चाइना के वुहान शहर का पहला कोरोनावायरस का मरीज “पेशेंट जीरो” | Covid 19 “Patient Zero” in hindi

चाइना के वुहान शहर का पहला कोरोनावायरस का मरीज (Covid 19 “Patient Zero”, First Coronavirus Patient in China in hindi)

कोरोना वायरस की महामारी ने पूरी दुनिया के लोगों के दिलों दिमाग में एक दहशत का माहौल बनाया हुआ है. अब तक 32,137 से भी ज्यादा लोग इस महामारी की वजह से मौत के हवाले हो गए हैं. इसके बावजूद भी यह संक्रमण फैल ना अभी तक रुका नहीं है. लगातार फैलता जा रहा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस वायरस की शुरुआत किस मनुष्य के जरिए हुई? विशेषज्ञों द्वारा इस वायरस के मूल बिंदु अर्थात पेशन जीरो का पता लगा लिया गया है जिसके जरिए यह भारत पूरी दुनिया में फैल गया. इस वायरस से संक्रमित होने वाला पहला पेशेंट जिसका नाम दुनिया के सामने अब आ ही गया आइए जानते हैं कौन था वह पहला पेशेंट?

Coronavirus First Patient in China hindi covid 19पेशेंट जीरो क्या होता है?

कोरोनावायरस का पहला पेशेंट कौन था इससे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर पेशेंट जीरो होता क्या है? दरअसल पेशेंट जीरो वह व्यक्ति होता है जिस व्यक्ति को सबसे पहले कोई वायरस अपना शिकार बनाता है. या फिर ऐसा कहे कि पहला केस दर्ज होने वाला नाम ही पेशेंट जीरो के नाम से जाना जाता है. वैसे कोरोनावायरस के पहले पेशेंट के बारे में पता तो लगा लिया गया है लेकिन यह जानकारी कितनी सही है और कितनी गलत इस बात का कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है. क्योंकि यह कुछ गहरी खोज और जांच-पड़ताल के बाद पता लगाया है कि वुहान शहर में रहने वाली महिला जिनकी उम्र 57 वर्ष है वे वुहान शहर के सी फ़ूड मार्केट में झींगा और मछली बेचने का काम किया करती थी. विशेषज्ञों की जांच पड़ताल के बाद कोरोनावायरस के पहले शिकार के रूप में वेई गुइकियन की पहचान सामने आई.

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पेशेंट जीरो का फार्मूला कब से इस्तेमाल किया?

दरअसल 1980 के दशक में एड्स की महामारी कई लोगों के बीच फैली थी जिसकी वजह से सबसे पहले पेशेंट की पहचान करने के लिए पेशेंट जीरो का फार्मूला उपयोग में लाया गया था. एड्स ही एक पहेली ऐसी महामारी थी जिसके लिए इस फार्मूले का इस्तेमाल किया गया. लेकिन बाद में इस तथ्य को गलत साबित कर दिया गया क्योंकि पेशेंट जीरो की पहचान जो की गई थी उसके अनुसार यूएस के विशेषज्ञों द्वारा इस प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया.

पेशेंट जीरो का पता लगाने से क्या फायदा होता है?

 दरअसल पेशेंट जीरो का पता लगाना कोई जरूरी तो नहीं है लेकिन आने वाले भविष्य के लिए यह जानकारी पहले से ही प्राप्त करके रखना बहुत आवश्यक होता है ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियों से बचने के लिए पहले से ही खुद को तैयार किया जा सके.

  • पेशेंट जीरो से ही पता चलता है आखिरकार किसी बीमारी का उद्गम कहां से हुआ और किस तरह से यह लोगों के बीच फैली.
  • उस वायरस के फैलने की वजह, वायरस के फैलने का समय और सही कारण इन सब बातों को एक साथ इकट्ठा करके एक डाटा तैयार किया जाता है वह सब पेशेंट जीरो के जरिए ही करना संभव हो पाता है.
  • उस इंसान से जुड़ी सभी बातें उसको किस चीजों से कैसा प्रभाव पड़ा और कैसे वह इस संक्रमण में आया और साथ ही उसके आसपास के मौसम का भी पूरा ब्यौरा लिखकर तैयार किया जाता है ताकि आने वाले समय के लिए उस डाटा को संभाल के रखा जा सके.

