निबंध आदि क्षेत्र आते हैं | इसके आलावा राजनीती गलियारों में हिंदी दिवस के लिए छोटे मोटे समारोह का आयोजन किया जाता हैं |

दुःख की बात तो यह हैं कि युवा वर्ग जो अपने जीवन की व्यस्तता में इतना लग्न हैं कि उसे यह दिन याद तक नहीं रहता हैं | वास्तव में हम सभी जानते हैं कि सर्वाधिक बोले जाने वाली इस भाषा को वो सम्मान प्राप्त नहीं हैं जो होना चाहिये हैं और इसका कारण हैं अपनी भाषा को तुच्छ समझना | जब तक हम स्वयं अपने देश की धरोहर हमारी मातृभाषा का सम्मान नहीं करेंगे तब तक हम इसे सम्मान दिला नहीं पायेंगे |

किसी भी तरह की भाषा को सिखना, उसे बोलना अपराध नहीं हैं पर अपनी भाषा के प्रति हिन् भावना रखना देश के प्रति गद्दारी के समान हैं | 

राष्ट्रीय एकता में हिंदी का महत्व (Rashtriya Ekata Main Hindi Ka Mahtva):

यह पढ़कर अक्सर ही हम जो शहरो अथवा महानगरो में बैठे हैं उन्हें हँसी आती हैं | पढ़े लिखे लोग जो बड़ी-बड़ी कंपनी में जॉब कर रहे हैं उन्हें आज के समय में हिंदी का कोई भविष्य दिखाई नहीं देता | उनका मानना भी सही हैं क्यूंकि वे अपने आस-पास के दायरे में रहकर सोच रहे हैं | उन्हें एक सफल भविष्य जिसमे नौकरी, पैसा एवम एशो आराम हैं | उसके लिए हिंदी का होना जरुरी नहीं लगता | पर वही जब एक क्षितिज पर खड़े होकर एक व्यक्ति देश के भीतर झांकता हैं तो उसे लोगो के मध्य एक बहुत बड़ा मतभेद दिखाई देता हैं |और यह मतभेद इन पढ़े लिखे लोगो को ही अकेला कर रहा हैं क्यूंकि देश में आज भी हिंदी भाषी ज्यादा हैं | माना कि ये Hindi भाषी तकनिकी ज्ञान से दूर हैं पर आज भी तकनिकी एकता से ज्यादा मानवीय एकता महत्व रखती हैं |मानवीय एकता तब ही आएगी जब सबमे समानता होगी | मतभेद कम होगा |

यह मतभेद भाषा का मतभेद हैं |  इंग्लिश आज की जरुरत हैं लेकिन क्या जरुरत के लिए नींव को छोड़ा जा सकता हैं ? अगर Hindi को इस तरह से प्रथक कर दिया जायेगा तो गाँव और शहरों में बढ़ता मतभेद और गहरा हो जायेगा जो कि देश के विकास में एक बड़ी बाधा हैं |

भाषा व्यक्ति को जोड़ती हैं व्यक्ति को जोड़ने से परिवार बनता हैं परिवारो के जुड़ने से समाज बनता हैं समाज से गाँव, गाँव से शहर, शहरों से महा नगर और महा नगरो से देश | इस प्रकार देश के विकास में इस  जुड़ाव का मजबूत होना आवश्यक हैं | खासतौर पर यह जुड़ाव भाषा के माध्यम से ही मजबूत हो सकता हैं क्यूंकि देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा Hindi हैं | जब तक इसका विकास नही होगा तब तक देश के विकास में बाधा पहुँचेगी | इसके लिए एक उदाहरण दे रही हूँ

आज डिजिटलाईजेशन को भारत में जोरो शोरो से लाया जा रहा हैं जिसमे सबसे पहले गाँव को टारगेट किया जा रहा हैं | इन्टरनेट को देश के हर कोने में लाने का काम हो रहा हैं लेकिन यह तब तक संभव नहीं हैं | जब तक यह काम Hindi में ना किया जाये | आप सोचे की हर एक व्यक्ति पहले इंग्लिश पढ़ना, लिखना सीखे फिर आकर इन्टरनेट पर गूगल करे तो इसमें कई सदिया बीत जायेगी | असंभव नहीं हैं पर इसमें बहुत वक्त लगेगा | हर एक छोटी ईकाई को इससे जोड़ने के लिए इसे हिंदी में लाना जरुरी हैं | तब ही पुरे देश को डिजिटलाइजेशन से जोड़ने का सपना सच हो सकेगा |

