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वानर राज बाली की कहानी | Vanar Raja Bali Story In Hindi

Vanar Raja Bali Vadh Story Hisory In Hindi महाबली बाली, हिन्दू पौराणिक कथा रामायण के एक पात्र थे, जोकि किष्किन्धा के वानर राज थे. उस समय भगवान विष्णु ने पृथ्वी को लंकापति रावण के आतंक से मुक्त कराने के लिए श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया था. जब लंकापति रावण सीता का हरण कर लंका ले गया था, तब भगवान श्रीराम उनकी तलाश में दर – दर भटक रहे थे. तभी उनकी मुलाकात पवन पुत्र हनुमानजी से हुई. हनुमानजी ने भगवान श्रीराम की सुग्रीव से मित्रता करवाई, जोकि महाबली बाली के छोटे भाई थे. वे दोनों एक जैसे ही दिखते थे. महाबली बाली ने सुग्रीव के राज्य और उनकी पत्नी को छीन लिया था, जिस वजह से भगवान श्रीराम ने महाबली बाली का वध किया. 

Vanar Raj Bali

वानर राज बाली की कहानी 

Vanar Raja Bali Story In Hindi

महाबली बाली का परिचय निम्न सूची के आधार पर दर्शाया गया है-

क्र.म.       परिचय बिंदु             परिचय
1. नाम बाली
2. पिता वनाराश्रेष्ठ “रीक्ष”
3. धर्म पिता देवराज इंद्र
4. पत्नी तारा
5. पुत्र अंगद
6. भाई सुग्रीव
7. शासन राज्य किष्किन्धा
8. विशेषता इसके पास 100 हाथी के बराबर बल था.
9. जीत दुंदुभी, मायावी का वध और लंकापति रावण को पराजित किया.
10. मृत्यु भगवान श्रीराम के द्वारा बाली का वध किया गया

बाली के सम्पूर्ण जीवन के बारे में निम्न आधार पर बताया गया है-

  • बाली का जन्म
  • बाली का विवाह
  • बाली का बल
  • बाली की सुग्रीव से लड़ाई
  • राम और सुग्रीव की मित्रता
  • बाली का वध
  • बाली के वध के बाद का संवाद
  • बाली का जन्म ( Vanar Raja Bali Birth)

बाली, किष्किन्धा के राजा और वानराश्रेष्ठ “महाराज रीक्ष” के पुत्र थे, किन्तु ऐसा कहा जाता है कि महाबली बाली देवताओं के राजा इंद्र के पुत्र थे. बाली और सुग्रीव के जन्म की बहुत ही दिलचस्प कहानी है. एक सुमेरु नाम का पर्वत था जोकि ब्रम्हा जी का कोर्ट था और यह 100 योजन तक के विस्तृत एरिया में फैला हुआ था. एक बार ब्रम्हा जी वहाँ तपस्या कर रहे थे, और उनकी आँख से 2 बूँद आँसू की गिर रही थी. ब्रम्हा जी अपनी तपस्या में लीन थे. ब्रम्हा जी ने उसे अपने हाथ में लिया और पोंछ दिया. उसी समय एक बूँद धरती पर गिरी जिससे एक वानर का जन्म हुआ. तब उन्होंने वानर से कहा- “तुम इस पहाड़ की चोटी पर रहोगे. कुछ समय बाद यह तुम्हारे लिए अच्छा होगा.” वह वहाँ रहने लगा, और रोज ब्रम्हा जी को पुष्प अर्पित करता रहा.

बहुत दिन बीत गए, फिर एक दिन रीक्ष राज वहाँ से गुजरे, उन्हें बहुत तेज प्यास लगी थी. वे तालाब में झुक कर पानी पीने लगे तभी उन्हें वहाँ एक परछाई दिखाई दी. उन्हें लगा उनका कोई दुश्मन है जो उन्हें मारने वाला है. वे तालाब में कूद गए. लेकिन जब वे बाहर निकले तब वे एक खूबसूरत युवती के रूप में बदल गए. उसी वक्त इंद्र और सूर्यदेव वहाँ से गुजर रहे थे, तब उनकी नजर उस सुंदर युवती पर पड़ी. दोनों उस पर मोहित हो गए. उस समय इंद्र की मनी उस युवती के सिर पर जा गिरी, जिससे एक वानर का जन्म हुआ. क्यूकि उस वानर का जन्म उस युवती के बालों से हुआ था इसलिए उसका नाम बाली पड़ा. जबकि सूर्य की मनी उस युवती के गले पर जा गिरी, जिस कारण एक और वानर का जन्म हुआ जोकि सुग्रीव था. इसलिए वे दोनों एक जैसे दिखते हैं.

