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भारत में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट व रेरा की मुख्य बातें| Real Estate Regulation Act or RERA India highlights in hindi

Real Estate Regulation Act (RERA) India in hindi कई सालों से रियल एस्टेट सेक्टर परियोजनाओं की डिलीवरी में देरी, अपूर्ण परियोजनाएं, निर्माण की बढ़ती लागत, विनियामक मुद्दे, प्रक्षेपण इत्यादि जैसी बहुत सारी समस्या इस क्षेत्र में मौजूद थी, लेकिन रेरा कानून के आ जाने से इस समस्या के हल होने की सम्भावना बढ़ गयी है. यह कानून आवासीय और वाणिज्यिक दोनों ही परियोजनाओं के नियंत्रण के लिए बना है. रियल एस्टेट नियामक अधिनियम से यह अपेक्षित है कि वह रियल्टी क्षेत्र में पारदर्शिता लाकर उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेंगे, और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी तरह का धोखा डेवेलोपेर्स के द्वारा उपभोगताओं को नहीं दिया जा रहा है, साथ ही अधिनियम में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि उपभोग्ताओं को देरी से डिलीवरी का दंश न झेलना पड़े. रेरा अधिनियम को 13 राज्य और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे लागु करने की अधिसूचना जारी की है. उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है जो पहले से ही न सिर्फ अधिसूचना को जारी करता है बाकि राज्य भी इस नियम के तहत अधिसूचना को लागु करने के लिए प्रयासरत है.

भारत में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (रेरा) का इतिहास (Real Estate Regulation Act (RERA) India history)

अचल संपत्ति विनियामक प्राधिकरण बिल को 2013 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार के द्वारा पेश किया गया था. इस अधिनियम को शहरी आवास मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास के द्वारा प्रस्तुत किया गया था, तथा स्टैंडिंग कमिटी को इसकी रिपोर्ट सौंपी गयी थी. राज्य सभा समिति की जाँच के आधार पर बिल में 20 प्रमुख संशोधनों के साथ उनकी सिफारिश पर दिसम्बर 2015 में भारत के केन्द्रीय मंत्रिमंडल के द्वारा इसकी मंजूरी दे दी गयी थी. फिर बिल को चयन समिति के पास भेजा गया, चयन समिति के द्वारा 2015 में बिल की रिपोर्ट को सौपा गया. उसके बाद बिल 10 मार्च 2016 को राज्यसभा में पास आ गया और लोक सभा के द्वारा 15 मार्च 2016 को अनुमोदित कर दिया गया. राज्यसभा का चुनाव यहाँ पढ़ें.   

real state bill

 

भारत में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (रेरा) (Real Estate Regulation Act (RERA) India in hindi)

आवास और शहरी ग़रीबी उन्मूलन मंत्रालय ने रियल एस्टेट नियामक अधिनियम के 92 वर्गों में से 69 को अधिसूचित कर लिया है, साथ ही इसे 1 मई 2017 से लागू भी कर दिया गया है. यह अधिनियम 8 साल के लंबे प्रयास के बाद अधिनियमित हुई है. अचल संपत्ति के कानून के लिए एक प्रस्ताव पहले जनवरी 2009 में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के आवास मंत्रियों के नेशनल कोंफ्रेंस में लगाया गया था. रेरा कानून के तहत केन्द्रीय और राज्य सरकार दोनों को 6 महीने के अन्दर ही नियम को तैयार करना है. इस कानून के तहत खरीदारों और डेवलेपर्स किसी को भी शिकायतों के निराकरण के लिए 60 दिनों से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगा, इसके लिए सरकार किसी भी नियामक अधिकारी को अंतिम प्राधिकरण नियामक के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है. दिल्ली के लिए शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा नियम का निर्धारण किया जायेगा और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एचयूपीए मंत्रालय नियम तैयार करने का कार्य भार संभालेगा. भारत में बेनामी संपत्ति अधिनियम यहाँ पढ़ें.     

रेरा कानून खरीदारों के लिए सहायक (RERA act for buyers)

रेरा डेवलेपर्स और खरीदारों दोनों के लिए ही फायदेमंद है. इस कानून के आ जाने से उपभोगताओं का बाज़ार में विश्वास बढ़ जायेगा. सभी लंबित परियोजनाएं पारदर्शी होते हुए समय पर वितरित होने लगेगी, जिससे ख़रीदारों को लाभ होगा. जो खरीदार अभी जो भी परियोजनाएं पंजीकृत नहीं हुई है या अभी भी निर्माण चल रहा है अगर वैसे प्रोजेक्ट खरीद रहे है, तो उन्हें रेरा अधिनियम के तहत प्रोजेक्ट डिलीवरी के समय या उससे जुड़े मुद्दे पर संरक्षण दिया जायेगा. इस कानून के तहत जीएसटी और रेरा के प्रभावी होने पर मूल्य का निर्धारण भी प्रभावित होगा.  

