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रजिस्ट्रेशन नम्बर के माध्यम से गाड़ी के मालिक का पता कैसे करें | Use Registration number and Find vehicle owners details in hindi

How to get vehicle owners details using Registration number in hindi भारत ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में दुनिया में वाहनों के खरीद बिक्री की वजह से पाचवें स्थान पर है. किसी भी गाड़ी के मालिक का पता लगाया जा सकता है, अगर आरटीओ में गाड़ी के नम्बर का पंजीकरण हो, या अगर किसी ने आरटीओ में पंजीकरण कराया है, तो सिर्फ़ आरटीओ में पंजीकरण और वाहन संख्या को डालने से ही पंजीकृत वाहन के राज्य, जिला और क्षेत्र का भी पता चल जायेगा. मालिक और वाहन का पता लगाना अब भारत में आसान हो गया है.

vehicle owner details

वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (What is vehicle registration number)

वाहन रजिस्ट्रेशन नम्बर को हम लाइसेंस प्लेट या नंबर प्लेट के नाम से भी जानते है. भारत में सभी मोटर चालित गाड़ियों को उसके लाईसेंस संख्या के साथ टैग किया जाता है. रजिस्ट्रेशन नम्बर को आरटीओ अर्थात क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है, जिसको सड़क मामलों का मुख्य अधिकार होता है. नम्बर प्लेटो को वाहन के आगे या पीछे लगाने के लिए क़ानूनी रूप से कहा गया है. साथ ही अन्य जो निर्देश दिए गए है, उसमे नम्बर प्लेट में नंबर अरबी अंको के साथ लैटिन शब्दों में लिखा हुआ रहता है. प्लेट ऐसा होना चाहिए की रात में वो चमकता हुआ दिखे और फॉन्ट में भी आप कुछ ज्यादा बदलाव नहीं कर सकते.

वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर के वर्तमान प्रारूप (Vehicle registration number format India)  

वर्तमान में इसके प्रारूपों को चार भागों में बांटा गया है जिसमे पहले दो अक्षर उस राज्य को इंगित करते है जिसमे गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हुआ है. इसके बाद के दो अंक इसके जिलों को इंगित करते है. गाडियों के पंजीकरण की संख्या अधिक होने के कारण आरटीओ कार्यालय को भी रजिस्ट्रेशन की संख्या दी गई है. नम्बर प्लेट के तीसरे भाग के लिए 4 अंकों की संख्या दी गई रहती है. इसके बाद चौथे भाग में एक अंतराष्ट्रीय गोल साथ ही थोडा चपटा आकार का दिया हुआ रहता है जिसके ऊपर एक होलोग्राम वाला चक्र रहता है.

रजिस्ट्रेशन नम्बर के माध्यम से गाड़ी के मालिक का पता कैसे करें (How to get vehicle owners details using Registration number in hindi)

वाहन का रजिस्ट्रेशन राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर होता है. आरटीओ दोनों के बीच डाटा का आदान प्रदान करता है. वीआईएन अर्थात वाहन पहचान संख्या के आधार पर भारत में सभी निजी और व्यापारिक वाहन के नम्बर प्लेट को इस तरह से विभाजित किया गया है कि इसके नम्बर से ही गाड़ी के मालिक और उसके स्वरुप का भी पता चल जायेगा. रजिस्ट्रेशन नम्बर का अगर शुरूआती नम्बर भी याद हो और यदि गाड़ी चोरी हो जाए या गाड़ी से कोई दुर्घटना हो जाए, तो उस नम्बर के द्वारा गाड़ी के मालिक को खोजा जा सकता है. इसके लिए निम्न प्रकार दिए गये हैं-

  • ऑनलाइन वाहन के मालिक का पता लगाने की प्रक्रिया (How to get vehicle owner details through online)

ऑनलाइन माध्यम से वाहन मालिक की जानकारी के लिए अगर संभव हो, तो आप भारत सरकार के द्वारा परिवहन सेवा के माध्यम से केन्द्रीय डाटाबेस से मालिक के नाम को ट्रेस कर सकते है. किसी भी वाहन के मालिक का नाम, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नम्बर के साथ अगर वाहन के फिटनेश प्रमाण पत्र को दिया जाए, तो इसे आरटीओ के माध्यम से आसानी से ट्रेस किया जा सकता है. इसको वाहन के ट्रेस सेवा का उपयोग करके उस क्षेत्र को और उसके मालिक को खोजा जा सकता है. वाहन ट्रेस सेवा सभी प्रकार के वाहनों के लिए काम करता है. व्यापारिक वाहनों के लिए वाहन के वीआईएन के तौर पर विशिष्ट नम्बर जारी किये जाते है. सेना या रक्षा विभाग की गाडियों में रजिस्ट्रेशन नम्बर के साथ एक तीर का चिन्ह होता है, जिस वजह से इसकी पहचान सेना की गाड़ी के रूप में होती है. अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा यहाँ पढ़ें. इसके निम्न प्रक्रिया है-

