ताज़ा खबर

सीवी रमन का जीवन परिचय व अनमोल वचन | CV Raman biography and quotes in hindi

सीवी रमन का जीवन परिचय व अनमोल वचन ( CV Raman biography and quotes in hindi)

सी वी रमन का पूरा नाम सर चन्द्र शेखर वेंकट रमन है. वह भारत के भौतिक शास्त्री थे. 1930 में उन्हें भौतिकी के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था. 1954 में उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से से भी सम्मानित किया गया है. 15 साल तक 1933-1948 वह कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे, उसके बाद वे खुद के रमन भारतीय अकादमी ऑफ़ साइंस के निदेशक भी रहे. वह विज्ञान संघ के अध्यक्ष भी रहे. आज वही विज्ञान संघ भारत की पहचान बना हुआ है. सी वी रमन जिस वक्त अपना शोध कर रहे थे, तब उस समय वैज्ञानिकों के लिए उस क्ष्रेत्र में उतनी ज्यादा करियर की सम्भावनाये नहीं थी. ऐसे महापुरुष के बारे में यहाँ दर्शाया गया है. 

CV RAMAN

सी वी रमन का जन्म और शुरूआती जीवन (C V Raman early life)

सर वेंकट रमन का जन्म 7 नवम्बर 1888 को दक्षिण भारत के तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में हुआ था. वो बहुत ही साधारण परिवार में जन्मे थे, जिसकी आमदनी बहुत ही कम थी. रमन जब 4 साल के थे तब उनके पिता को नौकरी मिली. रमन हिन्दू धर्म के ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे, उनके पिता धार्मिक थे किन्तु धर्म को लेकर अंधभक्त नहीं थे. रमन भी अपने पिता की तरह धर्म के लिए साधारण दृष्टीकोण ही रखते थे, लेकिन वह बहुत लोगों को देखते थे कि वह हिन्दू धर्म को परम्परागत तरीके से शाकाहारी बन कर पूजा पाठ करके निभा रहे है. वह हमेशा ही धार्मिक और सदाचारी प्रवृति के रहे. जब वह बहुत छोटे थे तभी उनके पिता का तबादला 1892 मे विशाखापत्तनम में हो गया. उनके पिता श्री मति ए. वी. एन. कॉलेज में भोतिकी और गणित के व्याख्याता थे. उनके पिता को पढने का बहुत शौक था वो किताबों को बहुत ही संजों के रखते थे, जिस वजह से उनके घर में ही एक छोटी सी लाइब्रेरी खुल गई थी. सी वी रमन को इस वजह से बचपन में ही पढने का माहौल मिल गया. बचपन में ही वह बहुत सारे हिंदी और अंग्रेजी के उपन्यास को पढ़ लिए थे. इसलिए वो पढने के लिए विशाखापत्तनम शहर में चले गए और वहा के सेंट अलॉयसियस एग्लों इंडियन हाई स्कुल में पढाई की और उन्होंने बहुत ही कम 11 साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली.

सी वी रमन की शिक्षा (C V Raman education)

13 साल की उम्र में उन्होंने स्कॉलरशिप के साथ इंटरमिडियट की परीक्षा पास की. उन्होंने मद्रास जोकि अब चेन्नई है, विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की परीक्षा 1904 में पास की. 1902 मे उनके पिता मद्रास में प्रेसीडेंसी कॉलेज में गणित और भौतिकी के व्याख्याता के रूप में आ गये थे. सी वी रमन ने पहली बार भौतिकी विषय में स्वर्ण पदक जीता था, फिर वे 1907 में अपनी मास्टर डिग्री में पुरे मद्रास विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान में प्रथम आये थे. अपनी मास्टर डिग्री के दौरान ही वह प्रयोगशाला में नई खोज करते रहते थे, जिस वजह से उनके प्रोफेसर उन्हें बहुत प्यार करते थे. बहुत पहले छात्र जीवन से ही उन्होंने प्रकाशिकी और ध्वनिक दो क्षेत्रों में अपना शोध करना शुरु कर दिया था. उनके प्रोफेसर आर एस जोन्स ने उन्हें सुझाव दिया कि वह अपने प्रयोग को अपने शोध पेपर के रूप में प्रकाशित करवाए, जिस पर अम्ल कर उन्होंने अपने शोध पेपर को लन्दन से प्रकाशित होने वाली पत्रिका में छपवाया. उस पत्रिका का नाम फिलोसिफिकल पत्रिका थी, उसमें 1906 के नवम्बर माह में सी वी रमन जी की शोध को प्रकाशित किया गया था. जिसका नाम था प्रकाश का आणविक विकिरण.                         

