आत्मनिर्भर भारत पर निबंध |Aatm nirbhar Bharat Essay in Hindi

आत्मनिर्भर भारत पर  निबंध, अर्थ, क्या है, स्तंभ, फायदे, अवसर, चुनौतियां (Aatm nirbhar Bharat Essay in Hindi) (Competition, Benefit, Opportunity)

प्रस्तावना

एक व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण होता है आत्मनिर्भरता। एक आत्मनिर्भर व्यक्ति अपने स्वयं के लिए सहारा बन सकता है। अगर कोई व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर रहता है तो उसे किसी और के सहारे की जरूरत नही पडती है। हमारा भारत देश विश्व की प्राचीन संस्कृतियों मे से एक रहा है और इस देश की संस्कृति, रंग – ढ़ग देखकर हम कह सकते है की भारत पहले से ही काफी आत्मनिर्भर है। स्वयं के हुनर से स्वयं का विकास करना ही आत्मनिर्भरता का सही मतलब है। हर व्यक्ति यही चाहता है की वह आत्मनिर्भर बने, फिर चाहे उसके रहन – सहन से हो या उसके तौर तरीके से। 

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आत्मनिर्भर का अर्थ 

आत्मनिर्भर का अर्थ एक व्यक्ति विशेष को किसी और के सहारे न रहकर अपने स्वयं के सहारे रहना चाहिए। इसी को एक उदाहरण के साथ समझे तो मान लीजिए की आप अपने घर पर अकेले रहते है और अपने खाने पीने के साथ – साथ अपनी सुविधाओं के लिए आपको रिश्तेदारों पर निर्भर रहना पडता है, रिश्तेदार आपको खाना या तो टिफिन के जरिये पहुंचाता है या किसी और के सहारे से आप तक पहुंचाते है। इसके विपरीत अगर आप अपने खाने के लिए खुद मेहनत करते है और खुद खाना बनाते है, तो हो गये ना आप आत्मनिर्भर। इसको सीधी सी भाषा मे समझे तो इसका मतलब यह होता है ही हम किसी और के भरोसे पर न रहे और स्वयं कोई ऐसा काम करे जिससे हमारा जीवन यापन हो सके। 

आत्मनिर्भर भारत अभियान

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने 12 मई 2020 को इस अभियान की घोषणा की थी जिसमें उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा था की भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए यह एक अच्छी पहल है। इस अभियान के तहत भारत आने वाले कुछ सालों मे अधिकतर वस्तुओं का निर्माण भारत के किया जाएगा। इस कारण से ही इस अभियान का नाम आत्मनिर्भर रखा गया है। 

इस अभियान के तहत उन सभी विदेशी निर्भरताओं को कम करना है जिस वजह से भारत का ज्यादातर व्यापार दूसरे पड़ोसी देशों पर निर्भर है। इसमें बाहर की वस्तुओं पर निर्भर न रहकर बाहर अपने स्वयं के स्तर पर अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट को हमारे देश मे ही तैयार करना है इस अभियान मे शामिल है। 

आज की बात करे तो हमारे दैनिक जीवन मे कई ऐसी वस्तुएं है जिसकी आपूर्ति हमें हमारा पड़ोसी देश चीन करता है। चीन के अलावा अमेरिका, कोरिया, सऊदी अरब भी इसी श्रेणी में शामिल है जो हमारे सामान की मांग को पूरा करता है। भारत के विकास की झड़े अगर मजबूत करनी है तो हमें पहले आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा तभी हमारा भारत विकासशील से विकसित देश बनेगा। इस अभियान के तहत हमारे जरूरी व आवश्यक चीजों का निर्माण हमारे देश मे ही किया जाएगा तभी हमारा देश आत्मनिर्भर भारत कहलायेगा। 

आत्मनिर्भर भारत का सपना

1947 के बात यानी देश की स्वतंत्रता के बाद से ही भारत आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहा है। आजादी से पूर्व ही भारत की आजादी की लडाई मे महात्मा गांधी द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन भी चलाया गया था जिसमें लोगों से विदेशी वस्तुओं पर निर्भर न रहकर भारत मे बनी वस्तुओं पर निर्भर रहने की अपील की थी। महात्मा गांधी स्वयं भी स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करते थे, और महात्मा गांधी ही ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आत्मनिर्भर भारत की तरफ पहला कदम उठाया था।

परंतु दुख की बात करे तो आजादी के 70 साल बाद ही भारत ने इस सपने की और कोई और नया कदम नहीं उठाया। मगर विश्व मे व्याप्त इस कोरोना महामारी की वजह से भारत को आत्मनिर्भर बनने का सपना एक बार फिर देखा और आत्मनिर्भर का सही मतलब समझा। इसके बाद ही भारत के दिल मे आत्मनिर्भर बनने का सपना पलने लगा।

भारत को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा महात्मा गांधी के उस सविनय अवज्ञा आंदोलन से ही मिली थी। इस आंदोलन के तहत लोगों ने विदेशी कपड़े पहनने बंद कर दिये थे और अपने हाथ से बुने हुए कपड़े पहने थे। अब वर्तमान मे भारत का यह अभियान उसी सपने को पूरा करेगा और भारत बनेगा आत्मनिर्भर।

