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हार्दिक पटेल का जीवन परिचय | Hardik Patel Biography in hindi

हार्दिक पटेल का जीवन परिचय (Hardik Patel Biography in hindi)

हार्दिक पटेल राजनीति  के क्षेत्र में वो दिन प्रतिदिन सामने आता चेहरा हैं जिनकी शुरूआती पहचान अपने स्वयं के समाज के लिए आंदोलन के नेतृत्व करने से हुई थी, और उनमें पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी  काफी सभावनाएं देखी जा रही हैं. वास्तव में गुजरात के पाटीदार समाज को आरक्षण दिलाने की मांग लिए इन्होने अपने संघर्ष की शुरुआत की थी और वो इन्हीं मुद्दों के साथ राजनीति में भी आये थे, लेकिन मात्र 3 साल के सफर में उनके जीवन का पूरा परिदृश्य ही बदल गया हैं.  और अब भी हार्दिक पटेल के नाम के साथ हर दिन कोई ना कोई विवाद जुड़ता रहता हैं,जिसका सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम तो समय ही बताएगा, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि हार्दिक पटेल के आलोचकों के साथ ही समर्थकों की संख्या भी काफी हैं.

Hardik Patel

जन्म,परिवार एवं शिक्षा (Birth,Family and Eductaion)

जन्मदिन (Birth date) 20 जुलाई 1993
माता (Mother) उषा पटेल
पिता (Father) भरत पटेल

इस युवा नेता का जन्म पाटीदार परिवार में हुआ था, उनके पिता भरत  पटेल पूर्व में बीजेपी के कार्यकर्ता रह चुके हैं और इस कारण ही पाटीदार केस के दौरान उन्होंने गुजरात की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल से मिलकर बात को सुलझाने की कोशिश भी की थी.

2004 में उनके अभिभावक विरंगम में सेटल हो गये थे, क्योंकि यहाँ पर उनके बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर थे. हार्दिक ने अपनी छठी कक्षा से ग्याहरवीं तक की पढ़ाई विरंगाम में दिव्य ज्योत स्कूल से की थी,इसके बाद  के.बी.शाह विनय मंदिर से उन्होंने बाहरवी की परीक्षा उतीर्ण की. फिर पटेल ने सहजानंद कॉलेज जॉइन किया था और अमदाबाद से ही उन्होंने बीकॉम की डिग्री ली थी. कॉलेज में पढ़ते हुए ही उन्होंने विरमगाम बस स्टैंड पर जनसेवा करना शुरू किया, यहाँ उन्होंने कॉलेज स्टूडेंट के बीच जनरल सेक्रेट्री का चुनाव लड़ा था और वो निरविरोध चुने भी गये थे, इसलिए ये माना जा सकता हैं कि यही से हार्दिक के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुयी थी.

2013 में 2 प्रयासों के बाद 50 % मार्क्स के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पटेल ने 49.6 % के साथ बीकॉम किया हैं, हालांकि हार्दिक पटेल पढ़ाई में कमजोर थे, लेकिन पढाई में औसत रहने के बावजूद भी हार्दिक ने गुजरात सरकार को हिलाकर मीडिया में काफी सुर्खियाँ बटोरी थी.

उनकी मार्कशीट के अनुसार उन्हें कॉमर्शियल कम्युनिकेशन में 17 मार्क्स मिले थे और 25 मार्क्स (जो कि पासिंग मार्क्स होते हैं) तक पहुचाने के लिए ग्रेस दिया गया था. यहाँ तक कि उनके 4 सब्जेक्ट्स-इंग्लिश, इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी और स्टेटिस्टिक्स में एटिकेटी भी थी. सेकंड ईयर भी उन्होंने सेकंड डिविजन से पास किया था, जिसमें उन्हें 490 में से 253 मार्क्स मिले थे.

कॉलेज के बाद हार्दिक ने अपने पिता के सबमर्जिंबल पंप को अंडरग्राउंड वाटर वेल में फिक्स करने के बिजनेस में सहयोग करना शुरू किया था.

