ब्लैक फंगस के लक्षण, उपाय, रोकथाम क्या है वाइट एवं येलो फंगस की जानकारी | Black Fungus Disease in Hindi white and yellow fungus

ब्लैक फंगस इन्फेक्शन (म्यूकर माइकोसिस) क्या है, White Fungus (व्हाइट फंगस) क्या है, येलो फंगस क्या है, मीनिंग, जानकारी, कोरोना के बाद जानलेवा बीमारी, लक्षण, उपचार, उपाय, कारण, ट्रीटमेंट, इन इंडिया [Black Fungus Disease in Hindi] [Yellow Fungus in Hindi] (Mucormycosis, Infection, Name, Symptoms, Treatment, Causes, Cases, on Humans, on Skin, After Covid, ICMR, in India)

कोरोना वायरस की वजह से लोग पहले से ही काफी ज्यादा डरे सहमे हुए हैं और अब कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों में और कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों के अंदर ब्लैक फंगस (black fungus) जिसे म्यूकरमायकोसिस (mucormycosis) भी कहते हैं, कि अनदेखी और जानलेवा बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। वही कोरोना वायरस के दूसरी लहर में ही यह लक्षण कोरोना के मरीजों में दिखाई देने लगे हैं और जो मरीज ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। आज के इस लेख में हम आपको इसी खतरनाक बीमारी के बारे में जानकारी देंगे, और साथ ही बताएंगे कि कैसे आपको इसके लक्षण दिखाई देंगे एवं क्या प्रिकॉशन लेने जरूरी है।

black fungal infection in hindi

Table of Contents

ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) के बारे में जानकारी

बीमारी का नामब्लैक फंगस
अन्य नामम्यूकर माइकोसिस
रोग का प्रकारसंक्रमण
कहां होता हैशरीर के किसी घाव  
कब होता हैअधिकतर कोरोना के बाद
किसे होता हैअधिकतर मधुमेह रोगी
महामारीराजस्थान एवं तेलंगाना में

ब्लैक फंगस (Mucormycosis) क्या है (मीनिंग इन हिंदी)

यह एक ऐसी बहुत ही दुर्लभ संक्रमण की बीमारी है, जो म्यूकर फफूद के कारण पनपती है। यह मुख्यता मिट्टी, खाद, पौधे, सड़े हुए फल एवं सब्जियों में अपना निर्माण करता है। कई बड़े विशेषज्ञों का कहना है, कि यह हर जगह होते हैं, यहां तक कि एक स्वस्थ मनुष्य के नाक और बलगम में भी यह मौजूद होते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमित गंभीर मरीजों के इलाज के लिए एवं फेफड़ों में सूजन को कम करने हेतु स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल किया जाता है। जब शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, तब वह शरीर को नुकसान होने से सुरक्षित रखती है, परंतु दोस्तों यह इम्यूनिटी को कम कर देती है और डायबिटीज या फिर बिना डायबिटीज वाले मरीजों में शुगर के स्तर को काफी ज्यादा बढ़ा देती है। कपड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है, कि कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके मरीजों या फिर रिकवरी कर चुके हुए लोगों में इम्यूनिटी सिस्टम काफी ज्यादा कमजोर हो जाता है और इसीलिए ब्लैक फंगस की बीमारी का संक्रमण ऐसे लोगों को संक्रमित करना शुरू कर दिया है।

ब्लैक फंगस संक्रमण किनको संक्रमित कर रहा है (After Covid)

पिछले कुछ 10 से 15 दिनों के अंदर अंदर यह बीमारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों को या फिर कोरोना वायरस की बीमारी से रिकवरी कर चुकी हुए मरीजों को हो रही है। डॉक्टरों का कहना है, कि बीमारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर में काफी ज्यादा सक्रिय हो चुकी है और यह अपने संक्रमण की संख्या में भी धीरे-धीरे वृद्धि करते जा रही है।जिन लोगों को पहले से ही कोई बीमारी है या फिर जिनका रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली का तंत्र कमजोर हो चुका है ऐसे लोगों को यह बीमारी शीघ्र ही अपने चपेट में ले रही है और इस बीमारी से लोगों की आंखों की रोशनी चली जा रही है और कुछ इसके गंभीर मरीजों में इसे ठीक करने के लिए उनके नाक और जबड़ो को भी रोगियों के शरीर से काटकर निकालना पड़ा।

