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मालदीव पर राजनीतिक संकट 2018 | Maldives recent political crisis 2018 in Hindi

मालदीव पर राजनीतिक संकट 2018 | Maldives recent political crisis 2018 in Hindi

मालदीव के तात्कालिक हालात क्या है (Maldives crisis 2018 current news)

मालदीव एक छोटा एवं बहुत खूबसूरत देश है, जो कि हमेशा से भारत का पड़ोसी देश होने के साथ-साथ एक अच्छा दोस्त भी रहा है. वहीं इस देश के राजनीतिक हालात कुछ समय से ओर खराब हो गए हैं. यहां के तात्कालिक राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने अपने देश में स्टेट इमर्जेन्सी लागू कर दी. इन्होंने 5 फरवरी 2018 को मालदीव में 15 दिन के लिए आपातकाल घोषित कर दिया है. जिस वजह से मालदीव की राजनीति ने पूरे संसार में हलचल मचा दी है. वहीं इस संकट का भारत और चाइना के बीच चल रहे शीत युद्ध पर भी असर पड़ा है.

मालदीव में कैसे लागू हुआ आपातकाल 2018 (how emergency affect in Maldives)

यमीन ने मालदीव सदन के 12 सदस्यों की सदस्यता को रद्द कर था, क्योंकि ये सभी सदस्य यमीन की राजनीतिक पार्टी को छोड़कर मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति नशीद की राजनीतिक पार्टी में शामिल हो गए थे. इतना ही नहीं इनके ऊपर कई आरोप लगाकर कार्यवाही की जाने लगी थी. लेकिन आपातकाल घोषित होने से कुछ समय पहले, मालदीव के सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हीं 12 मालदीव सदन के सदस्यों को फिर से सदस्यता वापस करने के लिए मौजूदा सरकार को आदेश दिए थे. कोर्ट ने सरकार के सदस्यता रद्द करने वाले फैसले को असंवैधानिक बताया था और इस तरह के फैसले को लोकतंत्र के लिए खतरनाक भी करार दे दिया था. वहीं कोर्ट के इस फैसले को राष्ट्रपति यमीन ने मानने से इनकार कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायधीशों को जेल में डाल दिया था. उन्होंने मंगलवार को न्यायमूर्ति अब्दुल्ला सईद और अली हमीद को पुलिस के हाथों गिरफ्तार करवा दिया, इतना ही नहीं बाकी के तीन न्यायाधीशों को गलत बयान लिखने पर मजबूर कर दिया था.

वहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने खिलाफ आते ही यमीन ने सेना को सुप्रीम कोर्ट यानी कि सर्वोच्च न्यायालय को घेरने के आदेश दे दिए थे. उसके बाद मालदीव की सेना ने सुप्रीम कोर्ट को चारों तरफ से नजर बंद कर लिया. इसके साथ ही देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया था. जिसके बाद ऊपर बताए गए न्यायमूर्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया.

आखिर क्यों लगाया गया इमरजेंसी यानी आपातकाल (reasons behind Maldives state emergency)

भारत के पड़ोसी देश में आखिर किन कारणों के चलते ऐसे हालात पैदा हुए हैं, उनके बारे में विस्तार से जानकारी नीचे दी गई है. जो कि इस प्रकार है-

मालदीव की मौजूदा सरकार के शासन का अंत (end of Maldives government)

कहा जा रहा है कि मालदीव के राष्ट्रपति ने अपना शासन बचाने के लिए स्टेट ऑफ इमरजेंसी का प्रयोग किया है. क्योंकि तथ्यों को मद्देनजर रखकर बात की जाए तो 12 सदस्यों के पार्टी छोड़कर जाने की वजह से मौजूदा सरकार खतरे में आ गई. इतना ही नहीं ये सभी सदस्य पूर्व राष्ट्रपति नशीद की राजनीतिक पार्टी में शामिल होने वाले थे. जिस वजह से यमीन की पार्टी का पूर्ण बहुमत खत्म होने की कगार पर आ गया था. इस समस्या से निपटने और पार्टी को बचाने के लक्ष्य से यमीन ने अपने देश में आपातकाल लगाने का फैसला किया

चीन की भी हो सकती है साजिश (Maldives crisis china)

ऐसा माना जा रहा है कि जब से यमीन को मालदीव का राष्ट्रपति चुना गया था तब से ही चीन और मालदीव के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं. चीन अपना व्यापार मालदीव में स्थापित करना चाहता था और उसे अपने प्रतिनिधि की जरुरत थी. इसलिए चीन ने यमीन का हर तरह से साथ दिया. जिसके बदले चीन ने मालदीव के साथ कई प्रॉजेक्ट एवं संधियों पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

क्यों मालदीव के राष्ट्रपति यमीन बने तानाशाह (is abdulla yameen maldives dictator)

मालदीव के इस गरमा-गर्मी के माहौल को एक तानाशाह की तरह यमीन द्वारा सम्भाला जा रहा है. मालदीव के सभी अखबार और न्यूज़ चैनल्स को सरकार के खिलाफ कुछ भी ना दिखाने के आदेश दिए गए हैं. वहीं जो सरकार के इस आदेश को नहीं मान रहे हैं, उन चैनल्स को बंद कर दिया गया है. वहीं यमीन के इन आदेशों का अमेरिका, श्रीलंका की दूतावास ने भी खुलकर विरोध किया है. वहीं अभी हाल के महीनों में यमीन ने अपने देश को कॉमनवैल्थ संगठन से बाहर कर लिया था. जिससे मालदीव के खेलों की तरक्की पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. यहां तक की अब्दुल गयूम जिन्होंने मालदीव पर 30 साल तक शासन बनाए रखा था. यमीन ने उनको वहीं मालदीव के पूर्व प्रभावशाली नेता गयूम, यमीन के रिश्ते में सौतेले भाई लगते हैं.

मोहम्मद नशीद का बयान (Mohamed nasheed latest tweet)

इस देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने ट्वीट करते हुए कहा कि भारत को हमारी मदद करनी चाहिए. उन्होंने लिखा कि भारत को अपनी सेना का इस्तेमाल करके मालदीव में बिगड़ रहे हालात को काबू करने में हमारा साथ देना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि भारत हमेशा की तरह मालदीव की फिर से मदद करने की पहल करेगा. क्योंकि भारत ही हमारा सच्चा दोस्त है.

कैसे गिरी थी नशीद की सरकार (Mohamed nasheed latest news)

साल 2008 में नशीद ने मालदीव में अपनी सरकार बनाई, उसके बाद सन् 2012 में इनका विवाद एक कोर्ट के जज से हो गया. जिसके बाद इन्होंने उनको हटाने की मांग की. लेकिन यमीन की पार्टी ने इनका जमकर विरोध किया और इनके खिलाफ भ्रष्टाचार एवं आतंकवाद फैलाने के गंभीर आरोप लगा दिए गए थे. इतना ही नहीं मालदीव के लोगों को भड़काया गया कि राष्ट्रपति नशीद ही मालदीव के सबसे बड़े दुश्मन हैं. जो भारत को अपनी जमीन बेचना चाहते हैं. इसके बाद 2013 में हुए चुनाव में नशीद की पार्टी मलडीवीएन डेमोक्रेटिक को हार मिली. नशीद को 13 साल की जेल की सजा सन् 2015 में सुनाई गई. जिसको एक साल पूरा करने के बाद ये यूएस चले गए.

यमीन ने कैसे दिया चीन का साथ एवं भारत का विरोध (current problems between India and Maldives) (India china Maldives crises)

जैसे ही यमीन की पार्टी सत्ता में आई थी, इन्होंने अपने विपक्ष के नेताओं को धीरेधीरे झूठे आरोपों में फसाकर जेल में डालना शुरू कर दिया था. क्योंकि यमीन नहीं चाहते थे कि उनका कोई विरोधी बचे जो चीन का विरोध करें. वहीं चीन और यमीन की चाल की भनक वहां काम करने वाली भारतीय एवं अन्य देशों के दूतावास को लग गई थी. इतना ही नहीं यहां के अफसरों ने पहले ही यमीन की सरकार को मालदीव के लोकतंत्रता पर खतरा बता दिया था. लेकिन इस चीज की पुष्टि अब हुई है, जब यमीन ने सेना को आदेश दिया कि मालदीव का कोई भी नागरिक सरकार का विरोध करने सड़को पर उतरता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने वाले कर्मचारियों एवं दो अफसरों को पद से बेदखल भी कर दिया गया था.

