ताज़ा खबर

अंगार संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि महत्व | Angarika Sankashti Chaturthi Vrat pooja vidhi mahatv in hindi

Angarika Sankashti Chaturthi vrat pooja vidhi mahatv in hindi माता पार्वती के पुत्र गणपति को पूरी दुनिया में प्रथम पूजनीय का दर्जा प्राप्त है. कोई भी शुभ कार्य के लिए सबसे पहले गणेश जी की ही आराधना की जाती है. गणेश जी संकटमोचन, विघ्नहर्ता है. कहते है कोई भी परेशानी, तकलीफ, संकट में इनकी आराधना करने से परेशानियों का अंत हो जाता है. गणेश जी का व्रत बहुत फलदायी होता है, ये हर चतुर्थी को रखा जाता है. हिन्दू पंचाग के अनुसार हर महीने में 2 चतुर्थी आती है – विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी.

संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि महत्व

Angarika Sankashti Chaturthi vrat pooja vidhi mahatv in hindi

हर महीने के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन विनायक चतुर्थी आती है, एवं हर महीने के कृष्ण पक्ष के चौथे दिन संकष्टी चतुर्थी आती है. संकष्टी चतुर्थी का व्रत भारत में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पश्चिमी व दक्षिणी भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है. संकष्टी चतुर्थी को संकट चौथ, संकटहरा चतुर्थी और गणेश संकष्टी चौथ भी कहते है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत 2017  तारीख  व समय (Sankashti chaturthi Vrat 2017 dates with Moonrise timings)

दिनांक महिना दिन चतुर्थी चाँद निकलने का समय
15 जनवरी रविवार संकष्टी चतुर्थी 20:52
14 फ़रवरी मंगलवार अंगारकी चतुर्थी 21:26
16 मार्च गुरुवार संकष्टी चतुर्थी 21:54
14 अप्रैल शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी 21:31
14 मई रविवार संकष्टी चतुर्थी 21:57
13 जून मंगलवार अंगारकी चतुर्थी 22:12
12 जुलाई बुधवार संकष्टी चतुर्थी 21:34
11 अगस्त शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी (बहुला चौथ) 21:29
9 सितम्बर शनिवार संकष्टी चतुर्थी 20:46
8 अक्टूबर रविवार संकष्टी चतुर्थी 20:09
7 नवम्बर मंगलवार अंगारकी चतुर्थी 20:39
6 दिसम्बर बुधवार संकष्टी चतुर्थी 20:27

कब मनाई जाती है संकष्टी चतुर्थी ?

वैसे कुछ लोग हर महीने की संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते है, लेकिन हिन्दू मान्यता के अनुसार भादों माह की संकष्टी चतुर्थी का बहुत महत्व है. क्योकि भादों माह की आने वाली संकष्टी चतुर्थी को बहुला चौथ कहा जाता है जिसका हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. बहुला चौथ व्रत पूजा विधि एवं कथा यहाँ पढ़ें. साथ ही भादों माह में आने वाली विनायक चतुर्थी देश भर में गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जिसे गणेश चतुर्थी भी कहते है.

संकष्टी चतुर्थी महत्त्व (Sankashti Chaturthi vrat Mahatv) 

संकष्टी नाम से ही पता चलता है, इसका मतलब है संकट हरने वाली. इस व्रत के रहने से किसी भी तरह की परेशानी दूर होती है, जीवन में सुख शांति आती है. इस व्रत को कोई भी गणेश जी का विश्वासी रख सकता है. इस व्रत को रखने वाले को अच्छी बुद्धि, जीवन में सुख सुविधा मिलती है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि (Sankashti Chaturthi vrat  pooja vidhi)

  • सूर्योदय के पहले उठकर स्नान कर लें. इस दिन पूरा दिन का उपवास रखा जाता है, शाम की पूजा के बाद भोजन ग्रहण करते है.
  • स्नान के बाद गणेश जी की पूजा आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें.
  • पूरा दिन बिना पानी व खाने के उपास रखा जाता है, जो ये कठिन उपवास नहीं कर सकते हैं, वे दिन में साबूदाना, आलू मूंगफली, मिठाई खा सकते है.
  • शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चंद्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचाग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें.
  • शाम की पूजा के लिए गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति बनायें. गणेश जी के बाजु में दुर्गा जी की भी फोटो रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है.
  • इसे धुप, दीप, अगरबत्ती, फूल से सजाएँ. प्रसाद में केला, नारियल रखें.
  • साथ ही गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें. इस दिन गुड़ व तिली के मोदक बनाये जाते है.
  • गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें.
  • कथा सुने.
  • आरती करके, प्राथना करें.
  • इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें उसे जल अर्पण कर, फूल, चन्दन चढ़ाएं. चन्द्रमा की दिशा में चावल चढ़ाएं.
  • पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है|
  • गरीबों को दान भी किया जाता है|