हार्दिक के पाटीदार संघर्ष की शुरुआत 

31 अक्टूबर 2012 को ये अपने समाज के युवा वर्ग के एक ग्रुप का हिस्सा बने.  अपनी योग्यता और समपर्ण से वो एक महीने के भीतर ही विरंगम यूनिट के प्रेसिडेंट बन गए. और इस दौरान उन्हें राज्य में पटेल समाज की स्थिति समझ आयी, उन्होंने देखा कि पटेलों को सरकारी और निजी सेक्टर में नौकरी के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता हैं. और पटेल किसानों को भी अपनी जमीन शहरीकरण और औद्योगीकरण के चलते सरकार को देनी पड़ती हैं. उन्होंने ये भी देखा कि पाटीदार समाज को अपने पारम्परिक डाईमंड के बिजनेस से पलायन करना पड रहा हैं. इसलिए उन्होंने अपने समाज के लिए काम करने का फैसला किया.

हालांकि 2015 में उन्हें लालजी पटेल के साथ विवाद के कारण आँर्गेनाइजेशन से हटा दिया गया, लेकिन उनका समाज के लिए संघर्ष ना केवल जारी रहा, बल्कि काफी आगे तक भी बढ़ा.  

पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति का गठन (The formation of Patidar Anamat Andolan Samiti (PAAS)

 2015 में जब हार्दिक पटेल की बहन को सरकारी स्कालरशिप नहीं मिली, जबकि उसकी एक फ्रेंड को कम मार्क्स पर भी ओबीसी के आरक्षण से वो स्कालरशिप मिल गयी तब पटेल ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाने की सोची. उन्होंने महसूस किया कि ये आरक्षण की नीति तो सिवाय पाटीदार समाज के सबको लाभ दे रही हैं इसलिए उन्होंने पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति का गठन किया. तब उन्होंने ये स्पष्ट कहा था कि ये एक गैर-राजनीतिक संगठन हैं जिसका एकमात्र उद्देश ओबीसी का आरक्षण हासिल करना हैं.

पटेल ने 6 जुलाई 2015 को पहली रैली विसनगर गुजरात में की थी जिसके आमंत्रण-पत्र को उन्होंने सिर्फ सोशल मीडिया पर मैसेज के माध्यम से फॉरवर्ड किया था,और बहुत बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गये थे, इसके बाद हार्दिक ने पूरे गुजरात में  रैलियों की बाढ़ लगा दी थी  और उनके भाषणों के कारण ही सपोर्टर बढने लगे.

इस तरह ये कहा जा सकता हैं कि 2015 में गुजरात में हुए पाटीदार संघर्ष का मुख्य चेहरा हार्दिक थे लेकिन ये संघर्ष काफी हिंसक था जिससे गुजरात के बहुत से जिलों में काफी नुक्सान हुआ. इस दौरान मेहसाना के एक जिले विसनगर में एफआईआर दर्ज करवाई गयी. जिसमें हार्दिक को पाटीदार समाज की रैली के बाद फैली हिंसा के लिए जिम्मेदार बताया गया, उस समय ही विधायक का ऑफिस और वहाँ खड़ी कार भी जलाई गयी थी.

 2015 हार्दिक पटेल के भूख-हडताल शुरू करने के बाद अहमदाबाद पुलिस ने उस शाम को उन्हें गिरफ्तार कर लिया था,उन पर आईपीसी की धारा 151 के तहत चार्ज लगाया गया. उनकी गिरफ्तारी से पूरे राज्य में हिंसा की आग भडक गयी,राज्य सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा और इंडियन आर्मी तक की मदद लेनी पड़ी. फिर इसी साल में इन्होने अन्य राज्यों में भी इस समाज के लोगों को संबोधित किया और इस रैली के बाद वो गायब हो गये और जब लौटे तो उन्होंने ये दावा किया कुछ लोगों ने उन्हें जबरदस्ती पकडकर रखा था.

पटेल नवनिर्माण सेना का गठन और विवाद  Launch of Patel Navnirman Sena (PNS) and controversy

9 सितम्बर 2015 को उन्होंने पटेल नव निर्माण सेना का गठन किया इस ऑर्गनाइजेशन का एकमात्र उद्देश्य पाटीदार,कुर्मी और गुज्जर को ओबीसी में शामिल करना और उन्हें सरकारी नौकरियों में लाभ दिलाना था.

