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ई-नाम क्या है | E-NAM Mobile App Web Portal Farmer Registration in hindi

ई-नाम क्या है | E-NAM Mobile App Web Portal Farmer Registration in hindi

ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक  कृषि पोर्टल है. जो पुरे भारत में मौजूद कृषि उत्पाद विपणन समिति को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करती है. इसका मुख्य उद्देश्य सभी कृषि उत्पादों को एक एकीकृत बाजार उपलब्ध करवाना है. ई-नाम के द्वारा सभी कृषि विपणन समितियों द्वारा लिए गये सभी फैसलों को एक ही जगह पर उपलब्ध कराया जाता है. इसमे कृषि उत्पादो के संबंध में खरीदी और बेची जाने वाली वस्तु की जानकारी, व्यापार में दिये गये ऑफर और आने वाली वस्तुओं की जानकारी और उनकी कीमत के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जाती है.

ई-नाम कैसे काम करता है (How E-NAM works) :

ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि व्यापार प्लेटफॉर्म है, जिसे कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा बनाया गया है. यह भारत के किसी भी राज्य में मौजूद कृषि बाजार को प्लग-इन प्रदान करता है. इस प्रोसेस के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर का निर्माण किया गया है, जो की सभी मंडियों के लिए उपलब्ध है. इसमे कोंई भी मंडी बिना किसी चार्ज के शामिल हो सकती है, इसके द्वारा हर राज्य की मंडियों के नियमों और फैसलों से सभी सदस्यों को अवगत कराया जायेगा.   

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ई-नाम के मुख्य उद्देश्य (Objective of the E-NAM) :

  • ई-नाम का मुख्य उद्देश्य कृषि बाजारों में वस्तुओं की खरीदी और बिक्री में पारदर्शिता लाना और राष्ट्रीय बाजार में वस्तुओं की एक कीमत तय करना है.
  • राज्य में उपस्थित बाजारों में बिना उपस्थिति या बिना किसी दुकान या कब्जे के व्यापारियों, किसानों और एजेंटों को लाइसेंस उपलब्ध करवाना. इसके अलावा केवल एक लाइसेंस के जरिये व्यापारी पुरे राज्य की मंडियों में व्यापार करने में सक्षम होगा.
  • इसके द्वारा अच्छी गुणवत्ता और तय मानकों के उत्पादो लिए सभी ग्राहक एक ही जगह पर बोली लगा सकते है. अब तक 25 वस्तुओं के लिए मानक तय कर दिये गये है.
  • किसानों को मृदा परिक्षण की सुविधा पास उपस्थित चयनित प्रयोग शाला में और मौजुदा मंडियों में ही उपलब्ध कराई जाएगी.
  • सुश्री नागार्जुन फ़र्टिलाइज़र एंड केमिकल्स लिमिटेड इसमे साझेदार है, जिन पर इसके प्रबंधन और विकास की जिम्मेदारी भी सौपी गई है. इनकी जिम्मेदारिया बहुत ही व्यापक है, इनके द्वारा मंडियों की आवश्यक्ता के अनुरूप सॉफ्टवेर को अपडेट करने का काम भी सौपा गया है.

ई-नाम से विभिन्न स्टॉकहोल्डर को मिलने वालें फायदे  :

ई-नाम के द्वारा इसके स्टॉकहोल्डर को बहुत सारे फायदे मिले है. जो की इस प्रकार है.

