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बबिता फोगाट का जीवन परिचय | Babita Phogat biography in hindi

Babita Phogat biography in hindi बबिता फोगाट एक भारतीय महिला कुश्ती पहलवान है. 2014 में स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में कॉमनवेल्थ खेल का आयोजन हुआ था, जिसमे बबिता कुमारी फोगाट ने 55 किलो ग्राम भार वर्ग मे फ्रीस्टाईल कुश्ती में कनाडा की महिला पहलवान ब्रितानी लाबेरदुरे को हराकर स्वर्ण पदक पर जीत हासिल की थी. इनके ऊपर हाल ही में एक फ़िल्म भी बनी थी जिसका नाम था ‘दंगल’ इस फ़िल्म को लोगों की बहुत सराहना मिली और यह फ़िल्म सुपरहिट रही.

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बबिता फोगाट का जीवन परिचय

Babita Phogat biography in hindi

बबिता फोगाट के बारे में जानकारी (Babita Phogat personal information)

नामबबिता फोगाट
व्यवसायकुश्ती
जन्म दिन20 नवम्बर 1989
जन्म स्थानभिवानी, हरियाणा 
राशिवृश्चिक
नागरिकताभारतीय
बालों का रंगकाला
आँखों का रंगकाला
ऊँचाई5 फीट 3 इंच 
वजन55 किलो ग्राम
धर्महिन्दू
वैवाहिक स्थितिअविवाहित
पसंदयात्रा करना और दौड़ना

बबिता फोगाट की शिक्षा (Babita Phogat education)

अपने कॉलेज की पढाई उन्होंने एम डी यू, रोहतक हरियाणा से की है. इन्होने पढाई तो की लेकिन कुश्ती से इन्हें समय कम मिल पता था, जिस वजह से ये अपने क्लासेज कम करती थी इनके शिक्षक इनकी मदद कर दिया करते थे.   

बबिता फोगाट का व्यक्तिगत जीवन (Babita Phogat personal life)

बबिता फोगाट को लोग भारतीय कुश्ती वर्ल्ड में एक ही नाम से जानते है. 6 साल की उम्र से ही बबिता अपने गाँव में अपने भाई बहनों के साथ कुश्ती की अभ्यास करती थी, वो गाँव में व्याप्त लड़का और लड़कियों में भेद देख कर दुखी होती थी और इस सोच को बदलने के लिए कोशिश करने के बारे में सोचती थी. इसमें उनका साथ उनके पिता ने दिया उनका ये मानना था कि लड़कियां किसी भी तरह से लड़कों से कम नहीं है. बबिता फोगाट के पिता कर्णम मल्लेश्वरी का जीवन परिचय से बहुत प्रभावित थे, महावीर फोगाट के कोच चन्दगी राम ने ही उनको बोला था कि तुम अपनी अपनी बेटियों को भी पहलवानी में लाने के बारे में सोच सकते हो. इस तरह से फोगाट बहनों का कुश्ती में आने का रास्ता खुल गया और वो पहलवानी के अभ्यास कार्य में लग गई. उनके पिता ही उनके कोच भी थे. उनके पिता भी अपने समय के मशहुर पहलवान रह चुके है. उन्होंने अपनी बेटियों को अच्छी तालीम दी. 26 वर्षीय बबिता आज अपनी पहचान पूरी दुनिया में बना चुकी है. महावीर सिंह फोगाट बायोग्राफी व दंगल फिल्म की कहानी यहाँ पढ़ें.                 

बबिता फोगाट का पारिवारिक जीवन (Babita Phogat family)

बबिता फोगाट के परिवार में उनके माता पिता, तीन बहन और एक भाई है. पिता का नाम महावीर सिंह फोगाट है. इनके पिता मान सिंह भी पहलवानी कर चुके थे अपने पिता से ही प्रेरित होकर महावीर सिंह ने भी इस क्षेत्र को अपना लिया, और बलाली गाँव जोकि हरियाणा के भिवानी जिले में है वहा पर पहलवानी का काम करने लगे. बबिता फोगाट के माता जी कि नाम शोभा कौर है. वह घरेलु महिला है, वह अपनी बेटियों का बहुत अच्छा ख्याल रखती है. हालांकि पहले वो अपनी बेटियों को पहलवानी में भेजने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी. उन्होंने अपने पति महावीर से कहा भी लड़कियों को पहलवानी में मत भेजो, पहलवान लड़की, कटे हुए बाल, कौन इनसे शादी करेगा तो महावीर ने जवाब दिया कि अगर एक औरत देश की प्रधानमंत्री बन सकती है तो पहलवान क्यों नहीं. बबिता अपनी जीत का सारा श्रेय अपनी माता जी को देती है. वह हमेशा अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहती है. बहन संगीता फोगाट भी कुश्ती लडती है. इन दोनों को लोग फोगाट बहनों के नाम से जानते है. दूसरी बहन का नाम संगीता फोगाट है और तीसरी बहन का नाम ऋतू फोगाट है इसके अलावा एक भाई जिनका नाम मोडू है. इसके साथ ही बबिता फोगाट के चाचा राजपाल के भी बच्चे कुश्ती में है जिनके नाम है प्रियंका और विनेश जिनकी देखभाल महावीर फोगाट करते है. फोगाट बहनों के सफल होने के साथ ही मीडिया में इनकी चर्चा होने लगी.     