18 अक्टूबर 2015 को भारत के राष्ट्रीय झंडे के अपमान में भी उनकी नींदा की गयी, इसके लिए राजकोट में उन पर केस हुआ. उन पर भारत और साउथ अफ्रीका में मध्य होने वाले वन डे इंटरनेशनल में बाधा डालने की कोशिश का भी आरोप लगा.

सूरत में उन पर गम्भीर राजद्रोह का आरोप लगा जिसमें उन्होंने पुलिस वालो को मारने के लिए पाटीदारों को प्रेरित किया था.

15 जुलाई 2016 में उन्हें जमानत मिली और अगले 6 महीने के लिए राज्य से बाहर  और अगले 9 महीने के लिए मेहसाना से बाहर रहने का आदेश दिया गया.

हार्दिक पटेल और पाटीदार संघर्ष की बात हो तो ये समझना जरुरी हो जाता हैं कि इस संघर्ष की शुरुआत कब हुई थी,और हार्दिक का इसमें कितना योगदान हैं?

क्या हैं पाटीदार संघर्ष?

 1931 कास्ट सेन्सस के अनुसार राज्य में केवल 15% पटेल थे लेकिन 1960 से इस कम्युनिटी ने अपनी राजनीतिक और आर्थिक शक्तियाँ काफी हद तक बढ़ाई इस कारण इनका आरक्षण मांगना किसी को भी चकित कर देने वाला विषय था. 

1970 तक पाटीदार समुदाय का गुजरात में काफी प्रभाव था, ये कांग्रेस को सपोर्ट करते थे लेकिन बाद में बदलते समय के साथ कांग्रेस ने पटेलों को दरकिनार करते हुए क्षत्रिय,हरिजन,आदिवासी और मुस्लिम को मिलाकर खाम (KHAM) बनाई जिसने 1980 के दशक में गुजरात पर शासन किया.

1981 और 1985 में ही पटेल समुदाय ने एंटी-रिजर्वेशन मूवमेंट चलाया था जिसका टार्गेट दलित और ओबीसी थे. कांग्रेस से निकलकर उन्होंने बीजेपी का समर्थन शुरू किया और 1990 के दशक में वो सबसे महत्वपूर्ण वोट बैंक बन गए,जिसके लिए बीजेपी ने 120 में से 40 तक सीट उनको दे रखी थी और हार्दिक पटेल के आन्दोलन के समय तक आनंदी बेन पटेल ही मुख्यमंत्री भी थी,इतना कुछ होते हुए भी इस आन्दोलन के पीछे कारण शिक्षा के क्षेत्र में समाज का पिछड़ जाना ही था.

 गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबीन पटेल के पति आरएसएस नेता मफतलाल पटेल के अनुसार ये सच हैं कि लगभग सभी पाटीदारों की स्थिति अच्छी है, उनमें से बहुत से विदेशों में चले गए हैं और उनमें से कई व्यवसायी हैं, लेकिन वास्तव में पाटीदार एक कृषि समुदाय हैं और हालांकि अब ऐसा  नहीं है, लेकिन अब भी  उनमें से कई अपने खेतों पर काम करते हैं.  और शिक्षा के प्रति समपर्ण इस बात से ही समझा जा सकता हैं कि पाटीदार लोन लेकर,अपनी जमीन बेचकर  भी अपने बच्चों को पढ़ाते हैं.धर्मराज जिले में लगभग 3000 पाटीदार परिवार है,जिसकी कुल जनसंख्या 11,333 हैं,ये सभी एनआरआई हैं जो कि ब्रिटेन,यूनाइटेड स्टेट,न्यूजीलैंड,कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सेटल हैं. इस तरह इस गाँव में 13 बैंक है जिसमें इन एनआरआई पटेलों के 1 हजार करोड़ रूपये हैं. लेकिन इतना पैसा और जमीन होते हुए भी इस समाज के संघर्ष का मुख्य कारण  शिक्षा में उनको अन्य वर्गों के समान अधिकार नही मिलना हैं.

