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बच्चों को कैसे पढ़ाएं?

बच्चों को कैसे पढ़ाएं (बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका) [How to teach kids in hindi]

क्या आपको वाकई में आज के समय में अपने बच्चों को पढ़ाना आसान लगता है. शायद आपका जवाब होगा बिल्कुल नहीं. बच्चे जितने मासूम होते हैं, उतने ही चंचल भी होते हैं, और उनको किसी एक जगह पर बैठाकर पढ़ाना ना सिर्फ उनके पेरेंट्स के लिए बल्कि उनके टीचरों के लिए भी काफी कठिन टास्क होता जा रहा हैं. कई बच्चों के पेरेंट्स तो बच्चों को डांट कर मार कर पढ़ाई करने के लिए कहते रहते हैं, परंतु ऐसा बिल्कुल भी उचित नहीं है. यदि आप अपने बच्चों को डांट -मार कर पढ़ाई करने के लिए कहेंगे तो वह आपकी बात एकदम से नहीं सुनेंगे और यहां तक की हो सकता है, वह आपकी अहमियत भी नहीं समझे. यह जरूरी है, कि आप अपने बच्चों को समझदारी से और नए-नए तरीकों से पढ़ने के लिए प्रेरित करें. बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे तरीकों का प्रयोग करें. जिससे बच्चों को यह न लगे कि वह पढ़ाई जैसा बहुत कठिन कार्य कर रहे हैं. बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके सामने कुछ ट्विस्ट रखें. जिससे बच्चों को थोड़ा पढ़ाई में इंटरेस्ट भी आएगा. बच्चों को खेल- खेल में और मस्ती के साथ पढ़ाएं जिससे उनको बोरिंग ना लगे और उनके अंदर पढ़ने के लिए एक्साइटमेंट भी जागृत हो सके. यदि आप भी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए परेशान रहते हैं , और यह आपकी शिकायत रहती है, कि कैसे अपने बच्चों को पढ़ाएं. तो यह लेख आपके लिए ही है, हम इस लेख के जरिए आपको अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए अनोखे और नए-नए तरीके बताने वाले जिससे आपकी शिकायत भी दूर हो सकती है और आपके बच्चे का पढ़ने में भी मन लगेगा.

baccho ko padhane ka aasan tarika in hindi

बच्चों को पढ़ाने के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें ?

बच्चों के ऊपर भूलकर भी हाथ ना उठाएं –

यदि आप सोचते हैं, कि बच्चे को मारपीट कर पढ़ने के लिए मना सकते हैं, तो यह तरीका बिल्कुल सही नहीं होगा. आपको बच्चे को मारने से उसका पढ़ाई के प्रति डर और ज्यादा हो जाएगा और फिर पढ़ाई करने से कतराने लगेगा. बच्चे को कुछ याद भी रहेगा तो इस दौरान वह भी सब कुछ भूल जाएगा इसलिए, बच्चों को कभी मारना नहीं चाहिए बल्कि प्यार से समझाना चाहिए.

बच्चों को कभी भी डराना-धमकाना नहीं चाहिए-

बच्चों को कभी भी डराना – धमकाना नहीं चाहिए यदि आपका सोचना है, कि डांटने – धमकाने से आपके बच्चे पढ़ाई करने लगेंगे तो यह बिल्कुल भी आपका गलत सोचना है. इमोशनल रूप से बच्चों को डांटने से बच्चों की मासूमियत पर गहरा प्रभाव पड़ता है. इसलिए जरूरी है, कि बच्चों को प्यार से खेल – खेल में लाड़- दुलार से पढ़ने के लिए प्रेरित करें.

बच्चों के द्वारा किए गए सवालों का जवाब प्यार से दे –

अगर आपका बच्चा आपसे कुछ कहना चाहता है या फिर कोई प्रश्न पूछना चाहता है, तो उसकी बातों को अनसुना नहीं करना चाहिए और ध्यानपूर्वक उनको समझना चाहिए. और उसकी बातों का सही एवं सोच – विचार कर जवाब देना चाहिए. ऐसा करने से आपके बच्चे आपको अपनी समस्याओं एवं प्रश्नों के बारे में खुलकर बिना डरें बता सकेंगा.

