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क्या है बिल इन और बिल आउट विधान | What is Bail in and Bail Out legislation in India in hindi

वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 के अंतर्गत क्या है बिल इन और बिल आउट विधान | What is Bail in and Bail Out legislation in FRDI bill in hindi

वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 इस समय एक चर्चा का विषय बना हुआ है. इस बिल को लेकर विपक्ष पार्टियों द्वारा काफी नाराजगी जताई जा रही है. वहीं आम जनता के मन में भी इस बिल को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. दरअसल इस बिल में ‘बेल इन’ के प्रावधान को लेकर लोगों के मन में एक डर बना हुआ है. लोगों को डर है कि इस बिल के पास होते ही उनके द्वारा बैंकों में जमा पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा. आखिर क्या है ये ‘बेल इन’ का प्रावधान जिसके चलते वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 को लेकर इतनी चर्चाएं की जा रही हैं.

क्या है वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 (What is FRDI Bill)

‘बेल इन’ के बारे में समझने से पहले वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 के बारे में जानना काफी जरूरी है. दरअसल वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 का प्रस्ताव, अगस्त वर्ष 2017 में संसद भवन के निचले सदन यानी लोकसभा में देश के वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा रखा गया था. जिसके बाद इस विधेयक को दोनों सदनों की एक मिली-जुली संसदीय समिति के पास विधेयक के नियमों का आंकलन लिए भेजा गया है. ये संसदीय समिति इस बिल पर संसद के अगले सत्र में एक रिपोर्ट पेश करेगी. इस बिल के अंदर ही बेल-इन का जिक्र किया गया है. जिसका विरोध लोगों द्वारा किया जा रहा है.

Bail in and Bail Out legislation

क्या है बेल इन का प्रावधान (What is Bail In legislation in India in hindi)

इस बिल में लोगों को जो चीज सबसे ज्यादा परेशान कर रही है वो है ‘बेल इन’. इस प्रावधान के मुताबिक अगर किसी बैंक का दिवालिया निकल जाता है, तो वो बैंक अपने खाताधारकों के द्वारा जमा करवाए गए पैसों का इस्तेमाल अपनी स्थिति को सुधारने के लिए कर सकता है. यानी अगर अपने किसी बैंक में अपने पैसे जमा करवाएं हैं, तो उन पैसों का पूरा इस्तेमाल करने की आजादी बैंक को मिल जाएगी और आपको उन पैसों के बदले बैंक अपने कुछ शेयर दे सकता है या फिर कोई और गारंटी.

बेल इनके नुकसान (Bail-In side effects)

बेल इन प्रावधान को मंजूरी मिल जाने से लोगों का बैंकों के प्रति जो नजरिया है वो पूरी तरह बदल जाएगा. लोग सोच समझकर किसी बैंक में अपने पैसे जमा करवाएंगे या कोई एफडी (FD) बनवाएंगे. इतना ही नहीं लोग बैंकों की जगह शेयर बाजार जैसी जगहों पर अपना पैसा निवेश करने से पहले सोचेंगे. लेकिन भारत में अधिकतर लोगों को शेयर बाजार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. हालांकि वित्त मंत्री जेटली ने लोगों को भरोसा दिया है कि सरकार उनके पैसों को बिल्कुल डूबने नहीं देगी.

क्या है बेल आउट’ (What is Bail Out legislation in India)

इस समय हमारे देश में बेल आउट के जरिए बैंकों की मदद करने का प्रावधान है. ‘बेल-आउट’ के जरिए जब कोई बैंक कंगाल होने के स्थान पर आ जाता है तो सरकार उसकी वित्तीय सहायता करती है. सरकार देश के कोष में से पैसे निकाल कर बैंक को देती है ताकि वो बैंक दोबारा से खड़ा हो सके. लेकिन बेल आउट को अब वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक 2017 के जरिए बेल इन में बदला जा रहा है. यानि अब बैंक के कंगाल होने पर सरकार की जगह उस बैंक के खाताधारक उस बैंक को अपनी जमा पूंजी देकर उसकी मदद करेंगे.

आखिर क्यों होते हैं बैंक दिवालिया (Reason behind Bankrupt)

दरअसल बैंक के दिवालिया होने के पीछे कई सारे कारण हैं, लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण कारण है, वो है बैंकों द्वारा दिए गए लोन की राशि का डूब जाना. अक्सर बैंक अच्छे खासे ब्याज पर लोगों को लोन दे देते हैं. लेकिन कई बार बैंक दिए गए लोन के पैसों को लोगों से वसूल नहीं कर पाता है. ऐसे हालात में बैंक पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और बैंक दिवालिया हो जाता है.

मौजूदा समय में अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है तो डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन के नियमानुसार बैंक के खाताधारकों को बैंक के दिवालिया होने पर 1 लाख रुपये तक मिलने की गारंटी मिलती है. लेकिन इस नए बिल में डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन को सरकार द्वारा समाप्त किया जाना है. इतना ही नहीं बैंक के दिवालिया होने पर सरकार द्वारा बेल-आउट के जरिए उसकी जो मदद की जाती थी, उसे इस नए बिल में बेल इन कर दिया गया है.

देश में मौजूदा बैंकों के हालात (what is the condition of India banks at present)

इस समय भारत में कई सारे सरकारी और निजी बैंक मौजूद हैं. वहीं इन बैंकों की गैर-लाभकारी संपत्ति पर नजर डाली जाए, तो वो बेहद ही चौकाने वाली है. गैर-लाभकारी संपत्ति बैंक के द्वारा दिए गए उस लोन की राशि को कहते हैं, जिसका ब्याज बैंक को 180 दिनों के बाद भी लोन लेने वालों की ओर से नहीं मिलता है. वहीं अगर देश के सबसे बड़े बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की गैर-लाभकारी संपत्ति को देखा जाए तो इस साल ये संपत्ति 1,88,069 रुपए तक पहुंच गई है.

निष्कर्ष

भारत में नोटबंदी के बाद से लगभग हर किसी का पैसा बैंकों में जमा है. वहीं बेल इन को मंजूरी मिल जाने के बाद से लोगों के बीच अपने पैसों को लेकर चिंता बनीं रहेगी. वहीं कई विशेषज्ञों ने भी सरकार के इस फैसले को सही नहीं बताया है. विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करने से बैंक के खाताधारकों का पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा और लोगों का देश के बैंक पर से भरोसा उठ जाएगा.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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