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चंद्रयान-2, विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर मिशन क्या है?

चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 मिशन क्या है? उससे जुड़ी सभी जानकारी (चंद्रयान रोवर मिशन की अवधि) विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर, उद्देश्य [Chandrayaan 2 Rocket Name, Speed in hindi] [Rover, Lander, Timing, FAQ]

आजकल की खबरों में सबसे ज्यादा जिक्र चंद्रयान के बारे में हो रहा है। जैसा कि आप सभी देख रहे होंगे कि हर न्यूज़ चैनल हर न्यूज़ वेबसाइट पर आज चंद्रयान का ही जिक्र हो रहा है। आप भी इस चंद्रयान  के बारे में जानने के लिए इच्छुक होंगे कि आखिर यह क्या चीज है और इसे चाँद पर क्यों भेजा गया है? ऐसे बहुत से सवाल आपके दिलो-दिमाग पर छाए हुए होंगे जिनका जवाब आप खोज रहे हैं पर आपको कहीं नहीं मिल पा रहा है। परंतु आज हम आपको बताने वाले हैं चंद्रयान के बारे में संपूर्ण जानकारी वह क्या है कैसे बनाया जाता है कैसे लांच किया जाता है और क्यों लांच किया जाता है?

chandrayan 2 mission india

नाम चंद्रयान-2
लांच हुआ 22 जुलाई
मिशन चंद्र कक्षयान, लैंडर, रोवर
ओपरेटर इसरो
मिशन अवधि ·        चंद्र कक्षयान – 1 साल

·        लैंडर – 15 दिन

·        रोवर – 15 दिन

कुल वजन 3877 किलोग्राम
लांच हुआ सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र

चंद्रयान मिशन क्या है, इसके उद्देश्य?

चंद्रयान शब्द एक ऐसा शब्द है जो 2 शब्दों के मेल से बना है जिसका अर्थ है चंद्र पर ले जाने वाला या पहुंचाने वाला यान मतलब एक जरिया जो चंद्र पर पहुंचाया जा सके। चंद्रयान से जुड़े कई सवालात आज भी आपके दिलो-दिमाग पर होंगे जैसे शायद चंद्रयान चंद्रमा पर रिसर्च के लिए भेजा जा रहा है। चंद्र पर क्या चीजें मौजूद हैं उसके बारे में जानकारी प्राप्त करना ही चंद्रयान  का मुख्य मकसद है। ऐसी बहुत सी बातें आपके दिलो-दिमाग में चल रही होंगी।

ISRO द्वारा चंद्रयान की शुरुआत

सबसे पहले साल 2008 में भारतीय अंतरिक्ष संस्थान इसरो जिसने चंद्रयान  को चंद्रमा पर रिसर्च करने के लिए भेजने की योजना बनाई। भारत संचार द्वारा संचालित ISRO द्वारा साल 2008 में पहला चंद्रयान  लांच करने की योजना बनाई गई। इस योजना की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के राज्य में साल 2003 में की गई, परंतु इस कार्य को पूरा होते-होते साल 2008 आ गया और उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत थे।

22 अक्टूबर साल 2008 को chandrayaan-1 का काम पूरा कर लिया गया और चेन्नई से लगभग 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा में मौजूद सतीश धवन स्पेस सेंटर के सानिध्य में लांच किया गया। यह एक ऐसी जगह है जहां से इसरो द्वारा सभी अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम दिया जाता है। सतीश धवन स्पेस सेंटर के पूर्व चीफ रह चुके हैं जिनके निर्देशों के अंतर्गत इस यान को लांच किया गया।

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2)

भले ही साल 2009 में चंद्रयान-2 का डिज़ाइन पूरी तरह से तैयार कर लिया गया हो परंतु उसको बनाने में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को लगभग 10 साल का समय लग गया। चंद्रयान-1 से ऐसी कौन सी खास बातें थी जो चंद्रयान 2 में भी पाई गई। चंद्रयान-1 के मुकाबले चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा बेहद दिलचस्प और आकर्षित बनाया गया। वह पहले से कहीं अधिक तकनीकों से लैस किया गया और उसकी सफलता के लिए उसे पूरे दिलो जान से एक नया स्वरूप दिया गया। तो यह जान लेते हैं ऐसी कौन सी खास बातें चंद्रयान-2 में मौजूद है जिसे लेकर वह धरती से चाँद की यात्रा पर निकल चुका है।