अपने बच्चों को किसी के भी सामने डांटना नहीं चाहिए –

चाहे मेहमान हो या फिर घर का ही कोई सदस्य क्यों ना हो, अपने बच्चों को किसी के भी सामने डांटना बिल्कुल भी नहीं चाहिए. अपने घर के सदस्यों के बीच में तो उसे कभी भी नहीं डांटना चाहिए, यह नहीं समझना चाहिए कि हमारे घर के ही सदस्य है, इनके सामने डांटने से क्या होगा. बच्चों को किसी के भी सामने डांटने से उनका मनोबल नीचे गिरता. अगर बच्चों का मनोबल गिरता है, तो उनका पढ़ाई में भी मन नहीं लगता और वह खुद को अपमानित मासूम करते रहते हैं. इसीलिए बच्चों को कभी भी किसी भी चीजों के लिए उन्हें प्यार से समझाएं और उनका मनोबल बढ़ाते रहें.

बच्चों को पढ़ाने के बेहतरीन तरीके क्या हो सकते हैं ?

1. बच्चों को अनुशासन जरूर दिखाएं

अनुशासन बच्चों – बड़ों दोनों के लिए जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग होता है. जब आप अपने बच्चे को पढ़ाना शुरू करें तो उनको सर्वप्रथम अनुशासन जरूर सिखाएं. जैसे :- कैसे बड़ों से बात करनी चाहिए , कैसे अपने टीचरों का सम्मान करना चाहिए , स्कूल में कैसे बैठते हैं , प्रतिदिन सुबह सबको नमस्कार करना सिखाना चाहिए और घर के बाहर या स्कूल में किसी से भी लड़ाई नहीं करनी चाहिए आदि महत्वपूर्ण बातों को जरूर बच्चों को सिखाना चाहिए. अनुशासन भी पढ़ाई का ही एक महत्वपूर्ण अंग होता है. इसलिए यह सबसे पहले जरूरी है, कि अपने बच्चों को स्कूल भेजने से पहले उसको अनुशासन सिखाएं.

2. छोटे बच्चे को पढ़ाने के लिए चित्रों का प्रयोग करें –

यदि आपका बच्चा छोटा है, तो उसको पढ़ाने के लिए रंग- बिरंगी चित्र वाली किताबें घर लेकर आए. ऐसा इसलिए क्योंकि सुनने से ज्यादा देखी हुई चीजें मस्तिष्क में अपनी छाप छोड़ती है. जब बच्चा किताबों में बने रंग- बिरंगे चित्रों को देखता है, तो उसकी रूचि इसमें बढ़ती है, और चित्रों को देखकर बच्चा उनको समझने की कोशिश करता है. इसीलिए बच्चों को ऐसी चीजें से पढ़ाई करानी चाहिए. ऐसा करने से उनका पढ़ाई में भी मन लगता है, और आपको उन्हें ज्यादा पढ़ने के लिए भी प्रेशर डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

3. खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करें –

अपने बच्चों के लिए थोड़ा समय निकालकर उनके साथ बच्चा बनकर खेल-खेल में एक अलग अंदाज के साथ उनको पढ़ाने की कोशिश करें. बच्चों -बच्चों के साथ मिलकर उनके छोटे-छोटे खेलों में हिस्सा लेकर उनको नई-नई चीजें कोई बारे में सिखा सकते हैं. ऐसा करके आप बच्चों को खेल – खेल में पढ़ा भी लेंगे और उनको थोड़ी खुशी भी मिल जाएगी.