2015 में, स्थायी नौकरियों के लिए राज्य सरकार की भर्ती अभियान को एक उत्प्रेरक के रूप में देखा गया जिससे  पाटीदार अन्नामत आंदोलन समिति को भारी समर्थन मिला.

हालांकि राज्य सरकार ने जिला स्तर पर मेगा नौकरी मेले आयोजित किए और यह दिखाने के लिए डेटा भी जारी किया  कि उसने अब तक  अपने रोजगार ब्यूरो के माध्यम से 13 लाख लोगों को रोजगार दिया है. लेकिन इन्होने और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकुर दोनों ने इन आधिकारिक आंकड़ों को झूठा बताया  और दावा किया है कि गुजरात में करीब 50-60 लाख बेरोजगार लोग हैं.

 देश के अन्य अन-आरक्षित वर्ग की तरह इस समाज के बच्चों का भी पढ़ाई में  लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उपयुक्त स्थान नहीं मिलना,समाज में रोष का मुख्य कारण रहा हैं. इस कारण ही इस संघर्ष की शुरुआत हुयी थी जो कि हिंसा में बदल गयी और इस दौरान हार्दिक पटेल जैसे कई अन्य युवा नेता भी सामने आये.  पाटीदार समाज की पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति (PAAS) ने कई छोटे-बड़े शहरों में रैलियों का आयोजन किया था जिससे गुजरात की सरकार को गिराया जा सके,और इसी आन्दोलन से हार्दिक पटेल ने पूरे देश का ध्यान पाटीदार संघर्ष की तरफ खीचा था.

हार्दिक का राजनीतिक संघर्ष (Political stint of Hardik Patel)

वैसे तो इन्होने पाटीदार संघर्ष के साथ ही अपना राजनीतिक जीवन शुरू कर दिया था लेकिन राज्य केचुनावों में उन्होंने गुजरात में शिव सेना का केम्पेन चलाने का निर्णय किया था. हालांकि उन्होंने बाद में उन्होंने शिव सेना का साथ छोड़ दिया और राज्य में कांग्रेस का चुनावप्रचार करने लगे,और अंतत: वो राजनीति की मुख्यधारा में आ ही गए.

आंतरिक कलह और निजी मुद्दों से जुडे विवाद ( The internal feud and controversies)

हार्दिक पटेल के नजदीकी मित्रों चिराग पटेल और केतन पटेल ने उन पर पाटीदार समाज के फंड का गलत इस्तेमाल के आरोप लगाये थे और ये भी कहा था कि वो कांग्रेस प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी से सीक्रेट मीटिंग करते हैं.

आखिर में नवम्बर 2017 में उनकी सेक्स टेप ने मीडिया  और उनके समर्थकों को चौका दिया था,हालांकि पटेल ने ये दावा किया था कि ये बीजेपी का गंदा राजनीतिक खेल हैं लेकिन इससे उनकी छवि काफी धूमिल हो गयी थी. 

अपराध Conviction

25 जुलाई 2018 को दंगे भडकाने और संपत्ति को क्षति पहुचाने जैसे काम  के लिए उन्हे  और उनके दो सथियों को दोषी घोषित किया गया जिसमें तीनों पर 50,000 का जुर्माना और 2 वर्ष की जेल की सजा भी  दी गयी,हालांकि वो जल्द ही जेल से छूट गये  

हार्दिक पटेल अब भी पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संघर्ष के अंतर्गत अनशन,धरना और कई रैलियों का आयोजन करते रहते हैं. इसी क्रम में उन्होंने किसानों की ऋण मुक्ति, आरक्षण और पाटीदार आन्दोलन समिति के संयोजक को छोड़ने  की मांग के साथ 25 अगस्त से 12 सितम्बर 2018 तक 19 दिनों का अनशन किया और फिर बिना किसी निर्णय के इस अनशन को तोड़ दिया,इस दौरान हार्दिक का 20 किलो वजन कम हो गया.