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कोविड-19 की पेशेंट जीरो

57 वर्षीय वेई गुइकियन जो सालों से चाइना के वुहान शहर की हुआँन मार्किट में अपनी दुकान चलाया करती थी और अपनी दुकान से झींगा और मछली का ताजा मास लोगों को बेचा करती थी. यह पूरी रिपोर्ट वॉल स्ट्रीट जनरल द्वारा एक न्यूज़ पेपर में छापी गई उनके अनुसार यह वायरस सबसे पहले उस महिला में पाया गया था. जबकि चाइना की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है कि वे महिला पेशेंट जीरो है परंतु कई सारे दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के बाद यही बात सामने आ रही है कि वेई गुइकियन ही वह महिला है जो इस बीमारी का पेशेंट जीरो साबित होती हैं. 10 दिसंबर को अचानक उस महिला की तबीयत खराब हुई और उसे बहुत ज्यादा ठंड महसूस होने लगी.

वह अपने पास के एक छोटे से क्लीनिक में खुद को चेक कराने के लिए पहुंची जब उसकी तबीयत ठीक होती नजर नहीं आई तब उसने शहर के बड़े हॉस्पिटल में जाना ठीक समझा. लेकिन इसके बाद भी उसकी हालत में कोई सुधार नजर नहीं आया जिसके बाद वह वुहान यूनियन अस्पताल में गई. वहां के डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उन्हें जो बीमारी है वह एक भिन्न प्रकार का वायरस है जिसकी वजह से उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है.

उनकी बीमारी की जानकारी प्राप्त होते ही उन्हें तुरंत आइसोलेट कर लिया गया. कुछ समय पश्चात उनके आसपास दुकान में काम करने वाले लोगों को भी यह परेशानी सामने आई और धीरे-धीरे उन्हें भी क्वॉरेंटाइन कर दिया गया. चीन के डॉक्टर्स ने यह बात का अंदाजा लगा लिया कि यह कोई बहुत बड़ी माहमारी है लेकिन इसके बावजूद भी वेई जनवरी के महीने तक पूरी तरह से ठीक हो गई.

हालांकि 31 दिसंबर तक चाइना में 27 केस दर्ज कर लिए गए थे इसके बावजूद भी चाइना देश इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि पेशेंट जीरो उनके देश चाइना से है. फिर भी इसकी रिपोर्ट उनकी ऑफिशियल वेबसाइट वुहान मुंसिपल हेल्थ कमीशन पर देखी जा सकती है. हालांकि कुछ रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि चीन में कुछ केस नवंबर में ही देखने को मिले थे लेकिन इस बात का खुलासा चीन देश ने नहीं किया है वह अभी भी इस बात को छुपा रहे हैं. हालांकि इस भारत को लेकर चीन हमेशा से ही यही दावा करता आया है कि अमेरिका के कुछ सिपाही इस वायरस को लेकर चीन में दाखिल हुए थे.

चीन देश का यही कहना है कि इस बीमारी और वायरस का हमारे देश से कोई लेना-देना नहीं है यहां तो बस कुछ वायरस से संक्रमित मरीज पाए गए हैं. लेकिन पूरी दुनिया इस बात को जानती है कि इस वायरस का जन्म चीन की वेट मार्केट से हुआ था. आइए जानते हैं चीन की इस वेट मार्केट के बारे में विस्तारपूर्वक….

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चीन की वेट मार्केट

हुआँन बाजार चाइना का सबसे बड़ा सेंट्रल बाजार है जहां पर कई प्रकार के जानवरों का मांस बिल्कुल ताजा बेचा जाता है बल्कि यहां पर कुछ जानवरों जीवित देह का व्यापार भी किया जाता है.

