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दलेर मेहंदी का जीवन परिचय एवं कबूतरबाजी का केस | Daler Mehndi Biography and controversies in Hindi

दलेर मेहंदी का जीवन परिचय एवं कबूतरबाजी का केस (Daler Mehndi Biography and controversies in Hindi)

दलेर मेहंदी भारत में बॉलीवुड में जाना माना नाम है. इनका असली नाम दलेर सिंह है लेकिन संगीत की दुनिया में इनको दलेर मेहंदी के नाम से जाना जाता है. दलेर मेहंदी एक भारतीय गायक, संगीत लेखक एवं म्यूजिक निर्माता भी हैं. दलेर मेहंदी का नाता एक ऐसे परिवार से है जिसमें हमेशा से गायकों की भरमार रही है. दलेर मेहंदी ने अपनी बुलंद आवाज के सहारे भांगड़ा संगीत को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया. इसके साथ-साथ दलेर मेहंदी ने भारत में बॉलीवुड संगीत के अलावा पॉप संगीत उद्योग की स्थापना भी कर डाली और इसका पूरा श्रेय भी दलेर को ही दिया जाता है.

दलेर मेहंदी

दलेर मेहंदी की व्यक्तिगत जानकारी (Daler Mehndi personal information)

 

वास्तिविक नाम (Name) दलेर सिंह
जन्म सम्बंधित जानकारी(Birth related information) 18 अगस्त 1967

पटना, बिहार

पेशा (Profession) गायक, संगीत निर्माता, गीत लेखक
गायन शैली (Singing style) फोल्क, रॉक एवं पॉप, भांगड़ा संगीत
माता का नाम (Mother’s name)  बलबीर कौर (राज्य स्तरीय पहलवान)
पिता का नाम (Father’s name) अजमेर सिंह चन्दन
भाई एवं बहनें(brothers and sisters) शमशेर मेहंदी, मीका सिंह
पत्नी का नाम(Wife’s name) तरणप्रीत कौर
बच्चों के नाम एवं संख्या (Brother’s name and numbers) गुरदीप मेहंदी, अजीत कौर मेहंदी, प्रभुज कौर मेहंदी और रबाब कौर मेहन्दी
पहला गाना (First song) बोलो ता रा रा
पहला एल्बम(First Album) ना ना ना रे (मृत्युदाता)
केस (crime) मानव तस्करी (दो साल की सजा)
सोशल मीडिया (Social Media) https://twitter.com/dalermehndi

https://www.facebook.com/DalerMehndi/

https://www.instagram.com/dalersmehndi/?hl=en

 

धर्म (Religion) caste सिख
कमाई (Net worth) लगभग 12 करोड़ (9 लाख प्रति गाना)

 

दलेर मेहंदी को कोर्ट ने दी 2 साल की सजा (Daler Mehndi latest news)

दलेर मेहंदी और इनके भाई के द्वारा सन् 1998 और सन् 1999 में  अवैध रूप से 10 व्यक्तियों को अपने सदस्यों के रूप में अमेरिका में ले जाया गया था. इस केस के चलते पटियाला की एक अदालत ने सन् 2003 में मानव तस्करी के मामले में दलेर मेहंदी को दो साल की जेल की सजा सुनाई थी. हालांकि उस समय दोनों मेहंदी भाइयों को जमानत दे दी गई थी.

इस केस के तीन साल बाद  सन् 2006 में पंजाब पुलिस ने शमशेर सिंह (दलेर मेहंदी का भाई) और दलेर मेहंदी को निर्दोष करार देने के लिए कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं. लेकिन कोर्ट ने केस को बंद नहीं किया था क्योंकि अदालत के पास दोनों भाइयों के खिलाफ कई सारे सबूत मौजूद थे.

अभी हाल में  फिर से इस केस में एक नया मोड़ आ गया है, फिर से पटियाला की एक अदालत ने दलेर मेहंदी को दोषी ठहराया. सूत्रों के मुताबिक इस केस के चलते पुलिस ने आज यानी 16 मार्च 2018 को इन्हें गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने 2 साल की सजा सुना दी है.

दलेर मेहंदी का जन्म एवं शिक्षा ( Daler Mehndi birth and education)

बिहार से सम्बन्ध रखने वाले दलेर का जन्म 18 अगस्त 1967 को  पटना में हुआ था. बचपन से दलेर मेहंदी को गाने का शौक था, इसलिए इन्होंने 5 साल की आयु में ही गायन कला को सीखना शुरू कर दिया था.