इंद्रा ने बाली को एक सोने का हार दिया, जबकि सूर्य ने सुग्रीव को हनुमान के रूप में एक सच्चा मित्र और रक्षक दिया. इसके बाद वह युवती फिर से रीक्ष राज में बदल गई. इसलिए वे बाली और सुग्रीव दोनों की माँ और मोरल पिता दोनों हैं. रीक्ष राज ब्रम्हा जी के पास गए और उन्होंने उन्हें किष्किन्धा जाने को कहा. वहाँ जाकर रीक्ष राज ने अपने बड़े बेटे बाली को वहाँ का राजा बना दिया. कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई.

  • बाली का विवाह

बाली का विवाह वानर वैद्यराज की पुत्री तारा के साथ हुआ. एक कथा में ऐसा कहा गया है कि जब समुद्र मंथन हुआ था, तब उसमें 14 मणियों में से कुछ अप्सरा भी थीं. उन्हीं अप्सराओं में से एक थी तारा, जिस पर बाली और सुषेण दोनों मोहित हुए. वे दोनों समुद्र मंथन में देवताओं का साथ दे रहे थे. बाली तारा के दाएँ ओर तथा सुषेण तारा के बाएँ ओर थे. तब भगवान विष्णु ने कहा कि विवाह के समय कन्या के दाएँ ओर पति और बाएँ ओर कन्यादान करने वाला यानि पिता होता है. जिस वजह से बाली तारा के पति और सुषेण तारा के पिता बन गए.

  • बाली का बल

महाबली बाली के पास 100 हाथियों के बराबर बल था, वह बहुत ही शक्तिशाली था. ऐसा कोई भी योद्धा नहीं था, जिसको उसने युद्ध में परास्त ना किया हो. ऐसा कहा गया है कि देवराज इंद्र ने बाली को एक हार दिया था, जिसे ब्रम्हा जी ने मंत्र्मुक्त कर उसे वरदान दिया कि – जब भी वह इसे पहन कर युद्ध में जायेगा तो उसके शत्रु की आधी शक्ति उससे छिन कर बाली को प्राप्त हो जाएगी. जिसके कारण वह और अधिक बलशाली हो गया. उसके पास इतना बल था कि एक बार बाली ने लंकापति रावण को भी अपनी काँख में दबा कर पूरी पृथ्वी में घुमाया था. रावण बाली को मारने के लिए संध्या के समय अपने पुष्पक विमान पर बैठ कर गया. उस समय बाली संध्यावंदन कर रहा था. रावण उसके पीछे से वार करने के उद्देश्य से गया, तभी बाली ने रावण को अपनी ओर आते देख उसे अपनी काँख में दबा लिया और सारी पृथ्वी में उसे घुमाया. रावण, बाली के बल से डर गया और उससे मित्रता करने के लिए हाथ बढ़ाया. बाली ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.

एक असुर स्त्री माया के दो पुत्र मायावी और दुंदुभी थे. एक बार दुंदुभी ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा. बाली किसी की भी युद्ध की ललकार सुनकर युद्ध करने चल पड़ता था, उसने तब भी यही किया. बाली ने दुंदुभी को बड़ी ही सरलता से मार दिया, और उसे घुमा कर हवा में उछाल दिया. जिससे उसके रक्त की कुछ बूंदे ऋष्यमूक पर्वत पर विराजमान ऋषि मतड्ग के आश्रम पर पड़ी. जिसके कारण ऋषि मतड्ग ने बाली को श्राप दिया कि जब वह इस पर्वत पर या इस पर्वत के दायरे पर भी प्रवेश करेगा तब उसकी मृत्यु हो जाएगी. बाली बड़ी – बड़ी पहाड़ियों को ऐसा उछालता था मानो वे गेंद हों.