ब्लैक फंगस इन्फेक्शन के लक्षण कैसे होते हैं (Symptoms)

ब्लैक फंगस बीमारी के संक्रमित को साइनोसाइटिस की समस्या होने लगती है और भी कई सारे इसके लक्षण संक्रमित के अंदर दिखाई देने लगते हैं। इस बीमारी के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार के नीचे निम्नलिखित बताए गए हैं।

  • नाक बंद हो जाना
  • नाक के अंदर पर काला रंग का पानी या फिर खून निकलना
  • जबड़े में दर्द होना
  • आधा चेहरा या फिर पूरा चेहरा सुन्न पड़ जाना
  • आधे चेहरे पर या पूरे चेहरे पर सूजन दिखाई देना
  • दांतों में दर्द महसूस होना
  • दांतों का टूट कर गिरना
  • बुखार होना
  • त्वचा में दाने आना
  • धीरे धीरे आंखों से कम दिखाई देना
  • छाती में दर्द महसूस होना
  • सांस लेने में समस्या होना

ब्लैक फंगस इन्फेक्शन (म्यूकर माइकोसिस) ट्रीटमेंट

ब्लैक फंगस (black fungus) या म्यूकर माइकोसिस (mucormycisis) बीमारी के अगर आपको कुछ लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करके एंटीफंगल थेरेपी के जरिए इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और काफी हद तक इस बीमारी के मरीज ठीक भी हो जाते हैं। मगर दोस्तों ज्यादातर इस बीमारी में संपर्क में आए हुए लोग अपनी जान से हाथ धो रहे हैं, कई बड़े एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इस बीमारी के संपर्क में वर्तमान समय में जो भी आ रहा है, उसकी 50 फ़ीसदी मौत हो जा रही है और बाकी के 50 फ़ीसदी के लोग इस बीमारी से रिकवरी कर रहे हैं।

ब्लैक फंगस बीमारी आईसीएमआर की एडवाइजरी (Black Fungus Infection ICMR)

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ( आईसीएमआर) के तरफ से ब्लैक फंगस बीमारी से बचने के लिए और कुछ अन्य जरूरी सावधानियों के संबंधित आधिकारिक रूप से एक एडवाइजरी जारी कर दिया गया है और इसकी जानकारी इस प्रकार से नीचे निम्नलिखित है।

कोरोना रिकवर होने के बाद महत्वपूर्ण बातों का रखें ध्यान

  • अगर आपको डायबिटीज की बीमारी है, तो ब्लैक फंगस की बीमारी का खतरा आपको सबसे अधिक होगा और इसीलिए इस बीमारी को नियंत्रण में रखने के लिए आपको सबसे पहले अपना ब्लड शुगर नियंत्रण में रखना अनिवार्य है।
  • अगर आप कोरोना पॉजिटिव रह चुके हैं और आपने इसकी रिकवरी भी कर ली है और इसके अतिरिक्त अगर आपको डायबिटीज है, तो पूरी तरीके से स्वस्थ होने के बाद नियमित रूप से ग्लूकोज लेवल की जांच करते रहें और इसे ट्रैक भी करते रहें।
  • अगर आपको डॉक्टर ने स्टेरॉयड लेने की सलाह दी है, तो आपको इसे सही समय पर लेना बहुत ही अनिवार्य है और इसके अतिरिक्त इसकी मात्रा और इसे लेने की अवधि के ऊपर भी बहुत विशेष रुप से ध्यान रखें।
  • ऑक्सीजन की थेरेपी करते समय आपको साफ़ और बेहद स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करना है।
  • आपको एंटीबायोटिक्स और एंटीफंगल के इस्तेमाल के दौरान महत्वपूर्ण सावधानियों को बरतना अनिवार्य है।

ब्लैक फंगस बीमारी बचाव के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां

  • अत्यधिक धूल मिट्टी वाली जगह पर जाने से पहले मास्क का इस्तेमाल करें।
  • खेतों में और बागवानी करने के समय जूते का इस्तेमाल करें और हाथों एवं पैरों को पूरी तरीके से ढके और हो सके तो, ग्लव इस्तेमाल करें।
  • प्रतिदिन स्नान करते रहें और घरों की एवं आपके इस्तेमाल में होने वाली सभी वस्तुओं की भी साफ-सफाई करते रहें।

