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अनुपम खेर का जीवन परिचय | Anupam Kher Biography in hindi

अनुपम खेर: जीवन परिचय | Anupam Kher Biography and Show in hindi

अनुपम खेर बॉलीवुड का वो  नाम है जिससे शायद ही कोई अनजान होगा, हालांकि फिल्मों में इनके हिस्से में मुख्य किरदार जैसे हीरो या विलेन के चरित्र ज्यादा नहीं आए हैं लेकिन फिर भी हर एक  फिल्म में इन्होने अपने अभिनय की छाप छोड़ी  हैं. अनुपम इस फिल्मी दुनिया में कभी किसी विशेष इमेज में नहीं बंधे, और उन्होंने  लगभग सभी प्रकार के किरदारों के साथ न्याय किया. उनका एक्टिंग के प्रति यही समर्पण उन्हें चरित्र अभिनेता के साथ कमर्शियल फिल्मों, हॉलीवुड की फिल्मों और सीरियल के अलावा भारतीय रंगमच पर भी श्रेष्ठ अभिनेताओं के साथ प्रथम पंक्ति में लाकर खड़ा करता है. केवल बॉलीवुड में ही लगभग 500 से ज्यादा फ़िल्में है जिनमे अनुपम ने काम किया है.

अनुपम हमेशा से रंगमंच पर सक्रिय रहे है, और अभी भी उनका नाटक “कुछ भी हो सकता है” पूरे भारत में बहुत ज्यादा पसंद किए जाने वाले नाटकों में से एक हैं, जिसका कि फिल्म,टेलीविजन और यू-ट्यूब जैसे मंच के होते हुए भी इतना प्रसिद्ध होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.  इसके अलावा अनुपम निर्देशन और प्रोडक्शन का काम भी  देखते हैं और अपना एक एक्टिंग स्कूल भी चलाते है. राजनीति से इनका सीधा कोई सम्बंध नहीं है फिर भी अनुपम खेर देश के एक जिम्मेदार नागरिक के समान अपने  विचार खुलकर अभिव्यक्त करते रहते हैं,जो उन्हें और लाइम लाइट में ले ही आते है

अनुपम खेर

वास्तविक नाम अनुपम खेर
पेशा अभिनेता
लम्बाई सेंटीमीटर में -170

मीटर में-1.70

फुट और इंच में-5’7”

वजन किलोग्राम में-72

पाउंड्स में-159lbs

आँखों का रंग गहरा काला
बालों का रंग सर पर बाल नहीं है
निजी जीवन (Personal life)
जन्मदिन 7 मार्च 1955
उम्र (2017तक) (Age) 62 वर्ष
जन्म स्थान शिमला, हिमाचल प्रदेश
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर शिमला,हिमाचल प्रदेश
स्कूल डी.ए.वी स्कूल,शिमला,हिमाचल प्रदेश
कॉलेज पंजाब यूनिवर्सिटी,चंडीगढ़,भारत

नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा,नयी दिल्ली,भारत

शिक्षा थिएटर ड्रामा में ग्रेजुएट
डेब्यू फिल्म: आगमन (हिंदी: 1982)

टेलीविज़न-सवाल `10 करोड़ का (2001 में होस्ट के तौर पर)

निर्देशक- ओम जय जगदीश (2002)

परिवार पिता:- स्वर्गीय पुष्कर खेर (फारेस्ट डिपार्टमेंट में क्लर्क)

माता:- दुलारी खेर

भाई (Brother): राजू खेर,अभिनेता(छोटा भाई)

धर्म हिन्दू
शौक पुराने हिंदी म्यूजिक को सुनना,किताबें पढना
पसंदीदा खाना प्रॉन,कश्मीरी दम आलू.राजमा-चावल
प्रिय रेस्टोरेंट संपन रेस्टोरेंट,जुहू,मुंबई
पसंदीदा अभिनेता रोबर्ट डे निरो,रणबीर कपूर
पसंदीदा अभिनेत्री विद्या बालान
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पत्नी (Wife) किरण खेर(1985)
पूर्व-पत्नी मधुमालती
बच्चे  पुत्र (Son)-सिकंदर खेर,अभिनेता
वार्षिक आय 70 मिलियन डालर

जन्म और शिक्षा (Birth and education)

अनुपम खेर वैसे तो कश्मीरी पंडित है, लेकिन इनके पिता की  नौकरी शिमला में होने के कारण इनका जन्म भी वहीँ 7 मार्च 1955 में  हुआ था. इनके पिताजी का नाम पुष्कर खेर था, जो की वन-विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे, जबकि माँ दुलारी खेर गृहिणी थी. अनुपम का अपने माता-पिता से काफी लगाव रहा है,जो कि समय-समय पर अब भी अनुपम के सोशल मीडिया के अकाउंट पर दिखता रहता है. अनुपम की प्राम्भिक शिक्षा शिमला के ही डी.ए.वी. स्कूल से हुई. इन्होने पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन की,नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से अनुपम ने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की, इसके अलावा और इन्होने थिएटर और ड्रामा में भी ग्रेजुएशन किया है.