चंद्रयान-2 की खासियत

चंद्रयान-2 की सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थी, परंतु चंद्रयान-2 में लगने वाली वह चीज जिसके सहारे इंपैक्टर चंद्र की सतह पर उतरने वाला था। उस इंपैक्टर के लिए भारत देश रूस पर निर्भर था। क्योंकि चंद्रयान-2 के उस हिस्से का निर्माण रूस द्वारा किया जाना था। चंद्रयान -2 से जुड़ी सभी कार्यवाही पूरी कर ली गई थी परंतु उस समय पर वह इंसान नहीं बना पाया और यह काम साल 2019 तक लटक गया। परंतु भारत देश उन देशों में से है जो कभी भी किसी नकारात्मक की वजह से हार नहीं मानता है। भारत देश और यहां रहने वाले नागरिकों ने स्वयं अपनी लड़ाई लड़नी सीखी है।

बस तो फिर इसरो के वैज्ञानिकों ने हार ना मानते हुए कहा कि अब वह खुद चंद्रयान-2 से जुड़ी सभी वस्तुओं का निर्माण स्वयं करेंगे और स्वयं ही अपना चंद्रयान-2 लॉन्च करेंगे। पहले चंद्रयान-1 को बनाने के लिए नासा की मदद ली गई थी। नासा एक अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था है जो विश्व में एक बड़े पैमाने पर पहचानी जाती है। परंतु इस बार चंद्रयान-2  के लिए हमारे भारतीय वैज्ञानिकों ने दिलो जान से मेहनत की और उसको चंद्रयान-1 से बेहतर बनाया। चंद्रयान के मुख्य हिस्से

  • लूनार ऑर्बिटर (Lunar Orbiter)
  • लैंडर (Lander) – विक्रम
  • लूनार रोवर (Rover) – प्रज्ञान (Pragyan)

चंद्रयान-2 के मुख्य हिस्से विस्तार से

  • चंद्रयान-2 लैंडर नाम (Chandrayaan 2 Lander Name) इस बार भारतीय वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 में कुछ नई चीजों को बढ़ावा दिया जैसे चंद्रायण का लैंडऱ। इस लैंडर का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया, जो इसरो के चेयरमैन है। भारत में होने वाले प्रत्येक स्पेस मिशन के फादर कहे जाने वाले विक्रम साराभाई के नाम पर इस लेंडर का नाम रखा गया।
  • इस बार चंद्रयान-2 में लैंडिंग के लिए एक ऐसा हिस्सा बनाया जो आराम से चंद्रमा की सतह पर जाकर टिक जायेगा, मतलब ऐसा कोई हिस्सा नहीं बनाया गया जो चंद्रमा की सतह पर जाकर क्रैश हो जाए या फिर कुछ खराबी हो जाए।
  • चंद्रयान-2 रोवर नाम (Chandrayaan 2 Rover Name) – इस बार चंद्रयान-2 में एक ऐसा रोवर इन्वेंट किया गया जो चंद्रमा की सतह पर गाड़ी की तरह चलने वाला है। रोवर मतलब एक ऐसी रोबोटिक गाड़ी जिसे धरती पर बैठकर संचालित किया जा रहा है। जो चंद्रमा की सतह पर पानी और नमी को मापने के लिए छोड़ी जाएगी।
  • चंद्रयान-1 में तो बहुत सी चीजों को बनाने में नासा ने अपना योगदान दिया था, परंतु इस बार भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसी खोज की है जिन के बाद एक नया चंद्रयान-2 लॉन्च किया गया है जो बेहद ही उपयोगी और सबसे अलग है।
  • इस बार चंद्रयान-2 को बेहतरी रूप से तराशा गया है और भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा ही बनाया गया है। चंद्रयान-2 को बनाने के लिए इस बार का खर्च कुल 978 करोड रुपए आया है।
  • यदि वजन की बात किए जाए तो चंद्रयान-2 के सभी हिस्से मिलाकर चंद्रयान का कुल वजन 3850 किलो है। इतना भारी भरकम विशालकाय मिशन भारत की धरती से चंद्रमा की ओर लांच किया जा चुका है।
  • चंद्रयान-1 के कुल 11 हिस्से थे, परंतु इस बार भारतीय वैज्ञानिकों की सफल मेहनत की वजह से चंद्रयान-2 में कुल 14 हिस्से हैं।
  • सभी 14 हिस्से जिन्हें भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया है अपने आप में एक भिन्न और अद्भुत संरचना वाले हैं। जिनमें से यदि रोवर के टायर्स के बात की जाए तो रोवर के टायर ही इतने कमाल के हैं की उनकी संरचना उन्हें और भी आकर्षक बना देती है।
  • क्या आपने कभी इसरो का लोगो देखा है? भारत देश के सम्मान का प्रतीक अशोक चक्र तो आपने देखा ही होगा। यहां पर मौजूद तस्वीरों में आप इसरो का लोगो और भारत का अशोक चक्र भी देख सकते हैं। कमाल की बात यह है कि रोवर के दो पहिए अशोक चक्र के आकार के बने हुए हैं वहीं बाकी दो पहिए इसरो के लोगों के आकार में बनाए गए हैं।
  • चंद्रयान-2 के सभी हिस्से चंद्रमा की कक्षा से होते हुए मात्र 17 मिनट के अंदर चंद्रमा की सतह पर पहुंच जाएंगे और अपना सर्वेक्षण का काम आरंभ कर देंगे। वहीं यदि बात करें रोवर की तो चंद्रमा की सतह पर जाते ही वह अपने खूबसूरत टायर की मदद से चंद्रमा की सतह पर पहुँचकर सर्वेक्षण जुटाने शुरू कर देगा।

चंद्रयान-2 का काम क्या है?

  • अंतरिक्ष में दो ही ग्रह ऐसे हैं जिन पर जल, जीवन, और वायु के लिए रिसर्च की जा रही है। पहला है चाँद और दूसरा है मंगल ग्रह। अब आप सोच रहे होंगे कि चंद्रयान किस तरह काम करते हैं और वहां पर क्या रिसर्च करने के लिए भेजा गया है? तो आपको बता दें कि चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी के कुछ कणों का पता लगाया था। जैसा कि आपको बताया कि बहुत से वैज्ञानिक चंद्र पर जीवन की खोज कर रहे हैं और जीवन के लिए जल और वायु का होना बेहद आवश्यक है।
  • चंद्रयान-1 के द्वारा खोजे गए उन पानी के छोटे पार्टिकल्स का ना तो कोई स्रोत मिल पाया है और ना ही बड़े पैमाने पर पानी की खोज हुई है। तो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने उस पानी की खोज के लिए ही चंद्रयान-2 को चाँद पर भेजा गया है।
  • इस पुष्टि के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भी मीडिया को यही बताया है कि “चंद्रमा पर पानी के कण पाए गए हैं। जिस की गहन जांच के लिए हमने चंद्रयान-2 को लॉन्च किया है। हम रिसर्च के जरिए यह जानना चाहते हैं कि चंद्रमा की सतह पर पानी कहां कहां पर मौजूद है और वह किस रूप में है? हम इस बात के बारे में भी जानना चाहते हैं कि क्या सतह के नीचे और वहां के पर्यावरण में भी पानी मौजूद है?”
  • जिस तरह से पृथ्वी पर दक्षिणी ध्रुव और पश्चिमी ध्रुव मौजूद है ठीक उसी तरह से चंद्रमा पर भी दक्षिणी और पश्चिमी ध्रुव पाए गए हैं। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर एक बहुत बड़ी परछाई देखी गई है। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार यह परछाई चाँद पर पानी की मौजूदगी का सबूत बताया जा रहा है।
दिनांक इवेंट जानकारी
29 जुलाई ऑर्बिट जलाना बर्न टाइम –
2 अगस्त ऑर्बिट जलाना बर्न टाइम –
6 अगस्त ऑर्बिट जलाना बर्न टाइम –
14 अगस्त ट्रांस-चंद्र इंजेक्शन बर्न टाइम –

चंद्रयान-2 समय सारिणी (Chandryaan-2 Time table)

