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भारत में सामान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) क्या है | What is Uniform Civil Code in India in hindi

भारत में समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) क्या है | What is Uniform Civil Code in India in hindi

देश में पिछले कुछ समय से एक नए क़ानून के अविर्भाव की बात चल रही है, जिसे यूनिफार्म सिविल कोड कहा जा रहा है. हालाँकि ऐसा पहली बार नहीं है कि यूनिफार्म सिविल कोड की बात हो रही है, देश में आज़ादी के बार कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है. यूनिफार्म सिविल कोड का सबसे पहला ज़िक्र भारत में ब्रिटिश राज के समय आया था. जिस समय अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत सभी स्थानीय सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं की दोष-निवृत्ति करना चाहते थे. यह सन 1840 का समय था. इसके उपरान्त स्वतंत्र भारत में शाह बानो केस के साथ यह मुद्दा एक बार फिर आया था, जोकि आज तक बहस का कारण बना हुआ है. यहाँ पर इससे सम्बंधित विशेष जानकारियों का उल्लेख किया जाएगा.

शाहबानो केस (Shah Bano Case)

शाहबानो केस का स्वतंत्र भारत में यूनिफार्म सिविल कोड की मांग के साथ सीधा सम्बन्ध है. सन 1978 में इंदौर की इस मुस्लिम महिला को इसके पति ने तलाक़ दे दिया था. तलाक़ के समय इस मुस्लिम महिला की आयु 62 वर्ष की थी. पांच बच्चों की इस बुज़ुर्ग माँ का जीवन यापन का कोई भी सहारा नहीं था. अतः अपना गुजारा भत्ता पाने के लिये यह महिला सुप्रीमकोर्ट गयी. इसके बाद इन्हें एक लम्बी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. सन 1985 में इस केस पर सुप्रीमकोर्ट का फैसला मुस्लिम महिला के हक़ में आया. इसी केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट में यूनिफार्म सिविल कोड का ज़िक्र आया था और कोर्ट ने कहा था कि देश भर में यूनिफार्म सिविल कोड लागू होनी चाहिए. हालाँकि सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले का आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ ने विरोध किया और अपना मुस्लिम वोट बैंक बचाने के लिए देश की तात्कालिक कांग्रेसी सरकार के प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी ने एक नया अधिनियम पारित किया, जिस वजह से केस जीतने के बावजूद भी शाहबानो को उसका हक़ नहीं मिल सका. इस घटना से देश भर के मुस्लिम महिलाओं की स्थिति पर कई सवाल खड़े हुए थे.

uniform civil code

 

यूनिफार्म सिविल कोड क्या है (What is Uniform Civil Code in hindi)

यूनिफार्म सिविल कोड नियमों का एक सेट है, जिसका अर्थ इसके नाम से ही मिलता है. इसका अर्थ है कि देश भर के सभी नागरिकों को, चाहे वह किसी भी धर्म अथवा समुदाय का हो, सबके लिए एक जैसा ही क़ानून रहेगा. इसके अन्तर्गत देश के विभिन्न धर्मों में आने वाले धर्म सम्बंधित नियम आ जाते हैं. यह एक तरह का धर्म अथवा पंथ निरपेक्ष क़ानून है, जिस पर किसी धर्म विशेष का प्रभाव नहीं होता है. यूनिफार्म सिविल कोड सभी तरह के धर्म सम्बंधित पर्सनल लॉ को समाप्त करता है. हालाँकि इस कोड का भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार तथा सेकुलरिज्म में एक बड़ी भूमिका होने के बावजूद भी यह सन 1985 में शाहबानो केस के साथ विवादों के घेरे में आ गया. यूनिफार्म सिविल कोड की वजह से मुस्लिम पर्सनल लॉ पर आज तक डिबेट हो रहे हैं. किन्तु यह एक ऐसा क़ानून है जो किसी देश में रहने वाले सभी धर्म और जातिगत सम्बंधित कानूनों से ऊपर होता है.

भारतीय संविधान में यूनिफार्म सिविल कोड का ज़िक्र (Uniform Civil Code in Indian Constitution)

भारतीय संविधान में भी इसका ज़िक्र किया गया है. इसका वर्णन संविधान के 44 वें आर्टिकल में आता है, जिसमे इसका ज़िक्र करते हुए लिखा गया है कि सरकार इस बात का प्रयत्न करेगी कि देश भर में समान नागरिकता के लिए सरकार यूनिफार्म सिविल कोड लाने की कोशिश करगी.

