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पैन टैन और टिन के मध्य अंतर | Difference between PAN TAN and TIN in hindi

Difference between PAN, TAN and TIN in hindi आयकर संबंधी जटिलताएं हमेशा ही आम आदमी को परेशान करती है. आम आदमी के लिए इनके शब्दावली को समझना मुश्किल होता है. नये नये निर्देशों पर मानकों के निर्गमन की जटिलता को समझने के लिए हमें आयकर के मूलभूत उपकरणों को समझना जरूरी होता है. आयकर विभाग में कर जमा करते समय हमें कई प्रकार के शब्दों से गुजरना पड़ता है, इनमें से प्रमुख है पैन, टैन और टिन.

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पैन, टैन और टिन के अर्थ (Full form of PAN, TAN and TIN )

 पैन (PAN Number) – पैन कार्ड का पूरा नाम है परमानेंट एकाउंट नंबर (Permanent Account N​umber) और पैन की प्रमुख लक्ष्य है आम नागरिकों के वित्तीय अर्न्तक्रिया को स्वस्थ बनाये रखना. पैन नम्बर आयकर विभाग के द्वारा निर्गमित होता है. स्थायी खाता संख्या दस अंको की एक अल्फान्यूमेरिक नंबर होता है. DVNT5432J इस तरह से लिखे अल्फान्यूमेरिक संख्या को पैन कार्ड नंबर कहते हैं. 

परमानेंट अकाउंट नंबर सिर्फ इनकम टैक्‍स से संबंधित डाक्यूमेंट नहीं बल्कि हमारी फाइनेंनसियल पहचान होता है. लेकिन क्‍या आपको पता है कि पैन नंबर का लापरवाही से किया गया इस्‍तेमाल आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है. पैनकार्ड की महत्वपूर्ण जानकारी के लिए पढ़े.

टैन (TAN Number) – टैन का पूरा नाम होता है टैक्स डिडक्शन एकाउंट नंबर (Tax Deduction and Collection Account Number) अथवा कर कटौती खाता संख्या या कर संग्रहण खाता संख्या. यह आयकर विभाग द्वारा निर्गमित दस अंको की अल्फान्यूमेरिक नंबर हैं. उन समस्त लोगों के द्वारा टैन हासिल की जानी चाहिए जो स्त्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) का भुगतान करते हैं या फिर जिससे स्त्रोत पर कर संग्रहण (टीसीएस) करना प्रत्याशित हैं.  टैन के प्राप्ति के लिए प्रपत्र 49ख में सूचनाओं को दाखिल किया जाना हैं तथा किसी कर सूचना तंत्र सुविधा केंद्र को जमा करना पड़ता है. धारा 272 (ख) टैन जमा करने में असफलता के लिए दंड का प्रावधान करती है तथा धारा 272 ख (1क ) टैन न उद्धृत करने के लिए दंड का प्रावधान करती है धारा 272 ख के जुर्माना 10000 रूपये हैं. टैन हेतु पैन का प्रयोग नहीं किया जा सकता, इसलिए कटौतीकर्ता को टैन ही प्राप्त करना ही पड़ता है.

टिन (TIN Number) – टैक्स इन्वायस संख्या या टिन 11 संख्या वाली एक पहचान नंबर होता है. ये व्यापारियों या कारोबारियों के लिए आवश्यक होता है और वैट लागू करने के लिए भी इसका होना आवश्यक होता है. अर्न्तराज्यीय तौर पर व्यापार करने के लिए टिन नम्बर कानूनी रूप से वैध और अनिवार्य है. इसे वैट या सेल्स टैक्स नंबर के रूप में देखा जाता है.

पैन टैन और टिन के मध्य अंतर ( Difference between PAN, TAN and TIN in hindi)

कसौटी पैन टैन टिन
निर्गमन अधिकारी आयकर विभाग आयकर विभाग संबंधित राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग
कोड के प्रकार 10 संख्या की अक्षरांकीय कोड 10 संख्या की अक्षरांकीय कोड 11 संख्यों की संख्यात्मक कोड
उद्देश्य यह किसी प्रकार के वित्तीय पारस्परिक क्रिया के लिए सार्वभौमिक पहचान संख्या है. स्रोत पर कर कटौती है वैट से संबंधित क्रियाओं को चिन्हित करता है.
किसके लिए सभी करदाताओं के लिए उन सभी के लिए जो स्रोत पर कर देते हैं सभी व्यापारियों के लिए जो वैट अदा  करते हैं
कानून के तहत अनुच्छेद 139, आयकर कानून 1961 अनुच्छेद 203a आयकर कानून 1961 हरेक राज्य के कानून के तहत
जूर्माना विधि के अनुसार नहीं होने पर 10000 रूपये का जूर्माना विधि के अनुसार नहीं होने पर 10000 रूपये का जूर्माना राज्य के कानून के अनुसार
आवेदन प्रपत्र भारतीयों के लिए 49 ए

विदेशियों के लिए 49एए

49बी विधि के अनुसार नहीं होने पर 10000 रूपये का जूर्माना
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज वैध पहचान पत्र, स्थायी निवास प्रमाण, तस्वीर, आयु प्रमाण पत्र कुछ भी नहीं पंजीयन प्रमाण पत्र, पैन, मालिक का पहचान पत्र आदि
संख्या 1 1 1
आवेदन में खर्च रू. 107 भारतीयों के लिए और 989 विदेशियों के लिए रू. 55 साथ में सेवा कर राज्य के कानून के अनुसार

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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