  1. भारत सरकार के द्वारा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से  parivaha.gov.in ये वेवसाइट बनाई गयी है. इसके माध्यम से सारी जानकारी आपको ऑनलाइन प्राप्त हो सकती है.
  2. इसमे आपको गाड़ी ढूढने का ऑप्शन आयेगा, जिस पर क्लिक कर आप अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डाल दें.
  3. फिर आपके पास एक ओटीपी नम्बर आएगा, जिसको डालने के बाद गाड़ी की सारी जानकारी, जैसे की गाड़ी लोन पर ली गयी है या पुरे पैसा चुकता करके ली गई है, इसके साथ ही गाड़ी किस जिले की है, के साथ उसके मालिक का भी नाम आ जाएगा.
  • मोबाईल द्वारा वाहन के मालिक का पता लगाने की प्रक्रिया (How to get vehicle owner details through mobile)

मोबाइल पर भी बहुत सारी एप्प है, जिसको आप प्ले स्टोर से डाउनलोड करके इसका लाभ गाड़ी को और उसके मालिक को खोजने में उठा सकते है. कुछ एप्प का नाम इस प्रकार से है-  व्हीकल ओनर इन्फो, इन्फो व्हीकल- फाइंड एड्रेस आरटीओ इसी तरह के बहुत सारे एप्प है. इसके अलावा बहुत सारे राज्यों की भी कई तरह की वेवसाइट है, जिनके माध्यम से आप रजिस्ट्रेशन नम्बर डाल कर मालिक का पता लगा सकते है. इन्हीं में से एक वेवसाइट है मध्य प्रदेश ट्रांसपोर्ट की है. टॉप 10 मोबाइल एप्प  यहाँ पढ़ें.

  • वेबसाइट्स से वाहन के मालिक का पता लगाने की प्रक्रिया (How to get vehicle owner details through website)

इसके लिए आप https://parivahan.gov.in/parivahan/ इस वेबसाइट से वाहन के रजिस्ट्रेशन और उसके लाइसेंस का पता लगा सकते हैं. वेबसाइट बनाने का तरीका यहाँ पढ़ें.                   

  • ऑफ़लाइन वाहन के मालिक का पता लगाने की प्रक्रिया (Find vehicle owner details through offline)

इस प्रक्रिया में आपको आरटीओ ऑफिस जाना पड़ेगा और वहाँ से आपको रजिस्ट्रेशन नम्बर देकर सभी जानकारी हासिल करनी होगी, क्योकि अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में आरटीओ कार्यालयों ने कार डीलरों के पंजीकरण के माध्यम से सारे रिकॉर्ड को इकठ्ठा किया हुआ है. इस वजह से सभी डीलरों के लिए यह आसान है कि वह आरटीओ में एक आई डी और पासवर्ड डाल कर एक नंबर सीरीज डाल सकते है, और जो भी वाहन क्रेता है उनके सारे रिकॉर्ड को, वाहन और मालिक के विवरण को आरटीओ रिकॉर्ड में डाल सकते है. इस वजह से जो गाड़ी के मालिक या क्रेता है, उन्हें अपने गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नम्बर को पंजीकृत करने के लिए आरटीओ ऑफिस नहीं जाना पड़ता है, और वो इसकी परेशानी से बच जाते है.        

  • एसएमएस द्वारा वाहन के मालिक का पता लगाने की प्रक्रिया ( Use Mobile Sms and Find vehicle owners details)

परिवहन विभाग ने नवनीकरण को अपनाते हुए एसएमएस सेवा की शुरुआत की है. इसके लिए आप गाड़ी के बारे में या उसके मालिक के बारे में जानने के लिए परिवहन विभाग द्वारा 7738299899 ये नम्बर जारी किया गया है. जानकारी के लिए आरटीओ को एसएमएस भेजना होगा जिसका फोरमेट इस प्रकार होगा, पहले वाहन फिर स्पेस देते हुए वाहन पंजीकरण संख्या इस एसएमएस को ऊपर दिए हुए नंबर पर भेजने के बाद 5 मिनट के अंदर आपके पास जो भी रिकॉर्ड उस पंजीकृत वाहन का कार्यालय में मौजूद होगा जैसे की मालिक का नाम, पता, सब आपको मिल जायेगा.

वाहन रजिस्ट्रेशन का फायदा (Vehicle registration number benefits)

  • अगर वाहन का किसी भी तरह से कोई दुर्घटना हो जाती है या किसी अपराध को अंजाम देने के लिए किसी भी वाहन का कोई इस्तेमाल करता है, तो इस पंजीकरण के माध्यम से पुलिस को जाँच करने में सुविधा होती है.
  • एक नम्बर प्लेट का शुरुआती कोड भी किसी व्यक्ति द्वारा बता दिया जाए तो उस नम्बर के माध्यम से गाड़ी के राज्य और क्षेत्र का पता लगया जा सकता है. क्योंकि हर राज्य का कोड अलग होता है. डाटाबेस में सभी पंजीकृत संख्याएं मौजूद रहती है.
  • रजिस्ट्रेशन नम्बर पंजीकृत होने से आरटीओ ऑफिस से गाड़ी के रंग, उसके बनाने की तिथि, मालिक के प्रकार अर्थात गाड़ी सरकारी है या निजी या सांगठनिक व्यापारिक, उसका भी पता चल सकता है. किस तरह का इंजन गाड़ी में इस्तेमाल होता है सभी मुलभुत विवरण को भी प्राप्त किया जा सकता है.
  • इसके लिए सबसे जरुरी विभाग आरटीओ आपकी मदद कर सकता है क्योंकि उसके डाटाबेस में सारी सूचनाएं मौजूद रहती है. वैसे विभिन्न एप्प के माध्यम से भी गाड़ी के मालिक का पता लगया जा सकता है.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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