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Sankashti Chaturthi vrat katha)

शिव पार्वती एक बार नदी किनारे बैठे हुए थे. पार्वती को चोपड़ खेलने का मन किया, उस समय उन दोनों के अलावा वहां कोई नहीं था, तो खेल में हार जीत का फैसला कौन करेगा यह सोच कर, पार्वती ने मिट्टी, घास से एक मूरत बनाई और उसमें जान फूंक दी. उन्होंने उस बालक से बोला कि तुम खेल का फैसला करना. खेल शुरू हुआ 3-4 बार खेलने के बाद हर बार जीत पार्वती की हुई, लेकिन भूलवश बालक ने शिव का नाम ले लिया. पार्वती जी क्रोधित होकर उसे लंगड़ा बना देती है. बालक उनसे माफ़ी मांगता है, और उपाय पूछता है. ममतामयी माता पार्वती उसे बताती है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन यहाँ कुछ कन्यायें गणेश की पूजा करने आती है, तुम उनसे व्रत की पूजा विधि पूछना और इस व्रत को श्रद्धापूर्वक रखना.

कुछ समय बाद संकष्टी व्रत के दिन वहां कन्यायें आती है, जिनसे वो बालक व्रत की विधि पूछकर व्रत रखता है. व्रत के कुछ समय बाद गणेश जी उसे दर्शन देकर वरदान मांगने को बोलते है. बालक अपने माता पिता शिव पार्वती के पास जाने को बोलता है. गणेश जी तथास्तु बोलकर चले जाते है. बालक तुरंत शिव के पास पहुँच जाता है. उस समय पार्वती शिव से रूठकर कैलाश छोड़ कर चली जाती है. शिव उस बालक से श्राप मुक्त कैसे हुआ ये पूछते है. वो सब बताता है, तब शिव भी पार्वती को वापस बुलाने के लिए यह व्रत रखते है. कुछ समय बाद पार्वती का मन में अचानक से वापस जाने की बात आ जाती है, और वे खुद वापस कैलाश आ जाती है. इस तरह ये कथा ये बताती है कि गणेश व्रत किस तरह हमारी मनोकामना पूरी होती है और सारे संकट दूर होते है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत उपवास खाना (Sankashti Chaturthi vrat fasting food) 

संकष्टी व्रत में अन्न नहीं खाया जाता है, इस व्रत में दिन में फल, जूस, मिठाई बस खाया जाता है. शाम को पूजा के बाद फलाहार जिसमें साबूदाना खिचड़ी, राजगिरा का हलवा, आलू मूंगफली, सिंघाड़े के आटे का समान खा सकते है. व्रत वाले खाने को सेंधा नमक में बनाया जाता है| व्रत में मिट्टी के अंदर, जड़ वाली सब्जी खा सकते है.

गणेश जी को मनाना बहुत आसान होता है, वे बहुत सीधे और जल्दी प्रसन्न होने वाले भगवन है. गणेश जी बुद्धि के भी देवता है, उन्हें अत्याधिक ज्ञान था. पढाई करने वाले बच्चे का गणेश जी की आराधना करने से अच्छी बुद्धि मिलती है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान इन मंत्रो का उच्चारण करें

Sankashti Chaturthi

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी (Angarki sankashti chaturthi)

अगर संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन आती है, तो इसे बहुत मान्यता दी जाती है, इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहते है. सभी संकष्टी चतुर्थी में इसे विशेष महत्त्व दिया जाता है. इस दिन का मराठी संस्कृति के अनुयायियों के लिए बहुत महत्व है, और इस त्यौहार का जश्न विशेष रूप से भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में प्रसिद्ध है. महाराष्ट्र में, अंगारकी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी के मंदिर में विशेष व्यवस्था की जाती है. ‘अंगारकी’ संस्कृत मूल का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है.’जला हुआ कोयला जैसे लाल’. हिन्दू भक्तों का ढृढ़ विश्वास है कि भगवान् गणेश की पूजा करके और उनके लिए उपवास रखकर उन्हें अपनी सारी इच्छाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी.

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2017 में कब है (Angarki sankashti chaturthi 2017 Date)

इस साल अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 14 फरवरी, 13 जून और 7 नवंबर 2017 को है. जिनमे से माघ माह की अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का बहुत महत्व है. जोकि 14 फरवरी 2017 को थी. 

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Angarika sankashti chaturthi puja vidhi)

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि की तरह ही है. यह मंगलवार के दिन पड़ने की वजह से इसका बहुत महत्व है.