ब्लैक फंगल इन्फेक्शन महामारी इन इंडिया

एक आफत के ख़तम होने से पहले ही दूसरी आफत आकर खड़ी हो गई है. जी हां हमारे भारत देश में कोरोना महामारी एक तरफ तांडव मचा रही है कि दूसरी तरफ ब्लैक फंगल बीमारी ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. ब्लैक फंगल इन्फेक्शन दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश एवं तेलंगाना के विभिन्न इलाकों में काफी तेजी से फ़ैल रहा है. राजस्थान एवं तेलंगाना में इस बीमारी ने इस तरह पैर पसारे हैं कि सरकार ने इसे एपिडेमिक यानि महामारी घोषित कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा यह अपील की गई थी कि इसे महामारी घोषित किया जाये, इसके बाद राजस्थान और फिर तेलंगाना राज्य सरकार ने महामारी घोषित करने का फैसला ले लिया.  

ब्लैक फंगस से बचने के लिए रोकथाम

नीचे दी हुई सावधानियों को बरतने से आप ब्लैक फंगल इन्फेक्शन से बच सकते है. यह अधिकतर कोरोना संक्रमित व्यक्ति या इससे ठीक हो चुके व्यक्ति पर असर कर रहा है इसलिए ऐसे लोगों को इसका विशेष ध्यान देना आवश्यक है –

  • अगर आपको शुगर की समस्या है, तो ऐसे में आपको अपना ब्लड शुगर नियंत्रण में रखना बेहद आवश्यक है।
  • स्टेरॉयड का उचित, तर्कसंगत और विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करना है बेहद आवश्यक।
  • ऑक्सीजन ट्यूबिंग का बार-बार बदलना और प्रयोग में हो चुके ऑक्सीजन ट्यूब का दोबारा से इस्तेमाल करना इस परिस्थिति में काफी खतरनाक हो सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप नए ट्यूब का उपयोग करें.
  • करोना वायरस से संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन देने के समय उनके शरीर की ह्यूमिडिटी की जांच करते रहे और यह निरंतर रूप से बार-बार करना बेहद आवश्यक है।
  • ऐसे मरीजों को दिन में करीब 2 बार तक अपनी नाक को धोना बेहद आवश्यक है।
  • कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच पहले, तीसरे और सातवें दिन करनी बेहद आवश्यक है और हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करते समय रोगी का सघन जांच जरूरी है।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी आवश्यक सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक है।

White Fungus Infection क्या है

कोरोना का प्रभाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. देश रोजाना नए केस को देख कर ऐसा लगता है की अब यह और भी खतरनाक होते जा रहा हैं. देश में बढ़ते ख़राब हालातो के बीच अब white fungus ने भी दस्तक दे दी हैं. इस white fungus को तो ब्लैक फंगस से भी खतरनाक माना जा रहा है. इस white fungus के केस भी अब हमारे आसपास दिखाई दे रहे हैं. देश में बढ़ती यह बीमारी काफी खतरनाक संकेत दे रही हैं. यह ब्लैक फंगस की तरह संक्रमित करने वाली और संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है. यह ब्लैक फंगस से थोड़ी ही अलग हैं परन्तु इसमें खतरा काफी ज्यादा हैं. शरीर के आंतरिक हिस्सों पर अटैक करके यह बीमार लोगों को पूरी तरह से घायल कर देती हैं. इस बीमारी का वायरस सीधे शरीर में लंग्स पर अटैक करता हैं. White fungus भी कोरोना का ही एक भाग हैं या यु कहे की यह भी कोरोना फॅमिली का ही एक सदस्य हैं तो कुछ गलत नहीं होगा. 

White Fungus का Covid में खतरा 

कोरोना बीमारी में कोरोना का नया वायरस सीधे शरीर के आंतरिक हिस्सों में अटैक करता है उसी तरह यह white fungus भी शरीर के आंतरिक हिस्सों को जैसे स्किन, नाखून, मुंह के अंदरूनी भाग, आमाशय और आंत, किडनी, गुप्तांग और ब्रेन आदि को भी संक्रमित करता है. कोरोना में जिस तरह से कोरोना वायरस सांस लेने में समस्या पैदा करता हैं उसी तरह यह white fungus भी फेफड़ो के संक्रमण का मुख्य कारण हैं. कोरोना के साथ यह भी अब धीमे धीमे लोगों में फैलने लगा है, इसके केस भी काफी मिल रहे हैं.