बबिता फोगाट का करियर (Babita Phogat career)

पंजाब के जालंधर में 2009 में कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप हुई थी, जिसमे इन्होने 51 किलो ग्राम के भार वाले कुश्ती में गोल्ड मेडल जीता था. 2010 में दिल्ली में आयोजित हुई कॉमनवेल्थ गेम में इन्होने रजत पदक भी जीता है. ये जीत इनके करियर का एक अच्छा मोड़ साबित हुआ. इसके साथ ही 2012 के वर्ल्ड कुश्ती प्रतियोगिता में ब्रोंज मेडल भी प्राप्त किया है. फिर 2011 कॉमनवेल्थ कुश्ती चैम्पियनशिप में 48 किलो ग्राम के फ्रीस्टाईल में बबिता फोगाट ने गोल्ड मेडल जीता. 2013 एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप टूर्नामेंट जोकि दिल्ली में आयोजित हुआ था, उसमे बबिता कुमारी ने उत्तर कोरिया की हान कुम ऑफ़ को 55 किलो ग्राम के फ्रीस्टाईल कुश्ती में हरा दिया था.

2014 का साल उनकी उपलब्धी के लिए नया आयाम था, 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों मे 55 किलो ग्राम की फ्रीस्टाईल कुश्ती में अपनी प्रतिद्वंदी स्कॉटलैंड की कथ्र्य्न मार्श को 4:1 से हराया. वह इंग्लैंड की लौइसा पोरोगोव्सका को हरा कर सेमी फाईनल में प्रवेश कर गई फिर कनाडा की ब्रित्तनी लावेर्दुरे को हराकर 3:1 से जीत हासिल की, और उन्होंने गोल्ड मेडल जीत लिया. 2014 के राष्ट्रमंडल कुश्ती चैम्पियनशिप में बबिता अपनी जीत को दोहरा नहीं पाई. वे इस प्रतियोगिता में ब्रोंज पदक ही जीत पाई.

2015 एशियन कुश्ती चैम्पियनशिप में बबिता कुमारी फाइनल में जाकर उत्तर कोरिया की पाक योंग मि से अंतिम के 5 सेकेण्ड में हार गई थी, और फाईनल में पहूँचने का अपना मौका खो दी. 

2016 के रियो ओलिंपिक जोकि रियो डी जनेइरो में आयोजित हुआ था, में उन्होंने अपने चचेरे भाई विनेश फोगाट के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया. वह ओलम्पिक के लिए भारतीय कुश्ती में तीसरी और अंतिम प्रविष्टी थी. वह क्वालीफाईग टूनामेंट में डोपिंग टेस्ट में फेल कर गई. वह 1-5 से पहले राउंड में ही हार गई.                        

बबिता फोगाट को मिले अवार्ड और उपलब्धियां (Babita Phogat achievements)

  • बबिता फोगाट को भारत सरकार की तरफ से अर्जुन पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है.
  • डेव स्चुल्त्ज़ मेमोरियल टूर्नामेंट 2010 में छठा स्थान प्राप्त किया.
  • इसी टूर्नामेंट के 2012 में उन्होंने ब्रोंज जीता.
  • फिर 2014 में सिल्वर भी जीतने में कामयाब रही.
  • 2010 में महिलाओं के लिए फ्रीस्टाईल कुश्ती में 51 किलो ग्राम के भार वर्ग में सिल्वर जीता.                

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विभूति अग्रवाल मध्यप्रदेश के छोटे से शहर से है. ये पोस्ट ग्रेजुएट है, जिनको डांस, कुकिंग, घुमने एवम लिखने का शौक है. लिखने की कला को इन्होने अपना प्रोफेशन बनाया और घर बैठे काम करना शुरू किया. ये ज्यादातर कुकिंग, मोटिवेशनल कहानी, करंट अफेयर्स, फेमस लोगों के बारे में लिखती है.
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