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बेग़म जान फिल्म रिव्यु और उसके प्रसिद्ध डायलोग | Begum Jaan movie Review and famous dialogues in hindi

Begum Jaan movie review and famous dialogues in hindi इन दिनों इस फिल्म के डायलॉग कई लोगों के ज़हन में अपना घर बना चुके है. यूट्यूब में बेगम जान के ट्रेलर का व्यू करोड़ो तक पहुँच चूका है, और लोग बेसब्री से उस फ़िल्म का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमे तवायफ रानियों की तरह अपने हक़ के लिए लड़ने वाली है. बेग़म जान बंगला सिनेमा ‘राजकहिनी’ का रीमेक है, जो 14 अप्रैल यानि आज रिलीज़ हो गई है. इस फ़िल्म में मुख्य किरदार के तौर पर राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत अदाकारा विद्या बालन नज़र आने वाली हैं. इस फ़िल्म के निर्देशक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता श्रीजीत मुख़र्जी हैं. राजकाहिनी बंगला में एक सफ़ल सिनेमा रही और उसके कथानक को देखते हुए निर्देशक ने इसका रूपांतरण हिंदी में करना सही समझा. विद्या बालन ने इस फ़िल्म में एक कोठे की मालकिन के रूप में अभिनय किया है. सिनेमा की कहानी सन 47 की आज़ादी के बाद सन 48 के आस पास की सत्य घटनाओं से प्रेरित है.

हालही में आई फ़िल्म बेग़म जान श्रीजीत मुख़र्जी की ही बंगला फ़िल्म ‘राजकाहिनी’ का रीमेक है. राजकाहिनी ने बंगला सिनेमा इंडस्ट्री में फिल्मों का नया आयाम बनाया था, किन्तु क्षेत्रीय सिनेमा होने की वजह से कई लोगों ने फिल्म राजकाहिनी नहीं देखी है, अतः फिल्म बेग़म जान के मद्देनज़र रखते हुए इस फिल्म के बारे में बताया गया है.

बेग़म जान फ़िल्म की कहानी (Begum jaan movie story)       

ये फ़िल्म सन 47 की आजादी के ख़ूनी खेल को नयी विडंबनाओं के साथ दिखाती है. आजादी के दौरान बॉर्डर कमीशन सर सायरिल राड्क्लिफ भारत का विभाजन करना चाहता है. इस समय सरकारी अफसर ये नहीं समझ पाते कि बॉर्डर की ये लाइन बेग़म जान के वैश्यालय से होकर गुज़रने वाली है. इस वैश्यालय का आधा हिस्सा विभाजन के बाद भारत में तथा आधा पकिस्तान में हो जाता है. अपने वैश्यालय को बचाने की लढाई में बेग़म जान की कहानी फ़िल्म को आगे बढ़ाती है.

bagum jaan

बेग़म जान फिल्म और उसके प्रसिद्ध डायलोग

Begum Jaan movie Review and famous dialogues in hindi

बेग़म जान फ़िल्म की समीक्षा (Begum jaan movie review)

यह फिल्म मुख्यतः एक नायिका प्रधान फ़िल्म है. इसमें बेग़म जान की भूमिका में विद्या बालन ने अभिनय किया है. फ़िल्म में इस्तेमाल होने वाली भाषा पात्रों के हिसाब से बहुत ही सक्षम है और लोगों को विद्या की डायलॉग- बाज़ी बहुत पसंद आई है. बेग़म जान अपने वैश्यालय को लेकर बहुत ही गर्वान्वित महसूस करती है और इसे अपने घर की तरह से देखती है. इसकी वजह ये है कि उसके कोठे पर शहर के सभी लोग आते जाते रहते हैं. इनमे लोकल राजा, ब्रिटिश सरकार के अफसर, पुलिस आदि लोग समय समय पर आते रहते हैं. जल्द ही बेग़म जान को इस बात का पता लग जाता है कि उन्हें आने वाले समय में बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि बंटवारे की वजह से उनका वैश्यालय खतरे में पड़ने वाला है. इस कनफ्लिक्ट के साथ कहानी आगे बढती हुई सभी पात्रों और अभिनेताओं को भरपूर मौक़ा देती है. बेग़म जान अपने वैश्यालय की रक्षा के लिए एक शेरनी की तरह युद्ध करती है. निर्देशक ने नायिका के चरित्र को बलवान बनाने के लिए  एनीमेशन का सहारा लिया है.

फ़िल्म की बैक स्टोरी में निर्देशक ने नरेशन और सेकेंडरी पात्रों का खूब इस्तेमाल किया है. चंकी पाण्डेय एक विलेन के रूप में नज़र आये. चंकी पाण्डेय का किरदार सभी पात्रों के मध्य रह कर भी फ़िल्म में एक आउटसाइडर की तरह लगता है. नसीर एक लोकल राजा की तरह नज़र आते हैं, जो अंग्रेजी हुकूमत के अनुसार ही अपनी सारी कार्यवाही करता है.

