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भारत में मुक्त व्यापार क्षेत्र व इसके फायदे व नुकसान क्या है | Free Trade Zone Advantages disadvantages in India in hindi

Free Trade Zone advantages and disadvantages in India in hindi भारत में कई जगहों में मुक्त व्यापार क्षेत्र हैं, इसका मूल उद्देश्य व्यापार आधारित संरचनाओं का निर्माण, उत्पाद का आयत और निर्यात, और व्यपार के लिए ‘फ्री करेंसी’ के इस्तेमाल को बढ़ावा देना था. इसके बारे में पूरी जानकरी यहाँ प्रस्तुत की गई है.

 

मुक्त व्यापार क्षेत्र क्या है? (What is Free Trade Zone)

कोई भी व्यापार अब वैश्विक स्तर का हो चला है. मुक्त व्यापार क्षेत्र को एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन या फोरेन ट्रेड जोन भी कहा जाता है. मुक्त व्यापार क्षेत्र वो जगह है जहाँ पर कोई भी उत्पाद को उतारा, संभाला, निर्माण और उत्पाद को पुनः नये रूप में बनाया जा सकता है. इस जोन में इस दौरान किसी भी कस्टम अधिकारी का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है. एक बार उत्पाद अपने देश के उपभोक्ताओं तक पहुँचने लगे, उसके बाद इस पर कस्टम ड्यूटी लगनी शुरू होती है. मुक्त व्यापार क्षेत्र मुख्यतः बड़े बंदरगाहों, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों या उन जगहों पर होता है जहाँ आयत निर्यात की सुविधा आसानी से मयस्सर हो सके.

मुक्त व्यापार क्षेत्र के फ़ायदे (Free Trade Zone Advantages)

मुक्त व्यापार क्षेत्र की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं, जिसे जानना अति आवश्यक है.

  • ये वह जगह होती है, जहाँ पर कई देश एक साथ मिल कर उनके दरमियाँ बनी व्यापार की सीमाओं (trade barriers) को हटाता है. इस वजह से आयत निर्यात में कई ड्यूटी शुल्क या तो कम हो जाते हैं या नहीं देने पड़ते.
  • इसे एक सघन श्रम केंद्र भी कहा जा सकता है, जहाँ कच्चे माल अथवा अवयव आयत होते हैं, और एक उपयोगी उत्पाद बनाकर उसका निर्यात किया जाता है. विश्व का पहला मुक्त व्यापार क्षेत्र शैनॉन में स्थापित किया गया था.
  • ये इब्तिदाई दौर में आयरलैंड की सरकार की योजना थी, जिसका मुख्य उद्देश्य वहाँ के लोगो को रोज़गार मुहैया कराना और आयरलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था. ये योजना काफ़ी सफ़ल हुई विश्व भर में इस नीति को कई देशों द्वारा अपनाया गया. आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का मुक्त व्यापार क्षेत्र सन 1934 में स्थापित हुआ.
  • भारत, ब्राज़ील, इंडोनेशिया, चीन, फिलिपींस, मलेसिया, बांग्लादेश, पकिस्तान, मैक्सिको, केन्या, श्री लंका आदि कई देशों में मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना हुई. सन 1997 तक कुल 93 देशों मे इसकी सहयता से 22.5 मिलियन लोगों को इसकी सहयता से रोजगार मिला और इसके पांच साल बाद देशों की यह संख्या बढ़कर 116 और रोज़गार पाने वालों की संख्या 43 मिलियन तक पहुँच गयी.
  • मुक्त व्यापार क्षेत्र मुख्यतः देश के उन हिस्सों में स्थापित किये जाते हैं, जहां पर विकास बहुत कम हुआ है. इसकी सहायता से उन जगहों के लोगों को नौकरी मिलने लगती है और ग़रीबी धीरे धीरे ख़त्म हो जाती है.
  • मुक्त व्यापार क्षेत्र को कई देशों में स्पेशल इकनोमिक जोन भी कहा जाता है. इस जोन का इस्तेमाल मूलतः देश की सरकार द्वारा एक प्रयोगात्मक भूमि की तरह होता है, जहाँ पर सरकार अपनी नयी नयी अर्थ नीतियां लागू करके उसका परिणाम देखती है.