White Fungus Disease के भारत में केस (News)

इस प्रकार की बीमारी के बारे में फिलहाल ही ध्यान पड़ा हैं. इस बीमारी के नए केस की बात करें तो इस प्रकार की बीमारी के फिलहाल उत्तरी भारत के राज्य बिहार में केस सामने आए हैं. बिहार के पटना के एक अस्पताल में ऐसे केस देखे गए हैं जिनकी संख्या अभी तक सामने नहीं आई हैं. इस प्रकार के केस के बारे में अभी कोई विशेष पुष्टि नहीं हुई है परन्तु यह भी बताया जा रहा हैं की उनकी संख्या 4 उससे ज्यादा हो सकती हैं. हालांकि जो भी मामले सामने आये हैं. 

White Fungus के लक्षण (Symptoms)

किन कारणों से फेलता हैं white fungus. White fungus के यह कुछ निम्न लक्षण हैं. कई हद तक तो यह लक्षण कोरोना और white fungus के सामान ही हैं परन्तु इसमें कुछ लक्षण अलग भी जो इस बीमारी को दूसरी बीमारी से अलग बनाते हैं. 

  • कही हद्द तक यह कोरोना के समान ही हैं और इसके लक्षण भी कोरोना के समान ही हैं इसमें अंतर पता करना थोड़ा सा मुश्किल है परंतु इसमें कुछ अंतर है. 
  • White fungus वाले मरीज के मुह पर सफ़ेद दाग बन जाते हैं.
  • RT-PCR टेस्ट में इस प्रकार के कोरोना मरीज नेगेटिव ही आते हैं. इस बीमारी का वायरस शरीर में सीधे फेफड़ो पर असर करता हैं इसलिए इससे बदन दर्द की भी शिकायत रहती हैं. 
  • खांसी के साथ बलगम का होना और सांस की तकलीफ white fungus को न्योता देते हैं.
  • जो लोग कैंसर से पीड़ित हैं और कैंसर का इलाज ले रहे हैं उन्हें यह वायरस जल्द गिरफ्त में लेता हैं. 
  • इस बीमारी में छोटे बच्चों में ओरल थ्रस्ट तो यह महिलाओं में ल्यूकोरिया का मुख्य कारण बन सकता है.

अगर किसी में ये लक्षण दिखें तो समझ लीजिये वे white fungus के मरीज हैं, उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर इलाज करवाने की सलाह जरुर देवे. 

White Fungus फेलने के कारण (Causes)

White fungus के फैलने का मुख्य कारण कोरोना में दी जाने वाली दवाइयां हैं. कोरोना मरीज को जो दवाइयां दी जा रही हैं उनके शरीर की इम्युनिटी कुछ कम हो जाती हैं. अगर कोरोना की दवाइयों के साथ मरीज को इम्युनिटी बढाने की दवाइया दी जाए तो fungus जैसी बीमारियों को रोका जा सकता हैं जो की कई बीमारियों का साइड इफ़ेक्ट हैं. कोरोना से संबंधित बीमारी का इलाज लेने के साथ शरीर की इम्युनिटी का भी ख्याल रखें.

White Fungus का ईलाज (Treatment)

आज हर बीमारी जो कोरोना की वजह या इस बीमारी के परिवार के सदस्यों की वजह से फ़ैल रही हैं तो वह काफी खतरनाक बीमारी होती है, white fungus से बचाव के उपायों को आप इस तरह से समझ सकते हैं. 

  • ब्लैक फंगस or White fungus के फेलने का मुख्य कारण यही हैं की ओक्सिजन सिलेंडर के साथ साफ़ पानी का इस्तेमाल नही किया जाता हैं, जब भी अस्पताल में किसी मरीज को ओक्सिजन सिलेंडर लगाया जाता हैं उसके साथ साफ़ और स्वास्थ्य पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए इससे fungus जैसी बीमारी को फेलने से रोका जा सकता हैं. 
  • शरीर में हलके लक्षण दीखते ही डॉक्टर से सलाह ले और बराबर इलाज लेवे. डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी कार्य नहीं करे.
  • इस बीमारी के इलाज के दौरान शरीर में इम्युनिटी कम ना होने दे, शरीर की इम्युनिटी को बढ़ने के लिए भी साथ में इलाज और उससे सम्बंधित इलाज लेना चाहिए. 

