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महिला दिवस त्याग की मूरत कविता

Happy Women’s Day केवल एक दिन यह मान लेने से क्या नारी को सम्मान मिल जाता है ?औरत त्याग की एक ऐसी मूरत हैं जिसे देवी का स्थान मिला हैं | किसी पुरुष में सहस्त्र हाथियों का बल होगा पर एक औरत की ताकत और उसके त्याग के आगे तो शून्य ही हैं |भले ही समाज में इसे दुःख मिला हो पर उस समाज की खुशहाली की इकलौती नींव एक नारि ही हैं |

हिंदी कविता : Women’s Day Special “Tyaag Ki Murat” Hindi Poem

Women's Day Special "Tyaag Ki Murat" Hindi kavita Poem

एक लड़की कुछ नहीं मांगती उसके नाम पर दहेज़ दिया और लिया जाता है पर उसमे उसका कोई अस्तित्व नहीं होता | एक रिश्ते को निभाने के लिए वो समझोते करती चली जाती हैं इस कदर खुद को बदल देती हैं कि उसके अरमान भी उससे मुहं मोड़ लेते |इतना त्याग वो परिवार की खुशियों के लिए करती बस थोड़े से प्यार और इज्जत की उम्मीद लिए | पर वो भी नहीं मिलता उसे | त्याग की मूरत को सफलता से भरे उस परिवार में अनदेखा कर दिया जाता |किसी को उसके त्याग का कोई अहसास नहीं रहता |

हिंदी कविता :नारी त्याग की मूरत

कुछ माँगा नहीं,कुछ चाहा नहीं,
बदला बस खुद को,कि रिश्ता टूट ना जाये कहीं |

आदतों को बदला,चाहतों को बदला,
भले मेरे अरमानों ने,अपनी करवट को बदला |

समन्दर की एक बूंद बन जाऊं भले,
बस समन्दर में मेरा अस्तित्व तो रहें |

धूल का एक कण भी में बन ना सकी,
मेरे त्याग की ओझल हो गई  छबि ||
                          कर्णिका पाठक 

Women’s Day Special “Tyaag Ki Murat” Hindi Kavita Poem यह मेरी भावना हैं | नारी शक्ति हैं जो दुसरो के लिए जीती हैं |

Women’s Day Special “Tyaag Ki Murat” Hindi Poem आपको कैसी लगी कमेंट करें 

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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