दलेर मेहंदी का परिवार (Daler Mehndi family)

दलेर मेहंदी की माता जो कि राज्य स्तरीय पहलवान रह चुकीं हैं उनका नाम बलबीर कौर है. दलेर मेहंदी के पिता अजमेर सिंह चन्दन भी बहुत अच्छे गायक रह चुके हैं. कुल मिलाकर इनके पांच भाई हैं जिनमें शमशेर मेहंदी जो इनसे बड़े हैं. भारत में संगीत की दुनिया में धमाल मचाने वाले मीका सिंह भी इनके छोटे भाई हैं.

दिलेर मेहंदी की शादी (Daler Mehndi marriage)

दलेर मेहंदी ने तरणप्रीत कौर से शादी की थी एवं इस दंपत्ति को चार बच्चे भी हैं जिनके नाम क्रमशः गुरदीप मेहंदी, अजीत कौर मेहंदी, प्रभुज कौर मेहंदी और रबाब कौर मेहन्दी. दलेर की बेटी अजीत कौर मेहंदी ने पंजाब के संगीतकार हंस राज हंस के बेटे नवराज हंस के साथ विवाह किया है. जबकि सन् 1984 में गुरदीप मेहंदी ने साथी अभिनेत्री जेसिका सिंह के साथ दिल्ली में मंगनी की थी और 2014 में दोनों की शादी भी हो चुकी है.

दलेर मेहंदी का करियर (Daler Mehndi music career)

दलेर मेहंदी का पहला एल्बम (Daler Mehndi first album)

मैग्नासाउंड ने तीन साल के लिए दलेर मेहंदी के साथ तीन एल्बम का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था. दलेर मेहंदी ने साल 1995 में अपना पहला एल्बम रिकॉर्ड किया था, जो कि मैग्नासाउंड के साथ कॉन्ट्रैक्ट का पहला एल्बम था. इस एल्बम का नाम “बोलो ता रा रा” था और इस एल्बम ने पूरे देश में अपना जलवा दिखाया था. इस एल्बम के फेमस होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी लगभग 20 मिलियन के आस-पास कॉपी बेचीं गई थीं.

अन्य एलबम (Daler Mehndi albums)

  • जब इनका पहला एल्बम हिट हुआ था, उस समय इनके विरोधियों ने इसे सिर्फ एक एल्बम की सफलता करार दिया. लेकिन उसके बाद सन् 1996 इनका दूसरा एल्बम रिलीज हुआ जिसका नाम “दर्दी रब रब” था और इस एल्बम ने फिर से पूरे भारत में खलबली मचा दी. जिससे इनके विरोधियों के मुँह पर भी ताला पड़ गया.
  • सन् 1997 में मैग्नासाउंड और दलेर मेहंदी के कॉन्ट्रैक्ट का तीसरा एल्बम ‘बल्ले बल्ले’ रिलीज किया गया, जिसने म्यूजिक इंडस्ट्री में कई नए रिकॉर्ड कायम किए. इसके बाद मैग्नासाउंड और देश के लोगों द्वारा इन्हें “सुपरएलिटीव (उच्चतम शिखर)” कहा जाने लगा था. इसी एल्बम के चलते इन्हें “द टर्बनिड टॉर्नडा” और “सुल्तान ऑफ स्विंग” जैसे शीर्षक से इंटरनेशनल मीडिया ने सम्मानित किया.
  • सन् 1998 भांगड़े के बादशाह दलेर मेहंदी का एक और एल्बम रिलीज हुआ, जिसका नाम ‘तुनक तुनक’ रखा गया और इस एल्बम ने दलेर मेहंदी को एक ब्रांड बना दिया.

दलेर मेहंदी का पहला गाना फिल्म में (Daler Mehndi first song in Bollywood film)

  • साल 1997 में पहली बार दलेर मेहंदी ने मृत्युदात्ता नामक फिल्म में “ना ना ना रे” नाम का गाना गाया था. इस गाने को दलेर मेहंदी के द्वारा कम्पोज भी किया गया था और इस फिल्म के गाने को अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया था.
  • इसके बाद सन् 1998 में इनको प्ले बैक सिंगिंग करने के लिए दूसरी फिल्म मिल गयी, जिसमें इनकी काफी मांग थी. इस प्रोजेक्ट के चलते इनको गाना गाने एवं म्यूजिक कम्पोजीशन का काम दिया गया. इस फिल्म का नाम था खौफ एवं इस फिल्म में रवीना टंडन पर फिल्माये गए गाने का नाम था  ‘अंख लड़ती है लड़ने दे’.