सी वी रमन की पारिवारिक जानकारी (C V Raman family)

सी वी रमन के पिता का नाम चन्द्र शेखर अय्यर था, वे एस पी जी कॉलेज में भौतिकी विज्ञान के शिक्षक थे. उनकी माता जी का नाम पार्वती अम्मल था. वह एक गृहणी थी. सी वी रमन अपने आठ भाई बहनों में अपने माता पिता के दुसरे संतान थे. उनके दुसरे भाई का नाम रमन सुब्रह्मण्यन था. वह आईएएएस में कार्य करते थे. रमन भी इस विभाग में जाना चाहते थे उन्होंने उसकी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त भी कर लिया था, लेकिन वो नहीं गए. रमन विज्ञान को लेकर हमेशा ही कुछ नया करने की सोचते रहते, जब भी छुट्टी में घर आते अपने भाई बहनों से सामने अपने शोध का प्रदर्शन करते रहते थे.

सी वी रमन का व्यक्तिगत जीवन (C V Raman personal life)

6 मई 1907 को सी वी रमन का विवाह लोकसुन्दरी अम्मला से हुआ था. लोकसुन्दरी बहुत अच्छा वीणा बजाती थी, जिसको सुनकर सी वी रमन ने ही विवाह का प्रस्ताव दिया था. उनके दो बेटे थे एक बेटे के नाम चंद्रसेखर था और दुसरे बेटे का नाम राधाकृष्णन था. राधाकृष्णन एक खगोलशास्त्री थे. चन्द्रशेखर के चाचा रमन सुब्रह्मन्यन ने 1983 में अपने परमाणु प्रतिक्रियाओं की खोज में नोबेल पुरस्कार जीता.       

सी वी रमन का करियर (C V Raman career)

उन्हें ब्रिटिश व्याख्याताओं ने यूनाईटेड किंगडम से उन्हें मास्टर डिग्री लेने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उनके माता पिता और मद्रास के सिविल सर्जन ने उन्हें बताया कि उनका स्वास्थ्य ब्रिटिश जलवायु का सामना करने के लिए पर्याप्प्त नहीं है, इसलिए उन्होंने भारत में ही रहने के लिए कहा. सी वी रमन ने 1917 में ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित की गई परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करके सरकार के वितीय विभाग में नियुक्त हो गए. उनकी नियुक्ति कोलकाता में सहायक लेखापाल के पद पर हुई. कोलकाता में ही वह अपने अनुसंधान ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेसन ऑफ़ साईंस’ की प्रयोगशाला में जाकर करते रहते थे. फिर उन्होंने नौकरी को छोड़ कर इस प्रयोगशाला में ही मानद सचिव के पद पर आसीन हो गये, फिर उन्होंने कलकत्ता विश्वविधालय में भौतिक विज्ञान के व्याख्याता के पद पर नियुक्त हो गये. 1917 में ब्रिटिश राष्ट्र मंडल का सम्मलेन लन्दन में हुआ था जिसमे उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया था. यहाँ से सी वी रमन की यात्रा पहली बार विदेश के लिए हुई थी. कुछ समय के लिए वो रंगून में भी रहे. रमन अपने इस समय को स्वर्ण युग के रूप में बताते है.

1916 में रमन ने बनारस के बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के फाउंडेशन सामारोह में भाग भी लिया और वहाँ उन्होंने गणित और भौतिकी में नये खोज के बारे में अपने व्याख्यान भी दिए. वे कुछ समय तक वहाँ प्रोफेसर के रूप में अपने व्याख्यान को देने जाते रहे. 1924 में वो लन्दन के रॉयल सोसाइटी के सदस्य बने. इसके बाद 28 फ़रवरी 1928 रमन ने आईएसीएस के सहयोगियों के साथ प्रयोगों को आगे बढ़ाया, जिसमे उनका सहयोग के एस कृष्णन ने किया. उर्जा की कमी का फोटो में दिखना और इसके परिणामस्वरुप स्पेक्ट्रम में कुछ तिरछी रेखाओं का दिखना, यही रमन द्वारा किया गया प्रयोग था. बाद में उन्ही के नाम का प्रयोग कर खोज को रमन इफेक्ट की खोज का नाम दे दिया गया था. इस खोज की घोषणा के बाद उसको एक पत्रिका नेचर ने प्रकाशित किया. इसके बाद दुनिया के सभी विश्वविद्यालय में उनके शोध रमन इफेक्ट नाम से अन्वेषित होने लगी. भारत में इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है. रमन इफेक्ट के द्वारा लेजर की खोज से अब रसायन उधोग, प्रदुषण की समस्या इत्यादि में रसायन की मात्रा का पता लगाने के लिए रमन इफेक्ट का इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में यह अतुलनीय खोज थी. इस खोज के लिए उन्हें भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार भी प्राप्त हुआ. वे पहले ऐसे वैज्ञानिक थे, जिन्होंने कम संसाधनों में भी अपनी शोध कार्य को अंजाम तक पहूँचाया.  

डॉ. सी वी रमन द्वारा लगभग 2000 तक शोध पत्र प्रकाशित हुए है, जिसमे ज्यादातर भौतिकी से सम्बंधित द्रव, गैस और ठोस की भीतरी अणु संरचना के बारे में पता लगाने में उन्होंने अपना शोध कार्य किया है. उनके शोध में हीरे की चमक के बारे में पता लगाने पर भी शोध कार्य हुआ. सी वी रमन को संगीत और वाध्य यन्त्र में भी रूचि थी अपनी इन्ही रुचियों की वजह से उन्होंने तबला और हारमोनियम में होने वाले तरंगों पर भी खोज की. पांच सौ से ज्यादा शोध उन्होंने किया है. जो उनकी उपलब्धियों में शामिल है. संगीत वाद्ययंत्र की रूचि होने से वाद्य यंत्रो की भौतिकी में उनका ज्ञान गहराता गया और जर्मनी में 1928 में संगीत वाद्य यंत्र के सिद्धांत पर हैंडबच डरे किजिक के 8वें संस्करण में एक लेख उन्होंने तैयार किया. भौतिकी विभाग में सी वी रमण ही एक ऐसे लेखक थे जो जर्मन नहीं थे.  

सी वी रमन का विवाद

कृष्णन को जब साथ में नोबेल पुरस्कार नहीं मिला तो यह एक विवाद उनके साथ जुडा जबकि कृष्णन उनके बहुत अच्छे व्यावसायिक मित्र थे. रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी में इस बात की चर्चा हुई है. इसके साथ ही अर्नेस्ट रदरफोर्ड में भी बताया गया है. 1929 में उन्होंने अपने रॉयल सोसाइटी के अपने राष्ट्रपति भवन के अभिभाषण में भी बोला.      

सी वी रमन के अवार्ड और उपलब्धियां (C V Raman awards and achievements)

  • 1929 में उन्होंने भारतीय विज्ञान कांग्रेस की 16 वे सत्र की अध्यक्षता भी की. उन्हें विभिन्न विश्वविद्यालय से मानद उपाधि, नाईट हुड के साथ और भी बहुत सारे पदक प्राप्त हुये हैं.
  • 1930 में उन्हें प्रकाश के बिखरने और रमन प्रभाव की खोज के लिए भौतिकी की क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला. वे विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई और प्रथम गैर सफ़ेद व्यक्ति थे. उनके पहले रविन्द्र नाथ टैगोर को 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हो चूका था.
  • 1932 स्पेन में रमन और सूरी भगवन्तं ने कुँनतम फोटोन की खोज की. इस खोज में दोनों ने एक दुसरे को सहयोग किया. 
  • 1934 में वो भारतीय विज्ञान संस्थान के निर्देशक बने जोकि बंगलौर में स्थित था. 1909 में बंगलौर में जे एन टाटा ने भारत के वैज्ञानिक के ज्ञान के विकास के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान की स्थापना की थी. जिसकों सी वी रमन ने पेड़ पौधो से सजाया. उसके स्तर को ऊँचा उठाने में सी वी रमन की बहुत भूमिका रही, बाद में इस संस्थान का नाम विश्व में भी जाना जाने लगा. उन्होंने स्टील की स्पेक्ट्रम के ऊपर भी काम किया और नये तरह से स्टील डायनेमिक्स पर विचार रखा.
  • 1947 में भारत सरकार द्वारा उनको राष्ट्रीय व्याख्याता का पद दिया था.
  • 1948 में वो आईआईएस से रिटायर्ड हुए. बाद में उन्होंने अपने नाम पर बंगलौर में रमन इंस्टिट्यूट की स्थापना की. विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए बहुत से पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है.
  • 1948 में ही दी अमेरिकन केमिकल सोसाइटी और इन्डियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस द्वारा अंतराष्ट्रीय रसायनिक खेती विज्ञान में रमन की खोज के लिए भी उन्हें पुरस्कार मिला.

इसके अलावा आजादी के बाद भी इन्हें कुछ पुरस्कारों से नवाजा गया वे हैं-   

वर्ष पुरस्कार
1954 भारतरत्न
1957 लेनिन शांति पुरस्कार

सी वी रमन का देहांत (C V Raman death)

21 नवम्बर 1970 को 82 वर्ष की अवस्था में बैंगलोर में इसका देहांत हो गया. सी वी रमन अपनी प्रयोगशाला में गिर गए थे, उनको डॉ. के पास ले जाने पर डॉक्टरों ने बताया, कि अब वो ज्यादा दिन तक नहीं बच पायेगे. ये जानने के बाद उन्होंने अस्पताल में न रहने की अपनी इच्छा जताई और वो अपने इंस्टिट्यूट के बगीचे में अपने लगाये हुए फूलों के साथ अपना समय व्यतीत करने लगे. मरने से दो दिन पहले सी वी रमन जी ने अपने एक छात्र से कहा, कि किसी भी जर्नल को प्रकाशित करने की अनुमति न दी जाए, जिसमे विज्ञान के गुण और सवेंदन शीलता से समझौता करना पड़े.     