  • उस बाजार में एक साथ कई सारे जानवरों का व्यापार किया जाता है ऐसे में इस बात का पता लगाना बहुत ज्यादा मुश्किल है कि आखिरकार किस जानवर में कौन सा वायरस है जो दूसरे जानवर तक पहुंचकर इंसानों तक भी पहुंच सकता है.
  • यह एक ऐसी गीली मार्केट है जहां पर जानवरों का खून खुला रोड के ऊपर ही बहता है. क्योंकि इसी मार्केट में खुलेआम जानवरों को काटा जाता है और वहीं पर उनका खून बहाया जाता है.
  • इसलिए इसे दुनिया की सबसे बड़ी वेट मार्केट कहा जाता है. हालांकि दुनिया के बाकी देशों में जानवरों को काटा कहीं और जाता है और उनका मांस किसी और बाजार में बेचा जाता है.
  • चीन के लोगों का ऐसा मानना है कि जब जानवर को उनके सामने काटा जाता है तो उसमें बहुत सारी सकारात्मक एनर्जी होने के साथ-साथ कुछ सेहतमंद एनर्जी भी ज्यादा होती हैं इसलिए वे अपनी आंखों के सामने जानवर को कटवा कर उसे खाना पसंद करते हैं.
  • हालांकि जिस अनुसार वहां के जानवरों को काटा और बेचा जाता है उस हिसाब से वहां मार्केट की सुरक्षा को ध्यान में नहीं रखा जाता है ना तो वहां के सैनिटाइजेशन को ध्यान में रखा जाता है और साथ ही जानवरों को रखने का तरीका वहां के लोगों का बिल्कुल भी सही नही है.
  • उस बाजार में मांस काटने और बेचने वाले लोगों के लिए किसी भी प्रकार के कोई नियम नहीं बनाए गए हैं और ना ही किसी भी सुरक्षित नियम का पालन किया जाता है जिस वजह से वहां पर पनपने वाले वायरस जल्द ही वहां के देश और फिर दूसरे देशों में फैल जाते हैं.
  • विभिन्न प्रकार के जानवरों को कई बार एक साथ ही पिंजरे में रख दिया जाता है और कभी-कभी एक जानवर का पिंजरा दूसरे जानवर के पिंजरे के ऊपर रख दिए जाते हैं. यदि किसी जानवर में कोई वायरस होता भी है तो वह तुरंत दूसरे जानवर में पहुंच जाता है.

हालांकि चीन के विशेषज्ञों ने इस बाजार में मौजूद जानवरों के 585 सैंपल लिए थे जिसमें से कोरोनावायरस से संक्रमित 33 प्रकार के जानवर पॉजिटिव पाए गए थे. हालांकि जनवरी में इस बाजार को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और चाइना का ऐसा कहना है कि वह जल्द ही इस रिवाज को पूरी तरह से खत्म भी कर देंगे.

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जानवरों से निकलने वाला वायरस मानव को कैसे प्रभावित करता है?

किसी भी जानवर में होने वाला वायरस आखिरकार इंसान तक पहुंचता कैसे है यह सबसे ज्यादा चौका देने वाली बात है. आइए जानते हैं कोविड-19 जानवरों से इंसानों तक कैसे पहुंचा?

