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क्या हमे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए ? | Should we boycott Chinese Products in hindi

क्या हमे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए ? | Should we boycott Chinese Products in hindi?

 वर्तमान में चीनी उत्पादों का बहिष्कार जैसे स्लोगन को इंटरनेट के माध्यम से लोगों तक फैला कर चीन में निर्मित वस्तुओं के उपयोग को रोकने के लिए नारा दिया जा रहा है. भारत, फिलीपींस और वियतनाम सहित अन्य देश भी चीनी माल का बहिष्कार करने के लिए लोगों से आह्वान कर रहे है लेकिन पूर्ण बहिष्कार इन्हीं देशों के लिए मुश्किल हो रहा है.

क्या हमे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए

चीनी उत्पादों का बहिष्कार और उसका कारण

Boycott Chinese Products and its Causes in hindi

चीनी उत्पादों के बहिष्कार का कारण (Boycott Chinese Products Causes)  

इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं :

  • चीन जनसंख्या की दृष्टी से विश्व का सबसे बड़ा देश है, साथ ही चीन की सीमा का एक बड़ा हिस्सा कई देशों की सीमा को छूता है. चीन की नीतियों की वजह से इसके पड़ोसी देशों के साथ हमेशा सीमा विवाद को लेकर समस्या बनी रहती है, इस वजह से भी चीनी उत्पादों का बहिष्कार किया जाता है.
  • 1949 में चीनी कम्युनिस्टों ने चीन का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. 1980 के दशक के बाद से चीनी नेताओं ने अपनी पहली प्राथमिकता में चीन को आर्थिक रूप से दृढ़ करने का निश्चय किया और इसके लिए उन्होंने बाजार की मांग के अनुरूप कम गुणवता वाले सस्ते माल का निर्माण कर उपभोक्ता को बेचना शुरू कर दिया. कम भुगतान कर और आवश्यकता की पूर्ति हो जाये तो ये बात सभी को पसंद आना स्वाभाविक है जिस वजह से लोगों का आकर्षण चाइना में निर्मित माल की तरफ हमेशा बना रहता है.
  • 2008 के चीनी दूध घोटाले के बाद चीन के लोग भी वहां के दूध उत्पादों पर भरोसा नहीं कर पाते है, हालाँकि चीन की सरकार खाद्य सुरक्षा और गुणवता के लिए कई सारे कानून बनाकर नियमों का पालन करने के आदेश जारी करती है.   

अलग- अलग देशों द्वारा चीनी उत्पादों के बहिष्कार (Boycott Chinese Products by Other Countries)

अलग अलग देशों में चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए कदम उठाये गए हैं, उनमे से कुछ इस प्रकार हैं :

  • भारत : भारत और तिब्बत चीन के माल का बहिष्कार करने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाकर दो सीमा घुसपैठ की घटनाओं को रोकने की कोशिश कर रहे है. भारतीयों द्वारा चीन का विरोध इसलिए किया जाता है क्योंकि चीन को भारत के एक प्रमुख अवरोध के रूप में देखा जाता है. हाल ही में 2016 में चीन ने भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से इनकार कर दिया, साथ ही चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के लिए भारतीयों द्वारा प्रमुख अवरोधक के रूप में देखा जाता है. इसके अलावा चीन पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में निवेश कर बिना किसी शर्त के पाकिस्तान का हमेशा समर्थन करता है. अगस्त-सितम्बर 2016 में भारत पर हुए उरी हमलों के बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति बनी तब भी चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया, जो भारत में चीनी उत्पादों के बहिष्कार अभियान के लिए प्रेरणा बन गयी. इससे भारत में कई दुकानों ने भी चीनी माल का बहिष्कार कर उसे बेचना छोड़ दिया. इस तरह के बहिष्कार का मकसद हमेशा से चीन को आर्थिक नुकसान पहुँचाने से रहा है.
  • फिलीपिंस : इस देश के कई राष्ट्रीय समूहों ने राष्ट्रव्यापी अभियान चलाकर चीनी उत्पादों का बहिष्कार सफलतापूर्वक किया है. अल्बे के गवर्नर जोये सलसेदा ने भी 2012 में हुए आइलैंड विवाद के बाद फिलीपींस को चीन उत्पादित वस्तुओं के बहिष्कार में अपना समर्थन दिया था.
  • वियतनाम : हैयांग शियो 981 गतिरोध के मामले के साथ दक्षिण चीन सागर में विवादित क्षेत्र के बारे में तनाव को लेकर वियतनाम में चीनी माल का बहिष्कार शुरू हुआ. वहां मेड इन वियतनाम माल के उपयोग को लेकर लोगों को प्रोत्साहित किया गया.
  • तिब्बत : तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए दलाई लामा के भाई प्रोफेसर थम्पटन नोरबू ने चीन के कम गुणवता और असुरक्षित उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए, इस अभियान में शामिल होने के लिए जनता से और अन्य भी देशों से समर्थन की अपील की है.

क्या चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए (Should We Boycott Chinese Products)  

भारत और चीन व्यापारिक साझेदार है. भारत-चीन व्यापार की मात्रा लगभग 71 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. नवीनतम डाटा के अनुसार 2016 में चीन से भारत का आयात 58.33 बिलियन था, जबकि भारत से चीन के लिए निर्यात केवल 11.76 बिलियन था जो भारत के व्यापारिक घाटे को दर्शाती है. चीन के साथ व्यापार हमारे देश को प्रभावित कर रहा है. भारत चीन से संचार उपकरणों के अलावा तपेदिक और कुष्ठ रोग की दवा, एंटीबायोटिक दवायें, बच्चों के खिलौने, बॉल बेयरिंग, एलसीडी, एलईडी. सेट टॉप बॉक्स और टीवी रिमोट इत्यादि का आयात करता है. और कपास, तांबा, पेट्रोलियम इत्यादि का निर्यात करता है.             

चीन हमारा दोस्त राष्ट्र नहीं है. भारत, चीन द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देने से नाराज होकर ही नहीं बल्कि भारत – चीन डोकलाम विवाद की वजह से चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर रहा है. लेकिन इस बहिष्कार की सफलता में संशय बना हुआ है क्योकि कभी भी जब बहिष्कार होता है तो छोटे चाइनीज बल्ब, पटाखे इत्यादि का होता है, जबकि पुरे भारत में टीवी, रेफ्रिजरेटर और स्मार्ट फ़ोन का बाजार लगभग चीनी बहुराष्ट्रीय कंपनीयों के कब्जे में है. जोकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत विशाल राजस्व उत्पन्न करता है. लोग लेनोवो, क्सिओमी जैसे स्मार्ट फ़ोन और लैपटॉप का विरोध कभी भी नहीं कर पाते, इन उत्पादों के प्रति मोह बना रहता है. इसलिए चीनी माल का बहिष्कार भारत के लिए भी नुकसानदायक है.

बहिष्कार तभी सफ़ल हो सकता है जब हम भी कम कीमत और अच्छी गुणवता की वस्तुओं का विकल्प उपभोक्ता को प्रदान कर पायें. मेक इन इण्डिया को सफल बनाते हुए और अपनी राष्ट्रीयता का परिचय देते हुए पूरी तरह से चाइनीज निर्मित वस्तुओं का त्याग कर दें.  

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत सिर्फ़ इस कारण से विरोध करे की चीन पाकिस्तान को समर्थन कर रहा है यह पूरी तरह से विसंगत है, लेकिन भारत चीन से सार्थक बातचीत के लिए चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर उस पर आर्थिक दबाव बना कर ही इस समस्या का समाधान निकाल सकता है.        

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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