सी वी रमन के चर्चित वचन (C V Raman quotes)

  1. मौलिक विज्ञान के बारे में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि मुझे मौलिक विज्ञान में पूरा विश्वास है, और इसको किसी भी औधोगिक, अनुदेशात्मक, सरकारों के साथ ही किसी भी सैन्य बल से प्रेरित नहीं किया जाना चाहिए.
  2. आधुनिक भौतिक विज्ञान के बारे में उन्होंने कहा कि आधुनिक भौतिक विज्ञान को पूरी तरह से परमाणु संविधान की मूल भुत परिकल्पना पर बनाया गया है.
  3. अपने महान अनुभव के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 1921 में जब गर्मियों में वो यूरोप गए, तब उन्हें पहला अवसर भूमध्य सागर के विचित्र नीले रंग के बदलने का अवलोकन प्राप्त हुआ.
  4. सफलता और असफलता के बारे में उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा है कि हम अपनी असफलता के खुद ही जिम्मेवार है. अगर हम असफल नहीं होंगे तो हम कभी भी कुछ भी सीख नहीं पायेंगे. असफलता से ही सफलता पाने के लिए प्रेरित होते है.
  5. ज्ञान की खोज के बारे में उन्होंने कहा है कि हम अक्सर यह अवसर तलासते रहते है कि खोज कहा से की जाये, लेकिन हम यह देखते है प्राकृतिक घटना के प्रारंभिक बिंदु में ही एक नई शाखा का विकास छुपा हुआ है.
  6. किसी भी सवाल से नहीं डरता अगर सवाल सही किया जाये तो प्राकृतिक रूप से उसके लिए सही जवाब के दरवाजे खुल जायेंगें.
  7. मैंने अपने माता जी और पिता से आज्ञा लेकर 3 जून 1941 को नौसेना में भर्ती होने के लिए चला गया.
  8. आप ये हमेशा नहीं चुन सकते की कौन आपके जीवन में आएगा, लेकिन जो भी हो आप उनसे हमेशा शिक्षा ले सकते हो वो हमेशा आपको एक सीख ही देगा.
  9. अगर कोई मुझसे सही से पेश आये तो हमेशा एक सही दिशा में सफलता को देखेगा, अगर मुझसे गलत तरीके से पेश आये तब तुम्हारी गर्त निश्चित है.
  10. अगर कोई आपके बारे में वे अपने तरीके से सोचता है, तो वह अपने दिमाग के सबसे अच्छे जगह को बर्बाद करता है और यह उनकी समस्या हो सकती है आपकी नहीं.
  11. आणविक विवर्तन के विषय का मूल महत्व लार्ड रेले के सैधांतिक काम के माध्यम से आकाश के नीले रंग में दिखने पर उसको इस रंग में पहचानने के लिए आया था, जिसमे उन्होंने बताया कि वातावरण की गैसों द्वारा सूर्य के प्रकाश के बिखरे हुए परिणाम का नतीजा है.
  12. जिस पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए मैंने 7 साल तक मेहनत करते हुए इंतजार किया और जब नोबेल पुरस्कार की घोषणा हुई, तो मैंने इसे अपना और अपने सहयोगी की उपलब्धि माना. लेकिन जब मै ब्रिटिश जैक में बैठा था और जब मै पीछे मुड कर देखा तब मुझे यह अहसास हो रहा था कि मेरा देश भारत कितना गरीब है, कि उसके पास अपने देश का एक झंडा भी नहीं है यह मेरे लिए बहुत पीड़ादायक स्थिति थी, और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरा सारा शरीर टूट रहा है.
  13. मुझे ऐसा लगता है और ये अहसास भी होता है कि अगर भारत की महिलाएं विज्ञान और विज्ञान की प्रगति में अपनी रूचि दिखाए, तो आज तक जो भी पुरुष हासिल करने में नाकाम रहे है वो वह सब कुछ वे प्राप्त कर सकती है. महिलाओं में भक्ति की एक गुणवत्ता है वह किसी भी काम को बहुत ईमानदारी से करती है यही गुणवत्ता विज्ञान के क्षेत्र में उन्हें महत्वपूर्ण सफलता दिला सकती है. इसलिए आईये हम एक कल्पना करते है विज्ञान के क्षेत्र में सिर्फ पुरुष ही अपना एकाधिकार न समझे.          

अन्य पढ़ें –

Ankita

Ankita

अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
Ankita

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *