अकाउंट पेयी चेक और क्रॉस्ड चेक में क्या फर्क होता है | Difference between Crossed and Account payee cheque in hindi

अकाउंट पेयी चेक और क्रॉस्ड चेक में क्या फर्क होता है Difference between crossed cheque and account payee cheque in hindi 

बैंकिंग करना आसान काम नहीं है क्योंकि इसमें पैसे के लेन-देन के एक ही माध्यम में इतने प्रोडक्ट होते है, कि उपभोक्ता उसे लेकर हमेशा दुविधा में रहता है और इसी गफलत की वजह से अक्सर वित्तीय लेन-देन में गलतियां करता है. सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट में क्या फर्क होता है?, चेक और ड्राफ्ट में क्या अंतर होता है? और इसी तरह का एक और बड़ा भ्रम बना होता है अकाउंट पेयी चेक और क्रॉस्ड चेक में क्या अंतर होता है? अक्सर लोग इन्हें एक ही चीज समझते हैं लेकिन दोनों में बड़ा फर्क होता है और इसमें गफलत होने की स्थिति में बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. यह समझने से पहले हमें यह समझना जरूरी है कि चेक क्या होता है और कैसे काम करता है.

chaques

कैसे काम करता है चेक (How to cheque work)

चेक कैसे काम करता है, इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे की ओर इतिहास में चलना होगा, जहां हमें पता चलेगा कि चेक का जन्म कैसे हुआ था. पुरातन काल में जब व्यापारी लंबे सफर तय किया करते थे, और सफर के दौरान पैसा लुटने के डर से वह शहर के किसी दूसरे ऐसे व्यापारी के पास अपना पैसा जमा करवा देता था, जिसके पास दूसरे शहर में पैसा दिलवाने की सुविधा हो. पैसा जमा करने वाला व्यापारी एक वादा पत्र हस्ताक्षर करके व्यापारी को देता था, जिसे वह दूसरे शहर में दिखाकर वह पत्र में लिखी रकम प्राप्त कर लेता था, और इसके बदले में कमीशन के तौर पर कुछ रकम अदा करता था. इस तरह चेक का जन्म हुआ.

दरअसल चेक भी एक तरह का वादा पत्र ही होता है, जो देने वाला लेने वाले के साथ करता है और बैंक उसमें मध्यस्थ की भूमिका अदा करता है, जो सुरक्षित तरीके से धन एक हाथ से दूसरे हाथ में पहुंचाता है और बदले में कुछ रकम कमीशन के तौर पर लेता है. आज आधुनिक बैंकिंग में चेक कई तरह के होते हैं, भुगतान की जगह के हिसाब से देखें, तो चेकों को स्थानीय चेक, आउटस्टेशन चेक और एट पार चेक में बांटा जा सकता है. और मूल्य को आधार बनाने पर चेक, कम मूल्य वाले चेक जो 25 हजार तक के होते हैं, अधिक मूल्य वाले चेक जो 25 हजार मूल्य से ज्यादा के होते है और उपहार चेक में वर्गीकृत किए जा सकते हैं. इसी तरह चेक, भुगतान के आधार पर भी तीन तरह के माने जा सकते हैं. बेयरर चेक, क्रॉस्ड चेक और आदेश चेक. अकाउंट पेयी चेक और क्रॉस्ड चेक में अंतर समझने के लिए हमें बेयरर चेक को भी समझना होगा, क्योंकि तभी हम चेक के भुगतान के मूल फर्क को समझ पाएंगे.

क्या होता है बेयरर चेक (Define bearer cheque)

  • बेयरर चेक या धारित को अदा करने वाला चेक बैंकिग व्यवस्था के शुरूआती दौर से ही प्रयोग में लाए जाने वाले चेक रहे हैं, और तब से लेकर अब तक इनके प्रयोग में कोई परिवर्तन नहीं आया है.
  • जब हम बैंक द्वारा दिए गए चेक पर किसी व्यक्ति का नाम लिखते हैं या फिर उसकी जगह सेल्फ लिखकर रकम अदा करते हैं, तो चेक धारक जिसे अंग्रेजी में बेयरर कहा जाता है बैंक के काउंटर पर जाकर चेक पर लिखी रकम को नगद प्राप्त कर सकता है.
  • बेयरर चेक अब लगभग प्रचलन से बाहर है क्योंकि यह काफी असुरक्षित होते हैं, और खो जाने की स्थिति में अगर बैंक को जानकारी देने में देरी हो तो आसानी से भुनाए जा सकते हैं. इसकी जगह अब क्रॉस्ड चेक ज्यादा प्रचलन में आ गए हैं.

