कॉविड 19 ‘AP स्ट्रेन’ क्या है, लक्षण, उपाय | COVID 19 ‘AP Strain’ in Hindi, Symptoms

कॉविड 19 AP स्ट्रेन क्या है, कोरोना लक्षण, उपाय, 15 गुना ज्यादा संक्रामक [AP Strain in Hindi] (Covid 19, N440K, Corona, Symptoms, News, Vaccine, Kurnool, Treatment)

दोस्तों आपको आज हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर देने जा रहे हैं, वह खबर कोरोना वायरस से सम्बंधित. जी हां आपको बता दें कि कोरोना जिसने पूरे देश में चारों ओर त्राही त्राही मचाई हुई है. वह अब अगले चरण में चली गई है. कोरोना एक रूप में एक बार फिर भारत में प्रवेश कर चूका है. कोरोना का यह नया रूप पहले से ज्यादा घातक है. कोरोना के इस नए रूप को ‘AP स्ट्रेन’ कहा जा रहा है, जोकि फले के मुकाबले 15 गुना ज्यादा तेजी से लोगों को संक्रामित कर रहा है. कोरोना का यह नया स्ट्रेन क्या है और यह स्ट्रेन कितना खतरनाक है इसकी जानकारी आपको हम यहां दे रहे हैं. इस लेख को अंत तक ध्यान पूर्वक पढ़ें.

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AP स्ट्रेन क्या है (AP Strain N440K)

भारत में कोरोना का एक नया वैरिएंट देखने को मिला है, जिसे भारत के वैज्ञानिकों ने AP स्ट्रेन नाम दिया है. इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योकि यह हमारे देश के आंध्रप्रदेश राज्य में देखने को मिला है. इस वैरिएंट को वैज्ञानिकों ने अपनी भाषा में N440K नाम दिया है.  

AP स्ट्रेन खोज

कोरोना के इस नए स्ट्रेन की खोज की बात करें तो आपको बता दें कि इसे सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च करके खोजा गया है. भारत में इन दिनों जो सबसे ज्यादा कोरोना वायरस का स्ट्रेन चल रहा है, वह है डबल म्यूटेंट वायरस. यह वायरस यूके और साउथ अफ्रीकन स्ट्रेन है.     

AP स्ट्रेन वैरिएंट कहां मिला (AP Strain Kurnool)

एक रिपोर्ट के अनुसार यह पता चला है कि कोरोना का यह नया वैरिएंट आंध्रप्रदेश के एक जिले जिसका नाम कुरनूल है में मिला. दक्षिण भारत में अब तक 5 मरीज इस नए स्ट्रेन के पाए गये हैं. यह बेहद खतरनाक वैरिएंट है. एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि CCMB में कई वैरिएंट की जाँच की जाती है. जहाँ पर यह देखा जाता है कि कौन सा वैरिएंट कितना खतरनाक है. वैज्ञानिकों ने कई जगहों से सैंपल इकट्ठे किये हैं, जिनमें से 50% इस नए वैरिएंट पाए गये हैं.

AP स्ट्रेन कितना खतरनाक है

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नया स्ट्रेन वर्तमान स्ट्रेन से 15 गुना ज्यादा संक्रामक यानि खतरनाक है. इस स्ट्रेन में 3 से 4 दिनों में व्यक्ति बेहद गंभीर रूप से बीमार हो जा रहे हैं. यह बहुत ही तेजी के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर रहा है.

AP स्ट्रेन वैरिएंट संक्रमित व्यक्ति

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह खबर सामने आई है कि यह स्ट्रेन आंध्रप्रदेश में मिला है लेकिन इसके मरीज तेलंगाना, कर्नाटक, और यहां तक कि महाराष्ट्र में भी देखने को मिल रहे हैं. इससे राज्य के लोगों में खौफ पैदा हो गया है.

AP स्ट्रेन के लक्षण (Symptoms)

  • जैसा कि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्ट्रेन 3 से 4 दिनों में व्यक्ति को बेहद गंभीर रूप से बीमार कर दे रहा है. यानि कि उन्हें हाइपोक्सिया या डिस्पनिया जैसी बीमारी की शिकायत हो जाती हैं.
  • इससे व्यक्ति के फेफड़े तक सांस नहीं पहुँच पाती, जिससे समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण उसका ईलाज भी नहीं हो पाता और उसकी तुरंत ही मौत हो जाती है.
  • यह नया स्ट्रेन बच्चों में भी देखा जा रहा है. जोकि बड़ी मात्रा में उन्हें भी प्रभावित कर रहा है. यहां तक कि वैज्ञानिक यह तक कह रहे हैं कि जिन लोगों की इम्यूनिटी बेहतर हैं और जो एकदम फिट है. उन लोगों में भी यह फ़ैल सकता है.

AP स्ट्रेन बचने के उपाय (Treatment)

कोरोना के इस नए स्ट्रेन से बचने का सबसे कारीगार तरीका केवल अच्छा सा मास्क लगाना, भीड़ से दूर रहना, किसी भी चीज को छूने के बाद हाथों को अच्छे से साफ करना और सबसे जरुरी चीज जहां तक हो सके तो अपने घर के अंदर ही रहें.

इन उपायों को ध्यान में रखते हुए इस नए स्ट्रेन से बचा जा सकता है, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्ट्रेन से बचना एवं इसकी चैन तोड़ना बहुत जरुरी है, नहीं तो यह कोरोना की दूसरी लहर से भी ज्यादा घातक और भायावह हो सकता है.

FAQ

Q : क्या AP स्ट्रेन कोरोना वायरस की तीसरी लहर है ?

Ans : ऐसा कहा जा सकता है.

Q : N440K क्या है ?

Ans : यह AP स्ट्रेन ही है जिसे वैज्ञानिकों ने N440K नाम दिया है.

Q : AP स्ट्रेन भारत में कहां कहां फ़ैल चूका है ?

Ans : इसके केस आंध्रप्रदेश के अलावा तेलंगाना, कर्णाटक एवं महाराष्ट्र में देखने को मिले है.

Q : कोरोना वायरस के पीक पर पहुँचने की उम्मीद कब की लगाई जा रही है ?

Ans : इसका कोई भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. यह सिर्फ लोगों के ऊपर निर्भर करता है कि वे इसकी चैन कैसे तोड़ सकते हैं.

Q : AP स्ट्रेन के भारत में अब तक कितने केस सामने आ चुके हैं ?

Ans : लगभग 50 से 60 केस देखने को मिल चुके हैं.

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