भारत में मुक्त व्यापार क्षेत्र क्या है? (What is Free Trade Zone in India in hindi)

भारत सरकार द्वारा ‘फॉरेन ट्रेड पालिसी’ के अंतर्गत सन 2004- 2009 की अवधि में मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित करने की घोषणा की गयी. इसका उद्देश्य व्यापार के निर्माण को बढ़ावा देना था. 23 जून सन 2005 में भारत के संसद में स्पेशल इकनोमिक जोन एक्ट सरकार द्वारा पारित की गयी. इसके अलगे साल सन 2006 के फरवरी के महीने में भारत सरकार ने ‘स्पेशल इकनोमिक जोन’ के लिए कानूनों की घोषणा की. मुक्त व्यापार क्षेत्र इसी अधिनियम के अंतर्गत एक वर्ग के रूप में निहित है. इसके अंतर्गत व्यापार की सभी सुविधाएँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुहैया की जाती है. उत्पाद के लिए अनुकूल संग्रहशाला, वातावरण के अनुकूल उपकरण, रेल स्लाइडिंग, कार्यालयों के लिए व्यापारिक जगह, स्वतंत्र रूप से इन्तेमाल होने वाले व्यपारिक स्टेशन, बैंक इन्सुरांस आदि की सुविधा इस अधिनियम के तहत दी जाती है.

free trade zone 1

भारत के मुक्त व्यापार क्षेत्र कौन कौन से है? (List of Free Trade Zones in India)

भारत में कई जगहों पर मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना हुई है. अर्शिया इंटरनेशनल लिमिटेड भारत का पहला हर तरह से मुक्त व्यापार क्षेत्र की तरह काम करने वाला जोन था. नीचे एक एक करके  मुख्य मुक्त व्यापार क्षेत्र के विषय में दिया जा रहा है.

  • महाराष्ट्र के औरंगाबाद में इन्स्पिरा फार्मा और रिन्यूएबल एनर्जी पार्क.
  • फ्री ट्रेड वेयर हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड
  • कांडला फ्री ट्रेड जोन
  • फैब (FAB) सिटी एसपीवी
  • श्रीसिटी मुलती प्रोडक्ट आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडू
  • एलएमजे वेयरहाउस गुजरात
  • जफ्ज़ा चेन्नई बिज़नस पार्क गुजरात
  • शिपको इंफ्रास्ट्रक्चर कर्नाटक
  • चिपलून इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड
  • डीएलएफ़ यूनिवर्सल
  • माता दी इको पार्क प्राइवेट लिमिटेड
  • झुनझुनवाला वनस्पति

तमिलनाडु में 36, तेलंगाना और कर्नाटका में कुल 26 ऐसे मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना हुई है.

मुक्त व्यापार क्षेत्र के नुकसान (Free Trade Zone disadvantages)

मुक्त व्यापार क्षेत्र के कई सारे फायदे होने के बाद भी इसे सभी देशों द्वारा नहीं अपनाया गया. दुसरे विश्व युद्ध के बाद तो कई ऐसे देशों ने इस व्यवस्था को अपने देश की अर्थनीति से खारिज किया जो पहले से इसके अपनाए हुए थे. इसे खारिज करने के पीछे के तर्क निम्नलिखित हैं.