अनुपम खेर का परिवार  (Anupam Kher Family)

अनुपम के परिवार में माँ दुलारी खेर,पत्नी किरण खेर और किरण का ही पुत्र सिकन्दर हैं जिसे अनुपम ने अपना नाम दे रखा है इसलिए सिकन्दर भी खेर सरनेम का ही प्रयोग करते है. अनुपम और सिकन्दर के मध्य का सम्बन्ध बिलकुल भी सौतेले पिता-पुत्र की तरह नहीं है, और अनुपम अपने बेटे को बॉलीवुड में लाने का एक प्रयास कर भी कर चुके है. सिकंदर भी अनुपम और किरण की तरह ही अभिनेता है. किरण खेर के साथ अनुपम की दूसरी शादी है, इससे पहले इनका विवाह मधुमालती से हुआ था, जो कि एक अरेंज्ड मैरिज थी,जबकि अनुपम किरण को कॉलेज के दिनों से जानते थे, लेकिन शादी से पहले दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त थे. इन सबके अलावा अनुपम खेर के छोटे भाई राजू खेर भी बॉलीवुड में एक स्थापित अभिनेता हैं और राजू की पुत्री वृंदा खेर भी बॉलीवुड में ही हैं.

अनुपम का संघर्ष और प्रेरणा (Anupam’s struggle and Inspiration)

अनुपम को फिल्मों में आने के लिए काफी समय तक संघर्ष का सामना करना पड़ा था, 1984 में सारांश फिल्म में अपनी उम्र से ज्यादा उम्र के व्यक्ति का काम मिलने के पहले तक अनुपम के दिन बहुत मुश्किल से बीत रहे थे. अनुपम  ने अपने उन्ही दिनों की प्रेरणा से एक किताब “ दी बेस्ट थिंग अबाउट यू इज यू” भी लिखी है, जो अब  हिंदी में भी उपलब्ध है. अनुपम ने इसके हिंदी वर्जन “आप खुद ही बेस्ट है” के रिलीज़ के समय कहा था कि “किसी को सफल होने के लिए उस व्यक्ति में सर्वोत्तम को पाने की तीव्र आकांक्षा होनी चाहिए” और वास्तव में यह किताब हर पाठक को अपनी मेहनत से असफलता को सफलता में बदलने की प्रेरणा देती हैं. खेर ने अपने टीनएज के दिनों को याद करते हुए एक बार कहा था कि उनके पिताजी ने उनके स्कूल के एग्जाम में फेल होने पर उन्हें बड़े होटल में ट्रीट दी थी, क्युकी उनका कहना था” कभी असफलता से ना घबराओ बल्कि इसे सफलता में बदलने के लिए और मेहनत करो” शायद यही बातें उनके मुंबई में संघर्ष के दिनों में प्रेरणा स्त्रोत रही होंगी, कि एक समय ऐसा भी था जब अनुपम के पास खाने तक के पैसे नहीं थे. ऐसे में अनुपम निराश नहीं हुए और उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों के भी मजे लिए, इसके बारे में अनुपम ने एक बार बताया था कि वो उस समय अपने गोरे रंग, गंजेपन और विदेशियों की नकल उतारने के टैलेंट का उपयोग करते थे, इसके लिए वो किसी भी रेस्टोरेंट में जाते और विदेशी की तरह बात करते हुए पेट भरके खाना खाते और बिना पैसे दिए निकल जाते, और लोग विश्वास ही नहीं कर सकते थे कि अनुपम कोई विदेशी व्यक्ति नहीं बल्कि भारतीय हैं.