यूनिफार्म सिविल कोड की पहली मांग (Uniform Civil Code First Demand)

भारत की स्वतंत्रता के बाद डॉ भीमराव आंबेडकर और पंडित जवाहर लाल नेहरु ने हिन्दुओं के लिये हिन्दू कोड बिल लाने का मुद्दा उठाया था, जिसका विरोध किया गया और यह सवाल उठाया गया कि केवल एक धर्म के लिए विशेष क़ानून लाना कहाँ तक सही है. इसके स्थान पर एक ऐसे क़ानून लाने की बात कही गयी, जो कि सभी धर्मों के लिए एक जैसा हो और जिसके अन्दर सभी धर्मों के पर्सनल लॉ का विलय हो सके.

यूनिफार्म सिविल कोड क्या करेगा (Uniform Civil Code What will do)

देश के कई छोटे बड़े सिविल राईट दल लगातार सरकार से इस बात की माँग करते रहे हैं कि देश भर में यूनिफार्म सिविल कोड जारी किया जाए, ताकि धार्मिक रुढ़िवादीता की वजह से कई दबी कुचली जिंदगियों को इन्साफ मिल सके. यह मुद्दा कई धर्मों में लगातार विवाद का कारण रहा है, क्योंकि इसके ज़रिये धर्म सम्बंधित रुढ़िवादी विचारधाराओं पर रोक लगेगी. इस क़ानून के आने से निम्नलिखित मुद्दों पर इसका सीधा असर पड़ेगा :

  • इसके लागू होने से हर मजहब के लिए एक जैसा क़ानून जाएगा तथा धार्मिक पर्सनल लॉ की अहमियत समाप्त हो जायेगी.
  • इसके आने से बहुविवाह, तीन तलाक़ जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगेगी तथा मुस्लिमों को तीन तीन शादियाँ करने और महज तीन बार तलाक़ कह कर तलाक़ लेने की आज़ादी समाप्त हो जायेगी. ग़ौरतलब है कि इस समय देश के सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ पर फैसला देते हुए इसे असंवैधानिक बताया है.
  • इस कोड के लागू होने से महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति पर अपने भाइयों की ही तरह अधिकार प्राप्त होगा और बच्चों के गोद लेने जैसे मुद्दों पर भी एक तरह के नियम लागू होंगे.
  • यूनिफार्म सिविल कोड की बात जब भी लोगों के बीच आई है और यह एक मुद्दा बन कर उभरा है, इसके विरोधियों ने इसका विरोध करते हुए यह कहा है कि यह कोड सभी धर्मों पर हिन्दू धर्म लागू करने जैसा है.
  • ध्यान देने वाली बात है कि जिस देश में सभी नागरिकों के लिए एक तरह का कनून हो और वह धर्म से ऊपर हो, तो उस देश का विकास नियमित रूप से लगातार होता रहता हैं.

यूनिफार्म सिविल कोड की विशेषताएं (Features of Uniform Civil Code)

यूनिफार्म सिविल कोड की बातें पूरी तरह से निष्पक्ष और समानता पर आधारित है, जिसका वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • यूनिफार्म सिविल कोड सामाजिक परिवर्तन का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण अंश है जिसका सर्वप्रथम उद्देश्य देश के सभी नागरिकों में समानता और एकरूपता स्थापित करना है. विश्व के कई देशों में इसे लागू कर दिया गया है.
  • यह पूरी तरह से निष्पक्ष क़ानून है, जो कि पूरी तरह से धर्म निरपेक्ष है.
  • तात्कालिक समय में विभिन्न धर्मों के नियम कानूनों की वजह से कई तरह के केस पर फैसला देने हुए न्यायपालिका पर इन धार्मिक नियमों का बोझ पड़ता है, अतः इस कोड के देश भर में लागू होने से न्यायपालिका को अपना काम और तेज़ी से करने का मौक़ा मिलेगा तथा एक लम्बे समय से अटके कई केस पर फैसला आ सकेगा.
  • सभी धर्मों के लोगों के लिए एक तरह का क़ानून आने से देश की एकता और अखंडता को बढ़ावा मिलेगा तथा देश कानूनी रूप से और भी अधिक सबल हो सकेगा.
  • इस तरह से एक नए समाज के लिए यूनिफार्म सिविल कोड जैसे क़ानून का आना अनिवार्य है.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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