बेग़म जान फ़िल्म का स्क्रीनप्ले (Begum jaan movie screenplay)

बेग़म जान का स्क्रीनप्ले स्वयं निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी ने कौसर मुनीर के साथ मिल कर लिखा है. स्क्रीन पर सारे चरित्रों को उजागर करने में स्क्रीनप्ले बहुत ही सक्षम साबित हुआ. स्क्रीनप्ले के दौरान कहानी का जैसा माहौल बनता है लोकेशन का इस्तेमाल भी ठीक उसी तरह से किया गया. फ़िल्म को उपयुक्त लोकेशन मिल पायी. इस फ़िल्म का लोकेशन मुख्यतः झारखंड रहा है. सभी पात्रों के बैक स्टोरी भी बहुत ही खुबसूरत तरीक़े से सामने आती है.   

बेग़म जान फ़िल्म का निर्देशन (Begum jaan movie direction)

इस फ़िल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संगीत निर्देशक ‘अनु मालिक’ ने संगीत दिया है. फ़िल्म अपने गानों के लिए और भी अधिक मशहूर हुई. फ़िल्म के दौरान बैक ग्राउंड स्कोर बहुत ही अधिक प्रभावित करती है. इस फ़िल्म में एक गाना होली पर फिल्माया गया है. यह गाना पूरी तरह क्रियात्मक रूप से सामने आया है. अधिकतर समय ये होता है कि एक ही फ्रेम में ग्यारह लोग आने से अक्सर सीन का एसेंस कम हो जाता है, किन्तु निर्देशक ने इस का पूरा ध्यान रखा और वीडियो बहुत ही अच्छी तरह से बन पायी. इस सिनेमा के साथ दो पुरानी फ़िल्मों की यादें ताज़ा हो जाती है, जो पैरेलल सिनेमा में हमेशा याद किये जायेंगे. इन दो फिल्मों में एक है सन 1983 में आई निर्देशक श्याम बेनेगल की फ़िल्म मंडी और सन 1987 में आई केतन मेहता की फ़िल्म मिर्च मसाला. संयोग की बात ये है कि नसीर इन दोनों फिल्मों में काम कर चुके हैं. कुल मिलाकर कर ये फ़िल्म मसाले के साथ साथ सच्चाई से भरी हुई है. सभी पात्र खूब मनोरंजन करते हैं तथा आज़ादी के समय की ख़राब परिस्थितियों को उजागर करते हैं. किसी भी फेमिनिस्ट को पसंद आये ऐसी सारी बात इस फ़िल्म के निर्देशन तथा स्क्रीनप्ले में मौजूद है.

बेग़म जान फ़िल्म के किरदार (Begum Jaan film cast) 

ये फ़िल्म कई प्रतिभाशाली और मक़ामी अभिनेता- अभिनेत्रियों से भरी हुई है. विद्या बालन, इला अरुण, नसीरुद्दीन शाह, चंकी पाण्डेय और अन्य कई कलाकारों ने इस फ़िल्म में जान फूंकी है. नीचे कलाकार और किरदार का नाम दिया जा रहा है..

किरदार का नाम कलाकार का नाम
बेग़म जान  विद्या बालन
अम्मा इला अरुण
रुबीना गौहर खान
गुलाबो पल्लवी शरद
जमीला प्रियंका सेतिया
अम्बा रिधीमा तिवारी
मैना फ्लोरा सैनी
रानी पूनम राजपूत
लता रविज़ा चौहान
शबनम इन्द्राणी चक्रबर्ती
मास्टर विवेक मुश्रान
राजा जी नसीरुद्दीन शाह
सलीम मिर्ज़ा सुमित निझावन
हर्षवर्धन आशीष विद्यार्थी
कबीर चंकी पाण्डेय
लाडली ग्रेसी गोस्वामी
लुइस माउन्टबैटन पैट्रिक आयर
सरदार पटेल अशोक धानुका

 बेग़म जान फिल्म का संगीत (Begum Jaan movie songs)

इस फ़िल्म को संगीत अनु मलिक और कौसर मुनीर ने दिया है. अनु मलिक म्यूजिक इंडस्ट्री के बहुत ही सफ़ल संगीत निर्देशक हैं, जिन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चूका है. इस फ़िल्म का संगीत टाइम्स म्यूजिक द्वारा रिलीज किया गया है. कई दिन बाद आशा भोंसले की आवाज़ में कोई नया गाना लोगों तक पहुँचा है. आशा जी ने इस फ़िल्म के लिए एक गाना ‘प्रेम में तोहरे’ गाया है, जो 14 फरवरी को रिलीज़ हुआ और लोगों में ख़ूब पसंद किया गया. ‘आज़ादियां’ इस फ़िल्म का दूसरा गाना है, जिसे सोनू निग़म और राहत फ़तेह अली खान ने मिल के आवाज़ दी है. इस फ़िल्म का एक और मशहूर गाना है- ‘मुर्शिदा’. इस गाने को विश्व भर में सराहे जा चुके मशहूर शायर राहत इन्दौरी ने लिखा है. इसके अलावा बाक़ी सभी गानों को कौसर मुनीर ने लिखा है. नीचे गाना और गायक का नाम दिया जा रहा है.