4. बच्चों को कभी भी जबरदस्ती पढ़ने के लिए ना कहें –

ज्यादातर देखा जाता हैं की, बच्चों के माता-पिता उनको पढ़ने के लिए दबाव डालते रहते हैं, लेकिन अपने बच्चों के साथ ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए. बच्चों को जब पढ़ने का मन करे तो उन्हें पढ़ने देना चाहिए. यदि उनका पढ़ने का मन नहीं कर रहा है, तो उन्हें कभी भी इसके लिए जबरदस्ती नहीं करना चाहिए. आपके जबरदस्ती करने से बच्चा तो पढ़ने के लिए बैठ जाएगा परंतु उसका पढ़ने में कभी भी मन नहीं लगेगा. आपका बच्चा केवल आपके डर के वजह से ही बुक लेकर बैठ तो जायेगा , लेकिन वह पढ़ेगा नहीं. हम सभी जानते हैं की, बच्चों का स्वभाव थोड़ा जिद्दी होता हैं. इसलिए आप जितना भी डालेंगे उतना ही वह पढ़ने के लिए इंकार करेंगे. और यही कारण है, कि बच्चों को कभी भी जबरदस्ती डांट – कर पढ़ने के लिए नहीं बैठाना चाहिए उनको प्यार से समझाएं.

5. छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और नई तकनीक का प्रयोग करें –
अपने छोटे बच्चे को पढ़ाने के लिए आप वीडियो बनाकर कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल पर दिखाएं ये, बच्चों को पढ़ाने का आसान एवं मजेदार तरीका है. आधुनिक गैजेट बच्चों को बिगाड़ते नहीं है, बल्कि आपको नए-नए लर्निंग टेक्निक से पढ़ाने में सहायता प्रदान करते हैं. आज के समय में यूट्यूब पर ऐसे -ऐसे लर्निंग वीडियो आपको मिल जाएंगे. जिसे देखकर बच्चे आधा से ज्यादा चीजें खुद-ब-खुद ही सीख जाते हैं. अपने बच्चों को नई-नई क्रिएटिव तकनीक से पढ़ाने का बहुत ही फायदा है.

6. बच्चों की प्रॉब्लम समझे और उनको पहचानने की कोशिश करें
जिद्दी बच्चों का पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता उनको पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है, कि आप उनकी सर्वप्रथम समस्या को समझने की कोशिश करें. बच्चे को कौन – सा सब्जेक्ट अच्छा लगता है, उसे कौन सी चीजें याद करने में आसानी होती है या फिर उसे दिक्कत होती है और उसे किस विषय में लिखने- पढ़ने में समस्या होती है. इन सभी चीजों को जब तक आप समझ कर उनका सलूशन नहीं करेंगे. तब -तक आप  अपने  बच्चों के  पढ़ाई के प्रति रवैया को बदल नहीं सकेंगे. यदि  एक बार आप  अपने बच्चों की परेशानी  समझ लेने तो , आप उनका हल भी निकाल  सकेंगे. ऐसा करने से बच्चों के पढ़ाई के प्रति आप एक अपना अहम रोल भी अदा कर सकते हैं. इन सभी चीजों को करने से अपने बच्चे का पढ़ाई के प्रति नकारात्मकपन भी आसानी से आप ठीक कर सकेंगे.

7. गिफ्ट देने के बहाने बच्चों को पढ़ाएं –
जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि सभी बच्चों को गिफ्ट बहुत ही पसंद होता है. अक्सर आपने देखा होगा कि यदि बच्चा बात नहीं सुनता तो उसे गिफ्ट का लालच देने से वे सभी आपकी बातें सुनने लगते हैं और आप जो बोलते हैं, वे सभी चीजें करने के लिए वे तुरंत तैयार भी हो जाते हैं. अक्सर बच्चे पढ़ाई से कतराते रहते हैं. यदि आप अपने बच्चों से यह कहते हैं, कि अगर आप अच्छे से पढ़ाई करोगे तो आपको अच्छा सा गिफ्ट दिया जाएगा और अगर आप पढ़ाई नहीं करोगे तो आपको कुछ भी नहीं मिलेगा. इस तरह बच्चों को गिफ्ट का लालच दिलाकर आप उनसे पढ़ाई के लिए कह सकते हैं. गिफ्ट पाने के चक्कर में बच्चा अच्छे से पढ़ाई भी करने के लिए तैयार हो जाएगा. क्योंकि छोटे बच्चे को नए-नए गिफ्ट लेना बहुत ही अच्छा लगता है.

