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दिग्विजय सिंह का जीवन परिचय | Digvijaya Singh Biography in Hindi

दिग्विजय सिंह का जीवन परिचय (Digvijaya Singh Biography in Hindi)

ये मध्यप्रदेश के वह पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जोकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से संबंध रखते हैं. उन्हें अक्सर उनके अन्य साथी राजनेता ‘अर्जुन सिंह’ के नाम से बुलाते हैं. इनके द्वारा की गई टिप्पणियों के चलते इन्हें पिछले कुछ सालों में कई विवादों में देखा गया है. ये राज्य सभा के सदस्य, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव और साथ ही संयुक्त गठबंधन में अग्रणी पार्टनर भी हैं. इनके जीवन एवं उससे जुड़े विवादों के बारे में जानने के लिए आप इस लेख को पूरा पढ़े.     

Digvijaya Singh

जन्म और परिचय (Birth and Introduction)

क्र. म.

(s.No.)

जीवन परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1. पूरा नाम (Full Name) दिग्विजय सिंह
2. अन्य नाम (Other Name) दिग्गी राजा एवं अर्जुन सिंह
3. जन्मतिथि (Birth Date) 28 फरवरी, 1947
4. जन्म स्थान (Birth Place) इंदौर, मध्यप्रदेश, भारत
5. उम्र (2018 में) (Age in 2018) 71 वर्ष
6. पेशा (Profession) भारतीय राजनेता एवं किसान
7. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी
8. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
9. गृहनगर (Hometown) इंदौर, मध्यप्रदेश, भारत
10. धर्म (Religion) हिन्दू
11. जाति (Caste) राजपूत
12. राशि (Sun Sign) मीन
13. वेबसाइट (Website) http://www.digvijayasingh.in/
14. वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
15. नेट वर्थ (Net Worth) लगभग 39 करोड़ रूपये (सन 2014 में)
16. भाषा का ज्ञान (Language) हिन्दी एवं अंग्रेजी

परिवार की जानकारी संक्षिप्त में  (Family Details)

1. पिता का नाम (Father’s Name) स्वर्गीय श्री बालभद्र सिंह
2. माता का नाम (Mother’s Name) स्वर्गीय श्रीमती अपर्णा कुमारी
3. भाई का नाम (Brother’s Name) लक्ष्मण सिंह
4. पत्नी का नाम (Spouse Name) स्वर्गीय श्रीमती राणा आशा कुमारी (पहली पत्नी) एवं अमृता राय (दूसरी पत्नी)
5. बेटे का नाम (Son’s Name) जयवर्धन सिंह
6. बेटियों के नाम (Daughters Name) मंदाकिनी कुमारी, कर्निका कुमारी एवं म्रदीमा कुमारी

शुरूआती जीवन (Early Life)

दिग्विजय सिंह जी का जन्म भारत की आजादी के पहले का है, उनका जन्म ब्रिटिश भारत के होलकर स्टेट के इंदौर शहर में हुआ था, जिसे वर्तमान में मध्यप्रदेश कहा जाता है. सिंह जी की माता एक गृहणी महिला थी, जबकि इनके पिता बालभद्र सिंह जी ग्वालियर राज्य के तहत आने वाले राघोगढ़ के राजा थे. इसे वर्तमान में मध्यप्रदेश के गुना जिले के नाम से जाना जाता है. वे राघोगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व जन संघ पार्टी के सांसद भी थे. इसलिए दिग्विजय सिंह जी बचपन से ही राजनीति से जुड़े परिवार से संबंध रखते हैं.

शैक्षणिक योग्यता (Digvijay Singh Educational Qualification)

इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के डेली कॉलेज से पूरी की, जोकि काफी चर्चित पब्लिक स्कूल है. इसके बाद उन्होंने अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के लिए इंदौर के श्री गोविन्द्रम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एवं साइंस (एसजीएसआईटीएस) कॉलेज में प्रवेश किया. उन्होंने वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर डिग्री हासिल की. इसके चलते पेशे से वे एक इंजिनियर भी हैं.     