रेरा कानून के कुछ नियम (RERA act rules)

रेरा कानून के नियम और उससे जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित है –

  • फ़्लैट या संपति के बुकिंग की राशि : सामान्यतः जब हम बुकिंग करते है तब डेवलेपर्स, जो भी हमारी फ़्लैट को खरीदने की पूरी राशि होती है, हमे उसका 10% तक की राशी को भुगतान करने को कहते है. साथ ही वो अग्रिम राशि की भी मांग करते है, लेकिन रेरा अधिनियम आने से 10% से अधिक भुगतान के लिए डेवलेपर्स को अब समझौता करना पड़ेगा.
  • प्रोजेक्ट के वितरण में देरी पर मुआवजा : जो भी खरीदार घर को खरीद रहे है अगर उन्हें आवंटित फ़्लैट या घर में किसी भी तरह के निर्माण कार्य में दोष दिखता है, या फ़्लैट का आवंटन समय के अनुसार नहीं होता है, तो डेवलेपर्स या बिल्डर रेरा अधिनियम के तहत दोषी पाए जायेंगे और उन्हें इसके लिए कुल राशि के ब्याज के साथ जुर्माना भी देना पड़ेगा.
  • परियोजना की गुणवता : रेरा अधिनियम के तहत बिल्डिंग में किसी भी तरह की खराबी के लिए 5 साल की वारंटी के तहत उसमे सुधार कराने की जिम्मेदारी बिल्डर की होगी.
  • परियोजनाओं का पंजीकरण : रेरा कानून के तहत जुलाई 2017 तक सभी प्रोजेक्ट का पंजीकरण हो जाना चाहिए. यह पंजीकरण प्रत्येक राज्यों के द्वारा स्थापित स्वयं के नियामक प्राधिकरण में कराना होगा, यह प्राधिकरण सभी तरह के परियोजनाओं को  नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी रखता है. अगर कोई भी बिल्डर रेरा के प्राधिकरण में पंजीकरण नहीं कराता है तो वह परियोजना की मार्केटिंग नहीं कर सकता है. इसके साथ ही विनियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकृत होने के बाद बिल्डर को प्राधिकरण की वेवसाइट पर ऑनलाइन परियोजना की सभी विवरणों के साथ ही उससे जुडी अन्य जानकारियों को भी अपडेट करना होगा. इन सभी विवरणों के ऑनलाइन जानकारी मिलने से खरीददारों को स्टिक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे वह परियोजनाओं में निवेश करने से पहले विचार कर पायेगा.
  • परियोजना की अवधि : कोई भी परियोजनाएं जो पूरी नहीं हुई है या अभी चल रही है, इन सब की जानकारी बिल्डर को प्राधिकरण को देनी होगी. साथ ही जो मूल योजना है, अगर उसमे किसी भी तरह का परिवर्तन बाद में होता है तो उन सब की जानकारी देनी होगी. बिल्डर को परियोजनाओं की समाप्ति की समय सीमा की जानकारी भी प्राधिकरण को प्रदान करनी होगी. साथ ही बिल्डरों को ग्राहकों से प्राप्त एस्क्रो अकाउंट में 70% तक का पैसा ट्रांस्फर करना होगा, इससे इस बात का पता चल जायेगा की बिल्डर जिस परियोजना के लिए पैसा ले रहा है, वो उसी परियोजना पर ही खर्च कर रहा है या नहीं.   

रेरा कानून व रियल इस्टेट बिल ग्राहक के लिए फायदेमंद (Real Estate Bill 2016 or RERA act Benefits For Customer)

यह कानून ग्राहकों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है. खास कर उन ग्राहकों के लिए जिन्होंने अपने घर के लिए पैसों का भुगतान तो कर दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें घर की प्राप्ति बिल्डरों के द्वारा नहीं कराई गयी है. इस कानून के अनुसार अगर बिल्डिंग में किसी भी तरह का संरचनात्मक दोष या बिल्डिंग निर्माण के गुणवता में दोष दिखता है, तो उसे ठीक कराने की जिम्मेदारी बिल्डर की होगी, वह भवन या बिल्डिंग के लिए ग्राहकों को पांच साल की वारंटी प्रदान करेगा. रेरा को चुकि बिल्डरों को परियाजनाओं को बेचने से पहले सभी तरह की जानकारी देनी होती है और आवश्यक मंजूरी लेनी होती है, जिस वजह से किसी भी तरह के धोखे को रोकने में सफलता मिलेगी.   