  • मंडी : ई-नाम के द्वारा संबंधित मंडियों को कई फायदे मिले है जो की इस प्रकार है :
  1. इसके द्वारा मंडियों में लेखा जोखा और अन्य रिकॉर्ड नहीं रखने पड़ते, क्योंकि ई-नाम के जरिये यह स्वतः ही हो जाता है.
  2. इसके द्वारा व्यापारियों और कमीशन एजेंटों पर निगरानी भी रखी जा सकती है, और इसके द्वारा उन्हें एकीकृत रूप से निर्देश भी दियें जा सकते है.
  3. इसके द्वारा पुरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है, जो नीलामी में होने वाली हेराफेरी को भी रोकने में भी मदत करता है.
  4. क्युकी इसके द्वारा मंडियों में होने वाले सभी ट्रांजेकशन का लेखा जोखा बना रहता है तो मंडियों में की जाने वाली वसूलीं भी आसान हो गई है.   
  5. इसमे व्यापार और एकाउंटिंग की सारी प्रोसेस कम्पूटर द्वारा स्वतः की जाती है, इसलिए इसमे मानव द्वारा किये जाने वाले कार्यो में कमी आयी है.
  6. इसके द्वारा आने वाले उत्पादों की कीमतों का पूर्वानुमान संभव हुआ है. इसके अलावा इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात कृषि उत्पाद विपणन समिति द्वारा लिए गये किसी भी फैसले की जानकारी तुरंत इसकी ऑफिसियल वेबसाइट पर प्राप्त हो जाती है.
  • किसान : इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसान है जिसके लिए यह सब किया जा रहा है. ई-नाम के द्वारा किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए बहुत सारे विकल्प प्रदान किये जाते है, जिससे वह अपनी फसल की सही कीमत प्राप्त करने में सक्षम बनेगा.
  • व्यापारी : किसानों के बाद व्यापारी ही है जो फसलों को बाजारों तक पहुचाते है. ई-नाम के द्वारा व्यापारियों को अपनी फसलों को बेचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराये जाते है, जिससे उन्हें भी फायदा मिलता है.
  • खरीददार : ई-नाम के द्वारा मंडियों में प्रत्यक्ष खरीदी को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे मध्यवर्ती लागत को कम किया जाना संभव है. जिसका लाभ अंतिम ग्राहक हो भी मिलेगा.

राज्यों को ई-नाम का लाभ कैसे मिलेगा :

इस योजना के तहत बाजारों और ऑनलाइन व्यापार को फायदा देने के लिए, राज्यों को निम्न सुधार करने होंगे:

  • पुरे राज्य में प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक वैध लाइसेंस उपलब्ध कराया जाये.
  • मार्केट फ़ीस को एक ही जगह पर एकत्रित किया जाना.
  • इलेक्ट्रॉनिक नीलामी की व्यवस्था करना ताकि उत्पादों की एक कीमत तय की जा सके.

जिन राज्यों ने उपरोक्त तीनो व्यवस्थाओ को अपने राज्य में लागू कर लिया है, वे ही इस पोर्टल का लाभ ले सकते है. इसके अलावा राज्य में मौजूद कोई भी मंडी जो ई-नाम की सुविधा का लाभ लेना चाहती है उसे भी ऑनलाइन कनेक्टिविटी, हार्डवेयर अन्य जरुरी उपकरण का प्रबंध करना होगा. और इन सबको चलाने के लिए एक व्यक्ति जिसे इन सब की जानकारी हो उसे भी मंडियों में उपलब्ध होना आवश्यक होगा.

ई-नाम का संचालन कैसे किया जाता है (How it works) : 

ई-नाम को भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा बनाया गया है. इसके द्वारा किसान और कृषि कल्याण विभाग के द्वारा एक राष्ट्रीय स्तर का मंच तैयार किया गया है, इसका खर्च भी इसी विभाग द्वारा वहन किया जाता है. लोकल मंडियों में इस सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण और रखरखाव का खर्च भी इसी विभाग द्वारा वहन किया जाता है. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर सॉफ्टवेयर के चलने की लागत गुणवत्ता और कर्मचारियों का खर्च उत्पादो की बिक्री और लेनदेन के द्वारा उत्पन्न किया जायेगा. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने लघु किसानों एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम को ई-नाम के प्रथम कार्यान्वयन समिति के रूप में नियुक्त किया है.  

ई-नाम के फायदे (E-NAM Benefits) :

ई-नाम के विभिन्न स्तर पर कई फायदे है, जो की नीचें बताएं गये है :

  • ई-नाम अपने सभी स्टॉक होल्डर के लिए लाभकारी है, इसमे शामिल सभी स्टॉकहोल्डर सामान्य से अधिक लाभ अर्जित करते है.
  • स्थानीय मंडियों में उपस्थित व्यापारियों को ई-नाम के द्वारा पुनः व्यापार करने के लिए नेशनल लेवल पर बहुत बड़ा मार्केट उपलब्ध कराया जाता है. जिससे वे अधिक लाभ कमा सकते है.
  • ई-नाम के द्वारा सभी मंडियों में लाइसेंस जारी करने, शुल्क जमा करने और अन्य प्रोसेस के लिए एक निश्चित प्रक्रिया का निर्धारण किया गया है.
  • इसके द्वारा भविष्य में किसानों को उनकी फसलों की सही कीमत उपलब्ध कराई जाएगी, इसके अलावा खरीदारों को लेने देन के लिए सीमित खर्च, और ग्राहकों के लिए तय कीमत पर उत्पादो की उपलब्धि को सुनिश्चित करता है.
  • ई-नाम के द्वारा पुरे देश में कृषि उत्पादो के संबंध में एक इलेक्ट्रोनिक चेन बनाई जाएगी, जिससे कृषि उत्पादो का वैज्ञानिक भंडारण और उसका मूवमेंट आसान हो पायेगा.