  • नई समय सारणी के अनुसार इसरो द्वारा लॉन्च किया गया चंद्रयान-2 23 अगस्त को ट्रांस लुनार इंजेक्शन का आयोजन करने से पहले लगभग 23 दिनों तक पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला है।
  • चंद्रयान 2 लगभग 23 दिन से लेकर 30 दिन तक की समय अवधि के दौरान चंद्र हस्तांतरण प्रक्षेपवक्र में उपस्थित रहेगा।
  • 20 अगस्त को चंद्रयान -2 चंद्र की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा, जिससे यह लूनर ऑर्बिट में पहुँच जायेगा।
  • 1 सितंबर तक चंद्रयान -2 लूनर ऑर्बिट में रहेगा, बाद में लगभग 2 सितंबर को लैंडर और ऑर्बिटर से अलग कर दिया जाएगा।
  • जैसा कि निर्धारित गया है 3 सितंबर के दिन लैंड ऑर्बिटल से अलग होकर मून की लैंडिंग यात्रा पर निकल जाएगा।
  • इसरो की निर्धारित समय सारणी के अनुसार ठीक 7 सितंबर को लैंड ओं मून पर लैंड कर जाएगा और अपना सर्वेक्षण आरंभ कर देगा।

विशेषज्ञों के अनुसार लैंड के समय में देरी का कारण कक्षा से 6000 किलोमीटर की दूरी है। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है पृथ्वी की कक्षा पर यान को अधिक समय और चंद्रमा की कक्षा पर कम समय लगा परन्तु यह चंद्रमा (पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह के रूप में) की स्थिति पर आधारित है।

चलिए अब चंद्रयान-1 के बारे में विस्तार से जानते है –

 चंद्रयान-1 का कार्यकाल

अक्टूबर 2008 को चंद्रयान को पृथ्वी से लांच कर दिया गया। चंद्रयान को पृथ्वी से चंद्र तक पहुंचने में लगभग 16 दिन लगे मतलब 8 नवंबर 2008 को चंद्रयान चंद्र की कक्षा में सम्मिलित हो गया।

अब चंद्र कि यह कक्षा होती क्या चीज है? तो आपको बता दें कि चंद्र के चारों और चंद्र की एक ऐसी कक्षा बनी हुई होती है जो गुरुत्वाकर्षण बल की मदद से किसी वस्तु को वापिस सतह की ओर खींचती है। कक्षा के चारों और गुरुत्वाकर्षण बल लगातार काम करता रहता है जिसकी वजह से चंद्रयान  चंद्र के चारों ओर घूमता रहता है।

कक्षा से बाहर निकल जाने के बाद चंद्रयान  उसके गुरुत्वाकर्षण बल से बाहर हो जाता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव कम हो जाता है जिसकी वजह से वह कहीं भी जा सकता है।

चंद्रयान 1 के मुख्य भाग

लगभग 6 दिन तक चंद्र की कक्षा में घूमने के बाद 14 नवंबर को ऑर्बिटर से इंपैक्टर अलग हो गया और चंद्रमा की सतह पर जाकर बैठ गया। यह कोई घबराने वाली बात नहीं है कहीं आप सोचें कि चंद्रयान  से कोई हिस्सा टूट कर चंद्र पर जा गिरा है। दरअसल इंपैक्टर 1 ऐसी गुप्त मशीन है जो चंद्रमा पर रहकर वहां की सभी जानकारी जुटाता है। लगभग 1 साल तक chandrayaan-1 ने चंद्र पर रहकर सभी सर्वेक्षणों के बाद एक नया आंकड़ा जुटा लिया। चंद्रयान  को लगभग 1 साल मतलब 312 दिन वहां पर सर्वेक्षण करते हुए पूरे हो चुके थे। चंद्रयान का चंद्र पर भ्रमण सिद्ध हुआ और उन्होंने चंद्र पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया।

चंद्रयान 1 पर होने वाला खर्च

साल 2017 के सत्र के दौरान राज्यसभा में सरकार द्वारा बताया गया कि chandrayaan-1 के लॉन्च में लगभग 386 करोड रुपए का खर्चा हुआ। इस मूल्य राशि को चंद्र पर मौजूद सभी जानकारी जुटाने के लिए खर्च किया गया था। यदि वैज्ञानिकों की दृष्टि से देखें तो यह खर्च उनके लिए सफल सिद्ध हुआ।

चंद्रयान-1 क्या है और इसके कितने भाग हैं?

आपने न्यूज़, टीवी चैनल आदि में कई जगह चंद्रयान-1 की पिक्चर देखी होंगी। आपने देखा होगा कि चंद्रयान-1 एक रॉकेट की तरह होता है जिस पर बहुत कुछ लिखा होता है। जैसे भारत, इसरो इंडिया, पीएसएलबी, जीएसएलबी।

  • रॉकेट जब लॉन्च किया जाता है तो वह कई हिस्सों में बट जाता है इस रॉकेट में दो स्मॉल बूस्टर के रूप में लगाए जाते हैं
  • जिसमें से पहला रॉकेट चंद्रयान-1 को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकालता है,
  • वहीं दूसरे रॉकेट का काम होता है चंद्रयान-1 को लेकर पूरे पृथ्वी का एक चक्कर लगाना।
  • जिसके बाद वह दूसरा रॉकेट चंद्रयान-1 को अंतरिक्ष के पास पहुंचाता है और उससे अलग हो जाता है।
  • आखिर में चंद्रयान अपने आखिरी रॉकेट के साथ चंद्र के और नज़दीक पहुंच जाता है। जिसके बाद वह रॉकेट भी चंद्रयान-1 से अलग हो जाता है।
  • रॉकेट अलग होने के बाद चंद्रयान के सोलर पैनल खुल जाते हैं। सोलर पैनल की सहायता से चंद्रयान-1 सूरज की किरणों के साथ आगे बढ़ता है और बाकी की मदद पृथ्वी पर संचालित गाइडेन्स सिस्टम द्वारा किया जाता है।
  • अब जो चंद्रयान चंद्र के पास उसकी कक्षा में घूम रहा है उसमें 2 हिस्से होते हैं। जिसमें से एक होता है ऑर्बिटर और दूसरा होता है इंपैक्टर।
  • ऑर्बिटर और इंपैक्टर दोनों ही चंद्रमा की कक्षा में एक साथ प्रवेश करते हैं परंतु ऑर्बिटर का काम होता है चंद्रमा की कक्षा में घूमना और इंपैक्टर का काम होता है चंद्रमा की सतह पर जाकर जानकारी इकट्ठा करना।
  • इंपैक्टर एक अंग्रेजी शब्द से बना हुआ है जो इंपैक्ट शब्द है जिसका अर्थ होता है उसके अंदर बहुत संयंत्रों का समावेश है। जहां एक तरफ ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में रहकर चंद्रमा की ऊपरी सतह की जानकारी जुटाता है। वही इंपैक्टर अपने अंदर समावेशित यंत्रों की मदद से चंद्रमा की सतह पर मौजूद सभी प्रकार की वस्तुओं के बारे में गहन अध्ययन करता है।
  • इसरो के इंपैक्टर को मून इंपैक्ट प्रोब यानी एमआईपी कहते हैं। पिछले चंद्रयान मिशन के समय इंपैक्टर चंद्रमा की सतह से लगभग 100 किलोमीटर सतह से ऊपर ऑर्बिटर से अलग हुआ था और चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया था।
  • इंपैक्टर के चांद की सतह पर गिरने पर भी कोई नुकसान या क्षति नहीं हुई थी क्योंकि इंपैक्टर को कुछ इस तरह बनाया गया था जिसके चाँद पर गिरने पर कोई भी क्षति या हानि ना हो।
  • इंपैक्ट द्वारा जो भी जानकारियाँ इकट्ठी की गई थी वह इसरो सेंटर में भेजी जा चुकी थी। इन दो हिस्सों के अलावा चंद्रयान में लगभग 10 हिस्से और मौजूद है। जो अपने आप में एक अद्भुत संरचना रखते हैं।
  • चंद्रयान के कुछ भाग तो ऐसे हैं जिनकी मदद से वे दूर से ही देख लेते हैं कि चंद्र की सतह कैसी है उबड़ खाबड़ है या समतल।
  • चंद्रयान में ऐसी चीजों का भी समावेश किया गया है जो चंद्र पर उपलब्ध सभी चीजों की जानकारी प्राप्त करता है जैसे उन चीजों से रेडिएशन निकलता है कोई नुकसान होता है कोई भी विकिरण निकलता है या फिर खतरनाक है।
  • उसमें कुछ ऐसी भी यंत्र शामिल है जो दूर तक लेजर के जरिए मौजूद चीजों का अंदाजा लगा सकते हैं उनका सत्यापित अनुमान ज्ञात कर सकते हैं।
  • MIT के अलावा चंद्रयान में एक अद्भुत चीज मौजूद है जो मून मिंरोलॉजी मेप्पेर्ड जिसने मुख्य रूप से चंद्रमा पर पानी होने का सत्यापन दिया। इसी पानी की खोज के चलते इसरो ने चंद्रयान -2 की नींव रख दी। क्योंकि चाँद पर पानी होने की बात जानने के बाद वैज्ञानिकों में चाँद की रिसर्च को लेकर और कहीं अधिक उत्साह बढ़ चुका था। इसके बाद चाँद की अधिक रिसर्च करने के लिए उन्हें एक और चंद्रयान की आवश्यकता थी। साल 2009 में chandrayaan-2 का डिज़ाइन पूरी तरह से तैयार कर लिया।