  • अब रियल इस्टेट बिल के पास होने के बाद, यदि इसके किसी ग्राहक को अपने किसी प्रोजेक्ट को लेकर या अपने बिल्डर से कोई शिकायत है, तो वह अपने केस की सुनवाई के लिए कस्टमर कोर्ट या सिविल कोर्ट की शरण मे जा सकता है. यदि किसी ग्राहक को बताए गयी गुणवत्ता की चीज नही दी जा रही या समय सीमा पर उसकी चीज नहीं दी जाती है, तो वह उसकी शिकायत भी कर सकता है.
  • इस रियल इस्टेट बिल के पास होने के बाद हर 500 स्क्वेयर फीट या इससे ज्यादा बड़े एरिया मे बने प्रोजेक्ट या 8 फ्लेट या इससे ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है. इसका एकमात्र उद्देश्य प्रोजेक्ट को पारदर्शिता देना है और यदि कोई बिल्डर यह करने मे असफल होता है, तो उसे प्रोजेक्ट की 10 प्रतिशत राशि पेनाल्टी स्वरूप देनी होगी और उसे जेल भी हो सकती है.
  • बिल्डर की ग्राहको से कलेक्ट की गयी राशि का 70 प्रतिशत अलग अकाउंट मे रखना होगा, जिसे वह निर्माण मे उपयोग करेगा. इसके द्वारा बिल्डर ग्राहको की राशि का उपयोग किसी अन्य प्रोजेक्ट मे लाभ कमाने मे नहीं कर पाएगा और ग्राहक को उसका घर टाइम पर मिलेगा।
  • इस बिल के पास होने के पश्चात घरो की कीमत स्टेबल होगी. इस बिल के पास होने के पश्चात इस क्षेत्र मे विभिन्न योजनाए लागू होगी. जिससे कई लोग इस क्षेत्र मे इनवेस्टमेंट के लिए आगे आएंगे और ग्राहको को ज्यादा चॉइस मिलेगी और कीमत भी स्टेबल होंगी.
  • इस बिल के अनुसार इस बात का ध्यान रखा जाएगा, कि ग्राहक अपना घर समय पर पा सके। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहक को उसकी प्रॉपर्टि तय समय पर और दिये गए निर्देशों के अनुरूप उपलब्ध करवाना है.
  • इस बिल मे कार्पेट एरिया स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है जिसमे किचिन और बाथरूम का एरिया भी तय जग़ह से कम नहीं हो सकता.
  • अगर प्रॉपर्टि मे 5 वर्ष के अंदर कोई स्ट्रक्चर डिफेक्ट आता है, तो इसे सही करने की ज़िम्मेदारी डेव्लपर की होगी. जिसका समय पहले 2 वर्ष था.
  • अपनी किसी भी समस्या का रजिस्ट्रेशन ग्राहक अब 90 दिनो तक कर सकता है, जबकि पहले यह समय 60 दिन था.
  • अब नियत अधिकारी को दी गयी एप्लिकेशन की सुनवाई 60 दिनो मे करनी होगी, जबकि पहले इसके लिए कोई समय सीमा ही नहीं थी.

बिल्डर के लिए रियल इस्टेट बिल व रेरा कानून के फायदे  (Real Estate Bill 2016 or RERA act benefits For Builders):

शहरी आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि यह कानून बिल्डरों के लिए भी फायदेमंद है, बिल्डरों में इस कानून के प्रति भय नहीं होना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा रेरा के आने से परियोजनाओं में पारदर्शिता की वजह से बिल्डरों को अधिक ग्राहक मिलेंगे जिस वजह से बाजार बढ़ेगा. इस कानून के तहत बिल्डर और ग्राहक दोनों को ही फायदा होगा. लेकिन साथ ही यह उन बिल्डरों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, जिन्होंने वादा कर के भी परियोजनाओं को अब तक पूरा नहीं किया है.

यह बिल केवल ग्राहको के लिए नहीं है, रियल इस्टेट बिल के कुछ फायदे बिल्डर के लिए भी है अगर बिल्डर को अपने किसी प्रोजेक्ट मे कोई समस्या है, तो वह भी नियत अधिकारी को शिकायत कर सकता है. यदि कोई ग्राहक तय समय पर पैसे नहीं दे पता, तो उसे भी पेनल्टी स्वरूप ज्यादा राशि देनी होगी.

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स्नेहा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि हिंदी भाषा मे है| यह दीपावली के लिए कई विषयों मे लिखती है|
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