आत्मनिर्भर बनने के पांच स्तम्भ

भारत के आत्मनिर्भर वे पांच स्तम्भ जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने मे करेंगे मदद –

  • अर्थव्यवस्था – वर्तमान की भारत की अर्थव्यवस्था एक मिश्रित प्रकार की अर्थव्यवस्था है जिसमें परिवर्तन किया जाता संभव है।अर्थव्यवस्था ही एक ऐसा साधन है जो भारत को आत्मनिर्भर बनने की और मोड सकता है।
  • तकनीकी – भारत मे तकनीकी काफी विकसित है और इसी तकनीक के चलते भारत मे विश्व शक्ति बनने का साहस रखता है। भारत की तकनीकी इसी का एक मुख्य अंग है जो भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर – भारत का इन्फ्रास्ट्रक्चर इतना मजबूत है की यह भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मदद करेगा।
  • मांग – भारत में कच्चे माल की मांग इतनी ज्यादा बढ़ रही है की हमे पड़ोसी देश पर निर्भर रहना पडता है। अगर हम कच्चे माल निर्माण भारत मे करते है तो उस स्थिति मे भारत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो सकेगा।
  • बढ़ती जनसंख्या– भारत की जनसंख्या भी जंगल मे आग की तरह फैल रही है, इस पर नियंत्रण भी जरूरी हैं।

आत्मनिर्भर बनने के फायदे

अगर भारत आत्मनिर्भर बनता है तो उस स्थिति मे भारत को कई तरह के फायदे होंगे जो भारत को एक नई पहचान दिलाने मे मदद करेंगे।

  • आत्मनिर्भर बनने के बाद किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे – भारत मे हमारे दैनिक जीवन मे उपयोग मे आने वाली वस्तुओं का आयात चीन या अन्य पड़ोसी देशों से किया जाता है। अगर भारत का यह आत्मनिर्भर बनने का सपना पुरा होता है तो भारत को किसी के अन्य देश के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे और भारत स्वयं ऐसी वस्तुओं का निर्माण करने लगेगा।
  • देशी उद्योग मे बढ़ोतरी – भारत के आत्मनिर्भर बनने से भारत मे कई तरह की वस्तुओं का निर्माण होगा और भारत मे उद्योग भी बढ़ेंगे। भारत उन वस्तुओं को विदेश मे भी भेज सकेगा और इससे भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
  • रोजगार के अवसर – आत्मनिर्भर से भारत मे देशी और घरेलू उद्योग बढ़ेंगे जिस वजह से भारत मे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और देश के कुशल और सक्षम लोगों को इससे रोजगार भी मिलेगा। इससे देश के आर्थिक हालात भी सुधर सकेंगे।
  • गरीबी से मुक्त होगा – देश मे आत्मनिर्भरता से उद्योगों के साथ साथ युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इससे देश मे गरीबी भी कम हो सकेगी।
  • पैसों की कमाई – भारत के आत्मनिर्भर बनने से देश मे व्यापार के अवसर को बढ़ेंगे ही साथ ही इससे देश को अच्छी कमाई भी होगी जिससे देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
  • आयात की जगह निर्यात बढ़ेगा – भारत के आत्मनिर्भर बनने से पहले देश अब तक जिन वस्तुओं का आयात करता था उसका अब भारत करेगा निर्यात, इससे देश मे विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ेगा।
  • आपदा के समय संकटमोचक बनेगा खजाना – आत्मनिर्भर बनने से भारत मे रोजगार बढ़ेगा और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी जिससे संकट के समय वह धन देश की रक्षार्थ काम आ सकेगा।

आत्मनिर्भरता के अवसर

इस कोरोना महामारी के समय मे हमने देखा ही है की भारत के साथ – साथ विश्व भी कई संकटों से गुजरा है। देश 55 से भी ज्यादा दिनों के लिए रुक चुका था। बावजूद इसके भी भारत मे कई ऐसे अवसर आए जिसकी बदौलत भारत मे भारत मे सैनिटाइजर और मास्क का घरेलू स्तर पर उत्पादन होने लगा। देश मे घरेलू उत्पाद तो बड़े ही साथ ही इससे रोजगार भी बडा।

भारत पहले से ही इस भयानक महामारी से लडने के लिए कई सारे प्रोडक्ट बना चुकी है पीपीई किट, वेंटिलेटर, मास्क, सैनिटाइजर इत्यादि। भारत मे संसाधनों की कमी नही है परन्तु लोगों को अवसर नही मिलते है परन्तु इस कोरोना महामारी की वजह से लोगों को अवसर भी मिले है जिस वजह लोगो ने घरेलू उत्पाद मे वृद्धि की है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए इन वस्तुओं का निर्माण के संदर्भ मे भारत की तरफ से यह पहला प्रयास है और काफी हद्द तक यह सफल भी रहा। इसकी वजह से हमारा देश विश्व मे एक अच्छी पहचान बना चुका।