व्यक्तिगत जीवन (Personal Life)

दिग्विजय सिंह ने 2 शादियां की है. इनकी पहली पत्नी श्रीमती राणा आशा कुमारी थी, जिनके साथ इन्होने सन 1969 में शादी की थी. इनके जितने भी बच्चे हैं वे सभी दिग्विजय सिंह और आशा कुमारी जी के ही है. किन्तु सन 2013 में इनकी कैंसर से पीढ़ित होने के चलते मृत्यु हो गई. इसके बाद उन्होंने अगस्त सन 2015 में अमृता राय के साथ विवाह किया, जोकि एक राज्यसभा टीवी एंकर हैं. दिग्विजय सिंह को खेल में काफी दिलचस्पी है, इन्होंने बचपन में कई खेलों में हिस्सा लिया हुआ है.

राजनीतिक करियर (Digvijay Singh Political Career)

जिस साल इनका विवाह हुआ, उसी साल से इन्होने राजनीतिक की और कदम बढ़ाया. ये राघोगढ़ नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष बने और इस पद पर वे सन 1971 तक विराजमान रहे. इस बीच वे सन 1970 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में एक सदस्य के रूप में शामिल हुए. हालाँकि इनके पिता भारतीय जनसंघ पार्टी से संबंध रखते थे. किन्तु इन्होने उससे न जुड़ कर कांग्रेस पार्टी से जुड़ने का फैसला किया. इसके बाद सन 1977 में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में वे खड़े हुए. इस चुनाव में उनकी जीत हुई, और वे गुना जिले में राघोगढ़ से विधायक चुन लिए गये. इस कार्यकाल के बाद सन 1980 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में उसी क्षेत्र के विधायक के रूप में उन्हें फिर से निर्वाचित किया गया था. इस दौरान उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन, सिंचाई और कमांड क्षेत्र के विकास के लिए कार्य किया.

सन 1984 में लोक सभा चुनाव आयोजित हुए, जिसमें ये राजगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के एक सांसद के रूप में चुने गये. राजगढ़ एवं गुना जैसे क्षेत्रों में सांसद बनने के बाद उन्हें पूरे मध्यप्रदेश की कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष बनने का मौका मिला और सन 1985 से 1988 तक उन्होंने इस पद को संभाला. सन 1989 में होने वाले चुनाव में दुर्भाग्यवश उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र को खो दिया, किन्तु सन 1991 में उन्हें फिर से सत्ता के लिए चुन लिया गया था.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में (Digvijay Singh MP CM)

सन 1993 में वे फिर से विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचित हुए और उन्हें इस बार जीत हासिल कर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार सँभालने का मौका मिला. मुख्यमंत्री के पद पर आने के बाद उन्होंने संसद के निचले सदन से एक सांसद के रूप में त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभाई, फिर उन्हें उपचुनाव में चछोडा निर्वाचन क्षेत्र से एक विधायक चुना गया. उनके त्यागपत्र देने के बाद उनके भाई लक्ष्मण सिंह जी उसी राघोगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुने गये, जहाँ पहले दिग्विजय स्वयं थे. दिग्विजय सिंह जी ने अपने कार्यकाल में काफी अच्छा काम किया था, इसलिए उन्हें सन 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में निर्वाचित होने का दोबारा मौका मिला और वे फिर से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये. इस पद पर उन्होंने सन 2003 तक कार्य किया, किन्तु अगले चुनाव में हार के बाद वे 10 वर्षों तक किसी भी चुनाव में नहीं खड़े हुए.

कांग्रेस पार्टी के महासचिव के रूप में (Digvijay Singh As A General Secretary)

सन 2013 में इन्हें आल इंडिया कांग्रेस कमेटी का महासचिव चुना गया. महासचिव के रूप में उन्होंने ओडिशा, बिहार, उत्तरप्रदेश, असम, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और गोवा राज्यों के लिए पार्टी के काम को संभाला. उन्हें महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में अभियानों को मैनेज करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी. इसी साल वे 6 सदस्यीय समिति का हिस्सा बने, जिन्हें सन 2014 में होने वाले चुनावों की तैयारी में कोओर्डिनेट करने के लिए तत्कालीन उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी की अध्यक्षता में नियुक्त किया गया था. वे कांग्रेस पार्टी की अधिकांश समितियों पर भी कार्य करते हैं.