ई-नाम वेब पोर्टल (E-NAM Web Portal details):

जैसा की मैंने पहले ही स्पष्ट किया है कि ई-नाम एक वेबपोर्टल है, इसके बारे में अन्य जानकारी के लिए आप http://www.enam.gov.in/NAM/home/index.html पर जा कर देख सकते है. यही वह पोर्टल है जिसे ई-नाम, नाम दिया गया है. कोई भी व्यक्ति या संस्था यहाँ से अपने लिए आवश्यक जानकारी अर्जित कर सकता है. यहा पर नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गईं है. अगर कोई किसान या व्यापारी इसमे रजिस्टर होना चाहता है तो वह इस वेबसाइट पर विजिट कर, रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करके अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकता है. इस पोर्टल पर किसान व्यापारियों सभी के लिए स्वतंत्र सेक्शन है जहाँ से वे अपने लिए उपयोगी सामग्री अर्जित कर सकते है. इन सबके अलावा इस पोर्टल पर नेशनल एग्रीकल्चर इवेंट, फसलों की वर्तमान कीमत आदि के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती रहती है.  

टोलफ्री नंबर (Toll Free number) –1800-270-0224  

ई-नाम मोबाइल एप (E-NAM Mobile App details) :

ई-नाम मोबाइल एप को कुछ नई और बेहतर सुविधाओं के साथ लांच किया गया है. इसके प्राप्त अपडेट के अनुसार अब यह इसके ग्राहकों के लिए और भी अधिक आसान और समझने में सरल होगी .

ई-नाम की मोबाइल एप में किये गये अपडेट (New Update in E-NAM Mobile app in hindi)

  • इस एप के डेवलपर्स ने यह सुनिश्चित किया है की इसका एमआईएस डेशबोर्ड किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए इंट्रेक्टीव हो. इसके अलावा उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिया है की इसके उपयोगकर्ता भीम एप, बेहतर भुकतान विकल्प, डाटा बेस और ई-लर्निंग मॉड्यूल आदि सुविधाओं का भी बेहतर उपयोग कर पाये.
  • डेवलपर्स ने अब इस एप में बहुत सी भाषाओं को भी शामिल किया है, अभी इसमे प्राप्त भाषाए हिंदी, मराठी, गुजरती, तेलगु और  उड़िया है. और अब किसान और व्यापारी इसमे उपलब्ध गेट एंट्री फीचर्स का सीधे उपयोग कर सकते है जिससे उनके समय की बचत होगी.
  • इस एप के जरिये किसान अब नीलामी के साथ-साथ अपनी फसलों की मंडी में पहुच की जानकारी मोबाइल app पर प्राप्त कर सकते है.
  • अब व्यापारी अपने मोबाइल पर विभिन्न प्रमाण पत्र भी देख पायेंगे, और इसी के साथ वे तुरंत नेट बैंकिंग के जरिये या डेबिट कार्ड के जरिये पेमेंट ट्रांसफर कर सकते है. और किसान भी बैंक के द्वारा प्राप्त मैसेज से प्राप्त पेमेंट की जानकारी हासिल करने में सक्षम होंगे.
  • यह नया मार्केट एप बाजार की स्थिति की सभी जानकारी प्रदान करेगा. इसके अलावा किसान किसी कार्यक्रम या व्यापारिक सेशन की जानकारी भी तुरंत हासिल कर पाएंगें. इस एप में ई-लर्निंग मॉड्यूल की समस्त जानकारी हिंदी में उपलब्ध होगी. इस एप के जरिये किसान और व्यपारी विभिन्न जानकारी एकत्र करके लाभ कमाने में सक्षम होंगे. आशा करते है की अपने इस आर्टिकल से हम आपको ई-नाम के संबंध में सभी आवश्यक जानकारी देने में सफल हुए होंगे और आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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