White Fungus से मुंह पर दाग

हाल ही में white fungus के मरीज सामने आए जिसमें यह देखा गया है की इस प्रकार के मरीजों के मुंह पर सफ़ेद क्रीम कलर के दाग बन जाते हैं. इस white fungus के वायरस की एंट्री शरीर में मुंह के जरिये ही होती हैं इसलिए इसका पहला असर मुंह पर दिखाई देता हैं उसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों पर. 

Yellow Fungus क्या है

कोरोना ने देश में जो तांडव मचाया हैं उसके ऊपर से और भी बीमारियाँ एक के बाद एक दस्तक देती जा रही है. जैसे कि ब्लैक फंगस जोकि कोरोना वायरस से पीढित व्यक्तियों को अपनी चपेट में ले रहा है. यहाँ तक कि इसे कुछ राज्यों में महामारी भी घोषित कर दिया है. उसके बाद वाइट फंगस पैदा हुआ जोकि ब्लैक फंगस से उतना खतरनाक तो नहीं है, लेकिन यह यदि फेफड़ों में होता है तो आदमी के लिए जानलेवा हो जाता है. ये सभी बीमारी देश में चल ही रही थी कि एक और बीमारी ने हमारे देश में दस्तक दे दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि येलो फंगस मुख्य रूप से छिपकली या फिर गिरगिट में दिखाई देता है. किन्तु अब ये इंसानों में भी दिखना शुरू हो गया है.

Yellow Fungus का पहला केस

येलो फंगस का पहला केस उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद में मिला है, जिसमें 45 साल के एक व्यक्ति के शरीर में येलो फंगस के लक्षण दिखाई दिए. और वहीँ पर उसका ईलाज हो रहा है.

Yellow Fungus का नाम (Name)

येलो फंगस को वैज्ञानिकों के आधार पर म्यूकर स्पेक्टिक्स कहा जाता है.

Yellow Fungus कारण (Causes)

येलो फंगस होने का मुख्य रूप से कारण आसपास गंदगी और नमी का होना. हमाकी ऐसा ही ब्लैक फंगस और वाइट फंगस में भी होता है. दरअसल फंगस उसी जगह पर एवं उसी चीज पर लगती है जहाँ गंदगी होती है.

Yellow Fungus के लक्षण (Symptoms)

येलो फंगस के मुख्य लक्षण की बात करें तो ये हैं –

सुस्ती आना :-

यदि किसी व्यक्ति को अचानक से बहुत सुस्ती जैसी लगने लगती हैं तो वह येलो फंगस का लक्षण हो सकता है.

वजन कम होना :-

आपका वजन बिना कुछ किये अचानक से कम होने लगे तो यह भी येलो फंगस का एक तरह का लक्षण होता है.

भूख कम लगना :-

यदि आपको भूख न लगे, या आपका कुछ भी खाने का मन न हो तो ये येलो फंगस के ही लक्षण हैं.

अन्य लक्षण :-

इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी है जैसे

  • यदि आपको कोई गंभीर घाव हैं तो उसकी ठीक होने की स्पीड में कमी आना,
  • नाक बंद होना,
  • कुपोषण का शिकार होना,
  • मवाद आना,
  • शरीर के कुछ अंगों का काम करना बंद कर देना
  • आंख का अंदर घुसना या आंख के नीचे गड्ढे आना  
  • आँखों में धुंधलापन छा जाना.
  • शरीर का मेटाबोलिक सिस्टम का ख़राब होना
  • हार्ट रेट अचानक बढ़ जाना
  • जैसे कुछ अन्य लक्षण भी येलो फंगस के ही हैं.

Yellow Fungus से बचने के उपाय

जैसा कि हमने आपको बताया कि येलो फंगस किस वजह से होता है, गंदगी और नमी की वजह से. तो यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको निम्न उपायों को अपनाना होगा.

  1. सबसे पहले आपको सफाई रखती होगी अपने आसपास और साथ ही अपने शरीर की भी.
  2. आपके घर में यदि कोई खाद्य पदार्थ ऐसा है जो कुछ दिन पुराना हो गया है उसे तुरंत ही बाहर फेक दें, ताकि उसमे फंगस या कीड़े न लग पायें.
  3. अभी बारिश का समय आना वाला है. ऐसे में नमी होना स्वाभाविक बात है. लेकिन आप अपने घर के अंदर कोशिश करें कि ज्यादा नमी न रहने दें. यह 30 से 40 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
  4. आपको बासा खाना बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए, आप ताजा खाना खाएं और स्वस्थ रहें.