दिग्विजय सिंह द्वारा नर्मदा यात्रा (Digvijay Singh Narmada Parikrama)

पिछले साल 30 सितंबर को दिग्विजय सिंह जी ने अपनी पत्नी के साथ एवं हिन्दू रीतिरिवाज के अनुसार आध्यात्मिक गुरु शंकराचार्य जी एवं स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का आशीर्वाद लेने के बाद नरसिंहपुर जिले के बरमन घाट से नर्मदा नदी की परिक्रमा शुरू की थी. दरअसल मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी की परिक्रमा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. यह परिक्रमा 6 महीने (लगभग 192 दिन) तक चली और फिर 9 अप्रैल, 2018 को 3,300 किमी की यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने नरसिंहपुर जिले के बरमन घाट में जाकर यह यात्रा समाप्त की. इसी घाट में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ ‘धार्मिक एवं अध्यात्मिक’ रिवाजों को पूरा करने के साथ जुड़े विभिन्न अनुष्ठान किये. इस यात्रा में बहुत से राजनेताओं ने हिस्सा लिया था.    

दिग्विजय सिंह द्वारा किये गये कार्य एवं उपलब्धियां (Work and Achievements)

  • ये गांवों के गरीब लोगों को ताकत देने के लिए सत्ता की डिसेंट्रलाइजेशन की अवधारणा को लेकर आये. इससे 52,000 ग्राम सभा स्थापित हुईं और विभिन्न गतिविधियों को संभालने के लिए ग्राम सभा के लिए 8 स्थायी समितियां भी बनाई गई. सत्ता की डिसेंट्रलाइजेशन की अवधारणा को लाने के लिए उन्हें एवं उनके काम को काफी सराहा गया. यहाँ तक कि ब्रिटिश हाई कमिश्नर सर रॉब यंग ने भी उनके काम की तारीफ की.
  • इनके कार्यकाल में मध्यप्रदेश में 26,000 से भी अधिक प्राथमिक स्कूल स्थापित किये गये. प्रत्येक गांव में 1 किमी की दूरी के अंदर प्राथमिक स्कूल एवं 3 किमी की दूरी के अंदर माध्यमिक स्कूल स्थापित किये गये थे. राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार सिंह के कार्यकाल के दौरान साक्षरता दर में 20.11% की वृद्धि हुई थी. यहाँ तक कि महिला साक्षरता में विकास दर 21% दर्ज की गई थी, उस समय राष्ट्रीय औसत 14 प्रतिशत था.
  • इन सब के अलावा राज्य में सन 1988 – 89 में 16% कुपोषित बच्चे थे, जोकि सन 2002 – 03 में कम होकर 2.92 % रह गए थे.      

दिग्विजय जी से जुड़े विवाद (Digvijay Singh Controversies)