  • अवास्तविक नीति : मुक्त व्यापार क्षेत्र मुख्यतः हस्तक्षेप नीति पर आधारित है. इसमें देश के सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है, साथ ही इसकी सफलता के लिए निदंधन योग्य प्रतिद्वंदी व्यवस्था की आवश्यता होती है. ऐसी व्यवस्था को अमल में लाना काफ़ी मुश्किल होता है. मुक्त व्यापार क्षेत्र बहुत अच्छे से काम करता यदि इसे अपनाने वाले सभी देश एक दुसरे को सहयोग प्रदान करते. यदि कोई देश अपने देश में उत्पाद निर्यात के लिए प्रभावशाली प्रतिबंध लगा देता है तो बाक़ी देशों के लिए इस नीति को अमल में लाना मुश्किल हो जाता है.
  • आर्थिक निर्भरता : मुक्त व्यापार अन्य देशों पर आर्थिक निर्भरता को बढ़ावा देता है. ये निर्भरता कच्चे माल, खाद्य पदार्थ आदि के रूप में होती है. किसी युद्ध के समय ये निर्भरता मुक्त व्यापार में काम करने वालों पर बहुत ही बुरा प्रभाव डालती है.
  • राजनैतिक गुलामी : मुक्त व्यापार राजनैतिक दासत्व को बढ़ावा देता है. दरअसल यदि ये नीति आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती तो इसमें राजनैतिक दासत्व की बात नहीं होती. मुक्त व्यापार आर्थिक निर्भरता पर आश्रित है और आर्थिक निर्भरता राजनैतिक दासत्व को सफल करती है.
  • असंतुलित विकास : मुक्त व्यापार में कोई देश सिर्फ उसी क्षेत्र में अपना विकास कर पाता है, जिसमे उसके तुलनात्मक रूप से अधिक फायदा पहुँचता है. इसके अलावा अन्य सभी क्षेत्र पहले की ही तरह अविकसित रहते है.
  • बाज़ार मूल्य का प्रभाव : दुसरे देशों में अपने देश के उत्पाद के ग्राहको की संख्या के लिए कई बार कुछ देश अपने उत्पाद बहुत सस्ते दाम में बेचते हैं. कभी कभी ये क़ीमत स्थानीय क़ीमत से भी कम होती है. इस वजह से वहाँ के स्थानीय व्यापारियों का व्यापार मंदा पड़ जाता है.
  • हानिकारक उत्पाद : मुक्त व्यापार के अंतर्गत कोई विदेशी कम्पनी हानिकारक उत्पाद भी दुसरे देशों के बाज़ार में भेज सकती है. ऐसे उत्पादों के निरिक्षण के लिए सरकार का हस्तक्षेप बहुत ज़रूरी होता है और मुक्त व्यापार में इसे स्थान नहीं दिया गया है.
  • अंतर्राष्टीय एकाधिकार : मुक्त व्यापार अंतर्राष्ट्रीय एकाधिकार को बढ़ावा देता है, जिसके तहत बहुराष्ट्रीय निगमों की स्थापना होती है. इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों की वजह से स्थानीय कंपनियों की अर्थनीति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और कई बार ये स्थानीय कम्पनियां बंद भी हो जाती हैं.
  • अल्प विकसित देशों के लिए : अल्प विकसित देशों के लिए ये नीति बहुत घातक साबित हो सकती है. इसके अंतर्गत जिस प्रतिद्वंद्विता का जन्म होता है उसमे अल्प विकसित देश बहुविकसित देशों के प्रतिद्वंदी नही बन पाते और अंततः पीछे ही रह जाते हैं. ब्रिटेन की मुक्त व्यापार नीति ने भारत की छोटी स्केल की कंपनियों के विकास को बहुत आघात पहुँचाया है, इससे अंततः ब्रिटेन की ही अर्थनीति मजबूत हुई है और भारत की अर्थनीति कमज़ोर. मुक्त व्यापार के आने की वजह से कई देशों में नयी कंपनियों को स्थापित करने में मुश्किल हो रही है. मुक्त व्यापार कई कमज़ोर देश की राजनैतिक और आर्थिक्म स्वतंत्रता को नुकसान पहुँचा सकती है.

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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