दरअसल विशेषज्ञों द्वारा बताया जा रहा है कि इस वायरस का जन्म चमगादड़ से हुआ क्योंकि चमगादड़ में 5 तरह के कोरोनावायरस पाए जाते हैं जो आमतौर पर मानवों को नुकसान नहीं पहुंचाते है. परंतु यह वायरस एक चमगादड़ में होने की वजह से इसका संक्रमण वुहान शहर के सीफूड मार्केट में मौजूद पैंगोलिन में पहुंच गया. हालांकि कुछ शोधकर्ताओं द्वारा ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वायरस सांपों तक पहुंचा लेकिन इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है. लेकिन इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि इस वायरस का जन्म चमगादड़ के जरिए ही हुआ है. उस चमगादड़ से संक्रमित हुई पैंगोलिन को उस बाजार में काटा गया होगा और जिस व्यक्ति के हाथों के संपर्क में उस जानवर का खून लगा होगा वह इससे संक्रमित हुआ जिसकी वजह से सारे मानवो तक यह संक्रमण पहुंच गया. इस पूरी प्रक्रिया को जूनोसिस नाम दिया जाता है. जब एक जानवर से निकलकर संक्रमण दूसरे जानवर तक जाता है और उस जानवर की वजह से स्वस्थ मानव संक्रमित होते हैं तो इस प्रक्रिया को जूनोसिस कहा जाता है.

जीरो पेशेंट से जुड़े वायरस का इतिहास

कुछ वायरस इतिहास में भी आए जिनका उद्गम भी जानवरों को ही माना गया आइए जानते हैं उनके बारे में…

  • साल 2003 में फैलने वाला सास वायरस भी चमगादड़ से निकला था जिसके बाद उस वायरस ने सिवेट कैट को संक्रमित किया और चमगादड़ में मौजूद इस वायरस ने वहां पर मौजूद ऊंटों को भी संक्रमित कर दिया. यह भी एक प्रकार का कोरोनावायरस ही था जो चमगादडो से निकला था फिलहाल कोविड-19 के रूप में लोगों के लिए जान का खतरा बन चुका है.
  • इसी प्रकार की एक महामारी साल 2009 में मेक्सिको के एक गांव में रहने वाले 4 साल के बच्चे एडगर हर्नानडेज को हुई थी. वह अचानक बीमार पड़ गया जब जांच पड़ताल की गई तब पता चला कि उसे स्वाइन फ्लू नामक महामारी हुई थी. उस बच्चे के घर के पास ही एक सूअरों का फॉर्म था जिसकी वजह से वह इस बीमारी से संक्रमित हुआ और उस बच्चे की वजह से गांव में रहने वाले कई लोग इस बीमारी की चपेट में आए थे. बाद में वह बच्चा बहुत ज्यादा फेमस हो गया और उसका एक छोटा स्टेचू बना कर उस गांव में लगाया भी गया. स्वाइन फ्लू नामक महामारी का जीरो पेशेंट वह एडगर नाम का बच्चा था.
  • इसी प्रकार 1854 के दशक में कोलेरा नाम की महामारी कई लोगों में देखने को मिली थी. इस महामारी में एक कुछ महीने के बच्चे को पेशेंट जीरो के नाम से पहचाना गया था. वह बच्चा लंदन का रहने वाला था.
  • उसके बाद 1907 के दौरान मैरी मेलिन नाम की महिला को टाइफाइड हो गया था हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ था जब किसी को टाइफाइड से संक्रमण हुआ था परंतु इस महिला से काफी लोग संक्रमित हुए थे इस वजह से इसे पेशेंट जीरो का नाम दिया गया था. इस महिला के नाम से यह केस काफी मशहूर हुआ था.

कई सारे विशेषज्ञ और शोधकर्ताओं का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को पेशेंट जीरो का नाम देना सही नहीं है. क्योंकि ऐसे में उस व्यक्ति की पहचान मशहूर हो जाती है जिसके बाद उसे कुछ लोग घृणा की नजरों से देखते हैं क्योंकि उसे उस संक्रमण का कारण मानना आरंभ कर देते हैं. हालांकि यह बिल्कुल भी सही बात नहीं है क्योंकि कोई भी संक्रमण किसी और चीज से फैला होता है हालांकि वह पहला व्यक्ति होता है जो उसका शिकार होता है इसलिए उसे पेशेंट जीरो का नाम लिया जाता है ना कि इस वजह से कि उसने यह बीमारी पूरी दुनिया में फैलाई है. इसलिए किसी भी दुर्घटना या महामारी के लिए किसी एक व्यक्ति को दोषी समझना सही नहीं है.

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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