अनुपम का फिल्मी सफर (Anupam’s Film Journey)

अनुपम ने 1989 में राम-लखन, 1990 में खतरनाक, क्रोध और 1991में दिल हैं कि मानता नहीं जैसी फिल्मे की थी. फिर 1994 में अनुपम की फिल्म “हम आपके हैं कौन” आई जिसकी शूटिंग के दौरान ही अनुपम को फेस पैरालिसिस हो गया,जो कि किसी भी अभिनेता के लिए सबसे मुश्किल घडी होती है,लेकिन अनुपम ने हार नहीं मानी,और इसके साथ ही यह फिल्म पूरी की और आगे भी काम ज़ारी रखा. 1995 में अनुपम ने एक एंटरटेनमेंट कंपनी खोलने का फैसला किया, जिसका किरण खेर ने विरोध किया था, लेकिन फिर पति की इच्छा और परिस्थिति को समझते हुए किरण ने वापिस काम करना शुरू कर दिया था. इसके बाद दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995), कुछ कुछ होता है (1998), सुर्यवंशम (1999), कहो ना प्यार है (2000), जोड़ी नंबर1 (2001) आई.  फिर 2004 में बल्ले-बल्ले अमृतसर टू एलए, तुमसा नहीं देखा, शर्त, आबरा का डाबरा, वीर-ज़ारा, कौन हैं जो सपनों में आया और गर्व जैसी फिल्मों में काम किया. इन सभी फिल्मों में अनुपम का किरदार कही छोटा तो कही बड़ा था, लेकिन ये तब भी तय था कि फिल्म में उनकी एक अलग पहचान होती थी, और वो दर्शकों का ध्यान खीचने से भी कही नहीं चुकते थे. इस तरह से उन्होंने अपनी अदाकारी और अभिनय-कौशल से प्रत्येक फिल्म में अपनी एक अलग पहचान बनाई. फिर 2005 में आई पहेली, मैं ऐसा ही हूँ, क्या कूल हैं हम, मैंने गांधी को नहीं मारा, जान-ए-मन जहाँ हिंदी की उनकी बेस्ट फ़िल्में थी वही इसी साल इंग्लिश में आई फिल्म “गांधी पार्क” ने भी दर्शकों का ध्यान खीचा. इसके बाद 2006 में “आपकी खातिर, खोसला का घोंसला, “होप & लिटिल सुगर”, विवाह, अपना सपना मनी-मनी,शाकलाका बूम-बूम, और 2007 में बुड्ढा मर गया, हे बेबी, धोखा, अपना आसमान, कुछ खट्टा-कुछ मीठा, लागा चुनरी में दाग,जर्नी ऑफ़ वुमन, गौरी,जैसी कई फिल्मे की. फिर 2008 से लेकर 2010 तक भी अनुपम की फिल्मों का सिलसिला युही ज़ारी रहा जिनमे मुख्य नाम है-अ-वेनस्डे, द एंड ऑफ़लाइन, विक्ट्री, ,संकट सिटी, मोर्निंग वाक, इट्स अ मिसमैच, तेरे संग: अ किडल्ट लव स्टोरी, लाइफ पार्टनर, दिल बोले हड़प्पा, वेक-अप-सिड, प्यार इम्पॉसिबल, स्ट्राइकर, अपार्टमेंट:रेंट एट योर ओन रिस्क, बदमाश कंपनी, लम्हा: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ कश्मीर, द डिजायर: अ जर्नी ऑफ़ वीमेन थी इसके बाद अगले कुछ सालों में यमला पगला दीवाना, यह फासले,  गेम,  नॉटी@40, आगाह: the वार्निंग, सही धंधे गलत बन्दे, क्या सुपर कूल  है हम, जब तक है जान, चश्मे बद्दूर, बेबी, डर्टी पॉलिटिक्स, एम्.एस. धोनी, जैसी बहुत से फिल्मे की. और यह क्रम अब भी ज़ारी हैं इस साल आई अय्यारी भी काफी प्रशंसा बटोर चुकी हैं.

अनुपम ने टेलीविज़न पर पहली बार 2001 में काम किया था, जो कि अमिताभ बच्चन के कौन बनेगा करोडपति के जैसे ही एक क्विज शो था,इसका नाम “सवाल 10 करोड़ का” था,यह कार्यक्रम इतना ज्यादा नहीं चल सका.फिर अनुपम ने 2004 में “से समथिंग टू अनुपम अंकल” को होस्ट किया, इसके बाद अनुपम ने 2014 में “द अनुपमखेर शो:कुछ भी हो सकता है” और 2016 में “भारतवर्ष” को होस्ट किया था.