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Angarki sankashti chaturthi story)

हिन्दू पौराणिक एक कथा के अनुसार, ऋषि भारद्वाज और माता पृथ्वी का एक पुत्र अंगारक एक महान ऋषि और भगवान् गणेश के परम भक्त थे. उन्होंने भगवान् गणेश की पूजा की और उनसे आशीर्वाद माँगा. माघ कृष्ण चतुर्थी (मंगलवार का दिन) पर, भगवान् गणेश जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उन्होंने उनसे वरदान मांगने को कहा. उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की कि उनका नाम हमेशा के लिए भगवान् गणेश के नाम के साथ जुड़ जाये. भगवान् गणेश ने उन्हें तथास्तु कह कर उनकी इच्छा पूरी करते हुए कहा कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी में से मंगलवार के दिन पड़ने वाली चतुर्थी अंगारकी चतुर्थी के नाम से जानी जाएगी. और इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत रखता है और गणेश जी पूजा कर जो भी प्रार्थना करता है वह पूरी हो जाएगी. इसलिए हर महीने की संकष्टी चतुर्थी में से मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी अंगारकी चतुर्थी कहलाती है.

अंगार की संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Angarika sankashti chaturthi importance)

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के महत्व और अनुष्ठान का ‘गणेश पूरण’ और ‘स्मृति कौस्तूभ’ जैसे धर्मिक ग्रंथों में उल्लेख किया गया है. गणेश जी के भक्तों में इस दिन का महत्व खुशहाल और समृद्ध जीवन, और गणेश जी के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत अधिक है. हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान् गणेश को सभी बाधाओं को दूर करने के लिए बुद्धिमत्ता और सर्वोच्च स्थान पर माना जाता है. इस प्रकार भगवान गणेश की पूजा करने से लोगों को बाधाओं को दूर करने और उनके जीवन में समस्याओं को कं करने में मदद मिलेगी. अंगारकी चतुर्थी छः माह में एक बार आती है और इसे बेहद उत्साह और समर्पण के साथ मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस अंगारकी चतुर्थी का व्रत रखते है उन्हें पूरे वर्ष की संकष्टी चतुर्थी का लाभ प्राप्त हो जाता है.  

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रत (Angarika sankashti chaturthi vrat) 

भक्त भगवान गणेश को खुश करने के लिए सुबह से दिन के अंत तक उपवास रखते है. उपवास सूर्योदय  से शुरू होकर शाम को चाँद देखने के बाद समाप्त होता है. पूरे दिन बिना भोजन का एक भी अनाज का दाना खाए व्यतीत करना पड़ता है. किन्तु कुछ लोग आंशिक रूप से भी उपवास रखते है जिसमे फल व साबूदाना खिचड़ी शामिल हो सकती है. उपवास के समय शराब, तम्बाकू और इस तरह की हानिकारक चीजों का सेवन वर्जित होता है. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत चाँद को देखने और गणेश पूजा के बाद समाप्त होता है. भक्त भी गणेश जी के लिए ‘आर्ग्य’ प्रदान करते है और फिर शुद्ध शाकाहारी भोजन कर अपना उपवास तोड़ते हैं. इस तरह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. नवरात्रि नाश्ता उपवास व्यंजन रेसिपी यहाँ पढ़ें.    

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी मनाने का तरीका (Angarika sankashti chaturthi celebration)

इस दिन भगवान गणेश को समर्पित वैदिक मंत्र का जिक्र किया जाता है. इस दिन चाँद की रौशनी पड़ने से पहले ‘गणपति अथर्वाशेष’ को पढ़ना बहुत फायदेमंद होता है. इस दिन भगवान गणेश की प्रशंसा में भजन और धार्मिक भजन भी गए जाते है. आज के दिन भक्त चंद्र देवता की चंदन के पेस्ट, चांवल और फूलों के साथ पूजा करते हैं. अंगारकी शब्द का अर्थ ‘कोयले की लाल या जलती हुई अंगूठी’ भी होता है इसलिए लाल रंग मंगलवार से जुड़ा होता है. इसलिए भक्त इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनते हैं. चूंकि भगवान गणेश बाधाओं को दूर करते हैं. वह लोगों की प्रार्थनाओं के पहले प्राप्तकर्ता हैं. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर पूर्ण समर्पण के साथ भगवान् गणेश की प्रार्थना कर, कई सपनों और अधूरी इच्छाओं को साकार करने में मदद मिलती है. इस तरह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है.

अन्य व्रत त्यौहार के बारे में पढ़े:

Vibhuti
Follow me

Vibhuti

विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
Vibhuti
Follow me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *