नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने दी अपने पिता को जीवन की सीख

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने दी अपने पिता को जीवन की सीख

बंगाल में महामारी फ़ैल गई थी जिससे कई घर तबाह हो गए थे | कई लोग मर गए थे | पूरा जीवन अस्त व्यस्त हो गया था | उस वक्त नेताजी सुभाषचंद्र बोस अपना ग्रेजुएशन कर रहे थे | उस वक्त कई लोगो की जरुरत थी जो उन मरीजों की सेवा करे | नेताजी ने भी स्वयंसेवकों के साथ मिलकर गाँव में सेवा का काम किया | इस काम में नेताजी पुरे वक्त लगे रहते कई- कई दिन तक सोते भी नहीं थे |

subhash chand bose

एक दिन सुभाषचन्द्र बोस घर रात सोने आये पिता ने अपने बेटे के सर पर हाथ फेरते हुए कहा कि बेटा कभी कभी आराम भी कर लिया करों | इसके जवाब में नेताजी ने कहा पिताजी ! आराम करने के लिए जीवन पड़ा हैं अभी गाँव के लोगो को मेरी जरुरत हैं | कई परिवार के मुखिया मर चुके हैं | कई परिवार के बच्चे राहत की आस लगाये हमें देख रहे हैं मुझसे उनकी यह तकलीफ देखी नहीं जाती | इस पर पिता ने कहा – बेटा मैं तुमसे सहमत हूँ पर मैंने माँ दुर्गा की पूजा रखी हैं जिसमे तुम्हारा आना जरुरी हैं  | इस बात पर नेताजी ने अपने पिता से क्षमा मांगते हुए कहा – पिताजी पूजा और हवन आप कीजिये | मैं दीन दुखियों की सेवा करूँगा और मुझे माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिल जायेगा क्यूंकि मानवसेवा ही सबसे बड़ा धर्म हैं | बेटे के इस कथन ने पिता का सीना गर्व से भर दिया | और उन्होंने सुभाषचंद्र जी को अपने गले से लगाकर कहा – बेटा ! तुम सच्चा कर्म कर रहे हो और तुम्हे इसका पूण्य मिलेगा |

इस दिन से नेताजी के पिता ने भी बेटे के साथ मिलकर गाँव की सेवा की |

Moral :

जीवन में धर्म से बड़कर इंसानियत हैं | मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म हैं | आज के समय हैं इस नीति को समझने की जरुरत हैं | देश हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई में इंसानियत को भूलता जा रहा हैं |

यह जीवन में बहुत मायने रखती हैं | कई बार बड़ी से बड़ी डिग्री भी ज्ञान नहीं देती और एक छोटी सी कहानी जीवन बदल देती हैं | शिक्षाप्रद कहानी को आधार बनाकर अपने बच्चो को जीवन का सच्चा ज्ञान दे |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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