इस तरह महाबली बाली के बल की चर्चाएँ आज भी प्रसिद्ध है.

  • महाबली बाली की सुग्रीव से लड़ाई

देर रात को एक बार दुंदुभी के भाई मायावी ने अपने भाई की मौत का बाली से बदला लेने के लिए उसको युद्ध के लिए ललकारा. बाली ने उसे बहुत समझाया कि वापस लौट जाओ लेकिन वह नहीं माना. तब बाली और सुग्रीव दोनों उससे युद्ध के लिए चल पड़े. मायावी भी उनको आता देख जंगल की ओर भागा. भागते – भागते वह एक गुफा में जा कर छिप गया. उसके पीछे बाली भी गुफा में जाने लगा, उसने सुग्रीव को गुफा के बाहर इंतजार करने को कहा और वह गुफा के अंदर चला गया. सुग्रीव बहुत देर तक बाली का इंतजार करता रहा, फिर कुछ समय बाद गुफा के अंदर से एक आवाज आई. फिर गुफा के अंदर से खून की धारा बहती हुई दिखी. तब सुग्रीव को लगा की मायावी ने बाली का वध कर दिया उसने सोचा कि वह किसी और को नुकसान न पहुंचाए, तो सुग्रीव ने एक बड़े से पत्थर से गुफा का द्वार बंद कर दिया और वह किष्किन्धा लौट गया. बाली की मृत्यु की खबर सुनकर सभी दुखी हुए फिर उन्होंने सुग्रीव को किष्किन्धा का राजा बना दिया.

कुछ दिनों बाद बाली किष्किन्धा लौटा उसे देख कर सभी आश्चर्यचकित हो गए. बाली सुग्रीव से बहुत नाराज हुआ उसे अपने राज्य से बाहर निकाल दिया और सुग्रीव की पत्नी रोमा को अपने पास ही रख लिया. बाली सुग्रीव को मार देना चाहता था, इसलिए उसने सुग्रीव का पीछा किया किन्तु सुग्रीव बाली के डर से ऋष्यमूक पर्वत में जा कर रहने लगा. जहाँ बाली का जाना वर्जित था क्यूकि वहाँ उसकी मृत्यु हो जाती. इस तरह बाली और उसके भाई सुग्रीव के बीच शत्रुता हो गई.

  • राम और सुग्रीव की मित्रता

लंकापति रावण ने सीता का हरण कर लिया था तब श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ वन में सीता की तलाश कर रहे थे. तब उनकी मुलाकात पवन पुत्र हनुमान जी से हुई. हनुमान जी श्रीराम के बहुत बड़े भक्त थे, वे श्रीराम को सुग्रीव के पास ले गए और उनसे मित्रता करवाई. तब सुग्रीव ने अपने भाई बाली द्वारा किये गए अन्याय के बारे में श्रीराम को बताया. श्रीराम उनकी बात सुनकर बाली का वध करने के लिए तैयार हो गए. किन्तु सुग्रीव को उन पर संदेह था कि वे बाली को मार पाएंगे या नहीं. तब सुग्रीव ने श्रीराम को बाली के बल के बारे में बताया. तब श्रीराम ने कहा कि –“मै आपको कैसे खुश कर सकता हूँ”. सीता हरण की कहानी को पढने के लिए यहाँ क्लिक करें.

सुग्रीव श्रीराम को उन सात पेड़ों के पास ले गया जिसे बाली ने एक बार में ही गिराया था. सुग्रीव ने श्रीराम से कहा जो इन सात पेड़ों को एक ही बाण से भेद सकता है वही बाली का वध कर सकता है. श्रीराम ने सुग्रीव के दावे को स्वीकार किया और एक ही बाण से उन सातों पेड़ों को गिरा दिया, जिससे सुग्रीव को पूर्णतया विश्वास हो गया कि श्रीराम बाली को अवश्य मार सकते हैं. सुग्रीव ने भी माता सीता को खोजने के लिए अपने और अपनी सेना के साथ श्रीराम का साथ देने का वादा किया. इस तरह श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता हुई. राम सुग्रीव मित्रता के बारे में विस्तार के पढने के लिए यहाँ क्लिक करें.