21 वीं शताब्दी का करियर (Daler Mehndi career graph)

  • उसके बाद सन् 2000 में इन्होंने एक और एल्बम का निर्माण किया, जिसमें भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को देखा गया. टीआईपीएस म्यूजिक के साथ बनाये गए इस एल्बम का नाम ‘एक दाना’ था. इस एल्बम में फोल्क, रॉक एवं पॉप तीनों तरह के संगीत को मिक्स किया गया था. ‘एक दाना’ नाम के इस एल्बम का गाना ‘सजन मेरे सतरंगिया’ बहुत प्रसिद्ध हुआ यहां तक की आज तक शादियों में इसको खूब बजाया जाता है.
  • इसके एक साल बाद 2001 में  दलेर को यूनिवर्सल म्यूजिक के साथ काम करने का ऑफर मिला. इनका गाना ‘काला कौआ काट खायेगा’ रिलीज किया गया. जिसने इनकी प्रतिभा का एक और भी अच्छा उदाहरण पेश किया.
  • सन् 2003 के बाद दलेर मेहंदी ने फिर से अपना रुख फिल्मों की तरफ किया, जिसमे 2003 में उन्होंने ‘मकबूल’ फिल्म के लिए “रु-बा-रु” गाना गाया. इसके बाद इन्हें फिल्मों से और भी ऑफर मिलने लगे.
  • साल 2004 में लोगों को दलेर मेहंदी और ए. आर. रहमान की जोड़ी का संगीत सुनने को मिला, ‘नच ले’ नाम के इस गाने को लकीर नाम की फिल्म में सुनने को मिला. इस फिल्म को अहमद खान ने निर्देशित किया था, जो कि अहमद की बतौर निर्देशक डेब्यू फिल्म थी.
  • सन् 2014 की नवरात्रि को दलेर मेहंदी ने हनुमान चालीसा का गायन अपनी आवाज में रिकॉर्ड किया, जो दलेर मेहंदी के स्टूडियो ‘डीएम फोल्क’ में रिकॉर्ड किया गया था. इसी साल इनका एक और गाना आया “आजा मेरे ट्विटर पे” जिसको सोसिअल मीडिया को मद्देनजर रखते हुए बनाया गया था.
  • सन् 2017 में भी इनकी आवाज का जादू एक बार फिर देखने को मिला, इन्होंने बाहुबली-2 में ‘जियो रे बाहुबली’ नाम के गाने में अपनी आवाज दी. इसके साथ साथ ‘पोस्टर बॉयज’ और ‘पैसा वसूल’ जैसी फिल्मों में भी इन्होंने गाना गाया.

दलेर मेहंदी के पुरस्कार एवं उपलब्धियां (Daler Mehndi awards and achievements)

  • दलेर मेहंदी के शुरुआती करियर में ही चैनल वी के सर्वश्रेष्ठ पुरुष पॉप सिंगर पुरस्कार से नवाजा गया. जो ‘बोलो ता रा रा रा’ नामक एल्बम को मद्देनजर रखते हुए 1996 में दिया गया था. चैनल वी के सर्वश्रेष्ठ पुरुष पॉप सिंगर पुरस्कार 1997 में भी ‘दर्दी रब रब’ एल्बम को एवं यही अवार्ड वर्ष 1998 में भी ‘हो जाएगी बल्ले बल्ले’ नामक एल्बम के लिए मिला.
  • इतना ही नहीं सन् 1997 में सर्वश्रेष्ठ पुरुष पॉप सिंगर के लिए स्क्रीन वीडियोकॉन अवॉर्ड दिया गया, जिसको इनके बहुचर्चित गाने ‘हो जाएगी बल्ले बल्ले’ के लिए दिया गया था. यही अवार्ड फिर से सन् 1998 में ‘तुनक तुनक तुन’ नामक गाने के लिए दिया गया.
  • साल 2000 में दलेर मेहंदी को मिलेनियम सिख पुरस्कार एवं ज़ी सिने पुरस्कार भी दिये गए. जी सिने पुरस्कार ‘ना ना ना ना ना रे’ नाम के गाने के लिए दिया गया जो कि मृत्युदाता फिल्म में गाया गया था.
  • दलेर मेहंदी ने संगीत के अलावा बहुत से सामाजिक सेवा के कार्यों में भी हिस्सा लिया है. दलेर मेहंदी को साल 2016 में ‘भारत सेवा रत्न पुरस्कार’ दिया गया था, क्योंकि इन्होंने भारत के अंदर कई पेड़ों एवं पौधों को प्लांट किया था.

