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पाकिस्तान का आसिया बीबी केस क्या हैं | Asia Bibi (Pakistan) Case History Verdict in Hindi

पाकिस्तान का आसिया बीबी केस क्या हैं ? (Asia Bibi Pakistan Case [History, Verdict] in Hindi, Urdu)

पाकिस्तान अपने निर्माण के साथ ही कट्टरपंथी रवैये के कारण चर्चित रहा हैं,लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वहाँ मानवाधिकार और महिला सम्बन्धित मामलों की पूरी तरह से अनदेखी होती रही हो. इन दिनों भी बेनजीर भुट्टो वाला ये देश  आसिया बीबी केस मामले के कारण विश्व पटल में  सुर्ख़ियों में हैं.  हर दिन होती बहस और नए-नए आदेशों के कारण ये स्वाभाविक हैं कि आसिया बीबी के प्रति जिज्ञासा बने,लेकिन पाकिस्तान के प्रति किसी भी वैचारिक निर्णय पर पहुँचने से पहले आसिया बीबी का जीवन और पूरे घटनाक्रम को समझना जरुरी हैं,जिसे निम्न सवालों के जवाब के रूप में समझा जा सकता हैं-

Asia Bibi Case (आसिया बीबी)

कौन है आसिया बीबी??

आसिया बीबी पाकिस्तान के पंजाब प्रोविंस में रहने वाली एक आम महिला हैं,जो कि खेतों में काम करती हैं और 5 बच्चों की माँ हैं. 47 वर्षीय आसिया बीबी की कहानी किसी भी आम महिला की जैसी ही हैं लेकिन उनका धर्म ईसाई हैं लेकिन निवास स्थान मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान हैं. पिछले कई सालों से जेल में बंद आसिया पाकिस्तान के कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं.

क्यों आसिया बीबी जेल में??

14 जून 2009 को आसिया बीबी का माफिया और अस्मा नाम की 2 महिलाओं के साथ एक ही कप में पानी पीने के कारण विवाद हुआ था. वो दोनों महिलाएँ मुस्लिम थी जबकि आसिया का धर्म ईसाई हैं. उन महिलाओं ने आसिया पर प्रोफेट मुहम्मद के खिलाफ अपशब्द कहने का आरोप लगाया.

जैसे ही आसिया के सन्दर्भ में ये बात फैली कि उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद के बारे में गलत बात बोली हैं,पूरे पाकिस्तान में उनका विरोध शुरू हो गया और उनके घर पर हमला किया गया,और आखिर में  उन पर केस दर्ज किया गया.

ये पूरा मामला पाकिस्तान के मुख्य समाचार पत्र डॉन में भी आया इसके अलावा बीबीसी और सीएनएन ने भी इस मामले को दिखाया.

हालाँकि आसिया बीबी ने कहा कि वो प्रोफेट मुहम्मद और पवित्र कुरआन की इज्जत करती हैं लेकिन तब तक उन पर केस दर्ज हो चूका था और बात काफी आगे बढ़ चुकी थी. अभियोजन पक्ष ने आसिया के खिलाफ 7 गवाह प्रस्तुत किये जिनमें माफिया बीबी और अस्मा बीबी भी शामिल थी। उन्होंने ये दावा किया कि आसिया ने कुछ अपशब्द कहे थे. इनके अलावा कारी सलाम (Qari Muhammad Salaam) और 3 पुलिस ऑफिसर और एक स्थानीय निवासी मुहम्मद अफज़ल भी शामिल थे. पुलिस अफसरों ने केस दर्ज किया था और इसकी तफ्तीश की थी ।

आसिया के ऊपर लगाई गई धारा और सजा

आसिया पर ब्लासफेमी  (blasphemy law)  के अंतर्गत केस दायर किया गया. पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल देश हैं जहां पर ये कानून हैं कि यदि मुस्लिम धर्म  और मुहम्मद के खिलाफ कुछ बोलते हैं तो उसकी सजा मौत तक हो सकती हैं. ऐसा ही कुछ आसिया बीबी के साथ भी  हुआ. नवम्बर 2010 में पाकिस्तान के ट्रायल कोर्ट पैनल कोड के 295-सी सेक्शन की धारा के अंतर्गत आसिया को फांसी की सजा सुना दी.

इसके बाद आसिया बीबी ने इस सजा को लाहौर हाई कोर्ट में चुनौती दी लेकिन वहाँ भी आसिया बीबी केस हार गयी  और लाहौर हाई कोर्ट ने  ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया.

फैसले का विरोध

आसिया को सजा मिलने के साथ ही पूरे विश्व में ये बहस शुरू हो गयी कि इतनी सी बात के लिए किसी को फांसी की सजा देना कहां तक सही हैं. दुनिया भर की मीडिया पाकिस्तान के सरकार से इस पर जवाब मांगने लगी  और पाकिस्तान में अल्प-संख्यक समुदाय के लिए चिंता व्यक्त करने लगी.

बहुत सी ईसाई संस्थाए पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की. वेटिकन के पॉप ने भी कहा कि आसिया केस के लिए पाकिस्तानी सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और ये मृत्यु सजा दुर्भाग्यपूर्ण एवं अन्यायी निर्णय हैं.

क्या हुआ आसिया का समर्थन करने वालों का?

2011 में पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर ने आसिया बीबी के समर्थन में आवाज़ उठायी थी और कहा कि ब्लेसफेमी लॉ (blasphemy law) के अंर्तगत जो सजा दी जा रही हैं वो सही नहीं हैं.जिसके कारण उन्हें ना केवल विरोध का सामना करना पड़ा बल्कि अंत में उनकी हत्या तक कर दी गई. उनकी हत्या इस्लामाबाद में उनके ही बॉडी गार्ड मुमताज़ कादरी ने की थी. मुमताज कादरी को 2016 में हत्या के आरोप में फांसी पर चढाया गया था लेकिन आश्चर्यजनक बात ये थी कि पकिस्तान में एक बहुत बड़ा वर्ग मुमताज़ कादरी के कृत्य को सही मानता हैं

इसके बाद  2011 में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्री शाहबाज भट्टी को भी आसिया का समर्थन करने के लिए मार दिया  गया. और इस तरह की हत्याओं से विश्व में पाकिस्तान की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा.

 आसिया बीबी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

लगातार हार को झेल रही और विरोध का सामना कर रही आसिया ने फिर भी हार नही मानी और उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्णय को गलत ठहराया और कहा महिलाओं के मध्य हुए विवाद में सबूतों का अभाव हैं,इस कारण आसिया को सजा नहीं दे सकते.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने आसिया को फांसी की सजा को निरस्त करते हुए उन्हें आज़ाद कर दिया.और चीफ जस्टिस ने ये भी कहा कि  “इस्लाम का मूलभूत आधार सहिष्णुता धर्म हैं”. हालाँकि उन्होंने कहा कि उनके इस निर्णय के कारण उन्हें भी मारा जा सकता हैं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद पाकिस्तान के हालात                  

अक्टूबर 2018 में आये इस आदेश के बाद से पाकिस्तान में कई सारे ग्रुप्स ये मांग करने लगे कि वहाँ पर आसिया को सबके सामने फांसी दी जाये. हाफिज सईद, जमात-उलेम-ए-इस्लाम जैसे संगठन (जो कि आतंवादियों का समर्थन करते हैं) भी  विरोध करते हैं और खुलकर कहते हैं कि चीफ जस्टिस को मार दो,आसीया को मार दो.

इन सबके कारण पाकिस्तान में हालात और ज्यादा  खराब होते जा रहे हैं .ईसाई बहुल क्षेत्रो में सुरक्षा व्यवस्था कठोर करनी पड़ी हैं , और पाकिस्तान का कट्टरपंथी चेहरा सामने आ रहा हैं ,जिसके कारण यहाँ की सरकार पर दबाव बढ़ने लगा हैं .

इन सबके कारण पाकिस्तान जैसे देश में भी 2 वर्ग बन गए हैं और वहाँ लिब्रल और कट्टरपंथी विचारधारा के मध्य लड़ाई  देखने को मिल रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद पाकिस्तान सरकार का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि  आसिया बीबी पर यदि कोई और मुकदमा नहीं चल रहा तो वो स्वतंत्र हैं।  ऐसे में आसिया पाकिस्तान छोड़कर अपने पति  आशिक मसीह और बच्चों के पास लंदन जा सकती थी जिसमे उनका बहुत से संगठन साथ भी देने को तैयार थे।

लेकिन पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के भारी विरोध और हाफिज सईद जैसे लोगों के दबाव के कारण वहाँ की सरकार ने कट्टर पंथियों के साथ ये समझौता कर किया हैं जिसके तहत   आसिया बीबी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी देश छोड़कर नहीं जा सकती.

सरकार और तहरीक-ए-लबैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने 5 पॉइंट का समझौता किया हैं . इस समझौते के अनुसार बीबी का नाम एग्जिट कण्ट्रोल लिस्ट में (इसीएल) रखा जाएगा जिसमें उन सभी का नाम शामिल हैं जो कि पाकिस्तान नहीं छोड़ सकते, और इसके लिए पाकिस्तान सरकार ने टीएलपी को जल्द ही क़ानूनी प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासान भी दिया हैं ।

इस तरह पाकिस्तान की सरकार उन्हें वहाँ रखना चाहती हैं लेकिन वहाँ के कोर्ट ने उन्हें क़ानूनी तौर पर छोड़ दिया हैं. अब  आसिया बीबी का भविष्य ही पाकिस्तान की विश्व में बनी छवि का निर्धारण करेगा,क्योंकि तत्कालीन परिस्थितियों में साफ समझा जा सकता हैं कि आसिया बीबी जेल से बाहर लेकिन पाकिस्तान के भीतर रहकर तो सुरक्षित नहीं हैं और वहाँ की सरकार की उन्हें देश में रोके रखने की बाध्यता भी पाकिस्तानी सरकार को कठगरेमें खड़ा कर रही हैं.

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