अनुपम खेर और विदेशी फ़िल्में (Anupam Kher and Foreign Films)

अनुपम ने कई इंटरनेशनल फिल्मों में भी काम किया हैं,जिसमे बेंड इट लाइक बेकहम (2002), ब्राइड एंड प्रिज्युडिस  (2004), स्पीडी सिंघ्स  (2011) प्रमुख है. अनुपम ने सिल्वर लाइनिंग प्लेबुक (2012)  में भी काम किया है जिसे एकेडमी अवार्ड मिला था और टीवी पर कुछ शो जैसे ईआर, द मिस्ट्रेस ऑफ़ स्पाइसेज  (2006) और लस्ट,कौशन  (2007) में भी काम किया था.

 अनुपम खेर: एक निर्माता के रूप में (Anupam Kher As a Producer)

अनुपम ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपना भाग्य आजमाया हैं और एक बार फिर से इसके लिए तैयार है,इसके बारे में अनुपम ने अपनी फिल्म “रांची डायरीज” के ट्रेलर लांच पर बताया कि उनके जीवन में एक ऐसा समय भी था जब वो एक फिल्म बनाने के कारण दिवालिया घोषित हो गए थे,अनुपम ने बताया कि उनके पास तब 5000 रूपये भी नहीं थे, तब उन्होंने “कुछ भी हो सकता है” नाटक किया था जो की पूरी तरह से उनकी असफलता पर ही आधारित हैं. इसके अलावा अनुपम ने कहा की वो इस शहर में 37रूपये के साथ आये थे और अब आज वह फिल्म के प्रोडूसर है मतलब कि मेहनत को अपना लक्ष्य मिलता ही हैं. अनुपम ने 2005 में “मैंने गाँधी को नहीं मारा” फिल्म को प्रोड्यूस किया था, उसके बाद अभी 2018 में आने वाली एक फिल्म “रांची डायरीज” उनके प्रोडक्शन में बन रही दूसरी फिल्म है. अनुपम ने 1994 में बंगाली फिल्म बरीवाली और 2009 में तेरे संग भी प्रोड्यूस की थी. 2002 में अनुपम ने ओम जय जगदीश” फिल्म को भी निर्देशित कर इस क्षेत्र में भी थोडा अनुभव लिया.

अनुपम खेर और अवार्ड्स (Anupam Kher Awards)

अनुपम ने देश विदेश में कई फिल्मों और टीवी सीरियल में काम किया है,इसके लिए उनको मिले अवार्ड्स के लिए भी देश की कोई सीमा नहीं है, अनुपम ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक कई तरह के अवार्ड्स जीते है.

  • नेशनल फिल्म अवार्ड्स (National Film Awards)

अनुपम को अब तक 2 फिल्मों के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड मिल चुके है जिनमे 1990 में डैडी फिल्म के लिए स्पेशल ज्यूरी अवार्ड और 2006 में “मैंने गांधी को नहीं मारा” के लिए भी स्पेशल ज्यूरी अवार्ड ही मिला था.

  • फिल्मफेयर अवार्ड (Filmfare Awards)

अनुपम की पहली उपलब्धि अपनी पहली ही फिल्म  “सारांश” के लिए 1984 में  बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिलना थी, इसके बाद 1988 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड  “विजय” फिल्म के लिए मिला जिसने खेर के लिए आगे बढ़ने के रास्ते खोल दिए. 1989 में “रामलखन” के लिए बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड,1990 मे “डैडी” फिल्म में बेस्ट परफॉरमेंस के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिला था.1991 में “लम्हे” फिल्म के लिए बेस्ट कॉमेडियन का फिर 1993 में “डर” फिल्म में काम के लिए बेस्ट कॉमेडियन का,1995 में “दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे” के लिए बेस्ट कॉमेडियन का अवार्ड मिला था.

  • स्टार स्क्रीन अवार्ड 

1994: 1942: अ लव स्टोरी में जहाँ बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड मिला वहीँ 1999 में “हसीना मान जाएगी” के लिए बेस्ट कॉमेडियन का अवार्ड भी जीता था.

  • बॉलीवुड मूवी अवार्ड्स

1999 में जहाँ सलाखे मूवी के लिए बेस्ट सपोर्टिंग अवार्ड मिला था, वहीँ 2007 में बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड मिला था.