8. बच्चों के पढ़ाई के दौरान थोड़ा उन्हें ब्रेक प्रदान करें –
ज्यादा समय तक पढ़ाई करने में बच्चों का मन भी नहीं लगता, लेकिन मां- बाप के डर से वे जबरदस्ती पढ़ते रहते हैं, जो कि उनके स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होता है. बच्चों को कम से कम पढ़ाई के दौरान 20 से 35 मिनट का ब्रेक जरूर देना चाहिए. बच्चों को छोटा सा ब्रेक मिलने से उनका माइंड फ्रेश होता है, और दोबारा पढ़ाई में मन अच्छे से लगता है. ब्रेक के दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, जैसे कि आपका बच्चा ज्यादा समय तक कंप्यूटर या मोबाइल फोन का प्रयोग ना करें. क्योंकि इन सभी चीजों का ज्यादा प्रयोग करने से बच्चों की आंखें कमजोर हो जाती हैं और उनका पढ़ाई से भी मन भटकने लगता है. इसलिए कोशिश करें कि बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय इन सभी चीजों से दूर रखें. और हो सके तो ब्रेक के दौरान बच्चों के साथ पढ़ाई से संबंधित किसी भी प्रकार का गेम खेलें और कुछ ऐसी बातें करें जो उनकी पढ़ाई में मदद करें. ऐसा करने से बच्चों का मन पढ़ाई के प्रति लगेगा और इसके साथ ही उन्हें इन सभी चीजों को करने में अच्छा भी लगेगा.

9. बच्चों को सही जगह पर बैठकर पढ़ाएं –

हमने देखा है, कि अक्सर बच्चों के पेरेंट्स कहीं पर भी बैठ कर बच्चों को पढ़ाने लगते हैं, जो कि बच्चों को पढ़ाने का बिल्कुल भी सही तरीका नहीं है. आपको अपने अनुसार नहीं बच्चे के कंफर्टेबल के अनुसार उसे पढ़ाना चाहिए. बच्चों को पढ़ाने के लिए स्टडी रूम या फिर बेडरूम इसकी सही जगह हो सकती हैं. क्योंकि स्टडी रूम या बेडरूम बच्चों को पढ़ने के लिए एक शांत वातावरण की तरह हो सकता है. यदि आप बच्चों को इन्हीं जगह पर हमेशा बैठ कर पढ़ाएंगे , तो वह उसी जगह पर बैठकर पढ़ना पसंद करेंगे और इससे उनका कंसर्टेशन भी इन्हीं जगहों पर अच्छे से बनेगा. इसलिए बच्चों को घर में बैठकर पढ़ने के लिए एक स्टडी रूम या फिर बेडरूम जरूर तैयार करना चाहिए.

बच्चों को पढ़ने के लिए कैसे प्रेरित करें ?

बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित भी करना आवश्यक है. कुछ प्रमुख तरीकों से आप बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं.

  • बच्चों को अपने तरीके से पढ़ने के लिए प्रेरित करें.
  • बच्चों को ऐसे – ऐसे टास्क दे , जो कि उनके पढ़ाई से संबंधित हो और उनकी रुचि से भी मेल खाता हो. ऐसा करने से उनका पढ़ाई के प्रति मन भी लगेगा.
  • बच्चों को खुद कुछ करके और सीखने का अवसर प्रदान करते रहें.
  • बच्चों को यह एहसास दिलाएं कि कि आप बतौर पेरेंट्स उनकी परवाह करते हैं.
  • बच्चों को पढ़ाई के दौरान कुछ फीडबैक भी प्रदान करते रहें.
  • बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने के लिए शाम को किसी समय बच्चों का ग्रुप तैयार करें और उसमें पढ़ाई से संबंधित प्रश्न उत्तर का गेम खिलाएं ऐसा करने से बच्चे बोरिंग भी नहीं महसूस करेंगे और पढ़ाई के प्रति उनका नॉलेज भी बढ़ेगा.

कभी भी बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेशर नहीं करना चाहिए और प्यार से समझाना चाहिए. बच्चों को पढ़ाने से पहले उनको अनुशासन में रहना सिखाएं क्योंकि अनुशासन भी पढ़ाई का ही एक महत्वपूर्ण अंग होता है. ऊपर बताए गए स्टेप को फॉलो करके आप अपने बच्चों को पढ़ाई करने के लिए आसानी से प्रेरित कर सकते हैं.
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