  • बाली का वध ( Vanar Raja Bali Vadh)

श्रीराम ने सुग्रीव को बाली से युद्ध करने के लिए चुनौती देने को कहा. सुग्रीव किष्किन्धा जा कर बाली को युद्ध के लिए ललकारता है. बाली उसकी ललकार सुनकर उससे युद्ध करने जाता है तब सुग्रीव वन की ओर भाग जाता है, और श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और हनुमान के साथ छिप कर बाली को मारने की योजना बनाते है. किन्तु बाली और सुग्रीव के एक जैसे दिखने के कारण श्रीराम बाली को पहचान नहीं पाते और बाण नहीं चलाते हैं. जिससे युद्ध में सुग्रीव को काफी चोट लगती है और वह किसी तरह बाली से बचकर भाग जाता है. फिर सुग्रीव श्रीराम से कहता है कि- “आपने ऐसा क्यों किया बाली को मारा क्यों नहीं?” तब श्रीराम कहने लगे – “आप दोनों भाई एक जैसे दिखते हैं, मैं युद्ध में बाली को पहचान न सका. इस कारण उस पर बाण नहीं चलाया”. फिर श्रीराम ने सुग्रीव को एक फूलों की माला पहनाई और उन्हें फिर से बाली को युद्ध के लिए ललकारने को कहा. सुग्रीव फिर से बाली को युद्ध के लिए ललकारने लगा तब बाली ने कहा – “तुम कायर हो आज तो मैं तुम्हारा वध करके ही रहूँगा”. ऐसा कहकर दोनों के बीच युद्ध शुरू हो जाता है. श्रीराम भी अब बाली को अच्छी तरह पहचान सकते थे तब उन्होंने छिपकर बाली के ऊपर बाण चला दिया. जिससे वह धरती पर गिर गया, और वे सभी उसे देखने चल दिए.

  • बाली के वध के बाद का संवाद

बाली के ऊपर बाण चलाने के बाद श्रीराम उससे मिलने वहाँ पहुंचे. बाली ने सुग्रीव से कहा कि –“किसने मुझ पर छिप कर वार किया है?” तब श्रीराम ने बताया कि उन्होंने उस पर वार किया है. बाली ने श्रीराम से पूछा कि –“आपने ऐसा क्यों किया क्या छिपकर वार करना धर्म के खिलाफ नहीं है?” तब श्रीराम ने कहा –“ तुम्हारा छोटा भाई सुग्रीव तुम्हारे पुत्र के समान है जिसके साथ तुमने दुर्व्यवहार किया, और अपने भाई की पत्नी पर भी अधिकार कर लिया. तुमने अपने भाई सुग्रीव के ऊपर बहुत से अन्याय किये यह सब धर्म के खिलाफ है.” श्रीराम के कथन सुनकर बाली को अपने किये पर पछतावा हुआ और उन्होंने उनसे माफ़ी मांगी. श्रीराम ने बाली को वचन दिया कि द्वापरयुग में जब वे कृष्ण के रूप में अवतार लेंगे. तब वह जारा के रूप में उनकी मृत्यु का कारण बनेगा. उसी समय उसका पुत्र अंगद वहाँ आया और बाली ने उससे अपने चाचा के साथ रहने और उसकी सेवा करने को कहा. ऐसा कहकर बाली की मृत्यु हो गई.

इसके बाद श्रीराम ने सुग्रीव को किष्किन्धा का राजा बना दिया. सुग्रीव ने अपनी पत्नी रोमा को वापस पा लिया. बाली के पुत्र अंगद को किष्किन्धा का युवराज घोषित कर दिया गया. सुग्रीव और उसकी सेना ने श्रीराम की पत्नी सीता को खोजने के लिए उनका साथ दिया. वे सभी उनकी खोज के लिए लंका की ओर चल पड़े.

इस तरह श्रीराम द्वारा महाबली बाली का वध किया गया.

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