दलेर मेहंदी के द्वारा किए गए सामाजिक कार्य (Daler Mehndi social work)

  • दलेर मेहंदी ने कारगिल में शहीद होने वाले सैनिकों के परिवारों की सहायता करने के लिए “कारगिल पीड़ितों की राहत निधि” में पैसे दान किये, दलेर मेहंदी के इस कार्य ने इनकी दया भावना एवं देश भक्ति को उजागर कर दिया. इसके आलावा दलेर मेहंदी कारगिल के सैनिकों से मिलने जाने वाले पहले सेलेब्रेटी थे.
  • दलेर मेहंदी सिर्फ महान आवाज के धनी नहीं हैं, बल्कि इन्होंने सामाजिक उत्थान के लिए अनेकों कार्य किये हैं. इन्होंने 1998 में ‘दलेर मेहंदी ग्रीन ड्राइव’ शुरू किया था और पर्यावरण को साफ एवं सुथरा बनाना ही इसका लक्ष्य था. इस मिशन के अंतर्गत दलेर मेहंदी ने भारत की राजधानी दिल्ली में 2 मिलियन पेड़-पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था.
  • दलेर मेहंदी ने पाकिस्तान में इमरान खान के “शौकत खानम मेमोरियल ट्रस्ट” के लिए मुफ्त में अपना शो किया था. जिसकी बदौलत 33 करोड़ रुपय इकठ्ठा किए गए, जिनको लोगों की मदद करने के लिए शौकत खानम मेमोरियल ट्रस्ट को दान कर दिए गए .
  • दलेर मेहंदी ने कैंसर, थैलेसीमिया और एड्स जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए बहुत से पैसे दान में दिए. इतना ही नहीं इन्होंने भारत में उड़ीसा में रहने वाले उन बच्चों की सहायता की, जिनके पास रहने को घर नहीं था. भारत ही नहीं बल्कि केन्या में जाकर भी गरीब एवं लाचार बच्चों के लिए दान दिया.
  • भारत के गुजरात राज्य में भूकंप से लोगों को बचाने के लिए इन्होंने भूकंप विरोधी घरों का निर्माण किया था. इसके अलावा दलेर मेहंदी ने वड़ोदरा में चक्रवात से पीड़ित लोगों के लिए लगभग 65 करोड़ रुपय दान दिए थे.
  • दलेर मेहंदी ने इंटरनेशनल बास्केटबॉल महासंघ (एफआईबीए) के एक फैसले का विरोध किया था, इस फैसले में पगड़ी बांधकर फुटबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों पर प्रतिबन्ध लगाने की बात की गई थी. इसके साथ-साथ इन्होंने इस मामले में लोगों को जागरूक करने एवं नियम में बदलाव करने के लिए एक वीडियो भी बनाया था.

दलेर मेहंदी के अनजाने तथ्य (Daler Mehndi facts)

  1. इनके माता पिता दोनों ही काफी धार्मिक व्यक्ति थे, इसलिए दलेर मेहंदी को इनके माता पिता ने गुरु ग्रन्थ साहब से राग एवं शब्द 6 साल की कम उम्र से ही सिखाना शुरू कर दिए थे.
  2. दलेर मेहंदी ने अपनी पहली परफॉरमेंस 13 साल की कम उम्र में दी थी. उस दौरान दलेर मेहंदी के सामने 20000 लोग मौजूद थे. इसके एक साल बाद तुरंत इन्होंने उस्ताद राहत अली खान साहब से संगीत सीखना शुरू कर दिया.
  3. 14 साल की छोटी सी उम्र में इन्होंने तबला, ढोलक, हारमोनियम एवं तानपुरा का अध्यन करना भी शुरू कर दिया और इन इंस्ट्रूमेंट के अध्यन के लिए दलेर ने 3 साल का समय खर्च किया.
  4. जब दलेर मेहंदी का करियर चरम सीमा पर था उस समय दलेर मेहंदी ने कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, पूर्वी अफ्रीका, बहरीन, मलेशिया, पाकिस्तान, हांगकांग, वेस्ट इंडीज, बेल्जियम, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, स्पेन, ओमान, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड देशों में अपने बैंड के साथ प्रदर्शन किया है.
  5. दलेर मेहंदी भेष-भूषा के भी अत्याधिक दीवाने हैं, इनको हमेशा से ही रंग बिरंगी पगड़ी को पहनते हुए देखा गया है. ये सभी पगड़ियां एकदम नए स्टाइल की होती हैं, जो कि हर कॉन्सर्ट में डिज़ाइन के साथ बदल जाती हैं.
  6. बहुत कम लोग जानते हैं कि दलेर मेहंदी ने पहली बार अपने वीडियो में ब्लू स्क्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था. जिस गाने में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, उसका नाम ‘तुनक तुनक तुन’ था.

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