Yellow Fungus कितना खतरनाक है

इस फंगस का केस मिलने के बाद कहा जा रहा है कि यह अन्य ब्लैक एवं वाइट फंगस से काफी खतरनाक है. ऐसा इसलिए क्योकि ये बीमारी बाहर से नहीं आ रही है यह शरीर के से पैदा हो रही है. और जब यह ज्यादा गंभीर हो जाती है तो फिर ये ऊपर दिखने लगती है. इसलिए इससे बचने के लिए साफ सफाई बहुत आवश्यक है. और यदि यह बीमारी के लक्षण आपको मिलते हैं तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.  

Yellow Fungus इंसानों में (In Human)

यह बीमारी छिपकली एवं गिरगिट जैसे प्राणियों को जान से मार देती हैं, तो यह इंसान का क्या हाल करेगी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कितना खतरनाक है. दरअसल यह बीमारी इंसानों में पहली बार दिखाई दी है.

Yellow Fungus किसे हो सकता है

डॉक्टर्स का कहना है कि ये फंगस उन लोगों में दिख सकता है जिसका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है. इसके लिए जरुरी आपने इम्यून सिस्टम को बहुत मजबूत बनाना क्योकि इससे आप सारी बिमारियों से लड़ने में सक्षम हो जायेंगे.

Yellow Fungus ईलाज के लिये इंजेक्शन  

फंगस की बीमारी होना कोई नहीं चीज नहीं है इसलिए बाजार में वर्तमान में अम्फोटेरिसिन बी नाम का इंजेक्शन उपलब्ध है. यह इंजेक्शन एंटी फंगस इंजेक्शन है. यदि किसी भी यह बीमारी दिखाई देती हैं तो उसका केवल एक ही ईलाज हैं वह यह इंजेक्शन ही है. यह एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटी फंगस है.

इस लेख में आपने जाना की ब्लैक, white एवं येलो fungus क्या है और इससे बचने के उपाय क्या है. इस बीमारी के बारे में आपको इस लेख के माध्यम से पूरी जानकारी दी गई है. उम्मीद करते हैं आपको यह लेख पसंद आया होगा. 

FAQ

Q : ब्लैक फंगस बीमारी की शुरुआत कब हुई ?

ANS :- इस बीमारी की शुरुआत कोरोना वायरस के दूसरी लहर में हुई।

Q : ब्लैक फंगस बीमारी के संक्रमित मरीजों को कौन सी समस्याएं होने लगती हैं ?

ANS :- आंखों की धीरे धीरे रोशनी चली जाना और जान जाने का खतरा भी होता है।

Q : ब्लैक फंगस की बीमारी क्या कोरोना के संक्रमित मरीजों को ही हो रही है ?

ANS :- कोरोना के संक्रमित मरीजों और इससे रिकवरी कर चुके मरीजों को, दोनों को।

Q : क्या ब्लैक फंगस की बीमारी घातक है ?

ANS :- यह बीमारी बहुत ही जानलेवा है और देश में इसके संक्रमण की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।

Q : ब्लैक फंगस की बीमारी का क्या इलाज संभव है ?

ANS :- समय पर लक्षणों का पता करके इसे ठीक किया जा सकता है।

Q : White Fungus बीमारी क्या हैं ? 

Ans : यह एक ऐसी बीमारी हैं जो शरीर के फेफड़ो पर सीधा अटैक करती हैं. 

Q : White Fungus का मुख्य लक्षण क्या हैं ? 

Ans : मुंह पर सफ़ेद क्रीम कलर के दाग बनना हैं. 

Q : कोरोना में White Fungus किस तरह फेलता हैं ? 

Ans : कोरोना संक्रमित हुए मरीजो में साइड इफ़ेक्ट की तरह इस बीमारी को देखा जा सकता हैं. 

Q : White Fungus का पहला केस कहा पर मिला हैं ? 

Ans : पहला केस पटना में मिला हैं. 

Q : White Fungus बीमारी का ईलाज क्या है ?

Ans : इम्युनिटी को कम न होने दें, इसे बढ़ाने की कोशिश करते रहें.

Q : येलो फंगस बीमारी क्या है ?

Ans : छिपकली एवं गिरगिट में होने वाला संक्रमण

Q : येलो फंगस बीमारी का पहला केस कहां मिला ?

Ans : उतरप्रदेश के गाजियाबाद में

Q : येलो फंगस का अन्य नाम क्या है ?

Ans : म्यूकर स्पेक्टिक्स

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