क्या फर्क होता है अकाउंट पेयी चेक और क्रॉस्ड चेक  (Difference between Crossed and Account payee cheque in hindi)

दोनों ही चेक का काम एक है लेकिन दोनों में बहुत फर्क है जिसे नीचे दर्शाया गया है-

क्या होते हैं क्रॉस्ड चेक (What is crossed cheque)

  • क्रॉस्ड चेक बेयरर चेक की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं, और इस चेक के कोने पर दो समानान्तर लाइनें खींच कर क्रॉस्ड मेन्शन किया जाता है.
  • इस तरह के चेक का नगद भुगतान नहीं किया जा सकता है और यह केवल खाते में ही हस्तान्तिरत हो सकता है.
  • भारत के एनआई एक्ट की धारा 126 में यह साफ किया हुआ है कि क्रॉस्ड चेक का किसी भी परिस्थिति में नगद भुगतान नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे प्राप्त करने वाला किसी और के नाम से आगे बढ़ा सकता है.
  • इसे उदाहरण की सहायता से समझने का प्रयास करते हैं. अगर मान लीजिए मोहित ने सोहन को कोई क्रॉस्ड चेक दिया है तो सोहन चाहे तो उसे मोहिनी के नाम कर सकता है और मोहिनी उसे सुरेश के नाम आगे बढ़ा सकती है.
  • चेक भुगतान न होने की स्थिति में सुरेश मोहिनी को, मोहिनी सोहन को और सोहन मोहित पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होता है.

क्या होता है अकाउंट पेयी चेक (What is account payee cheque)

  • चेक अपने भुगतान के तरीके के कारण कई तरीके के होते हैं और अपने तरीके के अनुसार ही उनके नाम भी होते हैं.
  • अकाउंट पेयी चेक, यह नाम अपने काम की वजह से ही मिला है क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के अकाउंट में ही पे किया जा सकता है.
  • हालांकि हम आपको यह साफ कर दें कि भारत के एनआई एक्ट में अकाउंट पेयी चेक के संबंध में कोई नियम नहीं दिया गया है.
  • वहां सिर्फ क्रॉस्ड चेक के संबंध में ही नियम है, लेकिन यह चेक बैंकिंग परम्पराओं के अनुसार नियमों में बंधा हुआ है जिसे कानूनी मान्यता भी दी जाती है.
  • अकाउंट पेयी चेक में चेक के कोने पर दो समानान्तर लाइने खींच कर उसके बीच अकाउंट पेयी लिखा जाता है. इस तरह आपका अकाउंट पेयी चेक तैयार होता है.
  • अकाउंट पेयी चेक और क्रॉस्ड चेक में बड़ा फर्क यह होता है कि लेने वाला इसे किसी दूसरे के लिए नामित नहीं कर सकता है, और इसका भुगतान वह अपने खाते में ही ले सकता है.
  • दूसरों को एंडार्स करने की क्षमता इस चेक में नही होती है.

चेक का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए क्योंकि यह सिर्फ धन भुगतान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक तरह से दो पक्षों के बीच धन के लेन देन को लेकर किया गया एक वैद्य कानूनी दस्तावेज भी होता है. ऐसे में अगर किसी भी परिस्थितिवश यह अनादरित होता है, तो भारतीय अदालतों में फौजदारी मामलों की तरह इसे रजिस्टर किया जा सकता है. और चेक अनादरण (disrespect) के मामले मे जुर्माने से लेकर जेल की सजा तक हो सकती है.

अन्य पढ़ें –

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *