हंता वायरस- क्या हैं, लक्षण, रोकथान एवं इतिहास | Hantavirus in hindi

क्या है हंता वायरस, लक्षण, रोकथाम, इतिहास   [Hantavirus in hindi, outbreak history, Treatment, Hantavirus Pulmonary Syndrome, Vaccine, Symptoms, Status] 

आज फिर से 120 घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की जनता को संबोधित करते हुए बताया कि 1 लाख लोगों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने में लगभग 67 दिन लग गए लेकिन उन 1 लाख लोगों से अगले 1 लाख लोगों तक यह संक्रमण पहुंचने में मात्र 11 दिन लगे और उसी संख्या को तीन लाख पहुंचने में मात्र 4 दिन का समय लगा जिस को जानने के बाद कोई भी व्यक्ति अंदाजा लगा सकता है कि कोरोनावायरस जैसी महामारी कितनी ज्यादा खतरनाक और भयावह है। अभी इसके खौफ से दुनियाभर के लोग उबर भी नहीं पाए हैं कि दूसरे ख़ौफ़ ने जन्म ले लिया है। इस दूसरे भयावह खौफ का नाम है हंता वायरस… आखिर अब यह वायरस कहां से आ गया और कितना ज्यादा खतरनाक है चलिए जानते हैं।

Hantavirus In Hindi

क्या है हंता वायरस?

अभी हाल ही में 23 मार्च के दिन यूनान शहर के एक व्यक्ति की मौत हो गई ।  जब वह अपनी रोज की दिनचर्या के अनुसार बस में बैठकर सफर करके कहीं जा रहा था। अचानक उसकी मृत्यु कि जब जांच पड़ताल की गई तब सामने आया कि उसकी जान लेने वाले वायरस का नाम हंता वायरस है। उसके बाद उस बस में मौजूद 32 लोगों की जांच की गई। आपको बता दें कि ऐसा ही एक वायरस पहले भी 1951 से 53 के बीच कुछ लोगों में पाया गया था जिसकी वजह से इस वायरस से ग्रसित 3000 लोगों की पहचान की गई थी। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है कि यह वायरस मुख्य रूप से चूहों के द्वारा फैलाया जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि एक मामूली चूहा आखिरकार इतना बड़ा वायरस कैसे फैला सकता है तो चलिए बता देते हैं दरअसल यह वायरस मुख्य रूप से नदी, तालाबों और नालियों के आसपास से फैलता है। जो चूहे नदी तालाब और नालियों के पास मौजूद होते हैं जब वे वहां पर मूत्र त्याग करते हैं तब यह वायरस जन्म लेता है।

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आइए जानते हैं इस वायरस का इतिहास

इतिहास में इस वायरस का जिक्र पहले भी हो चुका है। नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के द्वारा यह बताया गया है कि आज के समय में हंता वायरस में लगभग 21 से भी ज्यादा प्रजातियां सम्मिलित की गई हैं। इसकी एक प्रजाति 1978 के दौरान दक्षिण कोरिया में स्थित हन्तन नदी के किनारे पाया गया था जब इस वायरस से एक व्यक्ति संक्रमित हुआ था। वह व्यक्ति नदी के पास से ही संक्रमित हुआ था जिसकी वजह से इस वायरस का जन्म हंतन नदी से ही हुआ इसलिए इसका नाम हंता वायरस पड़ गया। कोरियाई युद्ध के दौरान यह वायरस सैनिकों के बीच फैल गया था लगभग 3000 से भी ज्यादा सैनिक इस वायरस के चलते बुखार से पीड़ित हो गए थे।

कुछ साल पहले नवंबर साल 2012 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में भी योसेमाइट नेशनल पार्क घूमने आए लोगों के बीच भी हंता वायरस का संक्रमण पाया गया था। उस समय उस पार्क में घूमने वाले लगभग 10 लोगों को इस वायरस से ग्रसित पाया गया था। साल 2017 में भी अमेरिका के 7 राज्यों के अंदर 17 लोगों को इस वायरस से ग्रसित पाया गया था। यह भारत पहले भी कई बार एशिया अफ्रीका से लेकर अमेरिका के कई राज्यों में फैल चुका है। यूरोप एशिया और अफ्रीका में जब यह वायरस पाया गया था तब उसे ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस कहा गया था लेकिन जब बाद में यह अमेरिका में पाया गया तो इसे न्यू वर्ल्ड हंता वायरस कहा गया। जिसे हंता वायरस पलमोनरी सिंड्रोम यानी HPS के नाम से भी संबोधित किया जाता है।

यह वायरस कोरोना वायरस से भी 38% ज्यादा खतरनाक है अर्थात यदि यह पूरी दुनिया में फैल जाए तो जितनी मौत अब तक हुई हैं उससे 38% ज्यादा मौत इस वायरस की वजह से हो सकती हैं। इसका अर्थ है दुनिया पर अभी खतरा मंडरा ना आरंभ ही हुआ है। यह तो बस शुरुआत है आने वाले समय में कौन सा वायरस कितना खतरनाक साबित हो सकता है इस बात का अंदाजा तक आप नहीं लगा सकते हैं।

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हंता वायरस के लक्षण

जो व्यक्ति हंता वायरस से ग्रसित होने लगता है उसे लगभग कोरोनावायरस जैसे लक्षण ही नजर आने लगते हैं आइए जानते हैं इसके मुख्य लक्षणों के बारे में:-

  • उस व्यक्ति को बुखार होने लगता है और धीरे-धीरे ठंड लगने लगती है।
  • सर्दी खांसी जुकाम जैसी आम बीमारियां उसे अपनी चपेट में ले लेती हैं जो दिखने में तो आम होती हैं परंतु उनका परिणाम बहुत खतरनाक हो सकता है।
  • जो व्यक्ति हंता वायरस से संक्रमित हो जाता है उसकी मांसपेशियों में बहुत ज्यादा तेज दर्द होने लगता है और साथ ही पेट में दर्द के साथ उसे दस्त भी लग जाते है।
  • उसको घबराहट होने लगती है और जी मिचलाने लगता है धीरे-धीरे जब यह लक्षण बढ़ने लगते हैं तब उसे तेज सिर में दर्द होने के साथ-साथ चक्कर आने भी आरंभ हो जाते हैं।
  • हालांकि यह भारत एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित नहीं होता है लेकिन एक व्यक्ति जब इस वायरस से संक्रमित हो जाता है तो इस बात का पता लगाने में लगभग 8 हफ्तों का वक्त लग सकता है।

हंता वायरस से कैसे बचें?

हंता वायरस से बचने के लिए आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा जो निम्नलिखित है:-

  • हंता वायरस से यदि आप बचना चाहते हैं तो ध्यान रखें किसी भी नदी तालाब व नालियों के पास ना जाएं।
  • यदि कोई बीमार जानवर हो या कोई जानवर मृत पड़ा हो तो उसके शरीर को छूने से परहेज करें।
  • अगर आप चूहे पालने का शौक रखते हैं या फिर आपके घर में बहुत ज्यादा चूहे हो रहे हैं तो उनके मूत्र से खुद को और अपने बच्चों को दूर रखें।
  • यदि आपके घर में कुछ पालतू जानवर है जिन्हें आप पालते हैं और उनका रखरखाव करते हैं तो उन्हें पालतू जानवरों वाला टीका नियमित रूप से लगवाते रहे।
  • अपने घर में और घर की नालियों के आसपास पूरी तरह से साफ सफाई करके कीटनाशक दवाइयों का अवश्य इस्तेमाल करें।
  • यदि आपके हाथ चूहों के मूत्र या लार से छू जाते हैं तो उन्हें तुरंत साबुन से धो लें और ध्यान रखें कि आपके हाथ आपकी आंख और मुंह को ना छुए।
  • यदि कोई भी व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है तो तुरंत उसे इलाज प्रदान करने की आवश्यकता है अन्यथा उसे सांस लेने में परेशानी हो सकती है और धीरे-धीरे उसके फेफड़ों में पानी भर जाता है।
  • यदि संक्रमण के दौरान किसी व्यक्ति के फेफड़ों में पानी भर जाए तो उसकी तुरंत मौत हो जाती है।

कोरोना वायरस भी यह सोच रहा होगा कि अभी तो मैंने पूरी दुनिया को ग्रसित भी नहीं किया और दूसरा वायरस निकल कर आ गया है। ऐसे में इंसान की प्रजाति बस लड़ाई के लिए तैयार रहें क्योंकि ऐसे वायरस दुनिया को हिलाने के लिए काफी है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी ने आज अपने संबोधन के दौरान 21 दिन के लिए सोशल डिस्टेंस बनाये रखने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस 21 दिन के सोशल डिस्टेंसिंग से इस कोरोना वायरस को देश से भगाया जा सकता है। तो इसी उम्मीद के साथ यदि 21 दिन तक लोग लगातार अपने घरों में ही बंद रहे तो शायद हम इस लड़ाई को जीत सकते हैं।

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Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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