आँखें ओल्ड दूरदर्शन टीवी धारावाहिक | Aankhen Doordarshan TV Serial in hindi

Aankhen Doordarshan TV Serial in hindi 90 के दशक में दूरदर्शन का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है. जिस समय प्राइवेट चैनलों का दौर नहीं आया था, उस समय दूरदर्शन के दर्शकों की संख्या बहुत अधिक होती थी. दर्शक अधिक होने की वजह से चैनल पर सबकी पसंद का ख़याल रखने की भी ज़िम्मेदारी थी. दूरदर्शन ने इस ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया है. दूरदर्शन के लोगों ने कुछ ऐसा दिखाने का सोचा, जिसमें लगभग सभी वर्ग और सभी उम्र के लोगों की रूचि हो. एक तरह से सभी लोग इसका आनंद उठा सके. सन 2001 में दूरदर्शन पर आने वाले सीरियल “आँखें” इसी प्रयोग का नतीजा था.

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आँखें ओल्ड दूरदर्शन टीवी धारावाहिक

Aankhen Doordarshan Old TV Serial in hindi

आँखे सीरियल कास्ट (Aankhen Serial Cast)

इस सीरियल में कई अच्छे अभिनेता अलग- अलग किरदार संभाल रहे थे. जोकि इस प्रकार है.

  • अरविन्द रौसेरिया, कर्नल ध्यानचंद के किरदार में,
  • संजीव विल्सन, कार्लोस के किरदार में,
  • जे पी शर्मा, कंगारू के किरदार में,
  • सागर सैनी, विनोद पाण्डेय, सर्वेन्द्र और राधास्वामी आँखे टीम के सदस्य के किरदार में नज़र आये.

आँखे सीरियल की कहानी (Aankhen TV Serial story)

इस सीरियल की कहानी भारत- अधीन कश्मीर में स्थापित की गयी थी. इस कहानी में मानवता के सबसे बड़े दुश्मन आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई दिखाई गयी थी. कश्मीर भारत विभाजन के बाद से ही आतंकवादियों और अलगाव वादियों से पीड़ित रहा है. पाकिस्तान में पड़ने वाले कश्मीर में बहुत आसानी से आतंकवादियों को जगह मिल जाती है, जहाँ पर रह कर वे भारत के ख़िलाफ़ अपने नापाक इरादों और मंसूबों को अंजाम देने की कोशिश करते रहते हैं. इस सीरियल में जे. के. मल्होत्रा भारत में स्थित कश्मीर के गवर्नर रहते हैं. उनकी तेज़ बुद्धि और पराक्रम से परेशान पाकिस्तान उनकी हत्या करवाना चाहता है. पकिस्तान एक ‘किल्लिंग कार्लोस’ से उनकी जान का सौदा करता है.

इस नापाक मंसूबे को नाकामयाब करने के लिए भारतीय जवानों की एक टीम तैयार होती है, जिसे “आँखे” का नाम दिया जाता है. ये टीम कर्नल ध्यानचंद के नेतृत्व में काम करती है और बड़ी बहादुरी से गवर्नर की जान बचा लेती है. इस नाकामयाबी से कार्लोस का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर होता है. वह फिर से “आँखें” टीम से बदला लेने की ठान लेता है. अबकी बार वह अपना तरीक़ा बदल लेता है. वह इस बार भारत में हो रहे शांति सम्मलेन वार्ता में धमाके करने की योजना बनाता है. इसके पीछे उसका उद्देश्य विश्व स्तर पर भारत को बदनाम करने का होता है. वे चाहते थे कि इस धमाके से विश्व भर में भारत की छवि बहुत बुरी तरह खराब हो जायेगी, और दुसरे देश भारत से हाथ मिलाने में कतरायेंगे, और इस तरह भारत विश्व के अन्य विकास शील देशों से अलग हो जाएगा.

अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए वह अपने साथी मिस मोनिका और थोम्सों को भारत पहुँचने के लिए कहता है. भारत की चावी और कई लोगों की जान बहुत खतरे में पड़ जाती है. इधर कर्नल ध्यानचंद को इस साज़िश की भनक लग जाती है. वो अपनी टीम को इस खतरे का सामना करने के लिए तैयार कर देते है. टीम ‘आँखें’ के सीक्रेट एजेंट्स इस साज़िश को नाकामयाब करने की कोशिश में लग जाते हैं. इस बार भी अपनी सूझ- बूझ और बहादुरी के साथ टीम “आँखें” वैश्विक स्तर पर भारत की इज्जत और कई लोगों की जान बचा लेने में सफ़ल हो जाती है.

ये सीरियल एंटी क्राइम इन्वेस्टीगेशन की कहानी लिए बहुत ही रोचक सीरीज के रूप में सामने आया. इस शो से पकिस्तान के तत्कालीन हरक़तों का पता चलता है. भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव को इस शो में बहुत ही अच्छे और सच्चे तरीक़े से दिखाया गया है. साथ ही इस शो से कुछ एंटी क्राइम अफसरों की ज़िन्दगी, उनके काम, उनकी परेशानियां, जीवन का खतरा आदि के बारे में भी पता चलता है. साथ ही इस सीरियल से हमें ये सीख भी मिलती है कि देश के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए.

आँखे सीरियल की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Aankhen serial)

सीरियल का नाम आँखें
जेनर ड्रामा, सस्पेंस
निर्देशक अमृत सागर, शक्ति सागर
निर्माता ज्योति सागर
बैनर इंडिगो क्रिएशन
चैनल डी डी नेशनल
एपिसोड्स की कुल संख्या 104
साल 2001

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Ankita
अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|

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