इसके बाद 2 अक्टूबर 2018 को अपनी इन्हीं मांगों के साथ धरना प्रदर्शन भी किया,जिसमें उन्होंने अगले 2 से 3 महीने के भीतर मोरबी जिले में बड़ी संख्या में किसानों को एकत्र करने का दावा किया. हालांकि उनके अनशन के दौरान भी बीजेपी ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया,और समाज के कुछ बड़े नेताओं ने सरकार से मिलकर इस समस्या को सुलझाने का प्रयत्न किया. 

हार्दिक से जुड़े रोचक तथ्य

उन्होंने पाटीदार समाज को शिक्षा और आरक्षण के लाभ दिलाने के लिए काफी संघर्ष किया हैं,जिससे उनके समाज का सर्वांगीण विकास हो सके.

पहली बार के आंदोलन के समय 22 वर्षीय हार्दिक ने ये दावा किया था कि पटेल समाज के बच्चे 90 प्रतिशत लाने के बाद भी मेडिकल में एडमिशन नहीं ले पाते हैं जबकि ओबीसी के छात्र मात्र 44 प्रतिशत पर ही मेडिकल की पढ़ाई में दाखिल ले सकते हैं,लेकिन हार्दिक के खुदके रिजल्ट्स का रिकॉर्ड उस समय काफी विवाद का विषय बना था. उनकी मार्क शीट और एकेडमिक रिकॉर्ड भी मीडिया में तब सामने आये थे जब उन्होंने पाटीदार समाज के बच्चों के होशियार होते हुए भी शिक्षा के क्षेत्र में वंचित रह जाने की बात कही थी. वास्तव में उन पर ये आरोप था कि  पढाई में कमजोर रहे हार्दिक ने राजनीति में आने का निश्चय किया और पाटीदार समाज का नेतृत्व करते हुए आगे बढ़ना उन्हें आसान लगा था,लेकिन अपनी पढ़ाई के मुद्दे पर उनकी समस्या थोड़ी बढ गयी,हालांकि इस खुलासे का भी उनके विरुद्ध कोई बड़ा परिणाम नहीं निकला,और विरोधियों को केवल निराशा ही मिली.

इनहोंने उस समय आंदोलन के दौरान  गुजरात में हुयी हिंसा में घायल हुए लोगों के लिए 35 लाख रूपये की भी मांग की थी. हार्दिक की निकाली गयी रैली में फैली हिंसा में लगभग 9 लोगों की मृत्यु हुयी थी.

पाटीदार संघर्ष के समय  से ही हार्दिक कई तरह के विवादों में उलझ चुके हैं,लेकिन आज की राजनीति में वो नेशनल लेवल पर विपक्षी दलों के लिए बड़ा चेहरा हैं, जिस कारण कभी भूख-हड़ताल तो कभी किसी वीडियो टेप या किसी अन्य कारण से उन पर समय-समय पर उनकी चर्चा मीडिया में होती रहती हैं.

2015 में हार्दिक पटेल को दंगों के आरोप में 2 वर्ष की जेल हुयी थी, लेकिन इस तरह एक घोषित दंगाई होने के बावजूद वो खुदको सामाजिक और राजनीतिक एक्टिविस्ट भी कहते हैं. वो लगातार देश के टॉप लीडर्स की आलोचना में आगे रहते हैं और उन्होंने इस तरह के मुद्दे पर बहुत सी रैलियाँ भी आयोजित की हैं. इस कारण ही उनकी रैलियां  सामाजिक मुद्दे को आगे बढ़ाने वाले विरोध से राजनीतिक बन गयी,और सच ये भी हैं कि उनके समर्थकों की संख्या किसी भी राजनेता से कम नहीं हैं.

इस तरह भले ही कई तरह के विवादों में उलझ चुके हार्दिक पटेल एक ऐसी शक्सियत हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता,और जिनमें भविष्य का राजनेता देखा जा सकता हैं.

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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3 comments

  1. Arakshan band karna chahiye, or apni apni gunvatta, kabiliyat pe noukariya milni chahiye, aaj esi kam kabiliyatwale Hi sarkari jobme hai.

  2. arkshan hi khatam krna chahiye

  3. नौकरियों में रिजर्वेशन नहीं मिले | सरकार को इस बारे में
    सोचकर सही निर्णय निकालना चाहिए|

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