आत्मनिर्भर भारत के समक्ष संभावित चुनौतियां

भारत के आत्मनिर्भर बनने के सपने को साकार करने कुछ चुनौतियां ऐसी है जिससे निपटना जरूरी है।

  • लागत और गुणवत्ता – भारत के स्वयं के उत्पादों मे एक समस्या है जो सबसे बडी है। भारत के प्रोडक्ट निर्माण मे यह देखना जरूरी है की क्या वास्तव मे भारत मे बने उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी है और उनकी लागत कम हो।हालांकि भारत मे बनने वाली वस्तुओं पर लागत भी कम लगेगी और उस पर व्यय भी कम आयेगा।
  • आर्थिक समस्या – भारत मे जनसंख्या और गरीबी दोनों की एक साथ तेजी से बढ रही है। किसी भी नये उत्पादन के लिए सबसे पहली आवश्यकता होती है पूंजी, हालांकि भारत मे कई ऐसी योजनाएं है जो किसी भी नये उत्पादन या व्यवसाय को चालु करते के लिए लोन मुहैया कराती है। परन्तु यह भी कहा जा सकता है की शुरुआती समय मे देश मे को आर्थिक समस्या का सामना करना पड सकता है।
  • आधारभूत ढांचा – कई आर्थिक व व्यापार विशेषज्ञों की मानें तो उनके अनुसार, चीन से निकलने वाली कई अधिकांश कंपनियों के भारत में न आने का एक सबसे बडा मुख्य कारण ही भारतीय औद्योगिक क्षेत्र (विशेष कर तकनीक के संदर्भ में) में एक मजबूत आधार ढांचे के अभाव को माना जाता है। यही वजह से की भारत मे कई वस्तुओं का आयात ज्यादा मात्रा मे किया जा रहा है जिस वजह से यह भारत के कई व्यापार दूसरे देश पर निर्भर है। आत्मनिर्भर भारत बनने की इस समस्या को सुधारने की भी जरूरत होगी।

निजी क्षेत्रों को बढ़ावा

आत्मनिर्भर भारत अभियान मे निजी क्षेत्रों को हो सकता है फायदा, हालांकि इस अभियान का उद्देश्य भी कही न कही यही है की इससे देश मे व्यापार व उद्योगों को बढ़ाया जाए।

  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश के निजी क्षेत्रों को बढ़ाया जायेगा। इसमे देशी उद्योगों को व व्यापार को बढाने हेतु बीते बजट सत्र 2021-22 मे भी कई बड़ी घोषणाएं की गई है।
  • प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को इस अभियान के तहत निजी क्षेत्रों के हस्तक्षेप के लिए खोल दिया जाएगा।
  • इस अभियान के तहत भारतीय बाजार मे निजी कंपनियों की डिमांड व उनका हस्तक्षेप भी बढ़ जाएगा।

कोरोना का टीका बना कर दूनिया को दिया संदेश

आत्मनिर्भर भारत के उदाहरण की बात करे तो भारत ने वैश्विक महामारी कोरोना का टीका बना कर विश्व को यह संदेश दिया है की भारत भी कुछ कर सकता है। भारत ने सबसे पहले कोरोना के टीके का निर्माण सफलतापूर्वक किया है। भारत मे स्थित पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट मे इस कोरोना के टीके का निर्माण किया गया है। यह टीका भारत के अलावा भारत के पड़ोसी देशों को भी भेजा जा रहा है। इस बात से अब ऐसा लग रहा है की भारत का आत्मनिर्भर बनने का सपना पूरा हो रहा है। भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। 

दूसरों पर निर्भर रहने का नुकसान

अगर देश मे इस आत्मनिर्भर भारत के अभियान की शुरुआत नही होती तो हमको पूर्व की भांति वर्तमान मे भी दूसरों पर निर्भर रहना पडता जिससे कुछ नुकसान भी होते –

भारत मे संसाधन सीमित है जिस वजह से हम दूसरों पर निर्भर रहते है। अगर हम दूसरों पर निर्भर रहते है तो हमे उनके अनुरूप काम करना पडता है और उस देश या की हर उस शर्त को मानना होता है जो हमे भले की मंजूर न हो। अगर भारत देश दूसरों पर निर्भर रहता है तो इससे हमारे देश को आर्थिक नुकसान होता है और दूसरे देश को आर्थिक फायदा होता है। दूसरों पर निर्भर रहते ने हमारा देश काफी पीछे रह जाता है और काफी हद तक रह भी गया है। दूसरे देश पर निर्भर रहने से हमारे देश मे बेरोजगारी जैसी भयानक समस्या आ सकती है।

उपसंहार

देश मे कोरोना महामारी की वजह से देश को कई समस्याओं का सामना करना पडा है। देश को कई आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ा था। वर्तमान मे देश के आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत के बाद ही हमें इसके परिणाम देखने को मिले है। देश मे कोरोना से लड़ने के लिए पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर इत्यादी भारत मे बनने लगे और इतना की नही वैश्विक महामारी को झड से मिटाने के लिए कोरोना का टीका भी भारत मे ही पहली बार बनाया गया है।

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