वहीं ऐसा ही कुछ भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए किया था. वहीं इंदिरा गांधी द्वारा उस समय लिए गए आपातकाल के निर्णय पर किसी भी अन्य देश का हाथ नहीं था और ये भारत का आंतरिक मामला था. जबकि मालदीव में चल रहे इस राजनीतिक एवं लोकतंत्र गड़बड़ी के पीछे चीन की साजिश मानी जा रही है.

क्या भारत और मालदीव के रिश्ते में दरार बना चीन (china affects India and Maldives friendship)

भारत पहले से ही मालदीव का बहुत अच्छा दोस्त रहा है, मालदीव के ऊपर आने वाली हर समस्या में भारत ने मालदीव का साथ दिया है. काफी लम्बे समय से चले आ रहे इस रिश्ते में दरार जब पड़ी जब चीन ने 2013 में अपनी कूटनीति के दम पर यमीन को मालदीव का राष्ट्रपति बनने में अपना योगदान दिया. वहीं इसको चीन की राजनीति इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चीन साल 2011 से पहले मालदीव में अपनी कोई रूचि नहीं रखता था. इतना ही नहीं चीन ने पाकिस्तान से फ्री ट्रैड समझौते पर सहमति पाने के साथ ही, मालदीव देश के साथ भी इसी तरह के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. जिससे की चीन और मालदीव की दोस्ती ओर गहरी हो गई है और इन दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होते जा रहे हैं.

वहीं कहा जाता है कि चीन ने वहां के इस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति को चुनाव जीताने में मदद की थी, जिसके बाद यमीन ने सत्ता में आते ही मेरीटाइम सिल्क रुट प्रोजेक्ट का भी समर्थन किया. जिसका विरोध भारत कई वर्षों से करता चला आ रहा है. वहीं भारत को इतनी दोस्ती निभाने के बाद भी मालदीव का इस मसले पर साथ नहीं मिला. जिसके पीछे का कारण मालदीव में बनने वाली नई सरकार का आना और वहां के राष्ट्रपति को चीन का समर्थक होना ही हैं.

भारत और मालदीव की दोस्ती का इतिहास (India Maldives old relation in Hindi)

अब्दुल्ला यमीन का नाता प्रोगेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव नामक पार्टी से है. वहीं इनकी पार्टी के  जीतने के साथ ही ये मालदीव के 6 वें राष्ट्रपति बने थे. वहीं इससे पहले राष्ट्रपति बने सभी नेता हमेशा भारत को ही अपना हितेषी मानते थे एवं हमेशा भारत के साथ चलने का सपना देखते थे. भारत ने इस देश के साथ साल 1981 में एक ट्रेड समझौता भी किया था, जिसमें आयात और निर्यात पर ध्यान दिया गया था. इस समझौते से हमारे देश के रिश्ते मालदीव के साथ ओर मजबूत हो गए थे. इसके बाद सुनामी में जब मालदीव देश को भारी क्षति हुई थी, तब भारत ने आर्थिक एवं मानवीय बल की मदद से इस देश को सहायता दी थी. मालदीव में इंदिरा जी के नाम से एक अस्पताल भी है एवं मालदीव के नागरिकों को भारत में आकर इलाज करवाने की सुविधा के लिए मुफ्त वीजा भी दिया जाता है. साथ ही मालदीव की सेना एवं पुलिस को भारत में प्रशिक्षण भी किया जाता है. वहीं चीन और मालदीव की बढ़ती दोस्ती के कारण आनेवाले समय पर हमारे देश और मालदीव के रिश्ते फीके पड़ सकते हैं

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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