प्रेम में तोहरे आशा भोंसले
आज़ादियाँ सोनू निगम, राहत फ़तेह अली खान
ओ रे कहारों कल्पना पटवारी, अल्तमश फरीदी 
होली खेलें श्रेया घोषाल, अनमोल मलिक
प्रेम में तोहरे (रिप्राइज) कविता सेठ
वो सुबह अरिजीत सिंह, श्रेया घोषाल
मुर्शिदा अरिजीत सिंह

बेग़म जान फिल्म का प्रचार (Begum Jaan film promotion)

इसके पहले पोस्टर से ही इस फ़िल्म के प्रति लोगों की उत्सुकता बनती रही है. पहले पोस्टर में ही विद्या बालन का नया रूप लोगों के सामने आया. इस फ़िल्म के दो पोस्टर क्रमशः 14 मार्च और इसके एक महीने बाद 14 अप्रैल को रिलीज हुये. 14 मार्च 2017 में रिलीज हुए इसके ट्रेलर को लोगों ने खूब पसंद किया. कई सोशल वेबसाइट्स पर इस फ़िल्म के पोस्टर, ट्रेलर आदि लोगों द्वारा ख़ूब शेयर किये जा रहे हैं.

बेग़म जान फ़िल्म में विशेष और इसके संवाद (Begum Jaan movie dialogues)

अंग्रेजों द्वारा भारत को दो भागों में बांटने पर मुल्क के दोनों हिस्सों को खूब परेशानियाँ उठानी पड़ी हैं. इस बंटवारे ने कई लोगों की ज़िन्दगी को तबाह कर दिया. ये फ़िल्म इस बंटवारे के बाद की सत्य घटनाओं पर आधारित है. इस फ़िल्म की कहानी एक तवायफ के कोठे के इर्द गिर्द घुमती है. अतः इस फ़िल्म के संवाद थोड़ी वयस्कता लिए हुए हैं. इस फिल्म के कुछ प्रसिद्ध संवाद इस प्रकार हैं-

  • “अगस्त 1947 हिंदुस्तान के आखिरी वाइसराय लार्ड माउंट बैटन के फरमान ने एक मुल्क के दो हिस्से कर दिये हिन्दुस्तान और पकिस्तान .. ये कहानी ऐसे ही एक घर की है जिसके बीच से ये तलवार सी लकीर सर काटते हुए निकली तो सही मगर बाँट नहीं सकी..”.
  • “बाप, भाई, बेटा, शौहर बेग़म जान के चौखट के उस पार हर मर्द मुर्गा होता है… तीन टांगों वाला मुर्गा..” इस संवाद से विद्या बालन ट्रेलर में दिखती है. ट्रेलर में ही फ़िल्म की तात्कालिक स्थिति के अनुसार एक जगह आज़ादी पर तंज़ भी किया गया है.
  • वौइस् ओवर आता है –“बेग़म जान आज हमारा मुल्क आज़ाद हुआ है.. आप जश्न नहीं मनाएँगी” इस पर बेग़म जान कहती हैं- “तवायफ के लिए हर दिन एक जैसा होता है मास्टर .. एक बार बत्ती बुझी तो सब एक ..”.
  • एक संवाद है –“बेग़म जान कैंदी एं कि सिरफ जिसम दी नईं साड्डे दिल दी भी क़ीमत होंदी एं”. इस संवाद से लोगो तक इस बात को पहुँचाने की कोशिश की गयी कि तवायफ़ों के जिस्म में भी दिल होता है, उसे सिर्फ एक बदन मानना सही नहीं है.
  • सियासत किसी को भी नहीं छोडती तवायफ के कोठे को भी नहीं- “ये कोठा खाली करना होगा बेग़म जान इस कोठे के बीचो बीच हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बॉर्डर निकलेगा” इस पर बेग़म जान कहती हैं- “जनाब आप जिसे ज़बान से कोठा और दिमाग में रंडीखाना सोच रहे हैं न ये मेरा घर है… मेरा वतन .. और इससे पहले कि कोई हमें यहाँ से हटाये हम उसके हाथ, पैर और जिस्म का वो क्या कहते हैं पार्टीशन कर देंगे”

बेग़म जान फिल्म की की कुछ मुख्य जानकारी (Begum Jaan movie information)

फ़िल्म का नाम बेग़म जान
जेनर पीरियड ड्रामा
निर्देशक श्रीजीत मुख़र्जी
निर्माता मुकेश भट्ट, विशेष भट्ट
बैनर विशेष फ़िल्म्स
संवाद कौसर मुनीर
स्क्रीनप्ले श्रीजीत मुख़र्जी, कौसर मुनीर
कहानी श्रीजीत मुख़र्जी
आधारित राजकाहिनी (2005)
नरेशन  अमिताभ बच्चन
संगीत अनु मलिक,खैयाम 
सिनेमेटोग्राफी गोपी भगत
एडिटर मोनिशा आर बलदावा, विवेक मिश्रा
भाषा हिंदी
देश भारत
रिलीज की तारिख 14 अप्रैल 2017

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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