इसी प्रकार बहुत से कारण हैं जिनके लिए हम सभी को एक भाषा से जुड़ना जरुरी हैं | इन सबसे बढ़कर यह देश की मातृभाषा हैं उसे सम्मान देना और दिलाना हमारा कर्तव्य हैं |

हिंदी दिवस स्लोगन सन्देश नारे (Hindi Divas Slogan Quotes):

  • एकता ही हैं देश का बल, जरुरी हैं हिंदी का संबल
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  • हिंदी का विकास, देश का विकास
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  • करो हिंदी का मान, तभी बढ़ेगी देश की शान
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  • प्रेम का दूजा नाम हैं हिंदी |
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  • ना करो हिंदी की चिंदी, हिंदी तो हैं देश की बिंदी

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Hindi Diwas Kavita Poem (हिंदी दिवस पर कविता)

  • हिन्दुस्तानी हैं हम गर्व करो हिंदी पर
    सम्मान देना,दिलाना कर्तव्य हैं हम पर
    खत्म हुआ विदेशी शासन
    अब तोड़ो बेड़ियों को
    तह दिल से अपनाओ खुले आसमां को
    पर ना छोड़ो धरती के प्यार को
    हिंदी हैं मातृतुल्य हमारी
    इस पर न्यौछावर करो जिन्दगी सारी
    Hindi Divas Kavita

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  • सबकी सखी हैं मेरी हिंदी
    जैसे माथे पर सजी हैं सुंदर बिंदी
    देवनागरी हैं इसकी लिपि
    संस्कृत हैं इसकी जननी
    हर साहित्य की हैं ये ज्ञाता
    सुंदर सरल हैं इसकी भाषा
    प्रेम अपनापन सौन्दर्य हैं इसका
    दिलाना सम्मान कर्तव्य हैं हम सबका

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हिंदी दिवस शायरी (Hindi Divas Shayari)

  • हर कण में हैं हिंदी बसी
    मेरी माँ की इसमें बोली बसी
    मेरा मान हैं हिंदी
    मेरी शान हैं हिंदी
    ================================
  • हिंदी का करे सम्मान
    हैं यह प्रेम सौहाद्र का दूजा नाम
    हर देश का सम्मान हैं मातृभाषा
    गर्व से कहों हैं हमारी हिंदी भाषा

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मातृभाषा देश की धरोहर होती हैं जिस तरह हम तिरंगे को सम्मान देते हैं वैसे ही हमारी भाषा भी सम्मानीय हैं | हम खुद जब तक इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे तब तक इसे दुसरो तक पहुँचाना मुश्किल हैं |

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अमेरिका में जाकर मातृभाषा में भाषण दिया था | यह हमारे लिए एक गर्व की बात हैं | कई लोग कहते हैं कि उन्हें इंग्लिश नही आती इसलिए उनके पास विकल्प नहीं हैं | शायद सच भी होगा पर अगर आपने वो भाषण देखा हैं | तब श्री मोदी जी के हाव भाव को जरुर देखिएगा आपको एहसास होगा कि इंग्लिश नहीं आती यह प्रश्न का उनके दिलो दिमाग में हो ही नहीं सकता जिस सहजता से बुलंद आवाज के साथ उन्होंने अपनी बात रखी थी उसमे गर्व छिपा था | विदेशी धरती पर अपनी मातृभाषा में पुरे आत्मविश्वास के साथ वही एक मंच की शोभा बढ़ा सकता हैं जो सच्चा देशभक्त हैं |

हिंदी दिवस Hindi Diwas को महज एक दिन ना समझे राष्ट्रीय एकता एवम देश विकास हम सबकी जरुरत हैं जिसके लिए सभी को एक साथ आगे बढ़ना जरुरी हैं | और इस दिशा में हिंदी को वास्तविक सम्मान मिले यह अत्यंत आवश्यक हैं |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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13 comments