इसके अलावा दशक के अभिनेता (मिलेनियम ऑनर) का अवार्ड भी और सेनसुई व्यूअर चॉइस अवार्ड इन कॉमिक रोल में बेस्ट एक्टर का अवार्ड 2000 में मिला था. 2001 में जी गोल्ड बॉलीवुड अवार्ड्स में रियल लाइफ हीरो अवार्ड मिला.

2004 में भारत की सरकार द्वारा पद्म श्री अवार्ड भी मिला, जो की अनुपम अपनी बड़ी उपलब्धियों में से एक मानते है, क्युकी यह सम्मान देश के सर्वोष्ठ सम्मानों में से एक है, जिसे हासिल करना गर्व की बात है.

“मैंने गांधी को नहीं मारा” के लिए 2005 में कराची इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से बेस्ट एक्टर अवार्ड भी मिला, इसके बाद दलाई लामा के आशीर्वाद के साथ “दिव्य हिमाचल अवार्ड” भी मिला 2006 में कैलिफोर्निया में “मैंने गांधी को नहीं मारा” के लिए रिवरसाइड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला था.और इसी वर्ष खोसला का घोसला में काम के लिए लिए GIFA अवार्ड में क्रिटिक्स चॉइस अवार्ड भी मिला.

अनुपम खेर और विवाद (Anupam Kher Controversy)

अनुपम का विवादों से विशेष रिश्ता हैं, वो चाहे या ना चाहे उनके दिए बयानों या सोशल मीडिया पर उठाये गए मुद्दों  की चर्चा अक्सर मीडिया में सुर्खियों का विषय रहती हैं. फिर चाहे वो आमिर खान के असहिष्णुता  पर दिए गए बयान पर कटाक्ष करना और अपने विचार व्यक्त करना हो  या फिर कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर खुलकर बोलना. अनुपम कभी अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उपयोग से पीछे नहीं हटते.

  1. यहाँ तक कि देश के सर्वोच्च पुरुस्कारों में से एक पद्मश्री मिलने पर भी अनुपम खेर विवादों से नहीं बच सके,अनुपम के समकालीन अभिनेता रहे और कई बार अनुपम के साथ नेगेटिव और कॉमेडी रोल कर चुके कादर खान ने अनुपम के बारे में कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया हैं कि उन्हें पद्म श्री मिल सके,ये सब उनकी सरकार को और सम्बन्धित अधिकारियों की गई चापलूसी का परिणाम है, और कादर खान कभी ये नहीं कर सकते.
  2. मधुर भंडारकर की फिल्म “इंदु सरकार” में भूमिका निभाने वाले अनुपम ने उस समय भी अपनी राय व्यक्त की थी, जब इस फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा रोक लिया गया था. अनुपम ने कहा “सेंसर बोर्ड में जो हो रहा हैं वो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि सेंसर बोर्ड की मुर्खता भी है”.
  3. 2015 में असहिष्णुता का मुद्दा उठने पर अनुपम ने आमिर खान के वक्तव्य पर बेबाकी से अपनी प्रतिक्रिया ट्विटर पर जाहिर की. अनुपम ने आमिर से कहा “डिअर आमिर खान, क्या आपकी पत्नी किरण को आपने बताया कि आपने इस देश में इससे भी बहुत खराब समय देखा है” और “आपके लिए इनक्रेडिबल इंडिया कब इनटोलरेंट इण्डिया बन गया, पिछले 6-7 महीने में ही?? इस तरह के 5 ट्विट अनुपम ने किये, इसके अलावा मीडिया में भी इस मुद्दे पर खुलकर बोले.
  4. विशाल भारद्वाज ने जब अपनी फिल्म “हैदर” के लिए जीते गए 5 नेशनल अवार्ड कश्मीरी पंडितो को समर्पित किये, तब भी अनुपम ने विशाल से अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की. अनुपम ने कहा “हमारे अपमान के बाद विशाल भारद्वाज ये बताना चाहते हैं कि वो कितने दयालु है?? मिस्टर भारद्वाज ने एक एक पक्ष को ध्यान में रखते हुए फिल्म बनाई और अब हमारे प्रति अपनी करूणा दिखा रहे हैं, हमें आपकी दया नहीं चाहिए.
  5. मई,2006 में अनुपम खेर ने ट्विटर पर 1990 में मारे गए कश्मीरी पंडितों का कोलाज शेयर किया, यह ट्वीट हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर बॉय “बुरहान वानी” के मारे जाने पर होने वाले प्रदर्शनों की प्रतिक्रिया में किया था.

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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