FAQ’s

चंद्रयान से जुड़े सवाल UPSC में भी पूछे जाते है, इसकी जानकारी हमें PIB द्वारा मिली है. 

Q: चंद्रयान-2 क्या है?

Ans: चंद्रयान-2 एक ऐसा यंत्र है जो चंद्र पर जाकर नई नई खोज करने वाला है जो पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिकों द्वारा संचालित किया जाएगा।

Q: क्यों रोकी गई थी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग?

Ans: पहले चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तारीख 15 जुलाई निर्धारित की गई थी। परंतु ऐसा कहा गया कि कुछ तकनीकी खराबी होने की वजह से चंद्रयान-2 का लांच रोक दिया गया। वैज्ञानिकों द्वारा संक्षिप्त विवरण के तौर पर बताया गया कि रॉकेट में डाले जाने वाले इंधन का प्रेशर कुछ गड़बड़ दिख रहा था, जिसकी वजह से इस मिशन को लॉन्च से पहले आखिरी क्षणों पर रोकना पड़ा। इसका साफ और सीधा अर्थ यही है कि चंद्रयान-2 में कोई परेशानी नहीं थी बल्कि उसको लेकर जाने वाले रॉकेट में कुछ परेशानी थी।

बहरहाल अब 22 जुलाई को अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा उच्च तकनीकी खराबी पर भी सफलता प्राप्त की गयी। जिसके बाद चंद्रायण-2 चंद्रमा की सैर के लिए धरती से लांच किया जा चुका है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा अब यही कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही चंद्रयान-2 द्वारा चाँद पर मौजूद सभी गुप्त जानकारियों के बारे में सभी छिपे हुए राज खुल जाएंगे. जिसकी मदद से चाँद पर जीवन की खोज कर ली जाएगी।

Q: चंद्रयान-2, चंद्रयान-1 से किस तरह भिन्न है?

Ans: चंद्रयान-2, चंद्रयान-1 से कई प्रकार से भिन्न है। जैसे चंद्रयान-2 में पहले से कहीं अधिक बदलाव किए गए हैं। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर और इंपैक्टर पहले से भिन्न है। इस बार इंपैक्टर में एक ऐसा यंत्र डाला गया है जिसका नाम रोवर है जो चंद्रमा की सतह पर अपने 8 पहियों से चलकर आसानी से गहन खोज कर सकता है। चंद्रयान-2 और चंद्रयान-1 के वजन में भी काफी अंतर है पहले के चंद्रयान-1 का वजन 1380 किलोग्राम था, और चंद्रयान-2 का वजन 3850 किलोग्राम है।

Q: चंद्रयान-2 किन लक्ष्यों को लेकर लॉन्च किया गया है?

Ans: चंद्रयान-2 के लॉन्च का मुख्य लक्ष्य चंद्रयान-1 द्वारा की गई अधूरी खोज को पूरा करना है। चंद्रयान-2 का उद्देश्य चंद्र पर समतल रूप में रोवर को चला कर चंद्र पर मौजूद प्राकृतिक कणों का पता लगाकर वहां जीवन की खोज को सत्यापित करना है।

Q: चंद्रयान-2 को कितने यंत्रों द्वारा चंद्र पर ले जाया जाता है?