  1. very good……… 😘😘😘😘😘😘😘😘

  2. भारत माता की जय ,इंकलाम जिंदा बाद हिन्दू हम है हिंदुस्तान हमारा

  3. अरुणा आनन्द

    बिल्कुल सही कहा कि हिन्दी का सम्मान केवल एक दिन यानि हिन्दी दिवस पर ,ही नहीं हर रोज. और हर पल होना चाहिये.यह हमारी अपनी भाषा है.जितनी अच्छी तरह से हम अपने भाव हिन्दी में व्यक्त कर सकते है किसी अन्य भाषा में नहीं. . .! ो

  4. नरेंद्र सिंह

    हिंदी दिवस पर हिंदी पर कविता

    हिंदी

    हिंदी सरल ,सरस ,व्यापक व वोधगम्य है

    हिंदी अन्य भाषायों से रखती तारतम्य है

    हिंदी के पास मौलिकता व लालित्य है

    हिंदी के पास अति समृद्ध साहित्य है //

    हिंदी राष्ट्रभाषा है ,शान बढ़ानेवाली

    हिंदी है भारत में एकता लाने वाली \।

    हिंदी भारतीय सभ्यता -संस्कृति की परिचायिका है

    हिंदी विश्व- वन्धुत्व का नारा देने वाली नायिका है ।

    हिंदी समग्र भारत में जन- जन की भाषा है

    हिंदी शांति -प्रेम ,सत्य -अहिंसा की परिभाषा है //

    हिंदी से विमुख होना ,राष्ट्र का बड़ा उपहास है

    हिंदी का विकास में ही ,निहित राष्ट्र का विकास है ।।

    नरेन्द्र सिंह

  5. Hindi India ki rajbhasha hain.aur hindi todnewali nahi jodnevali bhasha hain.

  6. m-m-jadhaw neemuch m-p-

    hindiis our matra bhasha we should proud on it –

  7. जो व्यक्ति अपने स्वदेश की भाषा को नही अपना सकता वह अपने देश के व्यक्तित्व, विचार , को क्या समझेगा
    इसी प्रकार जो स्वराष्ट्र के हित में प्रतिष्ठित नही रहा वह भारत की नागरिकता दर्शानें में भी हिचकिचाहट प्रदर्शित भी अवश्य करेगा
    जियो तो स्वदेश के लिए
    और मरना भी पड़े तो स्वेदश के लिए
    because हिन्दी भारत की बिंदी

  8. bilkul sahi likha h ki hindi diwas ko matra ek din nahi samajhna h balki hm jaise tirange ka samman karte h thik usi prakar se hme hr din hindi ka samman karna chahiye. sath hi sath hme hindi pr aur hindustani hone pr garv krna chahiye.

  9. kavita bahut achi hai.

  10. So. Gud. We r proud upon our hindi

  11. हिंदी भारत की मूल भाषा हैं परन्तु जिस तरह देश में भिन्न भिन्न धर्म के लोग हैं उसी तरह कई भाषाये एवम बोलियाँ भी यहाँ बोली जाती हैं इन सबके आलावा देश में हिंदी एवम आंग्ल भाषा अर्थात इंग्लिश के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती ही चली जा रही हैं | इंग्लिश बोलने वाले लोग हिंदी भाषी की तुलना में आकर्षण का केंद्र होते हैं जैसे अगर किसी ऑफिस में कोई हिंदी में बात कर रहा हो और उसी समय कोई इंग्लिश में बात करे तो सभी का ध्यान इंग्लिश भाषी की तरफ होता हैं और उनकी सुनवाई भी हिंदी भाषी की तुलना में जल्दी होती हैं |

  12. हिंदी हमारी मातृभाषा है।हिंदी हमारी स्ान हैऔर हमारा गौरव . यह हमारी स्ान है।जब तक जान है तब तक हमारा तब तक झुकने नहीं देंगे हम देश की
    सांन जय हिन्द जय भारत।

  13. Khushal Kumar Mali

    HINDI is our mother tongue. Everyone should speak HINDI. We should respect HINDI and HINDUS. Today, New Generation always demands to speak and learn English and other languages. We should told them that HINDI is a cultural language of India. We should have proud on us that we take birth in India where’s mother tongue is HINDI.
    Khushal Kumar Mali
    Rajasthan

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