  • सन 1998 मुलताई किसान नरसंहार :- सन 1998 में एमपी पुलिस द्वारा एक वारदात की गई थी, जिसमें उन्होंने 19 से 24 किसानों को गोली मार दी थी. ये उस समय राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर थे, और पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने उन्हें किसानों की गिरफ़्तारी के लिए दोषी ठहराया था.
  • लादेन के शरीर के दफन पर आलोचना :- सन 2011 में अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन को जब दफनया गया था, तब इन्होने उनके धर्म का सम्मान नहीं करते हुए उनकी आलोचना की थी. इसके चलते उन्हें विवादों में आना पड़ा.
  • बोध गया बमबारी :- सन 2013 में बोध गया बमबारी के बाद श्री सिंह ने एक ट्वीट किया था, उस ट्वीट में उन्होंने भाजपा को इस बमबारी के साथ जोड़ते हुए आलोचना की थी. इस विवादित बयान के चलते उन्हें कई विवादों का सामना करना पड़ा था.
  • विवादास्पद ट्वीट :- आरएसएस के एक स्थानीय वकील एवं स्वयंसेवक ने उनके एक विवादास्पद ट्वीट जिसमे उन्होंने लिखा था ‘बच्चा बच्चा राम का, राघव जी के काम का’ के कारण शिकायत दर्ज की थी. यह तब ट्वीट किया गया था, जब राज्य के फाइनेंस मिनिस्टर को यौन शोषण के आरोप में अरेस्ट किया गया था.
  • बटाला हाउस मुठभेड़ :– जुलाई सन 2011 में इन्होंने आरएसएस पर उनके कार्यकर्ताओं को बम तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करने का आरोप लगाया था. और उन्होंने पत्रकारों को आश्वासन दिया था, कि उनके पास 2 वीएचपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के विडियो क्लिप हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि बटाला हाउस में जो मुठभेड़ हुई थी वह नकली थी.
  • महिला सांसद के बारे में टिप्पणी :– मंदसौर की एक कांग्रेस सांसद मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ उनकी गंदी टिप्पणी के कारण उन्हें कई लोगों की अलोचना का शिकार होना पड़ा था.    
  • मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का विवाद :– मई 2017 की शुरुआत में तेलंगाना पुलिस ने उनके द्वारा किये एक ट्वीट पर शिकायत कर सिंह के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज किया था, इस ट्वीट में उन्होंने कहा था कि तेलंगाना पुलिस ने मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए नकली आरएसएस वेबसाइट बनाई है.

इस तरह इनके विवादास्पद बयान के चलते इन्हें कई विवादों का सामना करना पड़ा है.

दिग्विजय सिंह एवं अमृता राय (Digvijay Singh and Amrita Rai)

सन 2014 में राज्य सभा टीवी एंकर अमृता राय के साथ इनके संबंध थे. और इस बात की उन्होंने पुष्टि भी की थी. दरअसल कुछ महीनों से सोशल मीडिया में दोनों की व्यक्तिगत तस्वीरें पोस्ट की जा रही थी, जोकि दोनों के बीच प्रेम सम्बन्ध को दर्शाती थी. सूत्रों के मुताबिक दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद अमृता सिंह के करीब आ गये. वे दोनों एक दुसरे को पहले से जानते थे. उनके बच्चों को जब इस बारे में पता चला, तो उन्होंने इसका विरोध किया. कुछ समय तक उनके बेटे ने उनसे बात करना भी छोड़ दिया था. अमृता सिंह ने दिग्विजय की सारी संपत्ति को उनके बेटे के नाम करने को कहा. वे अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते हैं. अमृता राय एक हिन्दू परिवार से संबंध रखती हैं.

रोचक बातें (Interesting Facts)

  • दिग्विजय सिंह जी को बचपन से ही खेलों में दिलचस्पी रही है. उन्होंने अपने स्कूल एवं कॉलेज के स्तर में कई खेलों में हिस्सा लिया, जिसमें हॉकी, क्रिकेट, टेनिस, स्क्वैश एवं फुटबॉल शामिल है.
  • उन्होंने क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर में खेल खेलें हैं, उन्होंने एमपी स्कूल एवं सेंट्रल जोन क्रिकेट टीम के लिए खेला था. साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर कैटेगरी में स्क्वैश भी खेला और वे इसमें विजय भी रहे थे.
  • इसके अलावा उन्हें वन्यजीव फोटोग्राफी भी काफी पसंद है.
  • वे आरएसएस और छात्र इस्लामिक मूवमेंट को राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा मानते हैं और वे उन्हें ‘नज़ीस’ भी कहते हैं.
  • इन्हें स्वर्गीय श्री विजयराज सिंधिया ने जनसंघ पार्टी के साथ जुड़ने का प्रस्ताव दिया था. किन्तु उन्होंने इस प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया और कांग्रेस पार्टी के साथ ही जुड़े रहे.

इन्होने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के दौरान राज्य के बच्चों के लिए स्कूल एवं कुपोषित बच्चों को पोषित करने जैसे और भी कई महत्वपूर्ण कार्य किये थे, जिसके लिए उनकी तारीफ करना गलत नहीं होगा. अतः वे एक अच्छे राजनेता हैं.  

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