Ans: ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह के उचित आंकलन के लिए आठ वैज्ञानिक पेलोड ले जाता है और चंद्रमा के बाहरी वातावरण का अध्ययन करता है।  लैंडर को सतह और उपसतह विज्ञान प्रयोगों के संचालन के लिए तीन वैज्ञानिक पेलोड द्वारा चाँद पर ले जाया जाता है।  रोवर ने चंद्र की सतह के बारे में हमारी समझ को बढ़ाने के लिए अपने अंदर दो पेलोड का समावेश किया हुआ है। 

Q: ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर का मिशन जीवन कितने वर्षो का है?

Ans: चंद्रयान-2 को कई भागों में बांटा गया है जो एक अलग निर्धारित अवधि के अनुसार चंद्रमा पर जीवन की खोज करेगा। जैसे यदि बात करें लैंडर और रोवर की तो वह एक चंद्र दिन की अवधि तक चंद्र पर सर्वेक्षण करेगा। एक चंद्र दिन की अवधि से आशय पृथ्वी के 14 दिनों से है। ऑर्बिटर के खोज की समयावधि लगभग 1 वर्ष की होगी। चंद्रयान के ये सभी भाग चंद्र पर जीवन की खोज करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

Q: चंद्रयान-2 को कौन से वाहन के जरिए चंद्र तक लॉन्च किया गया है?

Ans: चंद्रयान-2 को जीएसएलवी एमके- III एम 1 लॉन्च वाहन द्वारा लॉन्च किया गया है।

Q: चंद्रयान-2 कब लांच किया गया?

Ans: चंद्रयान -2 ऑनबोर्ड GSLV MkIII-M1 की लॉन्चिंग सभी वैज्ञानिक जांच परीक्षणों के बाद 22 जुलाई, 2019 को श्रीहरिकोटा से 14.43 बजे शुरू की गई।

Q: विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर कब उतरेगा?

Ans: वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार विक्रम लेंडर की लैंडिंग चंद्रमा की सतह पर 6 सितंबर 2019 को तय की गई है।

Q: चंद्रमा की सतह पर यात्रा के लिए रोवर कितनी दूरी पर जा सकता है?

Ans: चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद रोवर लगभग आधा किलोमीटर की दूरी तक जा सकता है।

Q: चंद्रयान-2 मिशन की क्या चुनोती है?

Ans: चंद्रयान-2 मिशन की महत्वपूर्ण चुनोतियाँ

  • इसरो के अनुसार, चंद्रयान -2 चंद्रमा मिशन चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव का पता लगाना है।
  • चंद्रमा की सतह, उसके खनिज और तत्व की सामग्री, चंद्रमा और चंद्रमा की सतह पर पानी-बर्फ के होने का साबुत जुटाना।

Q: अंतरिक्ष यान लेंडर का नाम किसके नाम पर रखा गया है?

Ans: लैंडर को विक्रम के रूप में भी जाना जाता है। ISRO के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पिता कहे जाने वाले विक्रम साराभाई के नाम पर ISRO ने लैंडर का नाम रखा है।

Q: विश्व भर में चांद की नर्म सतह पर जाने के लिए कितनी एजेंसियों द्वारा प्रयास किए गए हैं? उनमें से कितने प्रतिशत एजेंसियां चांद पर अपनी खोज को लेकर सफल हुई हैं?

Ans: विश्व भर में चांद की सतह पर पहुंचने के लिए लगभग 52 एजेंसियों ने अपने भरसक प्रयास किए हैं। चांद की सतह पर पहुंचने में लगभग 52% एजेंसियों ने ही सफलता प्राप्त की है।

Q: चंद्रमा का अध्ययन क्यों आवश्यक है?

Ans: विशेषज्ञों के अनुसार चंद्रमा का अध्ययन सौरमंडल के इतिहास को समझने और समय के परिवर्तन होते समय आने वाले बदलावों को समझने के लिए करना आवश्यक है। चंद्रमा के अध्ययन से हमें पृथ्वी से जुड़ी कई जानकारियां प्राप्त होती है साथ ही चंद्रमा पर मौजूद प्राकृतिक कणों की खोज करके उनका सर्वेक्षण करने में सहायता प्राप्त होती है।

Q: चंद्रमा पर क्या तापमान होता है?

Ans: चंद्रमा पर तापमान समय के हिसाब से बदलता रहता है। जैसे दिन के समय सूर्य के प्रकाश की वजह से चंद्रमा पर तापमान 130 ZingC होता है। वहीं जब रात का समय हो जाता है तो सूर्य अपनी दिशा बदल लेता है जिसकी वजह से चंद्रमा पर पहले से ठंडक हो जाती है उस समय चंद्रमा का तापमान 180C हो जाता है।

Q: क्या चांद पर कोई जीवन है?

Ans: विशेषज्ञों की मानें तो अभी तक चांद पर जीवन की खोज नहीं हो पाई है। परंतु बड़े बड़े वैज्ञानिक चांद पर जीवन की खोज में जुटे हुए हैं।

Q: हमें चंद्रमा का केवल एक ही पक्ष क्यों दिखाई देता है?

Ans: चंद्रमा एक ऐसा ग्रह है जो पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर 27.3 दिन, 12 घंटे और 44 मिनट में एक पूर्ण चक्कर लगाता है। वैज्ञानिकों की माने तो चंद्रमा को एक चक्कर पूरा करने में इतना समय इसलिए लगता है क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसे अपनी ओर खींचता है जिसकी वजह से उसकी गति धीमी पड़ जाती है। इसलिए पृथ्वी के किसी भी हिस्से पर जाकर देखने से हमें चंद्रमा का एक ही पक्ष नजर आता है।

Q: पृथ्वी चंद्रमा से कितनी दूरी पर है?

Ans: यदि एक निश्चित आंकड़े के रूप में देखा जाए तो पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384000 किमी है। फिर भी यह बात अचंभित करने वाली है कि इतनी दूरी से भी चांद पृथ्वी तक अपनी ठंडक पहुंचाता है।

Q: चंद्रमा पृथ्वी से कितना भिन्न है?

Ans: चंद्रमा और पृथ्वी में सबसे बड़ा एक अंतर यही है कि पृथ्वी पर जीवन संभव है और चंद्रमा पर नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि पृथ्वी पर जीवन संभव करने के लिए सभी साधन मौजूद हैं जैसे जल, पानी और हवा और यदि चंद्रमा की तरफ देखा जाए तो चंद्रमा पर जीवन के लिए कोई भी आधारभूत संसाधन मौजूद नहीं है। यदि आकार की बात की जाए तो चंद्रमा का व्यास पृथ्वी के एक चौथाई व्यास के बराबर है मतलब 3,476 किमी। चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का मात्र 1/81 हिस्सा है। पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के बारे में तो आप जानते ही होंगे परंतु चांद का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के हिसाब से मात्र 1/6 है।

Q: चंद्रमा पर पानी की जरूरत क्यों है?

Ans: जैसा की आप सभी देख पा रहे हैं कि आजकल पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण की वजह से दिन प्रतिदिन लोगों का जीना मुहाल होता जा रहा है। इसके चलते अब यही अनुमान लगाए जा रहे हैं कि चंद्रमा और मंगल ग्रह पर जीवन की खोज यदि हो जाती है तो धीरे-धीरे लोग वही जाकर बसना शुरू कर देंगे। अब जब चंद्रमा पर पानी और हवा की खोज पूरी हो ही जाएगी तो यह आम बात हो जाएगी कि लोग अपने ज्ञान लेकर चंद्रमा और मंगल ग्रह की यात्रा पर निकलेंगे। उसके बाद वहां थोड़ा आराम करने के बाद ही आगे बढ़ेंगे तो ऐसे में चंद्रमा की स्थिति पेट्रोल पंप की तरह हो जाएगी। क्योंकि जब पानी और हवा पहले से ही चंद्रमा पर मौजूद होगी तो अपने साथ कम पानी और हवा लेकर आएँगे और चंद्रमा पर मौजूद वस्तुओं का फायदा उठाने के बाद वहां से निकल जाएंगे जैसा कि आप पेट्रोल पंप के साथ करते हैं। बहरहाल यह सब मात्र अंदाजे की तरह बताए जा रहे हैं भविष्य में ऐसा होगा या नहीं यह जानने के लिए आपको आने वाले भविष्य का ही इंतजार करना होगा।

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