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भागलपुर सृजन स्कैम | Bhagalpur Srijan Scam in hindi

भागलपुर सृजन स्कैम | Bhagalpur Srijan Scam in hindi

बिहार की राजनीति इन दिनों बहुत ही तेज़ी से करवट ले रही है. इसी बीच एक और स्कैम का सच सामने आ रहा है. यह एक बहुत बड़ा स्कैम है जिसके अंतर्गत बिहार सरकार पूरी तरह से जांच के घेरे में आ गयी है. इस स्कैम के पीछे का मुख्य प्लान सरकारी पैसे को प्राइवेट अकाउंट में ट्रान्सफर करना तथा उन पैसों से व्यापार करना था. यहाँ पर इस स्कैम की मुख्य तथ्यों का वर्णन नीचे किया जा रहा है. बिहार में छात्र क्रेडिट कार्ड योजना यहाँ पढ़ें.

भागलपुर सृजन स्कैम क्या है (What is Bhagalpur Srijan Scam)

भागलपुर सृजन स्कैम के अंतर्गत बिहार की तात्कालिक विपक्षी सरकार मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर एक सृजन नामक एनजीओ के हवाले से 700 करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगा रही है. इस एनजीओ के ओनर का नाम मनोरमा देवी है. मनोरमा देवी बिहार के कई उच्च स्तरीय नेताओं से अपनी पहचान रखती हैं. यह एक बहुत बड़ा स्कैम बताया जा रहा है, जिसमें इस संस्था के सहारे सरकार ने 700 करोड़ रुपयों का घोटाला किया है. इस केस के अंतर्गत विभिन्न लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दायर की जा चुकी है.

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सृजन एनजीओ क्या है (What is Srijan NGO)    

सृजन एक महिला विकास सहोय समिति है, जिसकी स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी. यह संस्था कथित तौर पर महिलाओं के विकास के लिए काम करती है. इसके बारे में यहाँ जानकारी दी जा रही है :

  • इस एनजीओ के कुल 16 प्रखंड हैं, जो कि लगभग पूरे भागलपुर जिले में फैले हुए हैं. इस एनजीओ का उद्देश्य कहने के लिए महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, स्वरोजगार आदि कार्यक्रमों का आयोजन करना होता है. ग़ौरतलब है कि यह एनजीओ पहले रांची में थी और 2003-04 के आस पास वहाँ से भागलपुर आ गई.
  • इस समय के जिलाधिकारी ने सरकार की ज़मीन मात्र 200 रुपये प्रति महीने लीज पर दे दी थी. सृजन ने इस ज़मीन पर अपना मुख्यालय बनाया और 2008 के आस पास यहाँ अपना एक कोआपरेटिव बैंक खोल लिया.
  • इस एनजीओ में कई फर्जी सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए गये और उनके अकाउंट सृजन कोऑपरेटिव बैंक में खोले गये ताकि सरकार का पैसा बाज़ार में निवेश कराया जा सके.
  • जांच के घेरे में आने से पहले यह संस्था दावा करती रही कि गाँव की महिलाओं को सरकार की योजनायें लाभ दिलाती है.
  • इस संस्था के अंतर्गत 6000 सदस्य, 60 स्टाफ और कुल 24,000 वर्ग फीट में इसकी ऑफिस फैली हुई थी.

कैसे होता था घोटाला 

इस स्कैम को बेहद ही शातिर तरीके से अंजाम दिया जाता रहा. इसके अंतर्गत भूमि अधिग्रहण, जनकल्याण आदि सरकारी योजनाओं के पैसे बैंक ऑफ बरोदा तथा इंडियन बैंक में जमा कराया जाता था. इन बैंकों से यह जमा किया गया पैसा सृजन कोआपरेटिव बैंक के खाते में फर्जी आदेश- रकम के तौर पर डाल दिया जाता रहा. चेक के पीछे एक फर्जी आदेश छपा होता था कि यह राशि सृजन के खाते में जमा करा दें. हालाँकि ऐसे आदेश जांच के दौरान किसी भी फाइल में नहीं पाए गये हैं.

मामला सामने कैसे आया (Srijan Scam Matter Open)

यह मामला बेहद ही आसानी से सामने आया है. दरअसल हाल ही में सुप्रीमकोर्ट ने बिहार सरकार के लिए यह आदेश जारी किये थे, कि वे भूमि अधिग्रहण मामले में सभी किसानों को उनका मुआवजा, जो कि कुल 200 करोड़ का था, जल्द से जल्द भुगतान करे. सरकार ने इसके बाद उन किसानों के नाम चेक ज़ारी कर दिए. हालाँकि सरकारी चेक के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का प्रयोग होता रहा था, किन्तु सृजन के अंतर्गत बैंक ऑफ़ बरोदा और इंडियन बैंक में भी सरकारी पैसों का लेनदेन होता था. अतः जब किसानों ने अपना चेक बैंक ऑफ़ बरोडा और इंडियन बैंक में डाले तो सारे चेक एक एक कर बाउंस होने लगे, जिससे किसानों को उनके अधिकार का पैसा नहीं मिल सका और यहीं से इस स्कैम का राज़ खुला. किसान विकास पत्र यहाँ पढ़ें.

यह घोटाला वर्ष 2008 से ही सृजन में हो रहा था. उस समय बिहार में भाजपा तथा जनता दल यूनाइटेड की सरकार थी. इस समय वित्त मंत्रालय शुशील मोदी के पास था. ऑडिटर ने हालाँकि उसी वर्ष इस घोटाले का नब्ज़ पकड़ लिया था और यह प्रश्न भी उठाया कि सरकार का पैसा कोआपरेटिव बैंक में कैसे जमा हो सकता है. इस समय एक एसडीएम ने सभी प्रखंड के अधिकारियों को सृजन के खाते में पैसा जमा करने से मना किया था, किन्तु सभी घटनाएँ पहले की तरह चल रही थीं. इस समय के तात्कालिक जिलाधिकारी पर यह प्रश्न आता है कि कोई जिलाधिकारी किस आधार पर सरकारी पैसा कोआपरेटिव बैंक के खाते में ट्रान्सफर होने दे रहा था.

ध्यान देने वाली बात है कि वर्ष 2008 से अब तक जो भी जिलाधिकारी यहाँ पर आये उन्होंने इस घोटाले को होते रहने दिया. वर्ष 2013 को भारतीय रिज़र्व बैंक ने बिहार सरकार तथा भागलपुर प्रशासन से इस कोआपरेटिव बैंक के गतिविधियों की जांच करने का आदेश दिया था, किन्तु फिर भी जांच नहीं कराई गई. भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार 30 करोड़ से ऊपर के घोटाले की जांच सीबीआई को करनी चाहिए.

तात्कालिक स्थिति (Srijan Scam Present Status)

इस मामले में अब तक कुल 9 एफ़आईआर तथा 12 लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिसमे बैंक अधिकारी भी शामिल हैं, किन्तु अधिकतर गिरफ्तारियां छोटे स्तर के अधिकारियों की की गयी हैं. अभी के समय में महेश मंडल नाम का एक व्यक्ति जो कि इस स्कैम का एक मुख्य कड़ी था, उसकी मृत्यु हो चुकी है. डोक्टरों के अनुसार महेश मंडल को किडनी, ह्रदय आदि के रोगों से परेशानी थी. आगे अभी इस घोटाले के अंतर्गत कई बड़े नाम आने की संभावनाएं हैं, जिस वजह से बिहार की राजनीति में भी कई परिवर्तन आ सकते हैं. इस घोटाले की वजह से बिहार के विभिन्न स्थानों पर सरकार का विरोध हो रहा है.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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